'राम वन गमन पथ' क्या कांग्रेस को रायपुर की सत्ता तक ले जा सकता है?

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पर आरोप लग रहे हैं कि उसने भारतीय जनता पार्टी के चुनावी मुद्दों और 'एजेंडे' को चुरा लिया है और अब वो इनके सहारे प्रदेश में अपनी राजनीतिक नैया पार लगाने की कोशिश कर रही है.
इस राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी पर आरोप है कि वो भी न सिर्फ़ राम का दामन थामने की कोशिश कर रही है बल्कि 'सॉफ्ट-हिंदुत्व' की राजनीति भी कर रही है.
कांग्रेस का दावा है कि छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी असुरक्षित महसूस कर रही है. अब दोनों ही दल आमने-सामने हैं और दोनों तरफ़ से बयानबाज़ी हो रही है.
अक्तूबर महीने में ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन के ढांचे में फेरबदल भी किया है जिसके तहत प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष को भी बदला है. इसके अलावा पाँच जिलों के अध्यक्षों को भी बदला गया है.
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार का दावा है कि वो गौशालाओं के ज़रिए ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने को भी प्रोत्साहित कर रही है और उससे गायों का संरक्षण भी हो रहा है. साथ ही वो 'राम वन गमन पथ' को भी विकसित कर रही है.
सरकार दावा कर रही है कि सिर्फ़ गौमूत्र से उसको इस बार दस लाख रूपए की आमदनी हुई है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार का ये भी दावा है कि इस दस लाख की आमदनी को किसानों के बीच बांटा गया है.
मुख्यमंत्री का दावा है कि इसके अलावा गोबर से खाद बनाने की परियोजना से भी काफ़ी आमदनी हो रही है. लेकिन इन दिनों जिस मुद्दे पर सबसे ज़्यादा बहस और रस्साकशी हो रही है, वो है 'राम वन गमन पथ' परियोजना.

राम वन गमन पथ परियोजना
राम वन गमन पथ यानी वो इलाक़े जहां से राम, सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान होकर गुज़रे थे या फिर पड़ाव डाला था.
यहां 'राम वन गमन पथ' के विकास का काम ज़ोरों पर चल रहा है और इस योजना के तहत उन स्थानों को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विकसित किया जा रहा है जहां के बारे में आस्था है कि इन इलाकों में राम, सीता और लक्षमण ने प्रवास के दौरान विश्राम किया था.
छत्तीसगढ़ की सरकार के पर्यटन विभाग के प्रबंध निदेशक अनिल साहू ने बीबीसी को बताया कि राम वन गमन पथ को विकसित करने का काम चरणबद्ध तरीक़े से हो रहा है और अलग-अलग चरण में अलग-अलग स्थानों को विकसित किया जा रहा है.
अनिल साहू कहते हैं, "भगवान राम के वनवास काल में उनके इस राज्य के गुज़रने के बहुत सारे साक्ष्य मौजूद हैं. राज्य के उत्तर से लेकर दक्षिण तक छत्तीसगढ़ की जो भौगोलिक स्थिति थी वो बहुत बड़ा 'लैंड मास' है. लगभग 2200 किलोमीटर का पथ है. इन मार्गों से भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के प्रवास के बहुत सारे प्रमाण हैं. जहां-जहां उनके पड़ाव डालने की मान्यताएं हैं वो 130 से ज़्यादा जगहें हैं. इनमें से पहले चरण में हमने नौ स्थानों को लिया है. दूसरे और तीसरे चरण में भी काम कई स्थानों पर शुरू हो चुका है."
धरमलाल कौशिक, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं जो हाल तक प्रतिपक्ष के नेता भी रह चुके हैं. बातचीत के क्रम में वो दावा करते हैं कि राम वन पथ गमन के विकास की योजना की परिकल्पना उनकी सरकार के शासनकाल में ही कर ली गई थी. उनका आरोप है कि उसी काम को राज्य में कांग्रेस की सरकार आगे बढ़ा रही है.
वो कहते हैं, "ये संवेदनशील मुद्दा है जो हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है. कांग्रेस की सरकार इसको लेकर जिस तरह से लाभ के लिए भुनाने की कोशिश कर रही है, वो ग़लत है. भगवान राम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. सरकार ने कुछ काम तो किया नहीं है. बस ये सोच रहे हैं कि राम के नाम से उनकी राजनीतिक नैया पार लग जाएगी. कांग्रेस तो भगवान राम को काल्पनिक बताती रही थी."

जिन इलाक़ों का इस परियोजना के तहत विकास किया जा रहा है उनमें से एक है चंदखुरी. यहां के बारे में मान्यता है कि श्रीराम की मां यानी माता कौशल्या का जन्म इसी इलाक़े में हुआ था इसलिए परियोजना के पहले चरण में मंदिर का भी जीर्णोद्धार किया गया है. साथ ही यहां राम की विशालकाय मूर्ति की स्थापना भी की गई है.
पंडित अभिषेक शर्मा चंदखुरी में मौजूद माता कौशल्या मंदिर के मुख्य पुजारी हैं. बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "भगवान राम की नगरी अयोध्या कही जाती है और भगवान श्रीराम की माता कौशल्या जी की नगरी ये कौशल्या धाम है. पूर्व काल में छत्तीसगढ़ कौशल और दंडकारण्य के नाम से जाना जाता था."
"दक्षिण कौशल में जो राजा हुए, राजा भानुमंत, कौशल्या उनकी पुत्री थीं, और राजा भानुमंत ने अयोध्या के नरेश महाराज दशरथ से अपनी पुत्री का विवाह कराया. विवाह के बाद माता कौशल्या राजा दशरथ के धाम चली गईं और उस नाते से यह भगवान राम ननिहाल है."

पुरातत्वविद हेमू यदु ने राम के वनवास के मार्ग को लेकर कई दशकों तक शोध किया है. धार्मिक ग्रंथों और स्थानों के शोध में उनकी संस्था यानी 'राम वन गमन शोध संस्थान' ने काफ़ी मेहनत की है. शोध के दौरान जो कुछ उन्होंने पाया उसे एक पुस्तक के रूप में भी जारी किया गया है.
उनका कहना है, "वनवास में एक शर्त भी थी कि श्रीराम, लक्ष्मण और सीता किसी नगर में प्रवेश नहीं करेंगे इसलिए उनके गमन के इलाक़े मुख्य रूप से घने जंगलों में ही मिलते हैं. उनके पड़ाव भी नदियों के किनारों पर हुए. ऐसा धर्म ग्रंथों और मान्यताओं में मिलता है."
"ऐसी मान्यता है कि मध्य प्रदेश के राजिम, चंदखुरी होते हुए वो दक्षिण बस्तर के रामाराम के इलाके में पहुंचे और यहां पड़ाव डाला. रामाराम से निकलकर जब वो तीनों तेलंगाना के भद्राचलम के इलाक़े में पहुंचे वहां से माता सीता के अपहरण की बात कही जाती है."

क्या है राम वन गमन पथ?
- लगभग 2200 से ज़्यादा किलोमीटर का पथ है.
- मान्यताओं के अनुसार इस पथ से भगवान राम, लक्ष्मण और सीता वनवास के दौरान यहां से गुज़रे थे या पड़ाव डाला था.
- 130 से ज़्यादा जगहों को छत्तीसगढ़ के संस्कृति और पर्यटन विभाग ने चिन्हित किया है.
- अभी पहले चरण में 9 स्थानों पर काम चल रहा है जबकि बाक़ी का काम अगले दो चरणों में होगा.
- राम वन गमन पथ को विकसित करने में 137.45 करोड़ रूपए का ख़र्च आएगा जिसे चंदे के माध्यम से जुटाया जा रहा है.
- श्री राम के ननिहाल, चंदखुरी में माता कौशल्या के मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ भगवान राम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है.
- राम वन गमन पथ परियोजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच ठन गई है.
- भाजपा का दावा है कि परियोजना की परिकल्पना उसने की थी. जबकि कांग्रेस इसे पूर्ण करने का अभियान चला रही है.
- कांग्रेस के न्योते पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी चंदखुरी मंदिर के दर्शन किए जिससे राजनीति और गरमा गई है.
- कांग्रेस पर आरोप है कि वो चुनावी फायदे के लिए भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे और मुद्दे चुरा रही है. कांग्रेस स्वीकार कर रही है कि उसकी रणनीति में बहुत बदलाव आए हैं.

मुद्दे को लेकर गरमाई राजनीति
परियोजना की प्रमुख अनुराधा दुबे कहती हैं कि राम वन गमन पथ के तहत जो इलाक़े विकसित किए जा रहे हैं उनमें प्रमुख रूप से हरचौका, देवगढ़, विश्रामपुर, रामग, मैनपाट, राम झरना, शिवरीनारायण, चंद्रपुर, सिहावा सप्त ऋषि आश्रम, नारायणपुर, धनोरा, चित्रकोट, गीदम, बस्तर स्थित कुतुम्सर की गुफाएं, रामाराम और कोंटा भी शामिल हैं.
वो बताती हैं कि इन सभी जगहों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था पर काम तो चल ही रहा है, साथ ही इन सभी चिन्हित किए गए स्थानों पर मंदिरों और आश्रमों के जीर्णोद्धार का काम भी किया जा रहा है. राजिम सहित इन स्थानों पर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की भव्य मूर्तियों को स्थापित करने का काम भी शुरू हो चुका है.
लेकिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में पेंच तब आ फंसा जब सितंबर माह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत संगठन के कार्यक्रम में रायपुर पहुंचे थे.
इसी दौरान छत्तीसगढ़ की सरकार ने उन्हें माता कौशल्या के मंदिर के दर्शन करने का न्योता दे दिया. भागवत ने मंदिर के दर्शन किए और ऐसा बताया जाता कि सरकार के प्रयासों की उन्होंने प्रशंसा भी की.
बस क्या था, राजनीति गरमा गई.

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना था कि जो कुछ उनकी पार्टी कर रही है वो 'उनके संस्कार' का हिस्सा है.
बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "देखिए, हिंदुत्व 'हार्ड' या 'सॉफ्ट' नहीं होता है. हिंदुत्व सनातन होता है. दरअसल भारतीय जनता पार्टी और हममें अंतर ये है कि धर्म हमारे लिए आस्था का विषय है. हमारे लिए ये संस्कार है. भाजापा के लिए धर्म दिखावा और व्यापार नहीं है. धर्म उनके लिए धंधा है. धर्म उनके लिए चंदा है, वोटों की भीख है."
आरएसएस के प्रमुख को न्योता भेजने के बारे में चर्चा करते हुए सिंह कहते हैं कि जब मोहन भागवत रायपुर अपने संगठन के किसी कार्यक्रम में आए थे तो कांग्रेस पार्टी ने उन्हें माता कौशल्या के मंदिर का दर्शन करने का न्योता दिया था.
वो कहते हैं, "यहां मोहन भागवत जी आए थे. हमने कहा कि जब आप यहां आ ही गए हैं तो यहां माता कौशल्या का मंदिर है. आइए और देखिए. आप हमारे गौठानों में जाइए जहां हम गोमाता की सेवा कर रहे हैं. उसके बाद उनके जो प्रवक्ता थे उनका बयान मीडिया के माध्यम से आया कि हमको आपका लिखित अनुरोध पत्र चाहिए. हमने जिला अध्यक्ष से बात की और वो आमंत्रण पत्र आधे घंटे में लेकर पहुंच गए."
मोहन भागवत मंदिर दर्शन को क्या गए कि कांग्रेस इसे अपनी बड़ी उपलब्धि मानने लगी. हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने भी मोहन भागवत के मंदिर दर्शन को लेकर कांग्रेस पर ही निशाना साधा.

छत्तीसगढ़ प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के संगठन सचिव नरेश चन्द्र गुप्ता ने बीबीसी से कहा, "यदि उनको लगता है कि मोहन भागवत को बुलाना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है तो ये बड़ी बात है. ऐसा पहले नेहरु जी से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी ने क्यों नहीं किया?"
"ये तो मैं मानता हूँ कि कांग्रेस ने अब स्वीकार कर लिया है कि मोहन भागवत इस देश में 'अल्टीमेट' हैं. संघ परिवार 'अल्टीमेट' है. आरएसएस 'अल्टीमेट' है. राष्ट्रहित में सोचने वाली संस्था है. यही उपलब्धि है संघ की. संघ के पास हर व्यक्ति को शरणागत होना पड़ेगा. सभी को संघ की विचारधारा पर जाना होगा."
उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे, तरीकों और मुद्दों को चुरा रही है.
मगर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमिटी की इन आरोपों पर अपनी दलील है. प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आरपी सिंह स्वीकार करते हैं कि उनकी पार्टी ने अपनी कार्यशैली में कई बदलाव किए हैं.

आरपी सिंह कहते हैं, "देखिए भारतीय जनता पार्टी बहुत परेशान है. उनको लगता है कि जो उनके बुनियादी मुद्दे हैं, उनको हमने चुरा लिया है. ये प्रभु राम पर, गोमाता पर अपना अधिकार समझते हैं. ये सच है भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं के 'बेस' वाली पार्टी है. मुझे स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है. हम 'मास बेस्ड' पार्टी हैं."
"लेकिन समय के साथ हमको बदलना पड़ा. पिछले विधानसभा के चुनावों में, ये सच है, कि हमने अपना कैडर बनाया. ये सच है कि हम बूथ तक गए. और ये भी सच है हमने अपनी बूथ कमिटियाँ बनाईं. हम 68 सीटें जीतकर आए तो समय के साथ राजनीति बदलती है. हमने समय को पहचाना. अपने आप को बदला."
लेकिन भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि चुनावों में जो वायदे कांग्रेस पार्टी ने किए उन्हें पूरा नहीं किया इसलिए अब वो भारतीय जनता पार्टी के मुद्दों को चुरा रही है.

कांग्रेस से उसके ही कुछ नेता ख़फ़ा
भारतीय जनता पार्टी के संगठन सचिव नरेश चन्द्र गुप्ता सवाल करते हैं कि अगर छत्तीसगढ़ में जिस कार्यशैली को कांग्रेस ने अपनाया है वो सही है तो फिर सोनिया गांधी उसे 'एंडोर्स' क्यों नहीं करती हैं ?
नरेश चंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया, "इस प्रदेश में माफ़िया राज काम कर रहा है. प्रशासन व्यवस्था के नाम की कोई चीज़ बची नहीं है. झूठ और फ़रेब के बलबूते पर इन्होंने सत्ता हासिल की है और झूठ और फ़रेब का अम्बार खड़ा कर रखा है"
लेकिन कांग्रेस पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता अपनी राज्य इकाई की कार्यशैली से नाखुश नज़र आए. उनका कहना है कि जो कुछ पार्टी कर रही है वो संगठन के मुख्य सिद्धांतों से विपरीत है.
अरविंद नेताम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं जो इंदिरा गांधी और नरसिम्हा राव की कैबिनेट में मंत्री भी रह चुके हैं.
बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "क्या ये भारतीय जनता पार्टी के 'एजेंडा' को आत्मसात कर रहे हैं? अगर ऐसा है तो फिर इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना चाहिए."
छत्तीसगढ़ की सरकार की महत्वकांक्षी राम वन गमन पथ की परियोजना की चर्चा करते हुए वो कहते हैं आज के दौर में इन मुद्दों पर समाज बहुत जागरूक है.
उनका कहना था, "कौन कितना ईमानदार है, क्या कर रहा है? केवल वोट बैंक के लिए कर रहा है या फिर दिल से कर रहा है, जनता सब समझती है. अगर इससे फ़ायदा हो तो ये कांग्रेस के लिए अच्छी बात है, पर मेरा अपना आकलन है कि उनके पास कोई ठोस सांगठनिक तंत्र नहीं है."

बीजेपी की भी चिंता बढ़ी
भारतीय जनता पार्टी के लिए चिंता की बात ये भी है कि संगठन के बीच से छत्तीसगढ़ सरकार की राम वन गमन पथ परियोजना की तारीफ़ के स्वर भी उठने लगे हैं.
विश्वराज सिंह चौहान सुकमा जिला भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष हैं.
वो ये मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी इस परियोजना का "राजनीतिक फायदे के लिए उपयोग कर रही है," लेकिन साथ ही वो ये भी कहते हैं कि "ठीक है जो पार्टी सत्ता में है उसको देश, परिस्थिति और लोगों की जन भावनाओं के अनुकूल कार्य करना चाहिए, तो यदि वो ऐसा कुछ कार्य कर रहे हैं तो हम उसका स्वागत करते हैं."
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति कोई नई बात नहीं है. वो कहते हैं कि जब भारतीय जनता पार्टी का उतना जनाधार नहीं बन पाया था वैसे समय में कांग्रेस 'सॉफ्ट' हिंदुत्व की राजनीति ही कर रही थी. बाद में कांग्रेस ने मध्यमार्ग चुना और 'धर्म निरपेक्षता' की राजनीति करने लगी.

जानकार ये भी मानते हैं कि अब हालात बदल गए हैं जब भारतीय जनता पार्टी हिंदुत्व के एजेंडे को मज़बूत कर पूरे देश में फैल गई है. वो मानते हैं कि ऐसे में कांग्रेस को 'सॉफ्ट' हिंदुत्व का ज़्यादा लाभ नहीं मिल पाएगा.
लंबे समय से कांग्रेस पर नज़र रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, "भूपेश बघेल अपनी तरफ़ से पूरा दाव लगा रहे हैं धर्म और आस्था के मामले में. वो भाजपा से एक क़दम आगे बढ़कर काम करना चाहते हैं. लेकिन कांग्रेस का एक तबक़ा है, जो दिल्ली में भी है और रायपुर में भी है, वो इसको लेकर बहुत ज़्यादा आश्वस्त नहीं है."
"उन्हें लगता है कि जब धर्म और आस्था का मामला आएगा, जिसे हम लोग हिंदुत्व के नाम से जानते हैं, तो उसमें नरेंद्र मोदी और अमित शाह के सामने, चाहे भूपेश बघेल हों, मल्लिकार्जुन खड़गे या फिर राहुल गांधी ही क्यों न हों- उनके सामने कोई नहीं टिक पाएगा."
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