जहाँ माँ की गोद से चुराकर बेच दिए जाते हैं बच्चे

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कीनिया में बच्चों की ख़रीद फ़रोख़्त के काले बाज़ार में सप्लाई जारी रखने के लिए धड़ल्ले से बच्चों को चुराया जा रहा है. अफ़्रीका आई की टीम ने एक साल तक तस्करों का पीछा करके ये रिपोर्ट तैयार की है. कुछ बच्चों को तो सिर्फ़ तीस हज़ार रुपये में बेचने के लिए चुराया गया.

अफ़्रीका आई के लिए पीटर मुरूमी, जोएल गुंटर और टॉम वॉटसन की रिपोर्ट

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रिबेका
इमेज कैप्शन, रिबेका के बेटे को रात के अंधेरे में चुरा लिया गया था, उन्हें उम्मीद है एक दिन वो लौट आएगा
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रिबेका का बेटा जहां भी होगा, दस साल का होगा. वो नैरोबी में भी हो सकता है, जहां वो रहती हैं, या फिर कीनिया के किसी और कोने में. और ऐसा भी हो सकता है कि वो अब तक मर ही चुका हो. रिबेका को भी अपने दिल में यही लगता है. लारेंस जोशिया उसका पहला बच्चा था. जब रिबेका ने उसे आख़िरी बार देखा था, वो नौ साल का था. मार्च 2011 की उस रात दो बजे का वक़्त होगा. रिबेका आसानी से उपलब्ध सस्ते नशे जेटफ्यूल को सूंघकर धुत थीं.

वो नशा करती थीं क्योंकि इससे उनमें अजनबियों के पास जाकर भीख मांगने का आत्मविश्वास आता था. रिबेका जब पंद्रह साल की थीं, उनकी मां के पास इतने पैसे नहीं थे कि उनका पेट भर सकें. स्कूल की पढ़ाई छोड़कर रिबेका सड़कों पर आ गईं. उन्हें एक उम्रदराज़ व्यक्ति मिला जिसने वादा तो किया था शादी करने का लेकिन गर्भवती करके छोड़ गया. अगले साल लारेंस जोशिया पैदा हुआ. रिबेका ने उसे एक साल कुछ महीने पाला. रिबेका ने उस रात जब अपनी आंखें बंद की तो फिर कभी अपने पहले बेटे को नहीं देखा.

'मेरे दूसरे बच्चे हैं, लेकिन वो मेरा पहला बच्चा था, उसने ही मुझे मां बनाया था. मैंने उसे हर जगह देखा है, लेकिन वो कहीं नहीं मिला'

रिबेका अभी भी नैरोबी की उन्हीं सड़कों पर रहती हैं जहां से उनका बच्चा चोरी हुआ था. अब उनके तीन और बच्चे हैं. तीनों बेटियां आठ, छह औ चार साल की हैं. सबसे छोटी बेटी को एक बार छीनने की कोशिश हुई थी. इलाक़े में घूम रहे एक पुरुष ने ये प्रयास किया था. वो उसे एक कार की ओर ले जा ही रहा था कि रिबेका वहां पहुंच गई. कार में एक औरत बैठी थी. अगले दिन वो आदमी फिर वहीं था.

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अपनी सबसे छोटी बेटी के साथ रिबेका
इमेज कैप्शन, रिबेका कहती हैं कि उन्हें हर वक़्त अलर्ट रहना पड़ता है. 'जब आप नींद में होंगे, अमीर लोग आपका बच्चा चुरा सकते हैं.'
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रिबेका जहां रहती हैं वहां ऐसी कहानियां खोजने के लिए बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ती. एस्थर का तीन साल का बेटा अगस्त 2018 में लापता हो गया था. वो कहती हैं, 'जब से मेरा बेटा ग़ायब हुआ है मुझे सुकून नहीं है. मैं उसे खोजने मोम्बासा तक गई.'

दो साल पहले रात के अंधेरे में कैरोल का दो साल का बेटाछीन लिया गया था. वो कहती हैं, 'मैं उसे बहुत प्यार करती हूं. अगर वो मेरा बच्चा लौटा दें तो मैं उन्हें माफ़ कर दूंगी.'

नैरोबी में बच्चों की बिक्री का काला बाज़ार चल रहा है जिसमें आपूर्ति के लिए ऐसी मजबूर महिलाओं को शिकार बनाया जाता है. एक साल लंबी अपनी खोजी रिपोर्ट में अफ़्रीका आई को सड़क पर रह रही महिलाओं से बच्चे छीने जाने और फिर फ़ायदे के लिए आगे बेच देने के सबूत मिले हैं. सड़कों पर बने क्लीनिकों में बच्चा चोरी और बड़े अस्पतालों में बच्चों की बिक्री का पर्दाफ़ाश भी हुआ है.

सरकारी पदों पर बैठे लोगों की करतूतों को उजागर करने के लिए अफ़्रीका आई की टीम ने अस्पताल में छोड़ दिए गए एक बच्चे को ख़रीदने का प्रयास किया. हमें सीधे बच्चा बेचने वाले अस्पताल के अधिकारी ने उसे अपने क़ब्ज़े में लेने के लिए वैध दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया था.

बच्चा चुरानों वालों में मजबूर मौकापरस्तों से लेकर संगठित अपराधी तक शामिल हैं. अधिकतर मामलों में ये मिलकर काम कर रहे होते हैं. मौकापरस्तों में अनीता जैसी महिलाएं हैं. अनीता शराब और नशे की आदी हैं और वो ख़ुद सड़क पर ही रहती हैं. वो रिबेका जैसी महिलाओं के बच्चे चुराकर पैसा कमाती हैं. वो अधिकतर तीन साल से कम उम्र के मासूम बच्चों को निशाना बनाती हैं.

अफ़्रीका आई को अनीता के बारे मे उनकी एक दोस्त से पता चला. इस दोस्त ने अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं की है. अपने आप को एमा बताने वाली इस महिला के मुताबिक अनीता बच्चे चुराने के लिए अलग-अलग तरीक़ों का इस्तेमाल करती हैं.

'कई बार पहलो वो मां से दोस्ती करती है और पता करती है कि कहीं बच्चे की मां को उसके इरादों का पता तो नहीं चल जाएगा. कई बार वो मां को नशा या नींद की गोलियां दे देती है और बच्चा चुराकर फुर्र हो जाती है. कई बार वो बच्चे के साथ खेलती है. उसे बच्चों के करीब आने के कई तरीक़े पता हैं.'

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एम्मा
इमेज कैप्शन, एम्मा ने एक ऐसी महिला का पर्दाफ़ाश करने में मदद की जो सड़क पर रह रही महिलाओं के बच्चे चुरा रही थी.
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अपने आप को ख़रीददार की तरह पेश करते हुए अफ़्रीका आई ने अनीता के साथ मीटिंग तय की. अनीता ने बताया कि उस पर अधिक बच्चे चुराने का दबाव है. उसने हाल ही में चोरी किए गए एक बच्चे के बारे में बताया.

'मां सड़क पर नई-नई आई थी, वो उलझन में थी, उसे पता नहीं था कि उसके इर्द-गिर्द क्या-क्या हो रहा है. उसने अपने बच्चे को लेकर मुझ पर भरोसा किया. अब मेरे पास उसका बच्चा है.'

अनीता ने बताया कि उसका बॉस एक स्थानीय कारोबारी महिला है जो छोटे-मोटे अपराधियों से चोरी किए गए बच्चे ख़रीदती है और फिर आगे मोटे फ़ायदे के साथ बेच देती है.

वो कहती है, 'कुछ ख़रीददार बांझ महिलाएं होती हैं, उनके लिए ये बच्चा गोद लेने जैसा होता है लेकिन कुछ बच्चों को बलि देने के लिए ख़रीदा जाता है.'

'हां, इन बच्चों की बलि दी जाती है, ये बच्चों सड़कों से ग़ायब हो जाते हैं और फिर कभी भी दिखाई नहीं देते हैं.'

अनीता ने जो ये काली सच्चाई बताई थी उसका संकेत एम्मा हमें पहले ही दे चुकी थी. अनीता ने बताया, 'कुछ लोग तंत्र-मंत्र के लिए बच्चे ले जाते हैं.'

असल में एक बाच बच्चा बेच देने के बाद अनीता को ये पता नहीं होता कि उसका क्या हुआ. वो कारोबारी महिला को लड़कियां पचास हज़ार शीलिंग और लड़के अस्सी हज़ार शीलिंग तक में बेचती है. ये लगभग 35 हज़ार से 50 हज़ार रुपए के बराबर हैं. नैरोबी में सड़क से बच्चों को चुराने का रेट भी लगभग यही है.

एम्मा बताती हैं, 'कारोबारी महिला ने अनीता को कभी नहीं बताया है कि वो बच्चों का क्या करती है. मैंने एक बार अनीता से इस बारे में पूछा था तो उसने कहा था कि उसे इसकी परवाह नहीं है. जब तक उसे पैसे मिल रहे हैं वो कुछ नहीं पूछती है.'

पहली मुलाक़ात के बाद अनीता ने दूसरी मुलाक़ात तय करने के लिए फ़ोन किया. जब हम मिलने पहुंचे तो उसकी गोद में पांच महीने की बच्ची थी. इस बच्ची को उसने मां का भरोसा जीतने के कुछ देर बाद ही छीन लिया था.

अनीता ने बताया, 'उसने मुझे कुछ देर के लिए बच्ची को गोद लेने के लिए दिया और मैं इसे लेकर भाग आई.'

उसने बताया कि इस बच्ची का एक ख़रीददार उसे पचार हज़ार शीलिंग दे रहा है. हमारी सोर्स एम्मा ने उससे कहा कि उसके पास एक ग्राहक है जो अस्सी हज़ार शीलिंग दे सकता है.

अनीता ने कहा, 'बहुत बढ़िया, कल सौदा पक्का करते हैं.'

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पांच महीने की एक बच्ची जिसे नैरोबी में चुरा लिया गया था
इमेज कैप्शन, पांच महीने की एक बच्ची जिसे नैरोबी में चुरा लिया गया था
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शाम पांच बजे के लिए मुलाक़ात तय हुई. एक बच्ची की जान ख़तरे में थी, इसके मद्देनज़र, अफ़्रीका आई की टीम ने पुलिस को जानकारी दी. पुलिस ने अनीता को गिरफ़्तार करने और बच्ची को बचाने के लिए जाल बिछाया. अनीता के ग़ायब हो जाने से पहले ये बच्ची को बचाने का अंतिम मौका था. .

लेकिन अनीता मीटिंग के लिए पहुंची ही नहीं. हमने कई दिन प्रयास किया लेकिन हम उसे खोज नहीं सके. कई सप्ताह बाद एम्मा को वो मिल ही गई. उससे अनीता ने बताया कि उसे एक और ग्राहक मिल गया था जिसने अधिक पैसे देकर बच्ची को ख़रीद लिया. इस पैसे से अनीता ने शहर की एक झुग्गी-बस्ती में दो कमरों की झुग्गी बनाई. बच्ची लापता हो गई है, पुलिस अभी भी अनीता की पड़ताल कर रही है.

'अगर हम ऐसा करते हैं तो?'

कीनिया में कितने बच्चों की तस्करी होती है इसका कोई विश्वस्नीय डाटा नहीं है- कोई सरकारी रिपोर्ट नहीं है, ना ही कोई राष्ट्रव्यापी सर्वे. जिन एजेंसियों की ज़िम्मेदारी बच्चों की चोरी और तस्करी रोकने की है उनके पास फंड और स्टाफ़ दोनों की कमी है. मारयाना मुनयेंडो ने मिसिंग चाइल्ड कीनिया नाम की एक एनजीओ स्थापित की है जो उन माओं की मदद करती है जिनके बच्चे चोरी हुए हैं. मुनयेंडो के मुताबिक एनजीओ चार साल से काम कर रही है और अब तक उसके सामने छह सौ से अधिक मामले सामने आए हैं.

मामले सामने ना आने की एक वजह पीड़ितों का आर्थिक स्तर भी है. मुनयेंडो कहती हैं, 'उनके पास साधन नहीं हैं, ना ही उनके पास जानकारी है या नेटवर्क है कि वो कहां जाएं और कहें कि हमारा बच्चा लापता हो गया है, कोई उसे खोज ले.'

बच्चों की कालाबाज़ारी के पीछे एक कारण ये भी है कि कीनिया में उन महिलाओं पर लांछन लगाया जाता है जो मां नहीं बन पाती हैं. मुनयेंडो कहती हैं, 'अफ़्रीकी देशों में बांझ होना महिलाओं के लिए बहुत बुरी बात मानी जाती है. आपसे उम्मीद की जाती है कि आप बच्चा पैदा करें और वो बेटा ही हो. अगर आप ऐसा नहीं कर सकती हैं तो आपको धक्के मारकर घर से निकाला जा सकता है. तो आप क्या करें, आप मजबूरी में बच्चा चोरी करती हैं.'

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स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक नैरोबी की झुग्गी बस्तियों में बच्चों की चोरी आम बात है

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इमेज कैप्शन, स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक नैरोबी की झुग्गी बस्तियों में बच्चों की चोरी आम बात है
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ऐसी परिस्थिति में महिला या तो अनीता की बॉस जैसी महिलाओं के संपर्क में आती है या फिर वो ऐसे लोगों से मिलती हैं जिनके अस्पतालों में संपर्क होते हैं.

अफ़्रीका आई की पड़ताल में पता चला है कि शहर के बड़ों अस्पतालों में भी बच्चों की तस्करी के गैंग सक्रिय हैं. एक सोर्स के ज़रिए हमने मामा लूसी किबाकी अस्पताल के क्लिनिकल सोशल वर्कर फ्रेड लेपरान से संपर्क किया. फ्रेड का काम मामा लूसी अस्पताल में आए ऐसे बच्चों की सुरक्षा करना है जो कमज़ोर परिस्थितियों में होते हैं. लेकिन हमारे सूत्र ने हमें बताया था कि फ्रेड लेपरान सीधे तौर पर तस्करी में शामिल हैं. सूत्र ने लेपरान के साथ हमारी मीटिंग तय की. लेपरान को ऐसी महिला के बारे में बताया गया जो बांझ हैं और बच्चा हासिल करने के लिए बेताब है.

लेपरान ने जवाब दिया, 'मेरे पास एक ऐसा बच्चा है जिसे उसके माता-पिता दो सप्ताह पहले अस्पताल में ही छोड़ गए थे और उसे लेने वापस नहीं आए.'

हमारे सूत्र के मुताबिक ये पहली बार नहीं था जब लेपरान इस तरह से बच्चा बेच रहे हों.

अफ़्रीका आई ने लेपरान के साथ मीटिंग के ख़ुफ़िया कैमरे में रिकॉर्ड किया. इस मीटिंग में उन्होंने कहा, 'पिछले मामले ने मुझे डरा ही दिया था. अगर हम ऐसा कर रहे हैं तो आप ऐसा प्लान बनाएं कि आगे चलकर मुझे दिक्कत ना हो.'

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फ्रेड लेपरान
इमेज कैप्शन, फ़्रेड लेपरान ने मामा लूसी अस्पताल से बच्चा चुराने के बदले तीन लाख शीलिंग की रकम स्वीकार की
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जिस बच्चे को लेपरान बेच रहे हैं ऐसे बच्चों को गोद दिए जाने से पहले सरकारी संस्थान में ले जाना अनिवार्य है. गोद लेने वाले अभिभावकों की पूरी जांच के बाद ही उन्हें बच्चा सौंपा जाता है. जब लेपरान जैसे लोग ऐसे बच्चों को बेच देते हैं तो किसी को पता नहीं चल पाता है कि ये बच्चे कहां पहुंचे.

अफ़्रीका आई की ख़ुफ़िया रिपोर्टर ने रोज़ नाम की महिला बनकर अस्पताल के पास ही एक दफ़्तर में लेपरान से मुलाकात की. लेपरान ने रोज़ के बारे में कुछ ऊपरी सवाल पूछे. रोज़ ने बताया कि वो शादीशुदा है और बच्चा पैदा नहीं कर पा रही है और उस पर पति के परिवार का बहुत दबाव है.

लेपरान ने पूछा, 'क्या आपने गोद लेने के बारे में सोचा है.'

रोज़ ने जवाब दिया, 'हमने इस बारे में सोचा है लेकिन ये प्रक्रिया बहुत जटिल है.'

इसके बाद लेपरान सहमत हो गए. उन्होंने बच्चे की क़ीमत तीन लाख शीलिंग तय की. जो भारतीय मुद्रा मं दो लाख रुपए के बराबर है.

रोज़ और हमारे सूत्र की ओर इशारा करते हुए फ्रेड ने कहा, 'अगर हमने ये सौदा पूरा किया तो सिर्फ़ तीन लोगों को इस बारे में पता होगा. मैं तुम और वो. मैं हर किसी पर विश्वास नहीं करता. ये बहुत ही जोख़िम भरा काम है. मुझे इसे लेकर बहुत चिंता भी होती है.'

फ़्रेड ने कहा कि वो सौदा पक्का करने के लिए संपर्क करेगा.

'अडामा के पास कोई विकल्प नहीं है'

सड़क से बच्चा चोरी करने वाली अनीता और अस्पतालों में बैठे फ्रेड जैसे अधिकारियों के बीच नैरोबी में बच्चा चोरी के कारोबार की एक और परत है. झुग्गी बस्तियों के आसपास ऐसे अवैध क्लिनिक हैं जिनमें गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी कराई जाती है. ये क्लिनिक बच्चों की बिक्री के कारोबार के जाने-पहचाने ठिकाने हैं.

घेटो रेडियो के पत्रकार जूडिथ कैनाइथा के ज़रिए अफ़्रीका आई ने कायोले झुग्गी बस्ती के एक क्लिनिक से संपर्क किया. इस झुग्गी बस्ती में नैरोबी के हज़ारों ग़रीब लोग रहते हैं. कैनाइथा के मुताबिक केयोले में बच्चों की बिक्री का धंधा फलफूल रहा है.

हम जिस क्लिनिक में गए इसे मैरी औमा नाम की एक महिला चलाती है. औमा का दावा है कि उन्होंने नैरोबी के बड़े अस्पतालों में काम किया है. कैनाइथा ने ख़रीददार बनकर संपर्क किया. क्लिनिक के अंदर दो गर्भवती महिलाएं भी मौजूद थीं जिन्हें प्रसवपीड़ा हो रही थी.

औमा फुसफुसाते हुए कहती हैं, 'ये साढ़े आठ महीने की गर्भवती है और बच्चा पैदा करने के लिए बिलकुल तैयार है. वो अजन्मे बच्चे को पैंतालीस हज़ार शीलिंग यानी लगभग तीस हज़ार भारतीय रुपए में बेचने का प्रस्ताव देती हैं.'

औमा को बच्चा पैदा होने के बाद मां के स्वास्थ्य को लेकर कोई चिंता नहीं है.अपना हाथ हिलाते हुए वो कहती हैं, 'जैसे ही उसे पैसा मिलेगा वो चली जाएगी. हम बात बिलकुल साफ़ करते हैं, वो वापस लौटकर कभी नहीं आती हैं.'

मैरी औमा
इमेज कैप्शन, मैरी औमा कहती हैं कि उन्होंने बड़े अस्पतालों में नर्स का काम किया है
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उस दिन क्लिनिक में मैरी जिस महिला का अजन्मा बच्चा बेच रहीं थीं उसका नाम अडामा है.

अडामा पूरी तरह टूटी हुई थीं. रिबेका की ही तरह उन्हें गर्भवती करने वाले व्यक्ति ने शादी का वादा किया था लेकिन छोड़ कर चला गया था. गर्भवती होने की वजह से उनका काम भी छूट गया था. वो एक निर्माणाधीन इमारत में काम करती थीं और अब भारी बोझ नहीं उठा पा रहीं थीं. तीन महीने तक उनके मकान मालिक ने किराया नहीं मांगा और फिर उन्हें घर से बाहर कर किसी और को रख लिया.

अडामा ने अपने बच्चे को बेचने का फ़ैसला किया. मैरी औमा उन्हें पूरे पैंतालीस हज़ार शीलिंग नहीं दे रहीं थी. उसने अडामा को बताया था कि बच्चा सिर्फ़ दस हज़ार शीलिंग में ही बिक रहा है.

बाद में अपने गांव में दिए साक्षात्कार में अडामा ने बताया, 'मेरा घर बहुत गंदा था, मैं ख़ून एक छोटे डिब्बे में डालती थी, बेसिन तक नहीं था, बिस्तर भी गंदा ही था. मैं बहुत परेशान थी और मेरे पास कोई विकल्प भी नहीं था.'

अडामा ने बताया कि जिस दिन हम क्लिनिक गए थे, औमा ने बिना चेतावनी दिए ही उन्हें प्रसव पीड़ा की दवाएं दे दीं थीं. औमा के पास एक ग्राहक था और वो जल्द से जल्द बच्चे को बेच देना चाहती थी.

लेकिन जन्म पूरी तरह ठीक नहीं रहा. अडामा को बेटा हुआ जिसे सांस लेने में दिक्कत थी. औमा ने उसे मामा लूसी अस्पताल जाने की सलाह दी. दो सप्ताह बाद अडामा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. उसने औमा को संदेश भेजा और औमा ने हमें.

उसने लिखा, 'नया पैकेज पैदा हुआ है. पैंतालीस हज़ार मे.'

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कायोले

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इमेज कैप्शन, नैरोबी की कायोले झुग्गी बस्ती में कई अवैध क्लिनिक हैं
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क्लिनिक में अडामा औमा और उसके सहायक के पास पहुंच गईं थीं. उसने बताया, 'उन्होंने कहा कि अब बच्चा ठीक लग रहा है और अगर ग्राहक को कोई परेशानी नहीं हुई तो उसे तुरंत ही ले लिया जाएगा.'

अडामा ने अपने बच्चे को बेचने का दर्दनाक फ़ैसला लिया था. अब वो दोबारा विचार कर ही थी.

बाद में उसने कहा, 'मैं अपने बच्चे को किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं बेचना चाहती थी जो उसका सही से ध्यान ना रख सके या बाद में किसी और काम में उसका इस्तेमाल करे.'

उस दिन अडामा क्लिनिक से अपने बच्चे को साथ ले आईं. उन्होंने उसे एक बच्चों के सरकारी अस्पताल में छोड़ दिया, जहां वो गोद लिए जाने का इंतेज़ार करेगा. अडामा ने उसकी बेहतर ज़िंदगी की उम्मीद की. उसे कभी वो पैसे नहीं मिले जिसकी उसे ज़रूरत थी.

अब वो नैरोबी से दूर अकेली रहती हैं. वो अपने बच्चे के बारे में सोचती हैं और कई बार नींद से अचानक जाग जाती हैं. जब नींद नहीं आती तो वो अंधेरी सड़क पर अकेले ही चलने लगती हैं. लेकिन उन्हें अपने फ़ैसले पर अफ़सोस नहीं है.

'मुझे इस बात की शांति है कि मैंने अपने बच्चे को सरकार को सौंप दिया. क्योंकि मुझे पता है कि वो सुरक्षित है.'

अस्पताल में बच्चों की बिक्री

सरकारी अस्पताल में क्लिनिकल सोशल वर्कर फ्रेड लेपरान ने हमें कॉल करके बताया कि उसने एक बच्चे की पहचान की है जिसे उसकी मां ने छोड़ दिया है और वो उसे हमें बेचने के लिए चुराना चाहता है. ये लड़का उन तीन बच्चों में से एक है जिन्हें बालगृह में भेजा जाना है. ये बच्चे सुरक्षित बालगृह पहुंचे, यही लेपरान की ज़िम्मेदारी है.

लेपरान ने अस्पताल में काग़ज़ी कार्रवाई पूरी की और वहां मौजूद कर्मचारियों से कुछ बात की. उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उनकी निगरानी में ही ये बच्चा चोरी होने जा रहा है. हमारी अंडरकवर रिपोर्टर रोज़ बाहर कार में इंतेज़ार कर रहीं थीं. लेपरान ने नर्स को बताया कि वो बच्चों के अस्पताल में काम करती हैं और उससे बच्चों को रोज़ के पास ले जाने के लिए कहा. वो घबराया हुआ था लेकिन उसने हमारे सूत्र को बताया था कि नर्स उसका बहुत दूर तक पीछा नहीं करेंगी.

वहां से जल्दी निकलने की गुहार लगाते हुए उसने कहा, 'वो पीछे नहीं आएंगी क्योंकि उनके पास करने के लिए बहुत काम है. अगर हम ऐसे ही बातें करते रहे तो ज़रूर किसी को शक हो जाएगी'

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कुछ देर बाद ये टीम मामा लूसी अस्पताल से तीन बच्चों को साथ लेकर बाहर निकल गई. लेकिन निर्देश सिर्फ़ दो ही बच्चों को बालगृह में छोड़ने के थे. यहां से तीसरा बच्चा कहीं भी पहुंच सकता था, कहीं भी.

अंडरकवर टीम ने तीनों बच्चों को बालगृह में सौंपा जहां उन्हें गोद लिए जाने तक रखा जाएगा.

उसी दोपहर, लेपरान ने रोज़ को फ़ोन किया और कहा कि वो तय किए गए तीन लाख शीलिंग उसकी मेज पर रखे. उन्होंने उसे सलाह दी कि बच्चे के टीकाकरण का पूरा ख्याल रखा जाए.

'सावधान रहना, बहुत सावधान रहना'

बीबीसी ने लेपरान से बच्चे की बिक्री के बारे में सवाल किया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. अस्पताल ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. लेपरान अभी भी अपनी नौकरी कर रहे हैं.

हमने बच्चों के लिए काम करने वाली एक एनजीओ को कायोले में मैरी औमा के क्लिनिक के बारे में बताया जिसने पुलिस को इस बारे में जानकारी दी, लेकिन लगता है कि औमा का कोराबर अभी भी चल रहा है.

हमने जब अपने आरोपों पर उनसे जवाब मांगा तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

हमने अनीता के सामने भी अपने आरोप रखने का प्रयास किया लेकिन वो एक बार नैरोबी की गलियों में गुम हो गई है.

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रिबेका
इमेज कैप्शन, रिबेका कहती हैं, 'हम सभी मां बनना चाहती हैं, हम सड़क पर हैं, इसमें हमारी ग़लती नहीं है.'
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जिन माओं के बच्चे चोरी हो रहे हैं उनके लिए कोई वास्तविक समाधान दिखाई नहीं देता. उनकी ज़िंदगी अधर में लटकी रहती है. वो अपने बच्चों को फिर से देखने की उम्मीद में जीती हैं, ये जानते हुई भी कि वो कभी उन्हें दोबारा नहीं देख पाएंगी. रिबेका कहती हैं, 'अपने बेटे को दोबारा देखने के लिए कुछ भी कर सकती हूं, और अगर वो ज़िंदा नहीं है तो भी मैं ये बात पक्के तौर पर जानना चाहती हूं.'

पिछले साल रिबेका को किसी ने बताया कि उसने पड़ोस की झुग्गी बस्ती में एक ऐसा लड़का देखा है जो बिलकुल उनकी बड़ी बेटी जैसा दिखता है. रिबेका जानती थीं कि इस बात में कुछ नहीं हैं, उनके पास उस झुग्गी बस्ती में जाकर पड़ताल करने का कोई ज़रिया भी नहीं थी. वो नज़दीकी पुलिस स्टेशन तक गईं, लेकिन यहां भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली. आख़िरकार उन्होंने हार मान ली.

मारियाना मुनयेंडो कहती हैं, 'ये माएं अपने बच्चों को फिर से देख पाएँगी, इसकी संभावना दस लाख में एक है. सड़क पर मां बनने वाली बहुत सी लड़कियां ख़ुद बच्ची ही हैं, उनका फ़ायदा उठा लिया जाता है.'

मुनयेंडो कहती हैं कि अकसर लोग रिबेका जैसी महिलाओं को पीड़ित की तरह भी नहीं देखते हैं. वो कहती हैं, 'लेकिन किसी को ये नहीं सोच लेना चाहिए कि सड़क पर रहने वाले लोगों के दिलों में भावनाएं नहीं होती हैं और वो न्याय की हक़दार नहीं हैं. उनकी भी भावनाएं हैं. जिस तरह से किसी पॉश इलाक़े में रहने वाली मां अपने बच्चे को प्यार करती है उसी तरह सड़क पर रहने वाली औरतें भी करती हैं.'

सड़कों से चुराए गए कुछ बच्चे उन पॉश इलाक़ों तक भी पहुंचते हैं. कई बार रिबेका उन अमीर महिलाओं के बारे में सोचती हैं जो बच्चा चुराने के पैसे देती हैं- आप कैसे ऐसे बच्चे को पाल लेती हैं जिसके बारे में आप जानती हैं कि उसे सड़क से, किसी मां की गोद से चुराया गया है.

वो कहती हैं, 'उन्हें कैसा लगता होगा, वो किस तरह सोचती होंगी.'

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तस्वीरें- ब्रायन इनगंगा

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