मुग़ल गार्डन से अमृत उद्यान तक: राष्ट्रपति भवन के इस बगीचे के बारे में अनसुनी बातें

दिल्ली का मुग़ल गार्डन

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    • Author, विवेक शुक्ला
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

मोदी सरकार ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए राष्ट्रपति भवन परिसर में बने मुग़ल गार्डन का नाम अमृत उद्यान करने का फ़ैसला किया है.

राष्ट्रपति भवन का ये बग़ीचा 1928-29 में बना था.

मुग़ल गार्डन का नाम बदलने की मांग हिंदू महासभा ने की थी. 2019 में हिंदू महासभा ने मांग की थी कि मुग़ल गार्डन का नाम बदलकर राजेंद्र प्रसाद उद्यान कर दिया जाए.

उस वक़्त ये मांग नहीं मानी गई थी. लेकिन अब दिल्ली की एक पहचान बन चुके मुग़ल गार्डन को नया नाम दे दिया गया है.

राष्ट्रपति भवन परिसर में 15 एकड़ में फैले मुग़ल गार्डन को बनाने की प्रेरणा, जम्मू-कश्मीर के मुग़ल गार्डन, ताजमहल के इर्द गिर्द फैले बाग़ीचे और यहां तक कि भारत और फ़ारस की पेंटिंग्स से मिली थी.

दिल्ली का मुग़ल गार्डन

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राष्ट्रपति भवन में मुग़ल गार्डन बनाने का आइडिया किसका था?

आम तौर पर यही माना जाता है कि राष्ट्रपति भवन में मुग़ल गार्डन बनाने का आइडिया सर एडविन लुटिएंस का था.

हालांकि, सच ये है कि ये विचार, उस वक़्त उद्यान विभाग के निदेशक विलियम मुस्टो का था. वो नई दिल्ली के मुख्य आर्किटेक्ट एडविन लुटिएंस की निगरानी में काम कर रहे थे.

माना जाता है कि विलियम मुस्टो को मुग़ल गार्डन को हरा-भरा बनाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी.

इस बारे में सर एडविन लुटिएंस और विलियम मुस्टो के बीच बातचीत और सलाह मशविरे का लंबा दौर चला था. आख़िर में दोनों लोग, बाग़वानी की दो परंपराओं के मेल से मुग़ल गार्डन बनाने पर सहमत हुए.

तय हुआ कि राष्ट्रपति भवन के मुग़ल गार्डन में मुग़लों और अंग्रेज़ी परंपरा को मिलाकर बाग़ लगाए जाएं.

सर एडविन लुटिएंस ने मुग़ल गार्डन तैयार करने के लिए विलियम मुस्टो को पूरी छूट दी थी. ये भी सच है कि विलियम ने अपने काम से लुटिएंस को निराश नहीं किया.

दिल्ली का मुग़ल गार्डन

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लुटिएंस की पत्नी ने मुग़ल गार्डन पर क्या लिखा?

क्रिस्टोफ़र हसी की क़िताब, 'द लाइफ ऑफ़ सर एडविन लुटिएंस' (1950) में लुटिएंस की पत्नी एमिली बुलवर-लिटन ने मुग़ल गार्डन की दिल खोलकर तारीफ़ की है.

उन्होंने लिखा है कि, "फूलों को इतनी बड़ी तादाद और तरतीब में लगाया गया गया है, मानों तमाम रंगों की ख़ुशबूदार रंगोली बनाई गई हो और जब फव्वारा लगातार चलता है, तो माहौल में ज़रा भी तुर्शी नहीं मालूम होती. ये गोलाकार बाग़ीचा अपनी ख़ूबसूरती में सबको मात देता है और इसकी तारीफ़ शब्दों के दायरे में नहीं बांधी जा सकती."

श्रीनगर का मुग़ल शालीमार बाग़

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इमेज कैप्शन, चिनार के पेड़ों से घिरा श्रीनगर का मुग़ल शालीमार बाग़

मुग़ल गार्डन की ख़ूबसूरती

मुग़ल गार्डन दुनिया के तमाम मशहूर फूलों की ख़ूबसूरती और ख़ुशबू से लबरेज़ है.

जैसे कि यहां नीदरलैंड के ट्यूलिप हैं. ब्राज़ील के ऑर्किड, जापान के चेरी ब्लॉसम और दूसरे मौसमी फूल, तो चीन के कमल के फूल भी हैं.

यहां पर मुग़ल नहरों, चबूतरों और फूलों की झाड़ियों का यूरोप के फूलों, लॉन और एकांत देने वाली बाड़ से बख़ूबी मेल देखने को मिलता है.

दिल्ली का मुग़ल गार्डन

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मुग़ल गार्डन में 159 तरह के गुलाब

मुग़ल गार्डन के गुलाब यहां की सबसे बड़ी ख़ासियत हैं. यहां ग़ुलाबों की 159 क़िस्में मौजूद हैं.

इनमें एडोरा, मृणालिनी, ताज महल, एफिल टॉवर, मॉडर्न आर्ट, ब्लैक लेडी, पैराडाइज़, ब्लू मून और लेडी एक्स शामिल हैं.

मुग़ल गार्डन में मशहूर शख़्सियतों जैसे कि मदर टेरेसा, राजा राममोहन राय, जॉन एफ, कैनेडी, महारानी एलिज़ाबेथ, क्रिश्चियन डायोर के नाम के ग़ुलाब भी हैं.

बाग़ीचे में महाभारत के किरदार जैसे कि अर्जुन और भीम नाम के फूल भी मिलते हैं.

दिल्ली का मुग़ल गार्डन

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इमेज कैप्शन, एंडोरा ग़ुलाब के फूल के पेड़ के पास पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल
वीडियो कैप्शन, कश्मीर के ख़ूबसूरत ट्यूलिप गार्डन का नज़ारा

ग़ुलाब की तमाम नस्लों के अलावा ट्यूलिप, कुमुदनी, जलकुंभी और दूसरे मौसमी फूल भी इसकी ख़ूबसूरती में चार चांद लगाते हैं.

राष्ट्रपति भवन के बाग़ीचे में मौसमी फूलों की 70 क़िस्में हैं. इनमें विदेशी गोल फूल और सर्दी में खिलने वाले फूल शामिल हैं.

इस बाग़ीचे में बोगनविलिया की 101 क़िस्मों में से 60 को उगाया जाता है.

फूलों की क्यारियों के किनारे किनारे एलाइसम, गुलबहार और बनफ़्शा की कतारें लगाई गई हैं.

इस बाग़ीचे में दरख़्तों, झाड़ियों और लतर की 50 क़िस्में मौजूद हैं. इनमें मौलश्री, अमलतास और पारिजात जैसे कई ख़ूबसूरत फूलों वाले पेड़ शामिल हैं.

दिल्ली का मुग़ल गार्डन

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मुग़ल गार्डन के गुमनाम नायक

इसके अलावा हम मुग़ल गार्डन को इसका ख़ूबसूरत रंग रूप देने वाले मालियों को कैसे भूल सकते हैं, जो अपने ख़ून पसीने की मेहनत से मुग़ल गार्डन को इसका शानदार रूप देते हैं.

अमिता बाविस्कर अपनी क़िताब, 'द फर्स्ट गार्डन ऑफ़ द रिपब्लिक' में लिखती हैं कि, "बसंत के मौसम में जो लाखों लोग ये ख़ूबसूरत बाग़ीचा देखने आते हैं, उन्हें शायद ही ये पता हो कि इसे तराशा हुआ दिलकश और ख़ूबसूरत ग़ुलिस्तां बनाने के लिए महीनों की योजना और मेहनत लगती है."

वो लिखती हैं, "सितंबर में फूलों के पौधों की भूरी-भूरी क़लमें लगाई जाती हैं, जो फ़रवरी में बहुरंगी इंद्रधनुष और ख़ुशबू के झरने के तौर पर उभरकर सामने आता है. सच तो ये है कि मुग़ल गार्डन के माली दिन रात बिना थके मेहनत करते हैं, और उनकी मेहनत से ही ये ग़ुलिस्तां दमक उठता है."

दिल्ली का मुग़ल गार्डन

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मुग़ल गार्डन में काम करने वाले माली सैनी जाति से आते हैं, और उनके परदादा भी यहां काम किया करते थे.

इन लोगों की पीढ़ी दर पीढ़ी इन बग़ीचों को सजाने संवारने में गुज़री है. अक्सर ये लोग राष्ट्रपति भवन परिसर में रहते हैं.

राष्ट्रपति भवन के मालियों का यहां से वहां तबादला नहीं होता. ये लोग, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के लिए काम करते हैं.

जब भी आप मुग़ल गार्डन की सैर के लिए जाएं, तो अपने ख़यालों में इन गुमनाम नायकों को भी रखें, जिनकी मेहनत से मुग़ल गार्डन को उसकी तराशी हुई ख़ूबसूरती मिलती है.

पूर्व राष्ट्पति एपीजे अब्दुल कलाम

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इमेज कैप्शन, साल 2006 की इस तस्वीर में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जैन पीटर बाल्केनेन्डे को मुग़ल गार्डन की सैर कराने पूर्व राष्ट्पति एपीजे अब्दुल कलाम

मुग़ल गार्डन में भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों का योगदान

मुग़ल गार्डन को और भी बेहतर और दिलकश बनाने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के निर्देश पर हर्बल गार्डन, दृष्टिहीनों के लिए टैक्टाइल गार्डन, संगीतमय बाग़ीचा, जैव ईंधन पार्क और पोषक बाग़ीचे जैसे कई बाग़ीचे जोड़े गए थे.

डॉक्टर कलाम ने दो झोपड़ियां भी यहां बनवाई थीं, एक तो थिंकिंग हट यानी 'वैचारिक झोपड़ी' और 'अमर झोपड़ी'.

डॉक्टर कलाम यहां बैठकर अपने दोस्तों के साथ बातचीत किया करते थे, और यहीं बैठकर उन्होंने अपनी किताब, 'इनडॉमिटेबल स्पिरिट' का बेहतर हिस्सा लिखा था.

डॉक्टर कलाम के पहले और बाद के राष्ट्रपतियों ने भी मुग़ल गार्डन को और ख़ूबसूरत बनाने में योगदान दिया था. मिसाल के तौर पर, के आर नारायणन ने 1998 में विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र को यहां बारिश का पानी जमा करने का यंत्र लगाने को कहा था, जिससे राष्ट्रपति भवन में भूगर्भ जल के स्तर को बेहतर किया जा सके.

2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन किया था, जिससे साफ़ किया गया पानी, पौधों की सिंचाई के काम आ सके और इसे एक तालाब में भी भरा जाता था, ताकि जलीय इलाक़ों के परिंदें भी यहां आएं.

वीडियो कैप्शन, काबुल के गुलों में बसी पुराने इश्क की कहानी

अगर हम बहुत पुराने दौर की बात करें, तो देश के तीसरे राष्ट्रपति डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन को विदेशों से ग़ुलाब की नई नई नस्लें मंगाने और रसदार पौधों के संरक्षण के लिए कांच का गर्म घर बनवाने के लिए याद किया जाता है.

इसी तरह नीलम संजीवा रेड्डी ने नींबू के छोटे पौधे उगाने को बढ़ावा दिया.

आर. वेंकटरमण को दक्षिण भारत से केले की नई नई क़िस्में लाकर यहां लगाने के लिए याद किया जाता है.

के आर नारायणन की पत्नी उषा नारायणन ने यहां ट्यूलिप और इकेबाना के फूलों की कतारें लगवाईं.

प्रतिभा पाटिल को दालिखाना फल भेजने के लिए जाना जाता है.

बाबर

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इमेज कैप्शन, बगीचे के काम का निरीक्षण करते बाबर जो मुगल वंश के संस्थापक थे.

राष्ट्रपति भवन में जन्म लेने का सौभाग्य

भारतीय महिला फ़ुटबॉल टीम के कोच रहे आनंदी बरुआ राष्ट्रपति भवन में ही पैदा हुए थे. उनके पिता उस वक़्त वहीं काम करते थे.

आनंदी उस दौर को याद करते हुए कहते हैं, "हमारे माता-पिता बताया करते थे कि फ़रवरी मार्च में मुग़ल गार्डन को सबके लिए खोलने का फ़ैसला देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने लिया था."

आनंदी बरुआ ने अपनी ज़िंदगी के क़रीब तीन दशक राष्ट्रपति भवन में ही बिताए हैं.

वे कहते हैं कि उनकी पीढ़ी के लोगों को इसे अमृत उद्यान कहना सीखने में कुछ वक़्त लगेगा, "आख़िर पुराना नाम हमारी यादों में बहुत गहराई से बैठा हुआ है."

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