सोनिया गांधी ने किया 'पारी ख़त्म' होने का ज़िक्र, तो उनके रिटायरमेंट को लेकर छिड़ी चर्चा

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
यह दिसंबर 2017 का वाकया है, जब कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी होने वाली थी.
ठीक एक दिन पहले संसद भवन के बाहर पत्रकारों ने सोनिया गांधी से पूछा कि अब जब राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष होंगे, तो आपकी क्या भूमिका होगी?
सोनिया गांधी ने जवाब दिया- "मैं रिटायर हो रही हूँ."
इसके पांच साल बाद अब एक बार फिर सोनिया गांधी का 'रिटायरमेंट' चर्चा में है.
शनिवार को रायपुर में कांग्रेस पार्टी के 85वें अधिवेशन में कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि यह मेरे लिए सम्मान की बात थी कि मैंने साल 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला. 25 वर्षों में पार्टी ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की और निराशा भी हाथ लगी.
सोनिया गांधी ने कहा कि 2004 और 2009 में हमारी जीत के साथ-साथ डॉक्टर मनमोहन सिंह के कुशल नेतृत्व ने मुझे व्यक्तिगत संतुष्टि दी, लेकिन मुझे सबसे ज़्यादा खुशी इस बात की है कि मेरी पारी 'भारत जोड़ो यात्रा' के साथ समाप्त हुई, जो कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई.
सोनिया गांधी के इस भाषण के अलावा अधिवेशन स्थल पर उनके कार्यकाल को लेकर एक फ़िल्म का भी प्रदर्शन किया गया.
यह सही है कि शनिवार को कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन में सोनिया गांधी ने राजनीति से संन्यास की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष रहते हुए अपनी अंतिम घोषणा 'भारत जोड़ो यात्रा' के संदर्भ में अपनी बात कही है.
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लेकिन कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन में उनके भाषण पर रायपुर से लेकर दिल्ली तक चर्चा हो रही है.
रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार कहते हैं, "कांग्रेसियों का मन भले इसे स्वीकार न करे लेकिन पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ने और मल्लिकार्जुन खड़गे के पार्टी अध्यक्ष बनने के साथ ही अपनी राजनीतिक पारी पूरी कर सोनिया गांधी रिटायर हो चुकी हैं. वे पार्टी की सर्वमान्य नेता रही हैं, जिन्होंने गरिमामय तरीक़े से फ़ैसले लिए हैं. आज का उनका भाषण, अपनी पारी के पूरा होने की सार्वजनिक घोषणा भर है.

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सबसे लंबा कार्यकाल
सोनिया गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब इसी साल राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में विधानसभा और अगले साल देश में लोकसभा के चुनाव होने हैं.
ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी भूमिका को लेकर स्वाभाविक चर्चा शुरु हो गई है.
कांग्रेस पार्टी के इतिहास में सर्वाधिक लंबा, लगभग 19 सालों तक कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने वाली सोनिया गांधी ने 2004 में अपनी जगह मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने की पहल की और पार्टी के उन फ़ैसलों को अपनी सरकार में लागू करने का काम किया, जो आज भी ऐतिहासिक माने जाते हैं.
उनके अध्यक्ष पद पर रहते रोजगार गारंटी योजना, भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार जैसे फ़ैसले लिए गए जिन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी.
साथ ही उनके अध्यक्ष रहते, देश में पहली बार महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल और लोकसभा की पहली दलित महिला अध्यक्ष, मीरा कुमार बनाई गईं.
महिलाओं के आरक्षण का बिल भी उनके कार्यकाल में पेश हुआ.

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76 साल की सोनिया गांधी की उम्र और सेहत के कारण, उनकी सक्रियता पिछले कुछ सालों में कम हुई है. लेकिन आज के भाषण के बाद राजनीतिक गलियारे में माना जा रहा है कि सोनिया गांधी एक तरफ़ तो कांग्रेस पार्टी को अपनी छाया से मुक्त करना चाहती हैं, वहीं दूसरी तरफ़ उम्रदराज़ कांग्रेसियों को भी वे संकेत देना चाहती हैं.
शनिवार को ही छत्तीसगढ़ में चल रहे महाधिवेशन में कांग्रेस ने अपने संविधान में बड़ा संशोधन किया है. पार्टी ने फ़ैसला किया है कि कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों में 50 प्रतिशत पदों को आरक्षण के जरिए भरा जाएगा.
कांग्रेस पार्टी ने एससी-एसटी, ओबीसी, महिला और युवाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का फ़ैसला किया और कहा कि पार्टी में 50 साल से कम उम्र के नौजवानों और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी समय-समय पर 'युवा कांग्रेस' का जो नारा देते रहे हैं, सोनिया गांधी ने अपनी विदाई का संकेत देते हुए, खुद इसकी पहल की है.
कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता भी मानते हैं कि सोनिया गांधी का ताज़ा बयान सक्रिय राजनीति से उनकी विदाई का संकेत है.
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित का मानना है कि सोनिया गांधी ने 'एक्टिव पॉलिटिक्स' से अलग होने के संकेत दिए हैं.
संदीप दीक्षित ने कहा, "संगठन की ज़िम्मेवारियों और रोजमर्रा के पार्टी के कामकाज से अलग होने की बात उन्होंने कही है. लेकिन किसी भी अनुभवी नेता की जो दूसरी भूमिका होती है, सुझाव देने की, विपक्षी एकता और पार्टी के भीतर के मुद्दों को सुलझाने जैसे काम की कांग्रेसजनों की जो अपेक्षा है, शायद वो उसमें सक्रिय रहेंगी.

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संन्यास से इंकार
दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के कई नेता मानते हैं कि सोनिया गांधी के कहे को संन्यास से जोड़ना ठीक नहीं है.
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह, सोनिया गांधी के सक्रिय राजनीति से संन्यास को सिरे से खारिज करते हैं.
अखिलेश प्रताप सिंह कहते हैं, "आज ही पार्टी के संविधान में एक संशोधन किया गया है कि जो हमारी कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष या पूर्व प्रधानमंत्री होंगे, वो वर्किंग कमेटी में होंगे. सोनिया जी राष्ट्रीय अध्यक्ष रही हैं तो वो तो कांग्रेस पार्टी की वर्किंग कमेटी में स्वाभाविक रुप से रहेंगी. ऐसे में उनके संन्यास की बात बहुत अजीब है. उन्होंने अध्यक्ष के कार्यकाल के तौर पर अपने पड़ाव की बात कही है."
कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस पार्टी की प्रभारी कुमारी शैलजा भी सोनिया गांधी के ताज़ा भाषण को, उनके संन्यास से जोड़े जाने के पक्ष में नहीं हैं.
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "आप लोगों को इसे सही संदर्भ में देखना होगा. सोनिया जी हमारी अध्यक्ष थीं, आज हमारे पास नए अध्यक्ष हैं. सोनिया जी ने अपने कार्यकाल के बारे में बात की है... नए अध्यक्ष ने भी कहा कि हम सोनिया जी का मार्गदर्शन चाहते हैं. तो मुझे नहीं लगता कि इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाना चाहिए."
सोनिया गांधी के बयान के सियासी मतलब चाहे कुछ भी हों लेकिन शनिवार के भाषण के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि उनकी भूमिका अब बदलने वाली है.
भारतीय राजनीति में संन्यास की कोई परंपरा नहीं रही है. ऐसे में सोनिया गांधी की कांग्रेस पार्टी और भारतीय राजनीति में किस तरह की भूमिका होगी, यह देखना दिलचस्प होगा.
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