बिहार: सम्राट चौधरी कौन हैं, जिन पर बीजेपी को सत्ता का ताज दिलाने की है ज़िम्मेदारी

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
बीते साल अप्रैल महीने में बिहार बीजेपी ने सम्राट अशोक की जयंती को लेकर पटना में एक बड़ा आयोजन किया था, जिसके मुख्य कर्ता धर्ता सम्राट चौधरी थे.
सम्राट अशोक कुशवाहा जाति से आते थे, इस बात को स्थापित करने की कोशिशों के साथ-साथ ये एक तरह का शक्ति प्रदर्शन भी था. पटना के बापू सभागार में हुए उस शक्ति प्रदर्शन के नतीजे 11 महीने बाद सामने है.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सम्राट चौधरी को बिहार बीजेपी की कमान सौंपी है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरूण सिंह की ओर से जारी पत्र में लिखा है- ये नियुक्ति तत्काल प्रभाव से है.
बिहार विधान परिषद में सम्राट चौधरी प्रतिपक्ष के नेता हैं.
बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनने के बाद बेहद संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने बीबीसी से कहा, "मेरी प्राथमिकता पार्टी को विस्तार देते हुए बिहार में बीजेपी की सरकार बनाना है. साथ ही हम अपने कार्यकर्ताओं के मान सम्मान की रक्षा करेंगे."
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जातिगत समीकरण
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल का कार्यकाल सितंबर 2022 में ही पूरा हो गया था. उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद से ही बीजेपी के अध्यक्ष पद को लेकर कई नाम राजनैतिक गलियारों में थे.
लेकिन बीजेपी ने अपना दांव 53 साल के सम्राट चौधरी पर लगाया है, जो एक नौजवान नेता है.

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वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी कहते है, " सम्राट चौधरी को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपने की दो वजहें हैं. पहली वजह उनकी जाति, जो कोइरी है और दूसरी वजह उनका नौजवान और आक्रामक होना. बीजेपी अब चाहती है कि उनको सीएम के तौर पर तेजस्वी के ख़िलाफ़ प्रोजेक्ट किया जाए. उनकी उम्र और जाति दोनों उनके साथ है."
बीजेपी के इस फ़ैसले को जातीय नजरिए से देखें, तो ओबीसी वोट बैंक में यादवों के बाद सबसे ज्यादा संख्या बल कुर्मी-कोइरी का है. यादवों की आबादी तकरीबन 15 फ़ीसदी है, तो कुर्मी-कोइरी की सात फ़ीसदी के क़रीब.
कुर्मी-कोइरी में भी कोइरी की आबादी ज़्यादा है. ऐसे में आरजेडी के यादव वोट बैंक का मुक़ाबला अगर किसी भी पार्टी को करना है तो उसमें कुर्मी-कोइरी वोट बैंक अहम भूमिका निभा सकता है.
इसी वोट बैंक पर नज़र होने के चलते ही राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने साल 2022 में अशोक जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कहा था- अगले साल ये कार्यक्रम गांधी मैदान में होना चाहिए, जिसमें कुशवाहा समाज के एक लाख से ज़्यादा लोग इकठ्ठा हो. लव-कुश (कुर्मी-कोइरी के लिए इस्तेमाल होने वाली राजनैतिक शब्दावली) भगवान राम से अलग नहीं किए जा सकते.
बिहार में खेती से जुड़ी ये जाति इतनी महत्वपूर्ण है कि ख़ुद नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में 1994 में लव-कुश सम्मेलन किया था. नीतीश ख़ुद कुर्मी जाति से आते हैं और इस कुर्मी-कोइरी के एकमुश्त वोट करने का राजनैतिक मतलब समझते है.

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सम्राट चौधरी की राजनैतिक विरासत
53 साल के सम्राट चौधरी की अपनी राजनैतिक विरासत बहुत समृद्ध है. वो शकुनी चौधरी के बेटे हैं, जो समता पार्टी के संस्थापकों में से एक हैं.
शकुनी चौधरी का नाम कुशवाहा समाज के बड़े नेताओं में शुमार है और वो खुद भी विधायक और सांसद रहे.
जेडीयू में रहते हुए साल 2014 में शकुनी चौधरी का नरेंद्र मोदी को लेकर एक विवादित बयान सुर्ख़ियों में आया था, जो उन्होने भागलपुर में चुनाव प्रचार के दौरान दिया था.
शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी का प्रवेश सक्रिय राजनीति में 1990 में हुआ. बिहार विधान परिषद की वेबसाइट के मुताबिक़ 1995 में उन्हें एक राजनीतिक मामले में 89 दिन के लिए जेल जाना पड़ा था.
1999 में राबड़ी देवी सरकार में वो कृषि मंत्री बने. लेकिन उनकी कम उम्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ.साल 2000 और 2010 में वो परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. साल 2014 में वो नगर विकास विभाग के मंत्री रहे. साल 2018 में वो राजद छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री थे.
आरजेडी से हुई शुरुआत
सम्राट चौधरी ने अपनी राजनीतिक पारी राजद से शुरू की थी.1997 में राजद के गठन के समय जो ड्राफ़्ट तैयार हुआ, उसकी तीन सदस्यीय कमेटी में से एक सदस्य चितरंजन गगन थे.
वो बीबीसी को बताते हैं, " शकुनी चौधरी राजनीति में सेना से रिटायर होने के बाद आए थे, लेकिन सम्राट बहुत ही कम उम्र में राजनीति में सक्रिय रहने लगे थे. वो बहुत कम उम्र में विधायक और मंत्री भी बने. जिसकी बाकायदा समता पार्टी से एमएलसी रहे पीके सिन्हा ने चुनाव आयोग को शिकायत की थी. सम्राट चौधरी को व्यक्तिगत तौर पर देखें तो वो बहुत सक्रिय, कमिटेड और राजनीति से इतर व्यक्तिगत संबंधों को निभाने वाले है."
परबत्ता विधानसभा से सम्राट चौधरी विधायक रह चुके है. उनके साथ साल 2005 में चुनाव लड़ चुके 67 साल के सुनील कुमार पेशे से वकील है. वो बताते हैं, "सम्राट चौधरी अपनी राजनैतिक विरासत से इतर काम करने वाले और जनप्रिय है. बहुत अच्छा भाषण और समाज में उनकी पकड़ बहुत अच्छी है. हमारे साथ उनकी तमाम असहमितयां हैं, लेकिन वो हवा हवाई नेता नहीं है."
बीजेपी से नीतीश की दूरी
बीते कुछ महीनों से बिहार की राजनीति में ये संकेत मिल रहे थे कि नीतीश और बीजेपी के बीच नज़दीकियाँ बढ़ रही हैं. बिहार में नए राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर की नियुक्ति से पहले गृह मंत्री अमित शाह का नीतीश कुमार को फ़ोन करना, नीतीश के जन्मदिन की बधाई से कयास तेज़ हो गए थे.
विश्लेषकों की मानें, तो सम्राट चौधरी को बिहार बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त करके अब इन नजदीकियों पर विराम लग गया है.
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शर्मा कहते है, "बीजेपी ने अब ये साफ़ कर दिया है कि उसका अब नीतीश के साथ फिर से गठजोड़ संभव नहीं है. नीतीश कुमार बीजेपी के साथ गठबंधन टूटने की बड़ी वजह बिहार बीजेपी के दो नेताओं के बयान बताते रहे है. ये है विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी, जिनको पहले विधानमंडल में नेता प्रतिपक्ष बनाया और अब बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है."

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क्या है उपेंद्र कुशवाहा के लिए मायने?
आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी के इस दांव के उपेंद्र कुशवाहा के लिए क्या मायने है?
उपेंद्र कुशवाहा, जिन्होंने जेडीयू से नाता तोड़ कर अपनी नई पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल बनाई है. जेडीयू से नाता टूटने के बाद ही बिहार बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष संजय जायसवाल ने उनसे मुलाक़ात की थी, जिसके बाद ये कयास लग रहे थे कि उनका बीजेपी से गठजोड़ हो सकता है.
पत्रकार अरविंद शर्मा कहते है, " इस फ़ैसले के बाद अब उपेंद्र कुशवाहा और बीजेपी में बहुत सीमित समझौता हो सकता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की पुरानी पार्टी आरएलएसपी को बीजेपी ने तीन सीटें दी थी और पार्टी जीती भी थी. लेकिन सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब उनकी जगह सीमित हो गई है."
वहीं उपेंद्र कुशवाहा ने बीबीसी से कहा, "मैं राजनीति को राजनीति के तौर पर देखता हूँ. किसी जाति के आधार पर नहीं. बाक़ी बीजेपी जिसको प्रदेश अध्यक्ष बनाए, ये उनका अंदरूनी मामला है."
सम्राट चौधरी को अध्यक्ष घोषित होने के बीच ही बीजेपी 2 अप्रैल को रोहतास में सम्राट अशोक जयंती आयोजन की तैयारी कर रही है.
इस आयोजन में गृह मंत्री अमित शाह ख़ुद शिरकत करेंगें. स्पष्ट है कि सम्राट चौधरी की जाति के ज़रिए बिहार बीजेपी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को साधने की कोशिश में है.
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