लखीमपुर हिंसा: एसआईटी ने कोर्ट से कहा- किसानों को रौंदना सुनियोजित साज़िश, आशीष मिश्र पर चले हत्या का मामला

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- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले में हुई हिंसा के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने अदालत से कहा है कि यह घटना एक "पूर्व नियोजित साजिश" थी.
इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र और 12 अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में गाड़ियों से रौंद कर 4 किसानों और एक पत्रकार की हत्या करने का आरोप है.
मंगलवार को आशीष मिश्र समेत 12 अन्य अभियुक्तों को अदालत में पेश किया गया है.

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एसआईटी ने जांच के बाद क्या कहा?
इस मामले की जांच कर रही एसआईटी ने शुरुआती जाँच में पाया है कि ये मामला सुनियोजित साज़िश का है.

एसआईटी ने लखीमपुर खीरी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को लिखे पत्र में कहा है, "अब तक की गई जांच और मिले सबूतों से यह प्रमाणित हुआ है कि अभियुक्त द्वारा उक्त आपराधिक कृत्य को लापरवाही एवं उपेक्षा से नहीं बल्कि जानबूझ कर पूर्व से सुनियोजित योजना के अनुसार जान से मारने की नीयत से किया गया है जिससे पांच लोगों की मृत्यु हो गयी और कई गंभीर रूप से घायल हुए."
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एसआईटी ने इस मामले में आशीष मिश्र सहित सभी अभियुक्तों पर भारतीय दंड संहिता की नई और गंभीर धाराएं लगाने का सुझाव दिया है.
इन धाराओं में "लापरवाही से गाड़ी चलने की वजह से चोट लगना, धारा 307 (इरादतन हत्या का मामला), धारा 326 (हत्या के इरादे से हथियार या उपकरण से चोट पहुँचाने), और आर्म्स एक्ट" जैसी धाराएं शामिल है.

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आशीष मिश्र के ख़िलाफ़ हत्या का मामला
आशीष उर्फ़ मोनू मिश्र के ख़िलाफ़ पहले से ही हत्या का एक मामला दर्ज है. लेकिन एसआईटी की इन नयी सिफारिशों से साफ़ है कि इन आरोपियों के ख़िलाफ़ सुनियोजित ढंग से हत्या करने का मामला बनने जा रहा है.
बता दें कि इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद जांच ने रफ़्तार पकड़ी है.

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कोर्ट ने इस मामले की जांच कर रही एसआईटी का विस्तार कर इसमें तीन और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया था.
इस मामले में न्यायिक जांच एक पूर्व हाई कोर्ट जज से भी करवाई जा रही है.

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बेटे से मिलने जेल पहुंचे केंद्रीय मंत्री
मंगलवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी अपने बेटे आशीष मिश्र से मिलने लखीमपुर खीरी जिला जेल भी पहुंचे.
जेल से निकलते वक़्त उन्होंने मीडिया से सिर्फ़ इतना कहा कि, "मैं अपने बेटे से मिलने गया था."
कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने वाले एडिशनल प्रॉसेक्यूटिंग ऑफ़िसर प्रदीप कुमार ने बताया कि मंगलवार को सभी अभियुक्तों को अदालत में पेश किया जायेगा और एसआईटी की अर्ज़ी पर सुनवाई की जाएगी.
इसके बाद अदालत साक्ष्यों के आधार पर नयी धाराओं को जोड़ने के बारे में फैसला लेगी.
सरकारी वकील एसपी यादव का कहना है कि, "मुल्ज़िम को अदालत में पेश किया जायेगा, और विवेचक की अर्ज़ी पर सुनवाई होगी. और नई धाराओं पर रिमांड स्वीकार करने के बारे में बात रखी जाएगी. उनके सामने जांच से जुड़े पेपर और सीडी रखी जाएगी."
नियमों के मुताबिक़ घटना के नब्बे दिनों के अंदर अभियोजन पक्ष को मामले में चार्जशीट दाखिल करनी होती है और उसके बाद कोर्ट में ट्रायल शुरू होगा.
उम्मीद जताई जा रही है कि जनवरी महीने में चार्जशीट दाखिल हो जाएगी.

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विपक्ष ने बोला बीजेपी पर हमला
ये ख़बर आने के बाद से विपक्षी दलों ने बीजेपी और उसके केंद्रीय नेतृत्व को आड़े हाथों लिया है.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करते हुए सवाल पूछा है कि, "न्यायालय की फटकार व सत्याग्रह के चलते अब पुलिस का भी कहना है कि गृह राज्य मंत्री के बेटे ने साजिश करके किसानों को कुचला था.
जांच होनी चाहिए कि इस साजिश में गृह राज्य मंत्री की क्या भूमिका थी? लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, किसान विरोधी मानसिकता के चलते आपने तो उन्हें पद से भी नहीं हटाया है."
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वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए ट्विटर पर लिखा है कि "मोदी जी, फिर से माफ़ी माँगने का टाइम आ गया…लेकिन पहले अभियुक्त के पिता को मंत्री पद से हटाओ. सच सामने है!"
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, "लखीमपुर में कौन नहीं जानता कि किसानों को कुचल दिया गया. और जो कुचलने वाली जीप थी. जीप को चलाने वाले लोग और साथ बैठे लोग बीजेपी के कार्यकर्ता थे या नहीं थे. क्या लखीमपुर की घटना किसान भूल जाएंगे."
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इस मामले में अब तक क्या हुआ?
बीती तीन अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले के तिकुनिया क़स्बे में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का विरोध कर रहे किसानों पर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा से जुड़े लोगों ने गाड़ियां चढ़ा दी थीं.
इस घटना में चार किसानों की कारों से कुचलने से मौत हुई थी. एक पत्रकार की भी कार से कुचलने से मौत हुई थी जबकि मौक़े पर मौजूद भीड़ ने कारों में सवार तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. कुल आठ लोग इस हिंसा में मारे गए थे.
इस घटना के बाद विपक्ष के तमाम नेताओं ने लखीमपुर खीरी पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलने की कोशिश की.
लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी नेताओं को लखीमपुर खीरी पहुंचने से रोक दिया.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को सीतापुर गेस्ट हाउस में रोककर रखा गया. इसके साथ ही अखिलेश यादव समेत तमाम अन्य नेताओं को लखीमपुर पहुंचने से रोका गया.
इसके बाद से किसान संगठन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टैनी के निलंबन और उनके बेटे के ख़िलाफ़ गंभीर मामला चलाए जाने की मांग कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी मामले का स्वत: संज्ञान लेने के बाद इस मामले की सुनवाई की थी.
मुख्य न्यायाधीश रमन्ना के नेतृत्व वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में की जा रही न्यायिक जांच का विवरण भी देने को कहा गया था.
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