महाराष्ट्र: क्या है अनिल जयसिंघानी का मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से कनेक्शन?

- Author, प्राजक्ता पोल
- पदनाम, बीबीसी मराठी
महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि अनिक्षा जयसिंघानी नाम की एक डिजाइनर तरह-तरह के वीडियो दिखाकर उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी.
अमृता फडणवीस ने शिकायत में कहा है कि 'उन्होंने अपने पिता पर से केस हटाने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की'.
इस शिकायत पर उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कुछ चौंकाने वाले दावे किए. उन्होंने कहा कि मामसे से कई नेताओं के नाम जुड़े हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार को 'फंसाने' की कोशिश की गई.
इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि आख़िर वो नेता कौन हैं? अटकलें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर लगाई जाने लगीं.
बीजेपी और ठाकरे के विवाद में शिंदे की मुश्किल?
इतना सब होने के बाद ठाकरे गुट की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट कर कुछ सवाल खड़े किए.
फिर अमृता फडणवीस और प्रियंका चतुर्वेदी के बीच ट्विटर पर बहस हुई. उसके बाद उद्धव ठाकरे के साथ अनिल जयसिंघानी के शिवसेना में शामिल होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं. इस बारे में सांसद संजय राउत बोलने से बचते रहे.
लेकिन शिवसेना नेता सुषमा अंधारे ने ट्वीट कर एकनाथ शिंदे पर उंगली उठाई.
अनिल जयसिंघानी की गिरफ़्तारी के बाद बीजेपी नेता मोहित कंबोज ने ट्वीट किया, ''उद्धव ठाकरे के क़रीबी सट्टेबाज अनिल जयसिंघानी को गिरफ़्तार कर लिया गया है. पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे और एक अन्य पूर्व पुलिस आयुक्त ज़ल्द ही बेनकाब होंगे."
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इस पर जब बीजेपी विधायकों से उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि पूरी जांच होनी चाहिए. उन्होंने शिवसेना और उद्धव ठाकरे का नाम लेने से परहेज किया.
दूसरी ओर आदित्य ठाकरे ने कहा,"बहुत सारे लोग मातोश्री जाते हैं. सब जानते हैं कि उन्हें वहां कौन लाया था. लेकिन इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए. "
इस पर जब शिवसेना के विधायकों से टिप्पणी करने को कहा गया तो कई विधायकों ने इस पर बात करने से मना कर दिया.
इसमें विधायक योगेश कदम ने कहा, "वे कुछ भी आरोप लगाते हैं क्योंकि उनकी सरकार चली गई है. हम इन आरोपों का जवाब नहीं देंगे."
लिहाज़ा बीजेपी और ठाकरे के बीच चल रहे इस राजनीतिक विवाद में शिंदे के विधायकों के लिए असमंजस बना हुआ है.
शिंदे के आशीर्वाद से शिवसेना में एंट्री?

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अनिल जयसिंघानी 2002 में उल्हासनगर से एनसीपी पार्षद चुने गए थे, जबकि उन्होंने 1995 और 1997 में कांग्रेस से चुनाव लड़ा था.
अनिल जयसिंघानी 2014 में तत्कालीन पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हुए थे.
ठाकरे के विधायकों का आरोप है कि उल्हासनगर में रहने वाले अनिल जयसिंघानी की एंट्री तत्कालीन ठाणे ज़िलाध्यक्ष और मौजू़दा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आशीर्वाद से हुई थी.
ज़िला प्रमुख द्वारा नाम दिए जाने के बाद ही 'मातोश्री' में प्रवेश मिलता है.
'लोकमत' के सहायक संपादक संदीप प्रधान कहते हैं, ''विभाग प्रमुखों और ज़िलाध्यक्षों के ज़रिए ही वहां प्रवेश हो पाता है. शीर्ष नेता के संज्ञान में आता है, तो उसके बारे में निचले लोगों को सूचित किया जाता है या उनकी राय ली जाती है. लेकिन जयसिंघानी पहले कांग्रेस में थे फिर एनसीपी में. जिस तरह की पार्टी ये अपराधी मानसिकता वालों को पसंद करते हैं. अब तक देखा गया है कि वे उस पार्टी में चले जाते हैं."
कौन हैं अनिल जयसिंघानी?

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अनिल जयसिंघानी को कुख़्यात सट्टेबाज माना जाता है. मौजूद जानकारी के मुताबिक उनके ख़िलाफ़ 14-15 अपराध दर्ज हैं.
जयसिंघानी को क्रिकेट सट्टा मामले में तीन बार गिरफ़्तार किया गया था. उन्हें पांच राज्यों में वांटेड घोषित किया गया था. मई 2015 में ईडी ने जयसिंघानी के घर पर छापा मारा था. उसके बाद जयसिंघानी बीमारी का हवाला देकर फ़रार हो गए.
1 मई 2016 को जयसिंघानी के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का एक और मामला दर्ज किया गया. मुंबई पुलिस के साथ ठाणे, गोवा, असम, गुजरात और मध्य प्रदेश की पुलिस जयसिंघानी की तलाश कर रही थी. ईडी के अधिकारी भी उनकी तलाश कर रहे थे.
फिर अनिल जयसिंघानी को इतने सालों बाद गुजरात से गिरफ़्तार किया गया है.
इस गिरफ़्तारी के लिए मुंबई पुलिस की पांच टीमों का गठन किया गया था. यह अभियान अलग-अलग राज्यों में चलाया जा रहा था.
अभियुक्त शिर्डी वाटे बारडोली भाग गए थे. तीन टीमें गुजरात भेजी गईं. यह ऑपरेशन गुजरात पुलिस के साथ मिलकर चलाया गया था. अभियुक्त ने 72 घंटों में सरेंडर किया.
अभियुक्त पवनबारा को रात में नाकाबंदी कर गुजरात पुलिस की मदद से कलोल में पकड़ा गया.
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