लश्कर-जैश जैसे पाकिस्तानी आतंकी समूह जा रहे हैं अफ़ग़ानिस्तान, पूर्व अफ़ग़ान सुरक्षा प्रमुख बोले- प्रेस रिव्यू

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अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व सुरक्षा प्रमुख ने दावा किया है कि तालिबान सरकार लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूहों को अफ़ग़ाानिस्तान में अपना ठिकाना बनाने दे रही है.

आज प्रेस रिव्यू में सबसे पहले अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' की ये ख़बर.

अफ़ग़ान ख़ुफ़िया विभाग के पूर्व निदेशक रहमतुल्लाह नाबिल ने द हिंदू को इंटरव्यू दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत को तालिबान के साथ बातचीत जारी रखनी चाहिए लेकिन उसे अपनी सुरक्षा को लेकर कोताही नहीं करनी चाहिए.

उन्होंने चेतावनी दी कि तालिबान की मदद से भारत को निशाना बनाने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी समूहों ने अफ़ग़ानिस्तान को अपना नया ठिकाना बना लिया है और अब उनकी पहुंच बेहतर तकनीक तक हो रही है.

अमेरिकी और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ तालिबान विरोधी अफ़ग़ान नेताओं के एक सम्मेलन से दौरान रहमतुल्लाह नाबिल अख़बार द हिंदू से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ बातचीत जारी रखना ज़रूरी है लेकिन भारत को 'अपने हितों' को ध्यान में रखते हुए पूर्व नेताओं के साथ अपने रिश्ते बनाए रखने चाहिए, भले ही वो अभी सत्ता में न हों.

रहमतुल्लाह नाबिल पूर्व अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई और अशरफ़ ग़नी के दौर में नेशनल डिफेंस सेक्रेटेरियट के निदेशक रहे हैं. अशरफ़ ग़नी के पाकिस्तान दौरे के मुद्दे पर उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था.

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उन्होंने ये भी कहा कि तालिबान से एक बार फिर सत्ता में आने के बाद उन्हें भारत आने के लिए वीज़ा नहीं दिया गया.

नाबिल अफ़ग़ानिस्तान के उन पूर्व अधिकारियों में शुमार हैं जिन्होंने तालिबान पर आरोप लगाया कि भारत के साथ उनके बेहतर रिश्तों के कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "हम अभी भारत को सलाह देने की स्थिति में तो नहीं हैं, वो हमसे बेहतर समझते हैं कि उनके राष्ट्रीय हित क्या हैं. लेकिन उन्हें किसी तरह के वहम में नहीं रहना चाहिए कि तालिबान बदल गए हैं. अगर उनकी मुलाक़ातें अच्छी हुईं या फिर तालिबानी नेता उनका अच्छे से स्वागत करें, तो भी भारत को समझना चाहिए कि भारत-विरोधी विचार उनके ख़ून में है."

भारत-अमेरिका सैन्याभ्यास

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अमेरिका संग युद्धाभ्यास पर भारत का चीन को जवाब- 'किसी तीसरे देश के पास वीटो नहीं'

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भारत ने उत्तराखंड के ऑली में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास अमेरिका के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास पर चीन की आपत्तियों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है. भारत ने कहा है कि हमारे सैन्य अभ्यास पर किसी भी तीसरे देश के पास 'वीटो' नहीं है.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, चीन एलएसी के पास इस सैन्य अभ्यास को भारत के साथ उसे सीमा संबंधित मुद्दों में अमेरिका के दखलअंदाज़ी के तौर पर देख रहा है.

चीन पर निशाना साधते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि ऑली में अमेरिका के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास का चीन के साथ 1993 और 1996 में हुए समझौतों से कोई लेना-देना नहीं है.

बागची ने कहा, "चूंकि चीनी पक्ष ने इस मुद्दे को उठाया है, ऐसे में मैं इस बात को रेखांकित करूंगा कि चीन को 1993 और 1996 के समझौते के उसके द्वारा किए गए उल्लंघन करने के बारे में खुद सोचना चाहिए. भारत किसके साथ युद्धाभ्यास करता है, उसको लेकर कोई तीसरी पक्ष वीटो नहीं दे सकता है."

उन्होंने कहा कि भारत का अमेरिका के साथ संबंध है और इसे कोई वीटो नहीं कर सकता.

भारत के साथ संबंधों में दखल नहीं देने की अमेरिका को चीन की चेतावनी के बारे एक खबर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कहा कि इस पर वह क्या कह सकते हैं, क्योंकि उन्हें धमकी नहीं दी गई.

दरअसल, पेंटागन ने कांग्रेस (संसद) में पेश एक रिपोर्ट में ये बताया था कि चीन ने अमेरिकी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वो भारत के साथ उसके संबंधों में दखल न दें.

पेंटागन ने कहा कि साल 2021 के दौरान पीएलए ने भारत-चीन सीमा के एक खंड पर सैन्य बलों की तैनाती बरकरार रखी और एलएसी के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण भी जारी रखा. रिपोर्ट में कहा गया है कि गतिरोध के समाधान के लिए भारत और चीन के बीच वार्ता में न्यूनतम प्रगति हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष सीमा पर अपने-अपने स्थान से हटने का विरोध करते हैं.

यूक्रेन पर जी-20 देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करेगा भारत

भारत ने ये भी कहा है कि यूक्रेन के मुद्दे पर बंटे हुए जी-20 देशों के बीच एक राय बनाने की कोशिश करेगा. भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान रूस के जी-20 की सभी प्रक्रियाओं में हिस्सा लेने की उम्मीद भी जताई है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "जी-20 देशों को एक आवाज़ में बोलने की ज़रूरत है. रूस जी-20 का एक सदस्य है और इसलिए हम उससे उम्मीद करते हैं कि वो इस समूह से जुड़ी हर प्रक्रिया में हिस्सा ले."

नरेंद्र मोदी

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मोदी बोले, कांग्रेस में मेरा अपमान करने का कंपीटिशन चल रहा है

बीबीसी हिंदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 'रावण' वाले बयान पर पलटवार करते हुए गुरुवार को कहा कि कांग्रेस के नेताओं में 'देश के प्रधानमंत्री का अपमान करने का कंपीटिशन चल रहा है' और चुनावों में हार के बाद उनका 'मानसिक संतुलन खो रहा है.'

अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मोदी की रैली की तस्वीर को पहले पन्ने पर जगह दी है. इसी के साथ गुरुवार को पचमहल के कलोल में दिए उनके बयान को भी जगह दी है.

मोदी कलोल में बीजेपी की चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे जहां दूसरे चरण में 5 दिसंबर को मतदान होने हैं.

इस दौरान उन्होंने कहा कि "कांग्रेस को लगा कि अभी और बोलना बाकी है, इसलिए खड़गे को यहां भेजा. मैं खड़गे जी का सम्मान करता हूं लेकिन उन्होंने वही कहा होगा, जो उन्हें कहने के लिए बोला गया होगा."

इसी ख़बर को हिंदुस्तान टाइम्स ने भी अपने पहले पन्ने पर जगह दी है.

अख़बार लिखता है कि मोदी ने कहा कि कांग्रेस में इस बात की होड़ है कि पीएम को सबसे ज़्यादा कौन गाली देगा.

अख़बार के अनुसार पीएम मोदी ने कहा, "कुछ दिन पहले एक कांग्रेस नेता ने कहा था कि मोदी ... की मौत मरेगा, एक ने कहा कि वो हिटलर जैसे मरेगा. किसी ने कहा कि अगर मुझे मौका मिला तो मैं खुद मोदी को मारूंगा...कोई रावण कहता है, कोई राक्षस कहता है तो कोई कॉकरोच कहता है."

मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसी सप्ताह अहमदाबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, "पार्षद चुनाव में भी आपको देखें, विधायकों के चुनाव में भी आपको देखें, सांसद चुनाव में भी आपको देखें, कितनी बार आपको देखें. आपके कितने रूप हैं? क्या रावण की तरह आपके 100 मुख हैं?"

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