अफ़्रीकी देश की हिरासत में भारतीय नाविकों ने कहा- नहीं जानते ज़िंदा घर लौटेंगे या नहीं

नाइजीरिया
इमेज कैप्शन, इक्वेटोरियल गिनी की नौसेना की हिरासत में भारतीय नाविक
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

पिछले तीन महीने से इक्वेटोरियल गिनी की नौसेना की हिरासत में रह रहे सोलह भारतीयों ने भारत सरकार से सुरक्षित घर वापसी में मदद की अपील की है.

भारत सरकार ने इन भारतीयों के परिवार वालों को मदद का आश्वासन दिया है.

लेकिन इस बीच, सोशल मीडिया में नाविकों के तौर पर काम करने वाले इन भारतीयों की अपील करते हुए वीडियो और मैसेज सोशल मीडिया पर शेयर होने लगे हैं.

इनमें ये भारत सरकार से अपनी रिहाई में मदद करने की अपील करते दिख रहे हैं.

इक्वेटोरियल गिनी ने अगस्त के मध्य में कार्गो शिप एमटी हेरोयिक इदुन को रोक लिया था. इस पर अलग-अलग देशों के 26 नाविक सवार थे. इनमें से 16 भारतीय हैं.

इस जहाज का संचालन नॉर्वे का ओएसएम मैरिटाइम ग्रुप करता है.

इस सप्ताह की शुरुआत में ग्रुप के सीईओ फिन एमंड नॉरबाय ने अपने एक बयान में कहा, "इस जहाज में 26 मल्टीनेशनल क्रू मेंबर हैं, जिन्हें इक्वेटोरियल गिनी ने पिछले 80 दिनों से अधिक दिनों से अपनी हिरासत में रखा हुआ है."

उन्होंने कहा, "इन नाविकों से अपराधियों जैसा बर्ताव किया जा रहा है. बग़ैर किसी औपचारिक आरोप या क़ानूनी प्रक्रिया के लगभग ढाई महीनों से अधिक समय से उन्हें हिरासत में रखा गया है. ये तो सदमे में डाल देने वाली कार्रवाई है. ये समुद्री क्षेत्र में किया जाने वाला अन्याय है."

कैसे मुसीबत में फंसे भारतीय नाविक?

जहाज के इंचार्ज तनुज मेहता की पत्नी सपना त्रेहन ने बताया कि इस जहाज को नाइजीरिया के एकेपीओ टर्मिनल पर जाने के लिए कहा गया था. दरअसल अधिकारियों का कहना था कि उन्हें इस जहाज के पहुंचने की कोई जानकारी नहीं थी.

तनुज मेहता ने अपनी पत्नी को बताया कि इसके बाद इस जहाज के पीछे और एक जहाज लग गया. पीछा करने वाले जहाज के बारे में दावा किया गया कि ये नाइजीरियाई नौसेना का है.

इस जहाज ने इक्वेटोरियल गिनी को अलर्ट कर दिया था. इसके बाद एमटी हेरोयिक इदुन को वहां पहुंचते ही कब्जे में ले लिया गया.

इंटरनैशल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ सी में दाखिल किए गए दस्तावेज़ों में कहा गया है कि इक्वेटोरियल गिनी की नौसेना ने समुद्री क़ानूनी का पालन किया है. नाइजीरिया की नौसेना के जहाज के भेजे अलर्ट के आधार पर इसे रोका गया है.

जहाज को रोके हुए लगभग तीन महीने हो गए हैं और इस बीच इसमें मौजूद चालक दल के सदस्यों ने रिकॉर्डेड वीडियो और फ़ोन कॉल के ज़रिए मदद मांगी है.

इक्वेटोरियल गिनी ने अभी तक इस पर सार्वजनिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है. हालांकि बीबीसी ने उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए उनसे संपर्क किया है.

नाइजीरिया

इमेज स्रोत, BBC

इमेज कैप्शन, चालक दल के सदस्यों का कहना है कि उन्हें नाइजीरिया ले जाया जा रहा है. वे डरे हुए हैं

20 लाख यूरो जुर्माना चुकाने के बाद भी रिहाई नहीं

शिप मास्टर के दोस्त और समुद्र में यात्रा करने का अनुभव रखने वाले कैप्टन सुखपाल सिंह ने बीबीसी हिंदी को बताया, "नॉर्वे के जिस ग्रुप का ये जहाज है उसने जुर्माने के तौर पर 20 लाख यूरो भी चुकाए हैं क्योंकि जिस वक़्त ये इक्वेटोरियल गिनी के समुद्री क्षेत्र में घुसा उस वक़्त इसने उस वक्त इसका झंडा नहीं लगाया हुआ था."

तनुज मेहता की पत्नी सपना त्रेहन ने बताया कि पिछले कुछ दिनों के दौरान क्रू मेंबर को अलग-अलग कर दिया गया है. उनके पति से फ़ोन भी ले लिया गया है.

उन्होंने बताया, "इनमें से 15 लोगों को इक्वेटोरियल के समुद्री जहाज से दूर ले जाया गया, जबकि कुछ लोग हेरोयिक इदुन में ही रह गए हैं. नौसेना के अधिकारी इन लोगों को घेरे हुए हैं."

इस सप्ताह इक्वेटोरियल गिनी के उप राष्ट्रपति ने ट्वीट करके कहा था कि इस जहाज को नाइजीरिया के हवाले कर दिया जाएगा. इसके बाद चालक दल के सदस्यों में हड़कंप मच गया.

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

वीडियो जारी कर मदद की मार्मिक अपील

कैप्टन तनुज मेहता के ससुर रिटायर्ड मैरिनर राजेश त्रेहन ने बीबीसी से कहा, "हर किसी को लग रहा था कि जुर्माना चुकाने के बाद जहाज और चालक दल के सदस्यों को छोड़ दिया जाएगा. जुर्माना 28 सितंबर को दे दिया गया था. इसके बाद उन्हें छोड़े जाने की उम्मीद थी. लेकिन अचानक इक्वेटोरियल गिनी ने नाइजीरिया के अनुरोध को स्वीकार करने का फ़ैसला कर लिया."

बहरहाल, चालक दल के सदस्यों के परिवारवालों ने जो वीडियो शेयर किए हैं, उनमें जहाज में मौजूद लोगों ने अपनी रिहाई के लिए मदद की अपील की है. उन्होंने अपील की कि उन्हें नाइजीरिया जाने से किसी भी तरह रोक लिया जाए."

इस चालक दल के सदस्यों में श्रीलंका, फिलीपींस और पौलैंड के नाविक भी शामिल हैं.

नाइजीरिया

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ड्यूटी पर तैनात नाइजीरिया नौसेना का जवान

नाइजीरिया क्यों नहीं जाना चाहते चालक दल के सदस्य?

कैप्टन त्रेहन कहते हैं, "ऐसी आशंका इसलिए जताई जा रही है कि समुद्री जहाज के चालक दलों का नाइजीरिया के बारे में अच्छा अनुभव नहीं रहा है."

2021 में नाइजीरिया ने एक स्विस टैंकर को छोड़ा था. इस टैंकर को तीन साल पहले क़ब्ज़े में लिया गया था.

कैप्टन सुखपाल सिंह कहते हैं, "नाविकों से बर्ताव के मामले में इन देशों का ट्रैक रिकार्ड ख़राब रहा है. इस तरह के बुरे अनुभवों के बाद कइयों ने अपना करियर ही छोड़ दिया है."

अपनी पत्नी को भेजे गए वीडियो में कैप्टन मेहता कहते हैं कि अगर नाविकों को नाइजीरिया ले गया तो वे 'मर जाएंगे'.

उन्होंने भारत सरकार से मदद मांगी है और कहा है उनकी जल्द से जल्द घर वापसी का इंतजाम कराए.

वो कहते हैं, "हमारे साथ क्या होगा ये हमें पता नहीं. वे हमारे साथ क्या करेंगे ये कोई नहीं जानता."

एक दूसरे वीडियो में वो कहते दिख रहे हैं कि चालक दल के सदस्यों को बंदूक की नोक पर जहाज चला कर जहाज नाइजीरिया ले जाने को कहा जाएगा.

वो कह रहे हैं, "हम फिर कभी अपने परिवार को नहीं देख पाएंगे."

नाविकों की ओर से शेयर किए गए एक और वीडियो में कहा जा रहा है कि चालक दल के सदस्य बीमार पड़ गए हैं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया है.

नाइजीरिया
इमेज कैप्शन, समुद्र में नाइजीरियाई समुद्री डाकुओं का भी जबरदस्त खौफ़ है.

भारत सरकार ने क्या कहा?

गुरुवार को भारत के विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने बताया कई देशों में मौजूद भारत दूतावास इक्वेटोरियल गिनी के अधिकारियों से बात कर रहे हैं ताकि इन नाविकों की रिहाई हो सके."

उन्होंने कहा, "विदेश मंत्री स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं, नाविकों के परिवार वालों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. हमारी कोशिश है कि नाविक सुरक्षित अपने घर लौट जाएं.''

बीबीसी ने इस मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से बात करने की कोशिश की लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला..

इस बीच, नाविकों के परिवार वालों में उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता काफ़ी बढ़ गई है.

जहाज के चीफ़ ऑफिसर सानू जोस की पत्नी मातिल्दा ने कहा कि "उनके परिवार काफी थक गए हैं और वे कमज़ोरी महसूस कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "पिछले दिनों भारतीय दूतावास के कुछ कर्मचारी हिरासत में रखे गए नाविकों को देखने आए थे. तब जाकर उन्हें थोड़ा पानी और खाना मिला था."

वे कहती हैं, "इस समय में मुझे ये पता नहीं कि वे किस हाल में हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)