वोक्कालिगा समुदाय के युवा स्वामी ने बीजेपी नेताओं को ऐसा क्या कहा, जिसकी हो रही है चर्चा

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कर्नाटक के किसी धार्मिक मठ के प्रमुख पुजारी, राजनेताओं की खिंचाई करें, ऐसा अमूमन देखने को नहीं मिलता है. नेता जब भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हों और उनकी पहचान सीटी रवि जैसे फायरब्रैंड नेता की हो, तो ऐसी स्थिति के होने की संभावना और भी कम होती है. लेकिन कर्नाटक के प्रमुख समुदाय वोक्कालिगा के प्रमुख मठ, आदि चुंचनगिरी मठ के प्रमुख पुजारी श्री निर्मलानंद स्वामी ने ऐसा ही किया है.
उन्होंने राज्य के दो मंत्री, मुन्नीरत्ना और डॉ. सीएन अस्वाथ नारायण के साथ सीटी रवि के उस अभियान की आलोचना की है जिसमें इन लोगों ने दावा किया कि दो वोक्कालिगा सरदारों, उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा ने 1799 में टीपू सुल्तान की हत्या कर दी थी.
जबकि इतिहासकारों का कहना है कि इस दावे की सत्यता के लिए कहीं कोई सबूत नहीं है और ना ही मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के जीवन काल के दौरान ऐसे सरदारों के अस्तित्व का जिक्र है.
इतिहास के मुताबिक टीपू सुल्तान की हत्या श्रीरंगपटना के युद्ध में अज्ञात ब्रिटिश सैनिक ने की थी. टीपू ब्रिटिश सैनिकों के ख़िलाफ़ युद्ध में मारे जाने वाले संभवत भारत के इकलौते शासक रहे हैं.
स्वामी ने बीजेपी नेताओं को इस तरह के काल्पनिक चरित्रों के बारे बोलने से बचने की सलाह दी है, यह राज्य में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी के अभियान के लिए झटके जैसा है. अप्रैल और मई में होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी अपने सबसे कमज़ोर क्षेत्र, कर्नाटक के दक्षिणी ज़िलों में ज़्यादा से ज़्यादा सीटें हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है.
राजनीतिक विश्लेषक और मैसूर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर मुज़फ़्फ़र असादी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पूरा ध्यान पुराने मैसूर या कहें कर्नाटक दक्षिणी हिस्से पर है, सब लोग इसे समझ रहे हैं. इस इलाके में वोक्कालिगा (लिंगायत के अलावा दूसरा सवर्ण समूह) समुदाय का दबदबा है. इस चुनाव में वोक्किलगा समुदाय का क्षेत्र ही धुरी बनने वाला है."

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इस क्षेत्र पर अतिरिक्त ध्यान दिए जाने के प्राथमिक कारणों में से एक यह है कि 2008 और 2018 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को पर्याप्त बहुमत नहीं मिला. पार्टी 2008 में 110 सीटें और 2018 में 104 सीटें हासिल करने में सफल रही थी. पार्टी को सबसे ज़्यादा फ़ायदा लिंगायत समुदाय-बहुल उत्तर और मध्य कर्नाटक और तटीय ज़िलों में मिला था. दोनों ही मौकों पर बीजेपी को बहुमत हासिल करने के लिए ऑपरेशन लोटस का सहारा लेना पड़ा था.
कोलार, चिक्काबल्लापुर, बेंगलुरु, तुमाकुरु, मांड्या, मैसूर, चमराजनगर, हासन, चिक्कमगलुरु और शिवमोग्गा के दक्षिणी ज़िलों में विधानसभा की कुल 83 सीटें हैं. इनमें से बीजेपी को सिर्फ़ 22 सीटें मिली हैं, जिनमें 11 ग्रेटर बेंगलुरु में मिली थीं. पुराना मैसूर क्षेत्र जनता दल सेक्युलर और कांग्रेस के लिए युद्ध का मैदान रहा है.
नया विवाद क्या है
उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा के नामों को पिछले कुछ दिनों में उभारा गया है. दरअसल श्रीरंगपटना में टीपू और उनके परिवार वाले जिस मस्जिद में प्रार्थना करते थे, उसके अतीत में मंदिर होने के आधार पर खाली कराने के लिए अभियान चलाया गया लेकिन उसे आम लोगों का बहुत समर्थन नहीं मिला.
पिछले दिनों बीजेपी के मंत्री और फ़िल्म निर्माता मुनिरत्ना ने उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा के नामों पर फ़िल्म बनाने के लिए इन नामों को पंजीकृत कराने की घोषणा की और कहा कि कर्नाटक स्टेट फ़िल्म चैंबर (केएसएफसी) फ़िल्म का निर्माण कराएगी.
इसके बाद श्री निर्मलानंद स्वामीजी ने मुनिरत्ना को बुलाकर कहा, "इतिहास को उस दौर में रहे लोगों ने दर्ज किया है. बाद के समय में उसमें की जाने वाली जोड़-तोड़ से केवल भ्रम और संघर्ष पैदा होगा. समाज और समुदाय के सामने इतने सारे मुद्दे हैं, ऐसे में सिर्फ़ उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा को मुद्दे की तरह उजागर करना और समुदाय (वोक्कालिगाओं) की भावनाओं को ठेस पहुंचाना ग़लत है. चाहे सीटी रवि हों या अस्वथ नारायण या गोपालैया, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. हमलोगों ने उन्हें भी यह बताया है.''
श्री निर्मलानंद स्वामीजी युवा पुजारी हैं और मठ की ज़िम्मेदारी से पहले सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में बतौर इंजीनियर काम कर चुके हैं. अतीत में विवादित मुद्दों पर उन्होंने कभी मुखरता से कुछ नहीं कहा है. वे विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बात रखने वाले पुजारी के तौर पर भी नहीं जाने जाते हैं.

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हालांकि, इस बार, उन्होंने मीडिया से खुलकर बात करते हुए यह संदेश दिया है कि वोक्कालिगा समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना हर क़ीमत पर शांति बनाए रखने की ज़रूरत है.
स्वामी के साथ बैठक के बाद मुनिरत्ना ने मीडिया से कहा कि वे ये फ़िल्म नहीं बना रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि स्वामी जी सीटी रवि और अश्वथ नारायण से भी बात की है. सीटी रवि ने बीबीसी हिंदी से बताया, "मैंने स्वामी जी से फ़ोन पर दो बार बात की. मैं उनसे मिलूंगा और उनके साथ इस मुद्दे पर बातचीत करूंगा. हमारे पास कुछ दस्तावेज़ हैं और हम उनसे बात करेंगे."
जनता दल सेक्युलर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने स्वामी जी के इस क़दम की काफ़ी सराहना की है. कुमारस्वामी ने बीबीसी हिंदी से बताया, "मैंने स्वामी जी को उनके स्टैंड के लिए बधाई दी है. बीजेपी वोक्कालिगा और मुसलमानों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रही है. भाजपा इधर-उधर से कुछ नामों को लेने की कोशिश कर रही है और इस क्षेत्र में विवाद पैदा कर रही है, जैसा उन्होंने उत्तर प्रदेश में वोट बटोरने के लिए किया था. हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे. दक्षिणी कर्नाटक में बीजेपी और जेडीएस के बीच 24 सीटों पर सीधी टक्कर है. हम उन्हें 20 सीटों पर हरा देंगे."
राज्य कांग्रेस प्रवक्ता बीएल शंकर ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''आम वोक्कालिगा इस मुद्दे से परेशान नहीं हैं. इसका कोई प्रभाव नहीं है. यह मामला करीब 300 साल पहले का है. लोग उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा जैसे काल्पनिक पात्रों की बजाय बारिश और उनके जीवन को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों के बारे में अधिक चिंतित हैं. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के क्षेत्र में प्रचार करने से भाजपा को कुछ ज़्यादा वोट मिल सकते हैं लेकिन यह ज़्यादा सीटें दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा.''
क्या उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा का अस्तित्व था?

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शोधकर्ता इतिहासकार तलकाडु चिक्केरंगा गौड़ा ने बीबीसी हिंदी को बताया कि ब्रिटिशों के साथ चौथे मैसूर युद्ध में टीपू सुल्तान के श्रीरंगपट्नम में मारे जाने पर उरी गौड़ा या नन्जे गौड़ा का कोई संदर्भ नहीं मिलता है.
उन्होंने बताया, ``एक लोकगीत में उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा नामक दो काल्पनिक पात्रों का उल्लेख है जिसमें उन्हें अंग्रेज़ों से लड़ते नायकों के रूप में वर्णित किया गया है और ध्यान रहे, यह 1834 में हुआ था. जबकि टीपू की हत्या की 4 मई, 1799 को हो चुकी थी. इस पहलू पर ध्यान देना होगा."
इतिहासकार गौड़ा ने बताया, ``यह वही है जो वे बनाने की कोशिश कर रहे हैं. वास्तव में, यह दिखाने के लिए ऐतिहासिक साक्ष्य हैं कि वोक्कालिगा ने 1834 में अंग्रेजों के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी थी. अप्पैया गौड़ा को फांसी दी गई थी और ज़मींदार केदंबाडी रमैया गौड़ा को सिंगापुर में जेल भेज दिया गया था. वास्तव में, उन्हें दंडित किए जाने से पहले, दोनों ने अंग्रेजों के साथ एक बड़ी लड़ाई के बाद 13 दिनों तक 2,000 लोगों के साथ वर्तमान मंगलुरु पर शासन चलाया था. बाद में इन लोगों की हत्या बीकरणकट्टे में कर दी गई थी."
इतिहासकार गौड़ा ने इस मामले और जानकारी साझा करते हुए बताया, "टीपू सुल्तान के लिए दूसरे जगहों पर भी ऐसा सम्मान था कि तमिलनाडु के कांचीपुरम के पास शिवंगंगे प्रांत में मारडू भाइयों ने वेल्लोर विद्रोह को अंजाम दिया था क्योंकि टीपू के बेटे फ़तेह हैदर और टीपू के बाक़ी परिवार के सदस्यों को वेल्लोर जेल में रखा गया था. लंबे समय तक चले संघर्ष में अंग्रेज उस विद्रोह को दबाने में सफल रहे थे और उन दोनों भाइयों को 1801 में फांसी दे दी गई थी. उन भाइयों की तस्वीरों को अब भाजपा उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा के रूप में दिखा रही है. लेकिन ये उरी गौड़ा या नन्जे गौड़ा की तस्वीरें नहीं हैं.''

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उरी गौड़ा और नन्जे गौड़ा को बीजेपी की ओर से मिलने वाले महत्व का पहला संकेत तब सामने आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मार्च को पुराने मैसूर क्षेत्र का दौरा किया था. उन्होंने प्रमुख विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी और उसी दिन बैंगलोर-मैसूर एक्सप्रेसवे को समर्पित किया था और मांड्या में एक रोड शो भी किया था. एक्सप्रेस-वे पर चार तोरणद्वार बनाए गए थे. इनमें से एक उरी और नान्जे गौड़ा को समर्पित किया गया था. लेकिन बाद में बिना कोई कारण बताए, उसे आनन-फानन में हटा दिया गया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पिछले कुछ महीनों से पुराने मैसूरु क्षेत्र की लगातार दौरा कर रहे हैं. इन दोनों के दौरों में बहुत अंतर भी नहीं रहा है. एक दो दिनों के अंतर पर दोनों नेताओं का दौरा देखने को मिला है. जैसे कि 24 मार्च को अमित शाह बेंगुलरु में दो प्रतिमाओं के उद्घाटन के लिए आ रहे हैं जबकि एक दिन बाद 25 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्हाइटफ़ील्ड-केआर पुरम मेट्रो लाइन का उद्घाटन करेंगे. उनका इस मेट्रो में यात्रा करने का भी कार्यक्रम है. हालांकि व्हाइटफील्ड में उनके प्रस्तावित रोड शो की अभी पुष्टि नहीं हुई है.
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