लखीमपुर खीरी हिंसा: प्रियंका गांधी ने कहा, 'थोड़े ही दिनों में खुल के घूमेगा, जिसने आपको कुचल डाला'

आशीष मिश्रा
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लखीमपुर हिंसा मामले में मुख्य अभियुक्त और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच से ज़मानत मिल गई है.

तीन अक्तूबर को लखीमपुर खीरी में कारों से कुचले जाने से चार किसानों की मौत हुई थी जिसमें से एक कार आशीष मिश्रा की थी.

उत्तर प्रदेश पुलिस की एसआईटी इस मामले की जाँच कर रही है और बीते महीने ही इस केस में चार्जशीट दाखिल की गई थी.

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पांच हज़ार पन्नों की चार्जशीट को स्टील के तालाबंद बक्सों में लखीमपुर के कचहरी परिसर में लाया गया और उसे सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया था.

इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र मुख्य अभियुक्त हैं. साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास के भतीजे अंकित दास के अलावा 12अन्य सह अभियुक्त हैं.

लखीमपुर हिंसा मामला

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आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत पर किसने क्या कहा

आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत के बाद कई राजनेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

प्रियंका गांधी ने एक रैली को संबोधित करने के दौरान आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत का उल्लेख किया.

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उन्होंने कहा, "अगर प्रधानमंत्री जी नेक और अच्छे हैं, तो किसानों को कुचलने वाले के मंत्री पिता का इस्तीफा क्यों नहीं मांगा? आज उसको जमानत मिल गई, अब वो खुला घूमे."

प्रियंका गांधी ने कहा, ''इनके मंत्री के पुत्र ने ​छह किसानों को कुचला, क्या उसने अपना इस्तीफ़ा दिया. हमारे प्रधानमंत्री जी बहुत अच्छे हैं, बहुत नेक हैं तो उन्होंने इस्तीफ़ा क्यों नहीं मांगा. इस्तीफ़ा क्यों नहीं मांगा अपने मंत्री से.

प्रियंका गांधी ने कहा, ''क्या देश के प्रति कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं हैं उनकी. थोड़े ही दिनों में खुल के घूमेगा फिर से, जिसने आपको कुचल डाला. इस सरकार ने किसको बचाया, किसानों के परिवारों को बचाया? उनकी पुलिस थी, प्रशासन था, कहां थे वे सब जब उनको कुचला गया? मैं बताती हूं कि वे कहां थे. वे सब हम जैसे लोग जो किसानों के परिवारों से मिलने जा रहे थे, उन्हें रोकने में जुटी थी.''

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राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चौधरी जयंत सिंह ने ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है, - " क्या व्यवस्था है!! चार किसानों को रौंदा, चार महीनों में ज़मानत… "

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी ट्वीट करके इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

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उन्होंने ट्वीट किया है- "किसी भी ज़मानत के लिए तीन बुनियादी सिद्धांत होते हैं कि आरोपी इन तीन चीज़ों को कर सकने की ताक़त या क्षमता ना रखता हो

-गवाहों को डराने की

-सुबूत को नष्ट करने की

-भाग जाने की

आशीष मिश्रा ज़मानत की पहली शर्त को किस तरह पूरा करते हैं? "

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महुआ मोइत्रा ने इस मामले पर एक अन्य ट्वीट भी किया है. जिसमें उन्होंने लिखा है- "यह व्यक्ति ज़मानत पर बाहर है. मुझे उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश का हर किसान वोट करते समय इस चेहरे के बारे में ज़रूर सोचेगा."

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी ट्वीट कर अपनी राय रखी है.

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उन्होंने ट्वीट किया है- "कल 'कैमरे' पर सफाई आई थी, आज सामने से रिहाई आयी है ! किसानों से 'विश्वासघात' नहीं संयोग है, ये राजा के किये अत्याचारों का 'योग' है ! मग़र जनता भी कर रही प्रयोग है, सही मौके का करना 'उपयोग' है"

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने भी ट्वीट करके इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

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एसआईटी ने क्या कहा था

लखीमपुर ज़िले में हुई हिंसा के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने अदालत से कहा था कि यह घटना एक "पूर्व नियोजित साजिश" थी.

एसआईटी ने लखीमपुर खीरी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को लिखे पत्र में कहा था, "अब तक की गई जांच और मिले सबूतों से यह प्रमाणित हुआ है कि अभियुक्त द्वारा उक्त आपराधिक कृत्य को लापरवाही एवं उपेक्षा से नहीं बल्कि जानबूझ कर पूर्व से सुनियोजित योजना के अनुसार जान से मारने की नीयत से किया गया है जिससे पांच लोगों की मृत्यु हो गयी और कई गंभीर रूप से घायल हुए."

एसआईटी ने इस मामले में आशीष मिश्र सहित सभी अभियुक्तों पर भारतीय दंड संहिता की नई और गंभीर धाराएं लगाने का सुझाव दिया था.

इन धाराओं में "लापरवाही से गाड़ी चलने की वजह से चोट लगना, धारा 307 (इरादतन हत्या का मामला), धारा 326 (हत्या के इरादे से हथियार या उपकरण से चोट पहुँचाने), और आर्म्स एक्ट" जैसी धाराएं शामिल हैं.

लखीमपुर हिंसा मामला

इमेज स्रोत, Getty Images

क्या है मामला

बीते साल तीन अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले के तिकुनिया क़स्बे में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का विरोध कर रहे किसानों पर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा से जुड़े लोगों ने गाड़ियां चढ़ा दी थीं.

इस घटना में चार किसानों की कारों से कुचलने से मौत हुई थी. एक पत्रकार की भी कार से कुचलने से मौत हुई थी जबकि मौक़े पर मौजूद भीड़ ने कारों में सवार तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. कुल आठ लोग इस हिंसा में मारे गए थे.

इस घटना के बाद विपक्ष के तमाम नेताओं ने लखीमपुर खीरी पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलने की कोशिश की.

लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी नेताओं को लखीमपुर खीरी पहुंचने से रोक दिया.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को सीतापुर गेस्ट हाउस में रोककर रखा गया. इसके साथ ही अखिलेश यादव समेत तमाम अन्य नेताओं को लखीमपुर पहुंचने से रोका गया.

इसके बाद से किसान संगठन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के निलंबन और उनके बेटे के ख़िलाफ़ गंभीर मामला चलाए जाने की मांग कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी मामले का स्वत: संज्ञान लेने के बाद इस मामले की सुनवाई की थी.

मुख्य न्यायाधीश रमन्ना के नेतृत्व वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में की जा रही न्यायिक जांच का विवरण भी देने को कहा गया था.

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