गोविंद पानसरे हत्याकांड की जांच आठ साल बीतने के बाद कहां तक पहुंची है?

गोविंद पानसरे

इमेज स्रोत, FACEBOOK/KABEER PANSARE

इमेज कैप्शन, वामपंथी नेता गोविंद पानसरे
    • Author, प्राजक्ता धुलप
    • पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता

सामाजिक कार्यकर्ता और वामपंथी नेता गोविंद पानसरे की हत्या को आठ साल बीत चुके हैं.

16 फ़रवरी, 2015 को कोल्हापुर में उनके आवास के पास दो लोगों ने उन्हें उस समय गोली मार दी थी जब वह मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे.

इस जानलेवा हमले के बाद इलाज के दौरान 20 फ़रवरी को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. उनकी उम्र 82 साल थी. इस हमले में उनकी पत्नी उमा पानसरे भी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं.

इस हत्याकांड को आठ साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक ये पता नहीं चल सका है कि उनकी हत्या क्यों की गयी थी. वहीं, दूसरी ओर पानसरे परिवार को अब तक न्याय का इंतज़ार है.

अब तक शुरू नहीं हुई सुनवाई

सामाजिक कार्यकर्ता और गोविंद पानसरे की बहू मेघा पानसरे ने बीबीसी मराठी को बताया, "हत्याकांड की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हुई है. दोनों अभियुक्त अभी भी फ़रार हैं. हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार और वाहन भी नहीं मिला है. मामला ऐसे ही परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. एटीएस को सख़्ती से जांच करनी चाहिए और जांच की ख़ामियां दूर करनी चाहिए."

मेघा पानसरे चाहती हैं कि इस हत्याकांड की सुनवाई जल्द से जल्द शुरू हो ताकि दोषियों को सज़ा दिलाई जा सके.

मेघा पानसरे ने बताया, "आठ साल के दौरान हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. यह हत्या संवैधानिक मूल्यों के ख़िलाफ़ एक बड़ी साजिश का हिस्सा है. पिछले आठ सालों के दौरान समाज के विभिन्न स्तरों तक यह हिंसा पहुंच चुकी है."

उन्होंने महाराष्ट्र की सरकारों पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले आठ सालों में भाजपा-शिवसेना या महाविकास अघाड़ी सरकार ने वैसी इच्छाशक्ति नहीं दिखाई, जैसी कर्नाटक सरकार ने गौरी लंकेश की हत्या के मामले में दिखाई."

गोविंद पानसरे

इमेज स्रोत, FACEBOOK/KABEER PANSARE

दस लोग हैं संदिग्ध अभियुक्त

अभी तक यह साफ़ नहीं हो पाया है कि कॉमरेड गोविंद पानसरे की हत्या किसने की.

इस साल यानी 9 जनवरी, 2023 को कोल्हापुर ज़िला एवं सत्र न्यायालय में दस संदिग्धों के ख़िलाफ़ हत्या और हत्या की साजिश रचने का आरोप तय किया गया है.

पानसरे हत्याकांड की सुनवाई में तेजी लाने के लिए आरोपों की पुष्टि को महत्वपूर्ण माना गया है. इसके बाद दो अभियुक्तों ने एटीएस की जांच पर आपत्ति जताते हुए बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

अदालत ने बीती एक फरवरी को अभियुक्तों की याचिका ख़ारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि 'अभियुक्तों को स्पीडी ट्रायल की मांग करने का अधिकार है, लेकिन अदालत के पास जांच का विरोध करने का अधिकार नहीं है.'

विशेष लोक अभियोजक हर्षद निंबालकर ने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए कहा, 'पानसरे मामले की सुनवाई और एटीएस की जांच दोनों जारी रहेंगी. अदालत में गवाहों और सबूतों के संबंध में अगली प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी."

मेधा पानसरे

इमेज स्रोत, FACEBOOK/KABEER PANSARE

दस संदिग्ध कौन हैं?

इन 10 संदिग्धों में समीर गायकवाड़, वीरेंद्र सिंह तावड़े के साथ अमोल काले, सचिन अंदुरे, वासुदेव सूर्यवंशी, अमित दिग्वेकर, गणेश मिस्किन, अमित बद्दी, शरद कालस्कर और भरत कुर्ने शामिल हैं.

उनमें से कुछ लोगों को डॉ नरेंद्र दाभोलकर और गौरी लंकेश हत्याकांड में भी अभियुक्त बनाया गया है.

इन संदिग्धों पर हत्या, हत्या के प्रयास और हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर अपराधों के लिए आर्म्स एक्ट सहित भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप लगाए गए हैं.

पानसरे की हत्या के बाद सितंबर 2015 में एसआईटी ने सांगली के समीर गायकवाड़ को गिरफ़्तार किया था.

समीर हिंदू समर्थक संगठन सनातन संस्था के पूर्णकालिक कार्यकर्ता हैं. पानसरे हत्याकांड में एसआईटी ने समीर गायकवाड़ के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल की थी.

कोल्हापुर कोर्ट ने बाद में समीर गायकवाड़ को ज़मानत दे दी. इसके ख़िलाफ़ पुलिस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

एसआईटी ने साल 2016 में पानसरे हत्याकांड में हिन्दू जनजागृति समिति के डॉ. वीरेंद्र सिंह तावड़े को गिरफ़्तार किया था.

एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में तावड़े को पानसरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया था.

इस मामले में तावड़े को जमानत मिल गई थी. इसके ख़िलाफ़ पुलिस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. वहीं, डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में तावड़े की ज़मानत नामंजूर हो चुकी है.

अमित दिग्वेकर को एसआईटी ने जनवरी 2019 में गिरफ़्तार किया था. उन पर गोविंद पंसारे के घर की रेकी करने का आरोप है.

साल 2018 में पानसरे कांड के अभियुक्त अमोल काले की पुलिस हिरासत की मांग करते हुए रिमांड अर्जी में लिखा है, 'डॉ. पानसरे की हत्या में दो देशी पिस्तॉलों का इस्तेमाल किया गया. इनमें से एक पिस्टल से डॉ. दाभोलकर की हत्या हुई और जबकि दूसरी का इस्तेमाल प्रोफ़ेसर कलबुर्गी की हत्या में किया गया था."

अमोल काले कौन है?

गोविंद पानसरे के समर्थक

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, सोमवार को नागपुर में सीपीआई कार्यकर्ताओं ने गोविंद पानसरे की बरसी पर प्रदर्शन किया.

कर्नाटक पुलिस ने अमोल काले को कर्नाटक की पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के सिलसिले में गिरफ़्तार किया था. इसके बाद एसआईटी ने काले को पानसरे मामले में गिरफ़्तार किया था.

जानी-मानी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के सिलसिले में वासुदेव सूर्यवंशी और भरत कुर्ने को बेंगलुरु पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. साल 2018 में महाराष्ट्र एसआईटी ने गोविंद पानसरे हत्याकांड में इन दोनों अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया था.

जांच दल ने अदालत में दावा किया था कि दोनों पानसरे की हत्या की साजिश में शामिल थे. इस मामले में कोल्हापुर कोर्ट ने 2020 में भरत कुर्ने की ज़मानत अर्जी ख़ारिज कर दी थी.

कुर्ने की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि डॉ. तावड़े ने पानसरे की हत्या में इस्तेमाल हुई दो बंदूकें कुर्ने को नष्ट करने के लिए दी थीं.

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में सीबीआई की ओर से गिरफ़्तार किए गए सचिन अंदुरे को 2019 में गोविंद पानसरे हत्याकांड में गिरफ़्तार किया गया था. कोर्ट ने सचिन अंदुरे को बरी करने की याचिका ख़ारिज कर दी है.

कोर्ट ने 2020 में उनकी ज़मानत अर्जी ख़ारिज कर दी थी. अभियोजन पक्ष का दावा है कि पानसरे की हत्या के समय अंदुरे मौजूद था.

अमित बद्दी और गणेश मिस्किन को महाराष्ट्र एटीएस ने 2018 में नालासोपारा हथियार ज़ब्ती मामले में गिरफ़्तार किया था. एटीएस ने उसके ख़िलाफ़ चार्ज़शीट दाख़िल की थी.

कर्नाटक पुलिस ने पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की 2017 की हत्या के मामले में भी दोनों को गिरफ़्तार किया था.

2019 में पानसरे हत्याकांड की एसआईटी ने डॉ. दाभोलकर हत्याकांड के अभियुक्त शरद कालस्कर को गिरफ़्तार किया. कालस्कर पर आरोप है कि वे गोविंद पानसरे की हत्या की साजिश रचने के लिए बेलगाम में हुई बैठक में शामिल थे.

वीडियो कैप्शन, गौरैया को आशियाना दिलाते हैं ये शख़्स

पानसरे मामले में फ़रार अभियुक्त

गोविंद पानसरे हत्याकांड के दो अभियुक्त सारंग अकोलकर और विनय पवार भगोड़े घोषित हैं.

पानसरे हत्याकांड की सुनवाई मार्च में कोल्हापुर की एक अदालत में हुई थी.

बीबीसी से बात करते हुए अभियुक्त के वकील वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने कहा, 'कॉमरेड पानसरे की हत्या किसने की? इसका अब तक पता नहीं चला है.'

इसका कारण यह है कि जांच एजेंसी ने पहले दावा किया कि समीर गायकवाड़ और उसके बाद दावा किया कि विनय पवार और अकोलकर ने उन्हें गोली मारी. तो सवाल यही उठता है कि आख़िर किसने उनकी हत्या की थी. जांचकर्ताओं ने अभी तक इस सवाल का जवाब नहीं दिया है कि पानसरे की हत्या किसने की है.

गोविंद पानसरे

इमेज स्रोत, FACEBOOK/KABEER PANSARE

एटीएस कर रही है मामले की जांच

पानसरे हत्याकांड की जांच आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) कर रहा है.

3 अगस्त, 2022 को पानसरे परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख कर मांग की थी कि इस मामले की जांच महाराष्ट्र सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जगह एटीएस को सौंपी जाए.

परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि 'एसआईटी हमलावरों का पता लगाने में विफल रही है.'

उच्च न्यायालय ने साथ ही इस मामले में जांच कर रहे कुछ अधिकारियों का तबादला एटीएस को करने और एक विशेष टीम नियुक्त करने के आदेश दिए थे.

याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सीआईडी की विशेष जांच टीम को निर्देश दिया था कि वह 2020 और 2022 के बीच जांच में क्या-क्या हुआ, इस पर रिपोर्ट दें. पानसरे परिवार के वकील अभय नवगी ने उस वक्त में दो सवाल उठाए थे.

पहला सवाल यह था कि डॉ. दाभोलकर, गोविंद पानसरे, गौरी लंकेश और प्रो. कलबुर्गी की हत्या के मामले आपस में जुड़े हुए थे और इन हत्याकांड में 40 लोगों को अभियुक्त बनाया गया, लेकिन जांच एजेंसियां अब तक यह नहीं बता सकी हैं कि इन सबका मास्टरमाइंड कौन है.

वहीं दूसरा सवाल है, डॉ. दाभोलकर मामले के अभियुक्त को पानसरे हत्याकांड में गवाह के रूप में पेश किया गया था. इस मामले को उठाने पर पुलिस ने उन्हें अभियुक्त बनाया, जांच में ऐसी ग़लती कैसे हुई.

वीडियो कैप्शन, तुर्की का वो इलाक़ा जिसका भूकंप भी कुछ न बिगाड़ सका

नालासोपारा में महाराष्ट्र एटीएस की कार्रवाई

इससे पहले 2018 में महाराष्ट्र एटीएस ने मुंबई के पास नालासोपारा इलाके में कुछ हथियार ज़ब्त किए थे. शरद कालस्कर के घर से बम बनाने की जानकारी से संबंधित दो नोट्स बरामद किए गए.

एटीएस ने मामले में वैभव राउत, सुवंधा गौंधलेकर, श्रीकांत पंगारकर, अविनाश पवार, लीलाधर, वासुदेव सूर्यवंशी, सुचित रंगास्वामी, भरत कुर्ने, अमोल काले, अमित बद्दी और गणेश मिस्किन को गिरफ़्तार किया था.

एटीएस अधिकारियों ने चार्ज़शीट में कहा कि उन्हें इस बात के सबूत मिले हैं कि हिंदू धर्म, मानदंडों और परंपराओं की आलोचना करने वाले साहित्यिक और सामाजिक शख़्शियतों को रेकी द्वारा निशाना बनाया जा रहा था और उन पर हमला करने की योजना बनाई गई थी.

ये भी पढ़ें -

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)