ख़बरों की दुनिया में औरतों की भागीदारी कैसे बढ़े?- BBCShe

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- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सुबह की चाय के साथ अख़बार पढ़ते हुए होनेवाली चर्चा हो या रात में सोने से पहले ट्विटर देखते हुए दिन की गहमा-गहमी पर टीका-टिप्पणी, क्या आपने भी महसूस किया है कि जाने-अनजाने ख़बरों को दो खांचों में बांटा जाता है?
राजनीति, अर्थव्यवस्था, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति... जिन्हें आमतौर पर महत्वपूर्ण विषय समझा जाता है वो मुद्दे मर्दों की झोली में और स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन जिन्हें आम तौर पर हल्का-फुल्का समझा जाता है वो औरतों की पसंद के मुद्दे माने जाते रहे हैं.
ख़बरों का ये अनुक्रम और उन्हें पढ़नेवालों के बारे में ये समझ दोनों ही पारंपरिक देन हैं, जिसके मुताबिक़ मर्द घर से बाहर जाकर पैसे कमाते हैं तो उनकी सोच विशाल और कौतूहल वाली होती है जबकि ज़्यादातर औरतें घर चलाती हैं तो उनकी दुनिया सीमित होता है और उनका सरोकार घरेलू मामलों से होता हैं.
फिर पढ़े-लिखे मर्दों का अनुपात औरतों से अधिक है और इंटरनेट और मोबाइल तक उनकी पहुंच ज़्यादा तो ख़बरें वो ही बनाते आए हैं और उन्हीं के लिए बनती भी रही हैं.

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ख़बरें चुनने और लिखनेवालों ने उन पाठकों के बारे में नहीं सोचा जिनके सीमित अनुभवों की वजह से ही कई विषय उनकी पहुंच से बाहर रहे हैं.
हमारी पत्रकारिता उनके लिए उन कठिन विषयों को सहज कैसे बना सकती है ताकि औरतें दोयम दर्जे पर पीछे ना छोड़ दी जाएं.
ख़बरों के चयन और उनको पेश करने के तरीकों पर यही 'जेंडर लेंस' लाने की ज़रूरत है.
अब दुनिया बदल रही है. औरतें पत्रकारिता में अपनी जगह बना रही हैं और ख़बरों के पुराने ढांचे और खांचों पर सवाल उठा रही हैं.
बीबीसी की पहल, BBCShe के दूसरे संस्करण में हम अन्य मीडिया संगठनों के साथ मिलकर ऐसी कहानियों पर काम कर रहे हैं जो ख़बरों के अनुक्रम में फंसे बग़ैर औरतों के सरोकारों और बड़ी घटनाओं और नीतियों के उनकी ज़िंदगी पर होनेवाले असर को सामने लाएंगी.
क्या है BBCShe?
इस संयुक्त पहल के तहत हमने देश के अलग-अलग इलाक़ों और भाषाओं में काम कर रहे मीडिया संगठनों से संपर्क किया और पत्रकारिता में 'जेंडर लेंस' पर उनकी सोच जानी.
आपसी विमर्श के बाद ये तय किया कि किसी एक मुद्दे पर साथ काम कर ऐसी कहानी कही जाए जो औरतों, मर्दों और सभी लोगों के लिए लिखी गई हो.

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हमने जिन छह संगठनों के साथ काम किया वो हैं -
बाईमाणूस - औरंगाबाद से चलाई जा रही मराठी भाषा की इस न्यूज़ वेबसाइट का मकसद है पारंपरिक पत्रकारिता के ढांचे से आगे बढ़कर आम महिलाओं को अपनी ज़िंदगी से जुड़े मुद्दे सामने लाने का मौक़ा देना. ये मुख्यधारा के मीडिया में कम जगह पानेवाले दलित, आदीवासी और पिछड़े समुदायों के सरोकार सामने लाने की कोशिश करते हैं.
फेमिनिज़म इन इंडिया (हिंदी) - अंग्रेज़ी और हिंदी में चलाई जा रही इस वेबसाइट का मक़सद है नारीवाद पर समझ विकसित करना. शोध के अलावा, ये सामयिक ख़बरों और मुद्दों पर लेख और वीडियो छापते हैं. इसका उद्देश्य महिलाओं और समाज के हाशिए के समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना और उनकी आवाज़ को बढ़ावा देना है.
द ब्रिज - खेल समाचारों पर पत्रकारिता बढ़ाने के मक़सद से शुरू की गई इस वेबसाइट में क्रिकेट ही नहीं, सभी खेल और खिलाड़ियों पर ख़बरें हैं. ओलंपिक और अन्य अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट पर मीडिया की नज़र अक्सर रहती है लेकिन इनका उद्देश्य है सालभर खेल की ख़बरें और खिलाड़ियों के संघर्ष सामने लाना.
गुड़गांव की आवाज़ - ये राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (नैश्नल कैपिटल रीजन) में आम समाज द्वारा चलाया जा रहा एकमात्र कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन है. गुड़गांव इलाक़े में इसको सुननेवालों में स्थानीय गांववालों के अलावा प्रवासी कामगार भी हैं. अपने कार्यक्रमों में ये शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति समेत कई मुद्दे शामिल करते हैं.

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द न्यूज़मिनट - देशभर की ख़बरों और मुद्दों पर नज़र रखनेवाले इस डिजिटल मीडिया संगठन का ख़ास ध्यान दक्षिण भारत के पांचों राज्यों पर है जहां इनके ज़्यादातर रिपोर्टर्स मौजूद हैं. बैंगलूरू में हेडक्वार्टर वाला इस पोर्टल के लेख अंग्रेज़ी में है, हालांकि वीडियो ये तमिल में भी छापता है.
वुमेन्स वेब - इस वेबसाइट का मूल मंत्र है कि पारंपरिक मीडिया की सोच से अलग, औरतें दरअसल हर तरह की ख़बर में दिलचस्पी रखती हैं. अंग्रेज़ी में लेख छापने वाली ये वेबसाइट औरतों को अपनी ज़िंदगी के अनुभव और सच्ची कहानियां बांटने की जगह देती है. साथ ही ये वर्कशॉप और सेमिनार भी आयोजित करते हैं.
इन सभी मीडिया संगठनों से विमर्श से हमने समझा कि औरतों की ज़िंदगी और सरोकारों को समझने, पेश करने और ख़बरें उन तक पहुंचाने के क्या तरीक़े और रास्ते हो सकते हैं.
इनके साथ मिलकर खोजी गईं छह कहानियों पर लेख और वीडियो आप आनेवाले दिनों में बीबीसी की सभी भारतीय भाषाओं - हिंदी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, तेलुगू, तमिल के वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल और इन मीडिया संगठनों की वेबसाइट पर पढ़ और देख सकते हैं
ये एक कोशिश है और हमारा मक़सद है जेंडर लेंस पर अपनी समझ बेहतर करना और महिलाओं से जुड़ी ख़बरों को कहने के तरीक़ों में बेहतरी लाना. हमारा ये प्रयास जारी रहेगा.
BBCShe के पहले संस्करण में पांच साल पहले हमने देश के अलग-अलग शहरों और कस्बों में जाकर आम महिलाओं से पूछा था कि वो बीबीसी पर कौन सी कहानियां देखना, पढ़ना या सुनना चाहती हैं और फिर उनकी सलाह पर अमल किया था.
वो सभी कहानियां आप यहां देख सकते हैं - BBCShe का पहला संस्करण
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