तिब्बत में चीन बना रहा 'सुपर' बांध, ब्रह्मपुत्र के पानी पर कर सकता है नियंत्रण?- प्रेस रिव्यू

2017 में ली गई पैगोंग त्सो झील की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर

तिब्बत में गंगा की एक सहायक नदी पर नेपाल और भारत की सीमा के नज़दीक चीन एक बांध बना रहा है. सैटलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि इस बांध का इस्तेमाल नीचे पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार, ये ख़बर ऐसे वक्त आई है जब चीन तिब्बत के निचले हिस्से में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नज़दीक यारलंग ज़ांगबो नदी पर एक 'सुपर' बांध बनाने की योजना बना रहा है. ये नदी तिब्बत से होते हुए अरुणाचल प्रदेश और फिर असम में प्रवेश करती है और ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है. अरुणाचल प्रदेश में इस नदी का नाम सियांग है जबकि असम में इसे ब्रह्मपुत्र कहा जाता है.

अख़बार लिखता है कि अब तक सामने आ रही सैटलाइट तस्वीरों से पता चला है कि एलएसी में ईस्टर्न और वेस्टर्न सेक्टर के गांवों में भी चीन तेज़ी से सैन्य ढांचा बना रहा है.

अख़बार ने ख़बर दी है कि इन्टेल लैब से जुड़े भू-स्थानिक इटेलिजेंस रीसर्चर डेमियन साइमन ने गुरुवार को कुछ सैटलाइट तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं, जिनमें देखा जा सकता है कि चीन की तरफ़ से तिब्बत के बुरांग काउंटी में माब्जा ज़ांगबो नदी पर मई 2021 से एक बांध बनाया जा रहा है. तस्वीरों के अनुसार, नदी के प्रवाह को रोकते हुए पहाड़ों के बीच ये बांध एक रिज़र्वायर बनाएगा.

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घाघरा की सहायक नदी (जिसे नेपाल में करनाली नदी कहा जाता है) पर बन रहा ये बांध नेपाल और भारत के साथ सटी सीमा से कुछ किलोमीटर दूर है. ये 350 मीटर से लेकर 400 मीटर लंबा है.

डेमियन के हवाले से अख़बार लिखता है, "इस बांध का काम अभी चल ही रहा है. ऐसे में ये कहना मुश्किल है कि इसका उद्देश्य क्या है. देखने में लगता है कि ये पानी को बांध कर रखने के लिए बनाया जा रहा है. इसके नज़दीक एक एयरपोर्ट भी बनाया जा रहा है."

अख़बार लिखता है कि जानकार मानते हैं कि ये जगह उत्तराखंड के कालापानी से नज़दीक रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण जगह पर बनाया जा रहा है और इसका इस्तेमाल पानी रोक कर रखने के लिए किया जा सकता है. यहां से अचानक पानी छोड़ने की स्थिति में इससे नीचे की जगहों पर बाढ़ की स्थिति पैदा होने का ख़तरा बन सकता है.

हाल के वक्त में चीन ने यारलंग ज़ांगबो नदी पर कई छोटे बांध बनाए हैं जिसके कारण ब्रह्मपुत्र को लेकर चिंता पैदा हो गई है. नवंबर 2020 चीनी सरकारी मीडिया ने कहा था कि यारलंग ज़ांगबो पर एक सुपर बांध बनाया जाएगा जो एक पनबिजली परियोजना होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से महत्वपूर्ण होगी.

ऑब्ज़र्वर रीसर्च फ़ाउंडेशन के सीनियर फ़ेलो समीर पाटिल ने अख़बार से कहा है कि साफ़ तौर पर ये बांध नदी पर बने मौजूदा ढांचों को और मज़बूत करने की चीन की कोशिश है. इसका असर भारत की जल सुरक्षा पर तो पड़ ही सकता है, दोनों देशों के बीच रिश्तों में आया तनाव इसके कारण और गहरा सकता है.

शहबाज़ शरीफ़

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पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते चाहता है भारत

भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा है कि वो अपने पड़ोसी पाकिस्तान के साथ हिंसा से दूर 'सामान्य दोस्ताना रिश्ता' चाहता है.

द हिंदू अख़बार लिखता है कि भारत के साथ बातचीत को लेकर पाक प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के हालिया बयान के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि पाकिस्तान से बातचीत को लेकर भारत के स्टैंड में कोई बदलाव नहीं है.

अख़बार के मुताबिक़ बागची ने कहा, "हमने पाक प्रधानमंत्री का बयान देखा है और उसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने जो बयान जारी किया उसे भी देखा है. हम दोहराना चाहते हैं कि हम हमेशा से पाकिस्तान के साथ दोस्ताना संबंध चाहते हैं, लेकिन इसके लिए डर और हिंसा से अलग हट कर अनुकूल माहौल होना चाहिए."

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अल अरबिया टीवी को दिए एक इंटरव्यू में शहबाज़ शरीफ़ ने भारत की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाया और भारत के साथ 'गंभीर और ईमानदार' बातचीत की बात की थी.

इसके बाद शहबाज़ शरीफ़ के दफ़्तर की तरफ़ से सफ़ाई देते हुए कहा गया कि भारत से बातचीत तभी हो सकती है, जब भारत कश्मीर से धारा 370 हटाने के अपने 'अवैध फ़ैसले' को पलटे और वहां दोबारा पुराने प्रावधान लागू करे.

महिला अफ़सर

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108 महिला अफ़सर बनेंगी कर्नल

दैनिक जागरण में छपी एक ख़बर के अनुसार, इसी महीने आर्मी में शामिल 108 महिला अफ़सरों को प्रमोशन देकर उन्हें कर्नल की रैंक दी जाएगी.

अख़बार लिखता है कि सेना में महिलाओं को बराबरी का मौक़ा देने के लिए बड़ी पहल करते हुए सेना ने लेफ़्टिनेंट कर्नल पद पर काम कर रही 108 महिला अफ़सरों को कर्नल रैंक में प्रमोशन देने का फ़ैसला किया है.

सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि इन अफ़सरों के पहले बैच को इसी महीने तैनाती के आदेश भी दिए जाएंगे. 1992 से 2006 बैच तक अलग-अलग विभागों में कर्नल रैंक के 108 खाली पद थे, जिन्हें इसके ज़रिए भरा जाएगा. इसके लिए 244 महिला अफ़सरों ने आवेदन किया था जिनमें से 108 को प्रमोशन दिया जाएगा.

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