केरल में अडानी ग्रुप के बंदरगाह का विरोध जारी, मछुआरों ने थाने पर बोला हमला: प्रेस रिव्यू

गौतम अडानी

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इमेज कैप्शन, भारतीय व्यवसायी गौतम अडानी

केरल में अडानी समूह के निर्माणाधीन बंदरगाह को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है. बीती रात इस बंदरगाह का विरोध कर रहे मछुआरों ने स्थानीय पुलिस थाने पर हमला बोल दिया है.

अंग्रेजी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, ये मछुआरे शनिवार को हुई हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग कर रहे हैं.

अडानी समूह केरल में साल 2015 से एक मेगा पोर्ट का निर्माण कर रहा है जिसका नाम विझिनजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह है.

लेकिन इसे लेकर स्थानीय निवासियों और मछुआरों की ओर से विरोध किया जा रहा है.

इन पक्षों का मानना है कि बंदरगाह बनने से उनकी जीविका पर असर पड़ने के साथ ही तटीय क्षरण हो रहा है.

अडानी समूह का बंदरगाह

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इमेज कैप्शन, केरल में अडानी समूह के बंदरगाह का गेट

ये पक्ष मांग कर रहे हैं कि सरकार निर्माण कार्य पर रोक लगाकर बंदरगाह की वजह से मरीन इकोसिस्टम पर पड़ने वाले असर का स्वतंत्र ढंग से अध्ययन कराए.

हालांकि, अडानी समूह का दावा है कि उनकी ये परियोजना पूरी तरह नियमबद्ध है और आईआईटी जैसी बड़ी संस्थाओं ने इसकी वजह से तटीय क्षरण होने की बात को नकारा है.

इस मामले में हाई कोर्ट की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अडानी समूह ने बीते शनिवार निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की थी.

अडानी समूह के प्रवक्ता ने दावा किया है कि शनिवार को लगभग 25 ट्रकों ने पोर्ट में घुसने की कोशिश की लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ा और दो ट्रकों पर प्रदर्शनकारियों की ओर से पत्थरबाज़ी की गयी.

मछुआरा समुदाय की महिलाएं विरोध प्रदर्शन को लेकर हो रही चर्चा सुनती हुईं

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इमेज कैप्शन, मछुआरा समुदाय की महिलाएं विरोध प्रदर्शन को लेकर हो रही चर्चा सुनती हुईं

इसके बाद ही हिंसा का दौर शुरू हुआ.

लेटिन कैथोलिक आर्कडायसीज़ ने बंदरगाह का विरोध कर रहे लोगों का समर्थन करते हुए ट्रकों को अंदर जाने से रोक किया.

इसके बाद, बंदरगाह का विरोध कर रहे लोगों का सामना स्थानीय हिंदू संगठनों से हुआ जो 7500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं.

बंदरगाह के समर्थन में जुटे लोगों को संबोधित करते हुए हिंदू संगठन के नेता

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इमेज कैप्शन, बंदरगाह के समर्थन में जुटे लोगों को संबोधित करते हुए हिंदू संगठन के नेता

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, इसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करते हुए पोर्ट कर्मचारियों को हिंसा प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर ले जाना पड़ा.

इसके साथ ही पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया जिसमें दोनों पक्षों के लोग घायल हुए. इसके बाद पुलिस ने इस मामले में दर्ज़ एफ़आईआर में तिरुवनंतपुरम के आर्चबिशप थॉमस नेट्टो, ऑग्ज़लरी बिशप आर क्रिस्तुदास समेत कई अन्य पादरियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया.

इसके साथ ही पुलिस ने शनिवार को हुई हिंसा के मामले में पांच मछुआरों को हिरासत में लिया.

पुलिसकर्मी

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इमेज कैप्शन, हालात तनावपूर्ण होने के बाद तैनात पुलिसकर्मी

इन मछुआरों को छुड़ाने और पुलिस की कार्रवाई के विरोध में रविवार की रात मछुआरों ने पुलिस थाने पर हमला किया जिसमें कई पुलिसकर्मी जख़्मी हुए हैं.

स्थानीय न्यूज़ वेबसाइट मनोरमा ऑनलाइन की ख़बर के मुताबिक़, इस पुलिस थाने को घेरने वालों में महिलाएं भी शामिल थीं.

गहलोत के 'गद्दार' बयान पर कांग्रेस आलाकमान करेंगे फ़ैसला

जयराम रमेश, कांग्रेस नेता

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच जारी कलह में कांग्रेस आलाकमान जल्द ही कुछ फ़ैसला कर सकते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, रविवार को पहली बार पार्टी ने साफ किया कि गहलोत को कुछ ख़ास शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था.

यह स्पष्ट करते हुए कि पार्टी गहलोत और पायलट दोनों को महत्व देती है, एआईसीसी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने स्वीकार किया कि दोनों के बीच कुछ मतभेद हैं.

लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा कि "मुख्यमंत्री की ओर से इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द अप्रत्याशित थे … मुझे भी बहुत आश्चर्य हुआ. और मैं यह भी कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री को कुछ ख़ास शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए."

कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी को गहलोत और पायलट दोनों की ज़रूरत है. कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे मामलों में पार्टी कड़े फैसले लेने से भी नहीं कतराएगी.

पार्टी के सूत्रों ने कहा कि राजस्थान में गहलोत बनाम पायलट के विवाद पर आलाकमान राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा के बाद ही कोई निर्णय लेगा.

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा दिसंबर के पहले सप्ताह में राजस्थान में प्रवेश करेगी और पार्टी नेतृत्व चाहता है कि गहलोत और पायलट के बीच के झगड़े की छाया कांग्रेस की यात्रा पर न पड़े.

उत्तर भारत के बड़े अपराधी दक्षिण भारत की जेलों में होंगे शिफ़्ट

एनआईए

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पंजाब समेत उत्तरी भारत के कई राज्यों की जेलों से अपना नेटवर्क चला रहे कुख्यात गैंगस्टरों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शिकंजा कसने की नई रणनीति तैयार की है.

हिंदी दैनिक अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, एनआईए ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखा है. इसमें पंजाब समेत उत्तर भारत के कई राज्यों की जेलों में बंद क़रीब 25 गैंगस्टरों को दक्षिण भारत की जेलों में शिफ्ट करने को कहा है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस दिशा में कार्रवाई हो सकती है. एनआईए की जांच में जैसे ही यह बात सामने आई थी कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान की जेलों में बंद गैंगस्टरों के संबंध विदेश में बैठे आतंकियों से हैं, उस दिन से ही एनआईए इस गठजोड़ को तोड़ने में जुट गई थी.

सूत्रों की मानें तो जेलों में गैंगस्टरों के मददगार भी सरकारी मुलाजिम बन रहे हैं, यह बात भी सामने आ चुकी है. कुछ राज्यों में सीनियर पुलिस मुलाजिमों पर कार्रवाई तक हुई है. ऐसे में अब इस दिशा में कदम बढ़ाया गया है. इसमें पहले चरण में गैंगस्टरों की पहचान की गई.

इन गैंगस्टरों को दक्षिण के राज्यों में शिफ्ट करने के पीछे की एक वजह यह भी है कि वहां पर इन लोगों के लिए भाषा बाधक बनेगी. दूसरा वहां पर कोई भी कदम उठाने से पहले सोचेंगे क्योंकि उन्हें वहां नेटवर्क बनाना आसान नहीं होगा.

आने वाले दिनों में मंत्रालय द्वारा राज्यों से राय ली जाएगी. हालांकि, नेशनल सिक्योरिटी एक्ट में शातिर अपराधियों को दूसरे राज्यों में शिफ़्ट करने का प्रावधान है.

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