BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

पेले

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नमस्ते. उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे होंगे.

हम जानते हैं कि रोज़मर्रा की आपा-धापी के बीच आपके लिए देश-दुनिया की हर ख़बर पर नज़र रखना मुश्किल रहता होगा.

ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.

ये पाँच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.

पेले: मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी की अनसुनी कहानियां

1977 में खेल से रिटायरमेंट लेने वाले पेले, आज भी दुनिया के सबसे मशहूर खिलाड़ियों में शामिल पेले का निधन हो गया है. वे 82 साल के थे और पिछले कुछ समय से किडनी और प्रोस्टेट की बीमारियों जूझ रहे थे.

पेले तीन फ़ुटबॉल विश्व कप जीतने वाली टीमों का हिस्सा रहे हैं. ऐसा करने वाले वो दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं. अपने करियर में 1363 मैच खेलने वाले पेले ने रिकॉर्ड 1281 गोल किए.

उनके खेल और रिकॉर्ड से जुड़े सैंकड़ों किस्से दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं लेकिन इतिहास के इस सबसे प्रसिद्ध खिलाड़ी से जुड़ी कुछ ऐसी बाते हैं जो कई लोगों को नहीं पता. पढ़िए ऐसे ही कुछ रोचक किस्से. पूरी कहानी यहां पढ़िए.

मोदी की विदेश नीति की पताका क्या वाक़ई जयशंकर ने बुलंद की

मोदी-जयशंकर

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नवंबर के आख़िरी हफ़्ते में मैं भूटान गया था. भूटान के कुछ युवाओं से पूछा कि वे भारत में अभी किस नेता को पसंद करते हैं?

उनमें से फुब शेरिंग नाम के एक युवा ने कहा, एस जयशंकर. फुब के जवाब से वहाँ के सभी युवाओं ने सहमति जताई. फुब से पूछा कि वह जयशंकर को क्यों पसंद करते हैं?

इसका जवाब उन्होंने हिन्दी में ही देते हुए कहा, ''जयशंकर जो भी बोलते हैं, सीधा बोलते हैं. यूक्रेन पर हमले के बाद रूस से भारत के तेल ख़रीदने पर यूरोप और अमेरिका ने सवाल उठाए तो जयशंकर ने बिल्कुल दो टूक जवाब दिया था. मुझे तो सुनकर मज़ा आ गया था. मैंने अब तक दक्षिण एशिया के विदेश मंत्रियों को पश्चिम को इस तरह से जवाब देते हुए नहीं देखा था.''

जयशंकर की तारीफ़ करने वाले पड़ोसी मुल्क के केवल फुब नहीं हैं बल्कि पश्चिम के डिप्लोमैट भी हैं. पूरी कहानी यहां पढ़िए.

पाकिस्तानी मुद्रा

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पाकिस्तान डिफ़ॉल्ट नहीं होगा, इस दावे में है कितना दम

पाकिस्तान में पिछले आठ महीने से जारी राजनीतिक अस्थिरता और इस साल की बाढ़ ने देश को आर्थिक तौर पर बहुत नुकसान पहुंचाया है.

देश में अनिश्चितता की स्थिति पैदा होने से न सिर्फ़ पूंजी निवेश प्रभावित हुआ है बल्कि आर्थिक घाटा बढ़ने के साथ पाकिस्तानी रुपये के मूल्य की तुलना में डॉलर आसमान छू रहा है.

पाकिस्तानी मुद्रा इस समय डॉलर के मुक़ाबले अत्यधिक दबाव में है.

इसके अन्य कारणों के अलावा एक बुनियादी वजह आयात में इज़ाफ़ा है जिससे डॉलर की मांग में बहुत वृद्धि हुई है जबकि दूसरी ओर देश के निर्यात में मामूली बढ़ोतरी हुई है.

डॉलर के मूल्य में वृद्धि के कारण वाणिज्यिक और आर्थिक घाटा बढ़ रहा है, वहीं देश के मुद्रा विनिमय के कोष में भी काफ़ी कमी आई है. आर्थिक विशेषज्ञ व्यापारिक घाटे में वृद्धि को देश की अर्थव्यवस्था के लिए ख़तरनाक संकेत मानते हैं. आगे की स्टोरी यहां पढ़िए.

पुतिन का वो अंतहीन दुख जो ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा

पुतिन

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जर्मनी की पूर्व चांसलर एंगेला मर्केल ने एक बार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से पूछा था कि उनकी अब तक की सबसे बड़ी ग़लती क्या है? पुतिन ने अपने जवाब में कहा था- आप पर भरोसा करना.

पुतिन साल 2000 में 47 साल की उम्र में रूस के राष्ट्रपति बने थे. राष्ट्रपति बनने के बाद वह रूस की पहचान को यूरोप से जोड़कर देखते थे.

25 सितंबर, 2001 को पुतिन ने जर्मनी की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि रूस एक मित्रवत यूरोपीय देश है. रूसी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा था कि यूरोप में स्थिरता और शांति ही उनके देश का अहम मक़सद है.

पुतिन ने जर्मन संसद में कहा था कि लोकतांत्रिक अधिकार और स्वतंत्रता ही रूस की घरेलू नीति का लक्ष्य है.

पुतिन जब ऐसा कह रहे थे तो जर्मन सांसद खड़े होकर ताली बजा रहे थे और इसमें एंगेला मर्केल भी शामिल थीं. तब मर्केल सांसद की हैसियत से वहाँ मौजूद थीं.

पेरिस में न्यूयॉर्क टाइम्स के मुख्य संवाददाता रोज़र कोहेन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पुतिन उस बर्लिन शहर में ये बातें कर रहे थे, जो लंबे समय तक पश्चिम और सोवियत संघ के बीच विभाजन का प्रतीक रहा है.

लेकिन यह कोई पहला मौक़ा नहीं था, जब पुतिन रूस को यूरोप की संस्कृति से जोड़कर देखते थे और समृद्ध यूरोप की बात करते थे. पूरी ख़बर यहां पढ़ें.

बॉक्स ऑफ़िस 2022: किन फ़िल्मों ने मचाया धमाल और कौन-सी फ़िल्में पिट गईं

फ़िल्म

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लॉकडाउन में भारी दिक़्क़तों का सामना कर चुका भारतीय सिनेमा उद्योग उस झटके से उबरने की कोशिशें कर रहा है.

हालांकि 2021 के काले बादल हिंदी सिनेमा के आसमान से अभी पूरी तरह छंटे नहीं हैं.

इस साल आई कुछ फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा किया, लेकिन कई फ़िल्में कोरोना काल के पहले वाला प्रदर्शन नहीं दुहरा पाईं.

भारत में कोरोना महामारी के क़हर के बाद जब सामान्य जनजीवन लौटा तो सिनेमाहॉल लोगों के लिए खोल दिए गए और फिर से फ़िल्म इंडस्ट्री में उम्मीद जगी.

इस साल कई फ़िल्में सिल्वर स्क्रीन पर रिलीज़ हुईं, इनमें कुछ बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छी कमाई के साथ विवादों में भी रहीं.

फ़िल्म ट्रेड मैगज़ीन 'कम्पलीट सिनेमा' ने बीबीसी के साथ बॉक्स ऑफ़िस के आंकड़े साझा किये.

आईए जानते हैं कि 2022 में किस फ़िल्म का कैसा प्रदर्शन रहा. पूरी ख़बर यहां पढ़ें.

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