अजय मिश्र टेनी: 22 साल पुराने हत्या के मामले में क्यों दोबारा हुई सुनवाई?

प्रभात गुप्ता

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    • Author, अनंत झणाणें
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

अक्टूबर 2021 में लखीमपुर खीरी में किसानों और चार लोगों की हत्या के तुरंत बाद शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के महासचिव और तिकुनिया निवासी राजीव गुप्ता ने एक वीडियो जारी किया.

वीडियो में राजीव गुप्ता ने मामले की न्यायिक जांच की मांग उठाई.

मामला 22 साल पुराने समाजवादी पार्टी के युवा नेता की हत्या से जुड़ा था जिसमें अजय मिश्र टेनी को बरी कर दिया गया था.

इस वीडियो में वो कह रहे थे, "जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए. यह मांग मैं, राजीव गुप्ता इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मेरे भाई प्रभात गुप्ता की हत्या हुई थी."

वीडियो में वो आगे कहते हैं "इन लोगों ने (अजय मिश्र) उस मुक़दमे में ऐसे दांव-पेच खेले थे, मैं इस बात का साक्षी हूं, इसलिए मेरा निवेदन है कि उच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान लेते हुए, न्यायालय की ही निगरानी में न्यायिक जांच करने का आदेश कर दे. और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का इस्तीफ़ा होना चाहिए."

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र उर्फ़ टेनी के 2019 लोकसभा के चुनावी हलफ़नामे में प्रभात गुप्ता की हत्या के मामले का ज़िक्र है.

उसी हलफ़नामे में यह भी कहा गया है कि सत्र न्यायालय से दोषमुक्ति के आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में सरकार द्वारा अपील और रिविज़न लंबित है.

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प्रभात गुप्ता

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सपा कार्यकर्ता प्रभात गुप्ता की हत्या का पूरा मामला

21 साल पहले, लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कस्बे में समाजवादी पार्टी के एक युवा नेता प्रभात गुप्ता की दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

उनके पिता संतोष गुप्ता की तहरीर के मुताबिक़, "कुछ दिन पहले हुए पंचायत चुनावों के कारण अजय मिश्र उर्फ़ टेनी से मेरे लड़के प्रभात गुप्ता उर्फ़ राजू की रंज़िश चल रही थी. अजय मिश्र उस वक़्त भाजपा के कार्यकर्ता थे."

प्रभात गुप्ता के पिता का आरोप है कि 8 जुलाई 2000 को दोपहर तीन बजे प्रभात गुप्ता घर से दुकान जा रहे थे.

वो कहते हैं, "जैसे ही वो मुख्य मार्ग पर पहुंचे तभी वहां मौजूद अजय मिश्र टेनी ने मेरे लड़के राजू की कनपटी पर गोली मार दी. तुरंत दूसरी गोली सुभाष उर्फ़ मामा ने सीने व पेट के नीचे मार दी. गोली लगने के बाद प्रभात मौक़े पर ही गिर गया और उसकी मौत हो गई."

संतोष गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि "अजय मिश्र टेनी के साथ ही शशिभूषण उर्फ़ पिंकी तथा राकेश उर्फ़ डालू हाथ से असलहा लहराते हुए चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे कि राजू बचने न पाए. और कोई व्यक्ति या पड़ोसी आ जाए तो उसे भी गोली मार दो."

प्रभात गुप्ता के पिता की तहरीर के मुताबिक़,"मौके पर ही मौजूद मेरे लड़के संजीव गुप्ता और विनोद ने इस घटना को दिन की रोशनी में देखा है."

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हलफ़नामा
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अदालत ने क्या कहा?

पूर्व मंत्री अजय मिश्र उर्फ़ टेनी और तीन अन्य को प्रभात गुप्ता की हत्या के आरोप में 29 मार्च 2004 को बरी किया गया था.

बीबीसी ने अजय मिश्र के वकील से उनका पक्ष जानने की भी कोशिश की. लेकिन उन्होंने 10 नवंबर से पहले इस मामले में बात करने से मना कर दिया.

बीबीसी को प्रभात कुमार के परिवार द्वारा 2004 में हाई कोर्ट में दायर की गई अपील से यह जानकारी मिली है कि लखीमपुर की अदालत ने एफ़आईआर में ग़लतियों और गवाहों की घटनास्थल पर ग़ैरमौजूदगी के आधार पर अजय मिश्र और अन्य को बरी किया.

अदालत ने गवाहों के बयानों को दर्ज करने में देरी, और उनके बयानों में ख़ामियों को भी अपने फ़ैसले का आधार बनाया.

उदाहरण के तौर पर अदालत के फ़ैसले में लिखा है कि एफ़आईआर में यह लिखा था कि प्रभात गुप्ता की हत्या थाने से एक किलोमीटर दूरी पर हुई थी. लेकिन प्रभात गुप्ता के पिता का कहना है कि हक़ीकत में मौक़ा-ए-वारदात थाने से आधा किलोमीटर ही दूर था.

लखीमपुर की अदालत ने प्रभात गुप्ता के पिता और भाई की गवाहियों पर भी संदेह जताया था, लेकिन उनके परिवारवालों का कहना है कि क़ानून में पीड़ित के परिवारवालों के बयानों को विश्वसनीय बताया जाता है.

राजीव गुप्ता

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अपील दायर होने में देरी

किसी भी मामले में अभियोजन पक्ष को निचली अदालत के फ़ैसले को चुनौती देने के 90 दिन के भीतर सरकार को अपील दायर करनी पड़ती है. गुप्ता परिवार का कहना है कि उन्हें इसमें भी काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी.

  • 19 जून 2004 को इस मामले में सरकार ने अपील दायर की और सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में शुरू हुई.
  • सुनवाई के दौरान अजय मिश्र अपने वकील बदलते रहते थे, जिस वजह से सुनवाई टलती रहती थी.
  • 12 मार्च 2018 को लम्बी सुनवाई के बाद फ़ैसला सुरक्षित रखा गया.
  • लेकिन फ़ैसला समयसीमा में न आने की वजह से मामले की सुनवाई फिर से नए सिरे से शुरू हुई.
  • 2019 में मामले की तीन तारीख़ें लगीं, लेकिन सुनवाई के दौरान बहस नहीं हुई.
  • फ़रवरी 2020 में अपील की आख़िरी तारीख़ लगी, लेकिन उस दिन भी सुनवाई नहीं हुई.
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अजय मिश्र टेनी

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सुप्रीम कोर्ट में मामला

राजीव गुप्ता कहते हैं कि सालों पुराने मामले में अपील पर दोबारा सुनवाई करना कितना चुनौतीपूर्ण है- ये बताने के लिए उन्होंने बीबीसी के साथ कुछ दस्तावेज़ साझा किए हैं.

गुप्ता परिवार ने 8 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और यह कहा कि मंत्री अजय मिश्र उर्फ़ टेनी ने तमाम तरीक़ों से बार-बार उनके ख़िलाफ़ दाखिल हुई अपील की फ़ाइनल सुनवाई टलवाने की क़ानूनी कोशिशें की हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2022 को अपने आदेश में कहा कि मामले की सुनवाई 10 नवंबर 2022 को हाई कोर्ट में शुरू हो.

आदेश में ये भी कहा गया कि अगर मंत्री अजय मिश्र के वकील सुनवाई के लिए इलाहाबाद से लखनऊ नहीं आ सकते हैं तो वो अपनी दलीलें वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए दे सकते हैं.

आज (10 नवंबर, गुरुवार) इस मामले में पांच घंटे तक सुनवाई हुई जिसके बाद अदालत ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.

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