अडानी पोर्ट पर हिंसाः केरल के इस बंदरगाह को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है?

इमेज स्रोत, KB JAYACHANDRAN
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को शुक्रवार तक अडानी पोर्ट में ट्रकों को दाख़िल होने की अनुमति देने के अपने आदेश के पालन पर जवाब दाख़िल करने के लिए कहा है.
अदालत ने सरकार से पूछा है कि विझिंजम पोर्ट (जो अडानी पोर्ट के नाम से चर्चित है) पर हुई हिंसा के बाद दर्ज हुई एफ़आईआर में अब तक क्या कार्रवाई हुई है.
सोमवार को अदालत में विझिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट लीमिटेड (वीआईएसएल) की याचिका पर सुनवाई हुई जिसके दौरान ये मौखिक सुझाव दिया गया. इस पोर्ट का निर्माण अडानी समूह कर रहा है.
शनिवार को हुई हिंसा के बाद पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लिया था. जिन्हें छुड़ाने के लिए रविवार रात थाने पर हमला कर दिया गया और इस दौरान भी हिंसा हुई. सोमवार को इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई हुई.
अडानी पोर्ट के निर्माण का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने निर्माण सामग्री ले जा रहे ट्रकों को पोर्ट में दाख़िल होने से रोक दिया था. इस पोर्ट के निर्माण के समर्थन में भी प्रदर्शन हो रहा है.
इन प्रदर्शनों की अगुवाई लैटिन कैथोलिक चर्च कर रहा है. प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि पोर्ट के निर्माण की वजह से समंदर को हो रहे नुक़सान के बारे में गहन वैज्ञानिक अध्ययन हो.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पोर्ट के निर्माण की वजह से उत्तर की तरफ़ तट को नुक़सान हो रहा है.
लैटिन कैथोलिक चर्च के अधिवक्ता शेरी थॉमस ने बीबीसी से कहा, "अध्ययन करने में सिर्फ़ तीन महीने का समय लगना है. आज प्रदर्शन का 130वां दिन है. हम पहले ही पोझीनूर और अंचुथेंगू इलाक़ों में क्षरण देख रहे हैं. आप कहीं भी इस तरह का जवाबी विरोध नहीं देखेंगे जैसा कि थिरूवनंतपुरम में हो रहा है."
7500 करोड़ की लागत वाले इस बंदरगाह का प्रस्ताव कांग्रेस और यूडीएफ़ के गठबंधन की सरकार के दौरान आया था. तब ओमन चांडी केरल के मुख्यमंत्री थे. उस समय भारत में डीप वॉटर पोर्ट भी नहीं था. इस समय बड़े कंटेनर जहाज़ दुबई, सिंगापुर और कोलंबो में ठहरते हैं. ये सभी भारत से आने-जाने वाला सामान के हब भी हैं.
आर्चबिशप कर रहे हैं प्रदर्शनों की अगुवाई

इमेज स्रोत, Reuters
इस पोर्ट को लेकर हो रहे प्रदर्शन और इनसे खड़ा हुआ विवाद कई मामलों में अभूतपूर्व भी है.
प्रदर्शनों का नेतृत्व लैटिन कैथोलिक चर्च के आर्चबिशप डॉ. थॉमस नेटो कर रहे हैं, कि सात मांगे हैं. ये हैं- तट के क्षरण का स्थायी समाधान, तटीय क्षरण की वजह से जिन लोगों के घर गए हैं और ज़मीन गई है उन्हें अस्थायी रूप से कहीं और बसाना, और घर और ज़मीन गंवाने वाले लोगों के लिए व्यावहारिक परियोजनाएं लागू करना.
आसपास के गांवों में रहने वाले लैटिन कैथोलिक चर्च के अनुयायियों का मुख्य तर्क यह है कि पोर्ट का तीस प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है और इसके दुष्प्रभाव दिखने लगे हैं.
अडानी कंपनी की तरफ़ से दायर याचिका पर जवाब देते हुए चर्च की क़ानूनी टीम ने कहा है कि "घरों की सात से अधिक कतारें क्षरण की वजह से बह गई हैं." और 2016 के बाद से ही महिलाएं और बच्चें सीमेंट के गोदाम में रहने को मजबूर हैं.
आरोप है कि 2017 में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने वरिष्ठ वैज्ञानिकों की विशेषज्ञ समिति के गठन का जो आदेश दिया था उसका पालन भी नहीं किया गया है.
लेकिन एक ग़ैर सरकारी संघटन विझिंजम पोर्ट एक्शन काउंसिल ने प्रदर्शनकारियों के तर्क पर जवाब देते हुए कहा है कि निर्माण स्थल के क़रीब के दो बीच शंकुमुगम बीच और वलाईथूरा बीच अपनी पुरानी प्राकृतिक स्थिति में लौट चुके हैं.
एनजीओ से जुड़े प्रशांत डेविड ने बीबीसी से कहा, "इसका मतलब है कि समंदर के उत्तरी तरफ़ ज़मीन का क्षरण नहीं हो रहा है जैसा कि प्रदर्शनकारी दावा कर रहे हैं. समुद्र ने स्वंय ही उनके तर्क का जवाब दे दिया है."
डेविड इस समय पोर्ट के निर्माण को जारी रखवाने के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं. वो कहते हैं, "ये इस प्रोजेक्ट को नुक़सान पहुंचाने के प्रयास के अलावा कुछ भी नहीं है. ये भी सच नहीं है कि तट के क़रीब रहने वाले सभी लोग लैटिन कैथोलिक चर्च के अनुयायी हैं. यहां रहने वाली आबादी में सभी समुदायों के लोग हैं. इनमें हिंदू, ईसाई और मुसलमान सभी शामिल हैं."
केरल के पोर्ट मंत्री अहमद देवारकोइल ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हमने उस दिन ही सुनिश्चित किया था कि प्रदर्शनकारियों और जिन लोगों के घरों पर हमला हुआ है उनके बीच कोई झड़प ना हो. हमने देखा कि उस दिन दूसरे धर्म के लोगों के घरों पर हमले का प्रयास हुआ. केरल जैसे राज्य में जहां हम धर्म-निरपेक्षता को बढ़ावा देते हैं, इस तरह की चीज़ें स्वीकार नहीं की जाएंगी. हम यहां किसी भी सूरत में सांप्रदायिक तनाव नहीं होने देंगे."
जब इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरू हुआ तो एक्शन काउंसिल एनजीओ को बीजेपी और दूसरे हिंदूवादी और धार्मिक समूहों का समर्थन भी मिलने लगा.
राजनीति से आगे बढ़ रहा है मुद्दा?

इमेज स्रोत, Reuters
अडानी पोर्ट ने एक तरह से राजनीतिक दलों के नज़रिए में भी बदलाव किया है.
इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव जब कांग्रेस पार्टी लाई थी तब सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ़ गठबंधन ने इसका विरोध किया था.
राज्य सरकार ने अगस्त 2015 में केरल सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाले उपक्रम वीआईएसएल के रियायतग्राही के रूप में अडानी विझिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को चुना. जब सीपीएम के नेतृत्व में लेफ्ट फ्रंट की सरकार राज्य में 2016 में सत्ता में आई तब उसने भी प्रोजेक्ट के निर्माण को नहीं रोका.
इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य दिसंबर 2015 में शुरू हो गया था लेकिन कई कारणों से निर्माण में देरी हुई. निर्माण के लिए चट्टानों की कमी, तूफ़ान जैसी प्राकृतिक आपदाओं और कोविड महामारी ने इसके काम को प्रभावित किया. कोविड महामारी के बाद जब निर्माण फिर से शुरू हुआ तो कैथोलिक चर्च के प्रदर्शन ने इसमें खलल डाल दिया.
एक हैरान करने वाली बात ये भी है कि इस पोर्ट के मामले में बीजेपी और सीपीएम साथ-साथ हैं और दोनों ही इसके निर्माण का समर्थन कर रहे हैं. अब तक इस मामले पर शांत रही सीपीएम की राज्य समिति ने भी बयान जारी किया है, "एक ख़ास वर्ग के लोगों ने सुनियोजित तरीके से दंगे किए हैं ताकि लोगों में तनाव पैदा हो और राज्य को अस्थिर करने के लिए ये प्रोजेक्ट ही पटरी से उतर जाए."
अडानी विझिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने हाई कोर्ट में परमादेश याचिका दायर करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों ने अगस्त में पोर्ट का रास्ता बंद कर दिया और पुलिस मूकदर्शक बनीं रही. तीन दिन बाद प्रदर्शनकारी पुलिस के बैरीकोड तोड़कर हाई सिक्यूरिटी इलाक़े में दाखिल हो गए और मुख्य दरवाज़े को तोड़ने के अलावा संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाया.
हाई कोर्ट के निर्देशानुसार शुक्रवार को निर्माण के लिए पत्थर ले जा रहे ट्रकों को पोर्ट में दाख़िल होने दिया जाना था.
थॉमस कहते हैं, "लेकिन ट्रक अगले दिन शनिवार को आए. उस दिन निर्माण का समर्थन करने वाले लोग बड़ी तादाद में आए और पोर्ट के गेट पर दोनों समूहों में झड़प हुई."
थॉमस ने आरोप लगाया, "सेल्टोन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ़्तार कर लिया गया लेकिन वो उस समय समंदर में था और उस समय उसकी नाव खो गई थी. जब चार लोग सेल्टोन के बारे में पूछने गए तो उन्हें भी गिरफ़्तार कर लिया गया. जल्द ही कुछ लोगों ने पुलिस स्टेशन पर पत्थरबाज़ी कर दी. अधिकतर पत्थर पुलिस स्टेशन के पीछे से आ रहे थे."
कई प्रयासों के बाद भी पुलिस की तरफ़ से इस घटनाक्रम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी.
रविवार रात को थाने पर हमले के बाद पुलिस ने हिरासत में लिए गए चार लोगों को छोड़ दिया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















