राहुल गांधी की सदस्यता रद्द होने के बाद क्या वायनाड में होंगे उपचुनाव?- प्रेस रिव्यू

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता रद्द होने के बाद वायनाड में उपचुनाव को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं और सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हुई हैं.
द हिंदू ने इस ख़बर को अख़बार के पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार राहुल गांधी को सांसद के तौर पर अयोग्य घोषित करने वाली अधिसूचना की प्रति चुनाव आयोग और केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी भेजी गई है.
अख़बार ने लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के हवाले लिखा है कि ऐसे में चुनाव आयोग इस पर संज्ञान ले सकता है और वायनाड में चुनाव की घोषणा कर सकता है.
अख़बार लिखता है कि हाल के उदाहरण देखें तो चुनाव आयोग एक हफ़्ते के अंदर उपचुनाव की घोषणा कर सकता है.
लक्षद्वीप के सांसद पीपी मोहम्मद फ़ैज़ल के मामले में उनकी सदस्यता 13 जनवरी को रद्द हुई थी और 18 जनवरी को उपचुनाव होने की घोषणा कर दी गई थी.
सपा नेता आज़म ख़ान की यूपी विधानसभा की सदस्यता 27 अक्टूबर को गई थी और पांच नवंबर को उनके विधानसभा क्षेत्र रामपुर में उपचुनाव की घोषणा हो गई थी. हालांकि, आज़म ख़ान के मामले में चुनाव आयोग के अधिसूचना जारी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज़म ख़ान के उच्च न्यायालय में अपील दायर करने तक इंतज़ार करने को कहा था.
इसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव की अधिसूचना स्थगित कर दी थी. अतिरिक्त सत्र न्यायालय में आज़म ख़ान की अपील खारिज होने के बाद उपचुनाव की घोषणा हुई थी.
इसी तरह फै़ज़ल के मामले में शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को केरल हाई कोर्ट के आदेश का संज्ञान लेने के लिए कहा था. हाई कोर्ट ने उनकी सज़ा के फ़ैसले को पलट दिया था. इसके बाद चुनाव आयोग को उपचुनाव की अधिसूचना वापस लेनी पड़ी थी.

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अब देखना ये है कि राहुल गांधी के मामले में चुनाव आयोग न्यायालय के आदेश के लिए इंतज़ार करेगा या नहीं. जन प्रतिनिधित्व क़ानून के मुताबिक़ अगर अदालत सज़ा के फ़ैसले को पलट देती है तो सांसद के तौर पर राहुल की अयोग्यता खारिज हो जाएगी.
अख़बार लिखता है कि विशेषज्ञों के अनुसार चुनाव आयोग को राहुल गांधी की अयोग्यता के मामले में थोड़ा सतर्क रहना चाहिए क्योंकि लोकसभा की अधिसूचना में कुछ "क़ानूनी खामियां" हैं.
लोकसभा सचिवालय के पूर्व जनरल पीडीटी अचारी के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि अधिसूचना में राहुल गांधी को अयोग्य करार दिया गया है लेकिन वायनाड सीट को रिक्त नहीं बताया गया. आदर्श स्थिति में, चुनाव आयोग किसी सीट के लिए तभी अधिसूचना जारी कर सकता है जब वो रिक्त घोषित न हो जाए.

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प्रतिबंधित संगठन का सदस्य होना यूएपीए के तहत अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फ़ैसले में कहा है कि अगर कोई व्यक्ति प्रतिबंधित संगठन का सदस्य है तो उसके ख़िलाफ़ गैरक़ानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला चलाया जा सकता है. ये ख़बर अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने दी है.
अख़बार लिखता है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही 2011 के फ़ैसले को पलटते हुए ये फ़ैसला सुनाया है. न्यायाधीश एमआर शाह की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के उस पुराने फ़ैसले को पलट दिया है जिसमें कहा गया था कि सिर्फ़ सदस्य होना अपराध नहीं है.
मौजूदा फ़ैसले में कोर्ट ने यूएपीए की धारा 10(ए)(1) को सही ठहराया है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर दो साल तक की सज़ा हो सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यूएपीए को लागू करने का उद्देश्य ये था कि कुछ गैरक़ानूनी गतिविधियों को और प्रभावी तरीक़े से रोका जा सके और किसी गैरक़ानूनी संस्था के सदस्य बने हुए किसी व्यक्ति को सज़ा दी जा सके."
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किरण पटेल मामले में गुजरात के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिया इस्तीफ़ा
जम्मू-कश्मीर में ख़ुद को पीएमओ का अधिकारी बताकर दौरा करने वाले किरण भाई पटेल के मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी हितेष पांड्या ने इस्तीफ़ा दे दिया है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि हितेष पांड्या ने किरण भाई पटेल से अपने बेटे का संबंध होने के चलते इस्तीफ़ा दिया है. उनका बेटा एक कारोबारी है जो बीजेपी और किरण पटेल से जुड़ा हुआ था.
मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त जनसंपर्क अधिकारी हितेष पांड्या ने शुक्रवार शाम को अपना इस्तीफ़ा दे दिया. वो 22 सालों से सेवारत थे और पांच मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुके थे.
वहीं, किरण पटेल फिलहाल गिरफ़्तार कर लिए गए हैं. वो गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले हैं.
73 साल के हितेष पांड्या ने अख़बार को बताया, "मैंने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है. किसी ने मुझे इस्तीफ़ा देने के लिए नहीं कहा. मैं 31 मार्च तक अपना बचा हुआ काम पूरा कर लूंगा."
उन्होंने अख़बार को इस्तीफ़े से कुछ घंटों पहले बताया था कि उनके 43 साल के बेटे अमित कारोबार के सिलसिले में इस महीने किरण पटेल के साथ जम्मू-कश्मीर गए थे. वो ये भी कहते हैं कि उनका बेटा अमित निर्दोष है और वो किरण पटेल के ख़िलाफ़ एक गवाह है.

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नई पेंशन योजना की होगी समीक्षा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है.
इसके लिए वित्त सचिव के नेतृत्व में एक समिति बनाई जाएगी जो नई पेंशन योजना की समीक्षा करेगी. अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में ये ख़बर दी गई है.
अख़बार के अनुसार उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन योजना यानी एनपीएस में सुधार की ज़रूरत की मांग की जा रही है.
देश में जनवरी 2004 से नई पेंशन योजना लागू की थी लेकिन कर्मचारियों का एक वर्ग पुरानी पेंशन योजना को ही वापस लाने की मांग भी की जा रही थी. ऐसे में नई और पुरानी पेंशन योजना राजनीतिक मुद्दा बन गई थी.
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