अमेरिका: समलैंगिक और अंतर-नस्लीय शादियों को मिलेगी क़ानूनी हिफ़ाज़त, सीनेट में ऐतिहासक बिल पास

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अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने समलैंगिकों और अलग-अलग नस्लों के बीच होने वाली शादियों की हिफ़ाजत के लिए एक ऐतिहासिक विधेयक पास किया है.
ये विधेयक अब अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में जाएगा जहां इसके पास होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके बाद ये विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति के समक्ष जाएगा.
विधेयक के समर्थकों को उम्मीद है कि प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण में आने से पहले ही ये विधेयक पास हो जाएगा.
हाल ही में हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल हुआ है. वहीं, सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत कायम है.
इस विधेयक के तहत अमेरिका के सभी राज्यों पर समलैंगिक विवाह को कानूनी दर्जा देने की बाध्यता नहीं है.
ये विधेयक पास कराने को लेकर कोशिशें सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के बाद शुरू हुईं जिसमें अदालत ने गर्भपात कराने के संघीय अधिकार को ख़ारिज कर दिया था.
एलजीबीटी अधिकारों के पक्षधर मानते हैं कि समलैंगिक विवाह से जुड़े कानून पर आने वाले दिनों में ख़तरा मंडरा सकता है.
मंगलवार को 36 के मुकाबले 61 वोटों से ये विधेयक पास हुआ. इसमें से 12 रिपब्लिकन सीनेट सदस्यों ने इस विधेयक के पक्ष में वोट दिया.
धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े प्रावधान जोड़े जाने के बाद रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सीनेट सदस्यों ने इस विधेयक को अपना समर्थन दिया है.
'समानता का दायरा बढ़ाने की दिशा में उठाया गया क़दम'

इस विधेयक का उद्देश्य समलैंगिक विवाह के अधिकार को संघीय कानून के ज़रिए सुरक्षा देना है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले के तहत पूरे अमेरिका में इस तरह के रिश्तों को पहले ही संरक्षण मिला हुआ है.
अमेरिकी सीनेट के नेता चक शूमर ने बताया है कि यह समाज में समानता का दायरा बढ़ाने की दिशा में उठाया गया एक अहम क़दम है.
उन्होंने कहा, "इस विधेयक को स्वीकार करके सीनेट एक ऐसा संदेश भेज रही है जिसे प्रत्येक अमेरिकी नागरिक को सुनने की ज़रूरत है - ये ज़रूरी नहीं है कि आप कौन हैं और किससे प्यार करते हैं, आप कानून के तहत सम्मान और समान बर्ताव के अधिकारी हैं."
इस विधेयक को पेश करने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेटर टैमरी बाल्डविन हैं जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने गे होने की बात स्वीकार की है.
बाल्डविन ने कहा है कि ये विधेयक अमेरिका में विवाह करने की समानता का अधिकार हासिल करने की दिशा में जो प्रगति हुई है, उसकी रक्षा करेगा.
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इस विधेयक में क्या-क्या शामिल है

इस विधेयक के तहत ये व्यवस्था की गयी है कि अगर भविष्य में समलैंगिक विवाह के संवैधानिक अधिकार को कमजोर या सुप्रीम कोर्ट की ओर से ख़त्म कर दिया जाता है तो उस स्थिति में 'रेस्पेक्ट फॉर मैरिज एक्ट' इन अधिकारों की रक्षा करेगा.
अगर ऐसा होता है तो विवाह के मुद्दे संभावित रूप से प्रांतीय सरकारों के अधिकार क्षेत्र में जा सकते हैं. और अमेरिका में अभी भी कई प्रांत कानूनी रूप से समलैंगिक विवाहों पर प्रतिबंध या पूर्ण रोक लगाते हैं.
ये नया विधेयक आधिकारिक रूप से साल 1996 के क़ानून 'डिफेंस ऑफ़ मैरिज एक्ट' को निरस्त करता है. इस कानून के तहत विवाह को महिला और पुरुष के बीच शादी के रूप में परिभाषित किया गया है.
अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने साल 2013 में इस क़ानून को असंवैधानिक करार दिया था.
इस विधेयक के तहत राज्यों पर दूसरे राज्यों में हुई वैध समलैंगिक शादियों को भी स्वीकार करने की ज़िम्मेदारी है. इसके साथ ही राज्यों पर ये भी ज़िम्मेदारी है कि समलैंगिक दम्पतियों को संघीय कानूनों के तहत मिलने वाले लाभ मिलें.
इस विधेयक पर पिछले कई महीनों से जारी द्विदलीय वार्ताओं के बाद मतदान हुआ है. इसके साथ ही सीनेट में इस विधेयक पर मध्यावधि चुनाव के बाद मतदान कराया गया है जिससे नेताओं पर चुनाव का दबाव कम हो गया है.
इस साल की शुरुआत में इसी विधेयक का पुराना स्वरूप अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा से पास हो चुका है. हालांकि, कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने इस विधेयक का समर्थन किया है. लेकिन ज़्यादातर रिपब्लिकन नेता इस विधेयक का समर्थन नहीं कर रहे हैं.
साल 2022 के जुलाई महीने का गैलप पोल में सामने आया था कि 71 फीसद अमेरिकी समलैंगिक विवाह का समर्थन करते हैं.
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ऑबेरगेफ़ेल बनाम हॉजेज़ और सुप्रीम कोर्ट

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में ओबेरगेफ़ेल बनाम होजेज़ मामले में ऐतिहासिक फ़ैसला देते हुए पूरे देश में समलैंगिक रिश्तों को संरक्षण प्रदान किया था.
इस एक फ़ैसले ने गे मैरिज पर लगे मौजूदा प्रतिबंधों को निरस्त करने के साथ ही अमेरिका में समलैंगिक जोड़ों को विवाह करने का अधिकार दिया.
यही नहीं, इस फ़ैसले की वजह से समलैंगिक जोड़े वे सभी कानूनी अधिकार और लाभ हासिल कर सकते हैं जो विवाहित महिलाओं और पुरुषों को प्राप्त हैं.
सुप्रीम कोर्ट में इस समय कंज़र्वेटिव विचारधारा के जजों की संख्या ज़्यादा है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने जब डॉब्स बनाम जैक्सन विमन हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन मामले में गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को ख़ारिज कर दिया तो शादी से जुड़े अधिकारों को लेकर आशंकाएं प्रबल हो गयीं.
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इस मसले में एक कंज़र्वेटिव जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने ये कहा कि जिन उदाहरणों के जरिये समलैंगिक शादियों और गर्भनिरोधक पर फैसले दिए गए हैं, उन्हें चुनौती दी जा सकती है.
2015 में सुप्रीम कोर्ट में इस मुकदमे को ले जाने वाले प्रमुख वादी जिम ऑबेरगेफेल ने बीबीसी ने कहा कि वो रेस्पेक्ट ऑफ मैरिज एक्ट से बिल्कुल खुश नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के लिए समान विवाह को मान्यता देना जरूरी है. हालांकि 2015 के फैसले को रद्द किया जाता है तो समलैंगिक जोड़ों को कुछ राज्य मैरिज लाइसेंस देने से इनकार कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि वह बिल में उस संशोधन से हताश हैं जो नॉन प्रॉफिट धार्मिक संगठनों को समलैंगिक शादी समारोहों में सर्विस और सुविधाएं देने से रोकता है.
कई धार्मिक समूहों ने इस बिल का समर्थन किया है. जिन धार्मिक समूहों ने बिल का समर्थन किया है उनमें चर्च ऑफ जीसस क्राइस्ट ऑफ़ लेटर डे सेंट्स शामिल हैं.
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