दिल्ली में पुलिस और अफ़्रीकी मूल के लोग क्यों भिड़े? ग्राउंड रिपोर्ट

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
राजधानी दिल्ली के ख़ानपुर इलाक़े में दिल्ली पुलिस और अफ़्रीकी मूल के लोगों के बीच हुई झड़प के बाद अब शांति है.
दक्षिणी दिल्ली के मिश्रित आबादी वाले इस इलाक़े में अफ़्रीकी मूल के कई लोग रहते हैं. कुछ यहां कारोबार भी करते हैं.
शनिवार को साकेत ज़िले के नेब सराय थाना क्षेत्र में पुलिस अफ़्रीकी मूल के लोगों के दस्तावेज़ जांचने के लिए पहुंची थी. इस दौरान मामूली झड़प भी हुई. पुलिस ने बिना वैध वीज़ा के रह रहे पांच लोगों को हिरासत में लिया है.
पुलिस फिलहाल इनके दस्तावेज़ों की जांच कर रही है. दक्षिणी दिल्ली की डीसीपी चंदन चौधरी ने बीबीसी को बताया है कि हिरासत में लिए गए पांच लोगों के ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा दर्ज नहीं किया गया है और उन्हें भारत से वापस उनके मूल देश भेजने की कार्रवाई की जाएगी.
पुलिस के मुताबिक जिन पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है वे सभी नाइजीरिया के नागरिक हैं.

शनिवार को क्या हुआ था?
साकेत ज़िला पुलिस की नारकोटिक्स सेल टीम को नेब सराय थाना क्षेत्र में आने वाले ख़ानपुर इलाक़े में बिना वीज़ा के रह रहे अफ़्रीकी मूल के लोगों की जानकारी मिली थी.
पुलिस की टीम बिना वर्दी के पहुंची थी. यहां पुलिस ने जब वीज़ा न दिखाने वाले कुछ लोगों को हिरासत में लेने का प्रयास किया तो आसपास रह रहे अफ़्रीकी मूल के क़रीब 150 लोग इकट्ठा हो गए.
इस दौरान पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ा था वो भागने में कामयाब हो गए. दिल्ली पुलिस और अफ़्रीकी मूल के लोगों में यहां मामूली झड़प भी हुई.
बाद में देर शाम आई दिल्ली पुलिस की टीम ने पांच लोगों को हिरासत में लिया. इनमें एक महिला भी है.

क्या कहना है स्थानीय लोगों का?
ख़ानपुर के राजू पार्क इलाक़े में मिश्रित आबादी रहती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक दिल्ली पुलिस की टीम ने जब एक अफ़्रीकी युवा को पकड़ने की कोशिश की तो उसने यहां रह रहे अन्य लोगों को मैसेज कर दिया.
कुछ ही मिनट के भीतर ही यहां रह रहे अफ़्रीकी मूल के लोग इकट्ठा हो गए.
इन लोगों ने दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी की और दिल्ली पुलिस पर परेशान और प्रताड़ित करने के आरोप भी लगाए.
स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रदर्शनकारी आक्रामक हो गए थे.
पुलिस टीम का हिस्सा रहे एक पुलिसकर्मी ने बीबीसी को बताया, "बिना वीज़ा के भारत में रह रहे लोगों को हिरासत में लिए जाने के दौरान अफ़्रीकी मूल के कई लोग आक्रामक हो गए थे. यदि पुलिस शांत नहीं रहती तो स्थिति बिगड़ सकती थी. इसलिए पुलिस ने संयम से काम लिया."
बीबीसी ने घटना के ऐसे कई वीडियो देखे हैं जिनमें अफ़्रीकी मूल के लोगों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस हो रही है.
एक स्थानीय व्यक्ति के मुताबिक आमतौर पर यहां रह रहे अफ़्रीकी मूल के लोगों का स्थानीय लोगों से कोई विवाद नहीं है और ना ही वे सार्वजनिक स्थानों पर कोई उत्पात मचाते हैं.
वे बताते हैं, "क़रीब छह महीने पहले यहां एक अफ़्रीकी युवती ने शराब के नशे में अपने कपड़े उतार दिए थे और हंगामा किया था."
"उसके बाद स्थानीय लोगों और मकान मालिकों ने जब शिकायत की तो उन लोगों ने माफ़ी मांगी और आइंदा ऐसा कुछ ना करने का वादा किया. तब से यहां कोई भी घटना नहीं हुई है."
वे बताते हैं, "यहां रहने वाले अफ़्रीकी मूल के लोग अधिकतर घरों के भीतर ही रहते हैं और बाहर कम ही दिखाई देते हैं."

बिना वैध वीज़ा के रहते हैं लोग
दिल्ली पुलिस ने बीते एक महीने में भारत में अवैध रूप से रह रहे 60 से अधिक अफ़्रीकी नागरिकों को वापस भेजा है.
दक्षिणी ज़िले की डीसीपी चंदन चौधरी के मुताबिक, "दिल्ली पुलिस पिछले एक महीने से अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों के ख़िलाफ़ अभियान चला रही है. जिन लोगों के पास वीज़ा नहीं है उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है."
शनिवार को हुई झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने कोई मुक़दमा दर्ज नहीं किया है.
इसकी वजह बताते हुए चंदन चौधरी कहती हैं, "बिना वीज़ा के भारत में रह रहे विदेशी नागरिक ये चाहते हैं कि उन पर पुलिस किसी भी तरह से मुक़दमा दर्ज कर दे ताकि जब तक मुक़दमा चलता रहे वे भारत में रह सकें."
चंदन चौधरी कहती हैं, "इसलिए ही हमने अभी कोई मुक़दमा दर्ज नहीं किया है. सीधे वीज़ा की जांच करके डिपोर्ट करने की कार्रवाई की जाएगी."
दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिए लोगों की जानकारी 'फॉरनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िस (एफ़आरआरओ) को दी है. भारत में रह रहे सभी विदेशी नागरिकों की जानकारी एफ़आरआरओ ही रखता है.
एफ़आरआरओ इनके दस्तावेज़ों की सत्यता की जांच भी करता है. वैध वीज़ा ना होने के बाद एफ़आरआरओ विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत कार्रवाई करता है.
यहां अफ़्रीकी मूल के लोगों को कई फ्लैट किराए पर देने वाले एक स्थानीय व्यक्ति अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए बताते हैं, "जब मकान किराए पर दिया जाता है तो दस्तावेज़ों की जांच की जाती है."
उन्होंने बताया, "कई बार फ़र्ज़ी दस्तावेज़ भी जमा कराए जाते हैं. हम सभी दस्तावेज़ एफ़आरआरओ को भेजते हैं, उसके बाद वीज़ा के वैध होने की जांच करना एफ़आरआरओ का काम है."
वे कहते हैं, "आमतौर पर ये लोग कोई ऐसा काम नहीं करते हैं जिससे किसी स्थानीय व्यक्ति को कोई दिक्कत हो. हमें लगता है कि इन्हें पुलिस का भी सहयोग करना चाहिए."

थाने में हंगामा
हिरासत में ली गई एक महिला नेब सराय थाने में हंगामा भी कर रहीं थीं. वो बार-बार पुलिसकर्मियों से कह रहीं थीं कि उन्हें बताया जाए कि उन पर क्या मुक़दमा दर्ज किया गया है.
इस महिला से मिलने आए अफ़्रीकी मूल के एक व्यक्ति ने बताया, "हम सब एक समुदाय के हैं, ये मेरी बहन जैसी हैं, अगर हममें से किसी एक भी साथ ग़लत होगा तो हम सब एकजुट होंगे."
भारत में क़रीब 12 साल से रह रहे नाइजीरिया से आए इस कारोबारी ने अब भारतीय दस्तावेज़ भी बनवा लिए हैं.
बीबीसी को अपना आधार कार्ड दिखाते हुए वे कहते हैं, "मैंने भारतीय महिला से शादी की है. मेरे बच्चे भारतीय हैं. हम चाहते हैं कि हम यहां सम्मान से रहें और अपना कारोबार कर सकें."
वे भारत से अफ़्रीकी देशों में कपड़े भेजते हैं और वहां से खाने-पीने का सामान भारत में मंगवाते हैं.
वे कहते हैं, "हमें लगता है कि दिल्ली पुलिस ने बेवजह अफ़्रीकी मूल के लोगों को परेशान किया है. अगर हमारे ख़िलाफ़ कोई शिकायत है या हमने कुछ ग़लत किया है तो हमें बताया जाए."
दिल्ली पुलिस ने जिस महिला को हिरासत में लिया है वो राजू पार्क इलाक़े में खाने-पीने के सामान की दुकान चलाती है.
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