राहुल गांधी की सदस्यता जाने पर प्रियंका, ममता, शिवराज समेत किसने क्या कहा?

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संसद की सदस्यता रद्द किए जाने के फ़ैसले के बाद विपक्ष के कई नेता राहुल गांधी के समर्थन में उतरे, तो बीजेपी के नेताओं ने कहा कि सबकुछ कानून के मुताबिक हुआ है.
फ़ैसले के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने ट्विटर पर कहा, "मैं भारत की आवाज़ के लिए लड़ रहा हूं. मैं हर कीमत चुकाने को तैयार हूं."
इससे पहले, गुरुवार को सूरत की एक निचली अदालत ने राहुल गांधी की 'मोदी सरनेम' पर की गई टिप्पणी के मामले में उन्हें कसूरवार ठहराया था.अदालत ने उन्हें इस केस में दो साल जेल की सज़ा सुनाई है.
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक जेल की सज़ा होने पर उसकी सदस्यता रद्द हो जाती है.
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राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने इस कार्रवाई को राहुल गांधी की आवाज़ दबाने की कोशिश बताया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार खड़गे ने कहा, "बीजेपी ने उन्हें अयोग्य ठहराने के सारे प्रयास किए हैं. यह कदम सच बोलने वालों और लोकतंत्र के उसूलों के अनुसार संविधान के तहत काम करने, उसकी रक्षा करने और जनता के हक़ों के लिए लड़ने वालों का मुंह बंद करने के लिए उन्हें (राहुल गांधी को) सदन से बाहर किया गया है."
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि उनका ऐसा कौन सा बड़ा अपराध था कि मानहानि के मामले में उन्हें सज़ा दी गई.
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला बैकवर्ड या फॉरवर्ड क्लास से नहीं जुड़ा है. उन्होंने पूछा कि जो लोग यहां से पैसे लेकर भागे चाहे नीरव मोदी हों या ललित मोदी या विजय माल्या, क्या वे बैकवर्ड क्लास के थे.
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राहुल गांधी के बारे में धारणा बनाने की कोशिश कर रही है कि वो बैकवर्ड क्लास के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं.
खड़गे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जो सच्चाई देश के सामने रखना चाहते हैं या रखना चाह रहे हैं, वो केंद्र सरकार को पसंद नहीं आ रही है, इसलिए उनकी सदस्यता को रद्द किया गया.
उन्होंने कहा "वे सोचते होंगे कि राहुल गांधी के संसद से बाहर जाने के बाद सरकार की समस्याएं समाप्त हो जाएंगी, पर ऐसा होने वाला नहीं है. ये जो अदानी मामले की जांच के लिए जेपीसी बनाने की मांग है, हम उसके लिए लड़ते रहेंगे. हमें जेल भी जाना पड़े तो जाएंगे. हमारी पूरी पार्टी साथ है."

प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना की है.
उन्होंने कहा, "नरेंद्र मोदी जी आपके चमचों ने एक शहीद प्रधानमंत्री के बेटे को देशद्रोही, मीर जाफ़र कहा. आपके एक मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी का पिता कौन है? कश्मीरी पंडितों के रिवाज निभाते हुए एक बेटा पिता की मृत्यु के बाद पगड़ी पहनता है, अपने परिवार की परंपरा क़ायम रखता है."
प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर लिखा, "भरी संसद में आपने पूरे परिवार और कश्मीरी पंडित समाज का अपमान करते हुए पूछा कि वह नेहरू नाम क्यों नहीं रखते. लेकिन आपको किसी जज ने दो साल की सज़ा नहीं दी. आपको संसद से डिस्क्वॉलिफाई नहीं किया. राहुल जी ने एक सच्चे देशभक्त की तरह अदानी की लूट पर सवाल उठाया. नीरव मोदी और मेहुल चौकसी पर सवाल उठाया."
"क्या आपका मित्र गौतम अदानी देश की संसद और भारत की महान जनता से बड़ा हो गया है कि उसकी लूट पर सवाल उठा तो आप बौखला गए? आप मेरे परिवार को परिवारवादी कहते हैं, जान लीजिए, इस परिवार ने भारत के लोकतंत्र को अपने खून से सींचा. जिसे आप ख़त्म करने में लगे हैं."
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'जारी रहेगी लड़ाई'
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि उनकी पार्टी कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह से ये लड़ाई लड़ेगी.
ट्विटर पर उन्होंने लिखा, "हम डरने या चुप रहने वाले नहीं हैं. प्रधानमंत्री से जुड़े अदानी महाघोटाले में संयुक्त संसदीय समिति के बजाय राहुल गांधी को अयोग्य करार दिया गया है."
अपने इस ट्वीट के अंत में उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के हालात पर तंज़ कसते हुए लिखा, "भारतीय लोकतंत्र, ओम शांति."

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लोकसभा स्पीकर के इस फ़ैसले पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करना मोदी सरकार की प्रतिशोध की नीति का उदाहरण है.
उन्होंने कहा, "भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी की लोकप्रियता बहुत बढ़ी है और मोदी सरकार को यही हजम नहीं हो रहा."
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "उन्हें लग रहा है कि राहुल गांधी का मुंह बंद करना होगा क्योंकि अगर उन्हें बोलने दिया गया तो भारतीय जनता पार्टी सरकार से बाहर हो जाएगी."
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कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया, "राहुल गांधी जी की लोकसभा सदस्यता ख़त्म कर दी गई. वह आपके और इस देश के लिए लगातार सड़क से संसद तक लड़ रहे हैं, लोकतंत्र को बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं."
"हर षड्यंत्र के बावजूद वह यह लड़ाई हर क़ीमत पर जारी रखेंगे और इस मामले में न्यायसंगत कार्यवाही करेंगे."
राहुल को मिला विपक्ष का समर्थन
राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द किए जाने के बाद विपक्षी नेताओं की भी प्रतिक्रियाओं आईं.
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि देश में एक पार्टी के शासन का माहौल बनाया जा रहा है.
अरविंद केजरीवाल ने कहा, "आज देश में जो चल रहा है बहुत ख़तरनाक है. विपक्ष को ख़त्म करके ये लोग वन-नेशन वन-पार्टी का माहौल बनाना चाहते हैं, इसी को तो तानाशाही कहते हैं. मेरी देशवासियों से अपील है- हमें मिलकर आगे आना होगा, जनतंत्र बचाना है, देश बचाना है."
उन्होंने ट्विटर पर कहा, "लोक सभा से राहुल गांधी जी का निष्कासन चौंकाने वाला है. देश बहुत कठिन दौर से गुज़र रहा है. पूरे देश को इन्होंने डरा कर रखा हुआ है. 130 करोड़ लोगों को इनकी अहंकारी सत्ता के ख़िलाफ़ एकत्र होना होगा."
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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिखा, " संसद की सदस्यता के अपहरण से राजनीतिक चुनौती ख़त्म नहीं हो जाती. सबसे बड़े आंदोलन संसद नहीं; सड़क पर लड़कर जीते गये हैं."
"जिन महोदय ने मानहानि का दावा किया है दरअसल ये उन्हें अपने उन लोगों पर करना चाहिए जो अपने देश को धोखा देकर विदेश भाग गये, जिससे उनके नाम-मान को हानि पहुँची है."
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, " पीएम मोदी के न्यू इंडिया में बीजेपी के निशाने पर विपक्षी नेता! आपराधिक पृष्ठभूमि वाले भाजपा नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाता है, विपक्षी नेताओं को उनके भाषणों के लिए अयोग्य ठहराया जाता है. आज, हमने अपने संवैधानिक लोकतंत्र में एक नया निम्न स्तर देखा है."
बीजेपी ने क्या कहा
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि ये कोई राजनीतिक निर्णय नहीं है और क़ानून की नज़र में सब बराबर हैं.
केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री एसपीएस बघेल ने लोकसभा सचिवालय के फ़ैसले को 'वैध' करार दिया है.
उन्होंने बीजेपी के एक एमएलए का ज़िक्र करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के एक पार्टी विधायक की हाल ही में एक आपराधिक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई थी.
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संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि फ़ैसला क़ानूनी है और उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस न्यायपालिका पर सवाल उठा रही है.
उन्होंने कहा, "ये एक क़ानूनी फ़ैसला है और किसी राजनीतिक दल ने ये निर्णय नहीं किया है. ये अदालत का फ़ैसला किया है. कांग्रेस को ये स्पष्ट करना चाहिए कि वो किनका विरोध कर रहे हैं."
बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव ने कहा, "क्या एक पूरे समाज को चोर बोल सकते हैं? क्या कांग्रेस जैसी पार्टी के लिए छोटे समाज और ओबीसी समाज का अपमान करना और माफ़ी भी न मांगना ही अभिव्यक्ति की आज़ादी है. गाली देने में और आलोचना करने में अंतर है. वे (राहुल गांधी) ओबीसी समाज को गाली देने का काम कर रहे थे जिसकी वजह से उन्हें सज़ा हुई."
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नीमच में कहा, "जो जैसे करता है उसको वैसा परिणाम भोगना पड़ता है, राहुल गांधी ने जो किया उसका परिणाम अब उन्हें भोगना है."
बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा, "ये कोर्ट का फ़ैसला है और न्यायपालिका के फै़सले को स्वीकार करना चाहिए. देश में न्यायालय के सामने सब समान हैं. वे (कांग्रेस) आरोप लगा रहे हैं कि देश में तानाशाही आ गई है. जो लोग भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं वो कह रहे हैं कि हम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे थे. वे कोर्ट के फैसले को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं."
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केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने जम्मू में कहा, "स्पीकर को अधिकार है कि वे ऐसी स्थिति में किसी सांसद को अयोग्य घोषित कर सकते हैं. सूरत ज़िला अदालत के फै़सले के बाद ये निर्णय लेना बहुत ज़रूरी था, स्पीकर ने उचित फैसला लिया है."
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने उन पर हमला करते हुए कहा है, "राहुल गांधी का मामला क्या है? वो नेशनल हेराल्ड में भ्रष्टाचार के एक मामले में पहले से ही ज़मानत पर हैं."
"राहुल गांधी 2018 में मानहानि के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में माफी मांग चुके हैं. उस मामले में अदालत ने उन्हें चेतावनी दी थी कि उन्हें आगे भी बिना किसी आधार के कोई आरोप लगाने और लोगों की छवि धूमिल करने से बचना चाहिए.
उन्होंने कहा, "उन्हें संसद में सच्चाई से दूर जाने की आदत है. वो अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज़ नहीं पेश करते."

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ठाकुर ने कहा, "उन्होंने 2019 में कहा था कि 'सारे चोर मोदी हैं'. उन्होंने इसे बार-बार कहा. उनके ख़िलाफ़ सुशील मोदी की ओर से दाख़िल एक मामला पटना हाईकोर्ट में लंबित है, जिसमें वो ज़मानत पर हैं."
ठाकुर के अनुसार, "एक अन्य मामला सूरत की एक अदालत में पूर्णेश मोदी ने दाख़िल किया, जिसमें उन्हें सज़ा दी गई. अदालत के फैसले में साफ़ कहा गया कि वो इस तरह के आरोप लगाने के आदी हैं."
"मुझे लगता है कि राहुल गांधी का मानना है कि वो संसद, कानून देश से ऊपर हैं. वो मानते हैं कि उन्हें विशेषाधिकार हासिल है और गांधी परिवार कुछ भी कर सकता है."
उन्होंने कहा, "पिछले 15-20 साल में कांग्रेस ने लगातार ओबीसी की छवि ख़राब करने की कोशिश की है. राहुल गांधी की मोदी सरनेम को लेकर की गई टिप्पणी ओबीसी की छवि ख़राब करने की कोशिश है औरओबीसी का अपमान है."
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