देश में जल्द लॉन्च होगा ई-रुपी, 10 सवालों से जानिए कितना होगा फ़ायदा?

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    • Author, दीपक मंडल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा वित्त वर्ष (2022-23) का बजट पेश करते हुए कहा था कि आरबीआई की डिजिटल करेंसी यानी डिजिटल रुपया या ई-रुपी देश की डिजिटल इकोनॉमी को मज़बूत बनाएगा.

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) डिजिटल रुपये में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकता है. शुक्रवार को आरबीआई ने इस बात के संकेत दिए कि वह कुछ ख़ास इस्तेमालों के लिए जल्दी ही ई-रूपी या सीबीडीसी (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) लॉन्च करेगा. ये रिटेल और होलसेल ट्रांज़ैक्शन के लिए इस्तेमाल होगा.

कहा जा रहा है कि ई-रुपी देश में पेमेंट सिस्टम को नई ऊंचाई पर ले जाएगा. आम लोग और कारोबारी ई-रुपी से कई तरह के लेनदेन के लिए डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल कर सकेंगे. आइए जानते हैं कि डिजिटल करेंसी यानी आरबीआई का ई-रुपी क्या है, ये कैसे काम करेगा और इसके क्या फ़ायदे हैं?

आरबीआई की योजना क्या है?

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आरबीआई ने कहा है कि सीबीडीसी यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी लोगों को वित्तीय लेनदेन के लिए एक रिस्क फ़्री वर्चुअल करेंसी मुहैया कराएगी.

सीबीडीसी के दो मक़सद हैं.

पहला डिजिटल रुपया तैयार करना और दूसरा इसे बग़ैर किसी अड़चन के लॉन्च करना.

आरबीआई का यह भी मानना है कि सीबीडीसी ऐसा ऑफ़लाइन मोड भी विकसित करे, जिसमें डिजिटल रुपये से लेनदेन हो सके. इससे ज़्यादा से ज़्यादा लोग डिजिटल रुपये का इस्तेमाल कर सकेंगे.

यह पेपर करेंसी के समान है, जिसकी सॉवरेन वैल्यू होती है.

डिजिटल करेंसी फ़िज़िकल करेंसी का ही इलेक्ट्रॉनिक रूप है.

डिजिटल करेंसी की वैल्यू भी मौजूदा करेंसी के बराबर ही होगी और यह उसी तरह स्वीकार्य भी होगी. सीबीडीसी केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट में लाइबिलिटी के तौर पर दिखाई देगी.

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आरबीआई डिजिटल करेंसी क्यों लॉन्च करना चाहता है?

आरबीआई के कॉन्सेप्ट पेपर के मुताबिक़ आरबीआई देश में फ़िज़िकल कैश के प्रबंधन में आने वाली भारी-भरकम लागत कम करना चाहता है.

यानी नोटों को छापने, इन्हें सर्कुलेट करने और इसके ड्रिस्टीब्यूशन की लागतें कम करना चाहता है.

वह पेमेंट सिस्टम की कार्यक्षमता बढ़ाना चाहता है और इसमें इनोवेशन भी करना चाहता है.

इससे क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट स्पेस में नए तरीक़े अपनाए जा सकेंगे.

डिजिटल करेंसी ऐसी वर्चुअल करेंसी होगी जो किसी भी तरह के जोखिम से मुक्त होगी और लोग पूरे भरोसे के साथ इसका इस्तेमाल कर सकेंगे.

डिजिटल करेंसी अपने ऑफ़लाइन फ़ीचर की बदौलत ऐसे इलाक़ों में भी काम करेगी, जहां बिजली और मोबाइल नेटवर्क नहीं है.

डिजिटल करेंसी कैसी होगी?

आरबीआई के मुताबिक़ इसकी डिजिटल करेंसी ई-रुपी के दो स्वरूप होंगे.

पहला टोकन आधारित और दूसरा अकाउंट आधारित.

टोकन आधारित डिजिटल करेंसी का मतलब ये बैंक नोट की तरह बियरर इंस्ट्रूमेंट होगा.

यानी जिसके पास ये टोकन होगा वो उसके मूल्य का हक़दार होगा.

टोकन आधारित डिजिटल करेंसी वाले मॉडल में टोकन हासिल करने वाले व्यक्ति को यह वेरिफ़ाई करना होगा कि उसके टोकन पर उसी का मालिकाना हक़ है.

अकाउंट आधारित सिस्टम में डिजिटल करेंसी होल्डर को बैलेंस और ट्रांज़ैक्शन का रिकार्ड रखना होगा.

दरअसल ई-रुपी भारतीय रुपये का डिजिटल वर्जन होगा.

आरबीआई इसके दो वर्जन जारी करेगा. इंटरबैंक सेटलमेंट के लिए होलसेल वर्जन और आम लोगों के लिए रिटेल वर्जन.

आरबीआई के इनडायरेक्ट मॉडल के मुताबिक़ डिजिटल रुपी ऐसे वॉलेट में मौजूद होगा जो किसी बैंक या सर्विस प्रोवाइडर से जुड़ा होगा.

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क्या ई- रुपी क्रिप्टोकरेंसी है?

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क्रिप्टोकरेंसी में जिस टेक्नोलॉजी (ड्रिस्टीब्यूटेड लेज़र) का इस्तेमाल होता है, उसे डिजिटल रुपी सिस्टम में इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन अभी आरबीआई ने यह नहीं बताया है कि ई-रुपी में इसका इस्तेमाल होगा.

बिटक्वाइन और इथेरियम जैसे बिटक्वाइन निजी क्रिप्टोकरेंसी हैं लेकिन डिजिटल रुपी आरबीआई के नियंत्रण में होगा.

बिटक्वाइन की तरह इसकी माइनिंग नहीं हो सकती है. इसका मतलब ये है कि ज़्यादा एनर्जी इस्तेमाल और पर्यावरण के नुक़सान के लिए जिस तरह से बिटक्वाइन की आलोचना की जा रही, उससे आरबीआई का ई-रुपी बचा रहेगा.

इसे कौन जारी करेगा और ये कैसे ट्रांसफ़र होगा?

आरबीआई ई-रुपी जारी करेगा लेकिन कॉमर्शियल बैंक इसे डिस्ट्रीब्यूट करेंगे. डिजिटल रुपये का रिटेल वर्जन टोकन आधारित होगा. आपको ई-मेल जैसा लिंक मिलेगा, इस पर आप अपने पासवर्ड का इस्तेमाल कर पैसा भेज सकेंगे.

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क्या ई-रुपी पर ब्याज मिलेगा?

आरबीआई के कॉन्सेप्ट नोट के मुताबिक़ वह लोगों के वॉलेट में रखे ई-रुपी पर ब्याज देने के हक़ में नहीं है. क्योंकि लोग बैंकों से पैसा निकाल कर इसे डिजिटल रुपी के तौर पर रखने लगेंगे. इससे बैंकों के फ़ेल होने का ख़तरा हो सकता है.

क्या ई-रुपी दूसरे डिजिटल पेमेंट्स से बेहतर साबित होगा?

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अगर आप सीबीडीसी प्लेटफ़ॉर्म या यानी ई-रुपी का इस्तेमाल करेंगे तो इंटरबैंक सेटलमेंट की ज़रूरत नहीं होगी.

इससे लेनदेन ज़्यादा रियल टाइम में और कम लागत में होगा.

इससे आयातकों को काफ़ी फ़ायदा होगा. वे इंटमीडियरी के बगै़र भी अमेरिकी निर्यातक को रियल टाइम में डिजिटल डॉलर के ज़रिये भुगतान कर सकेंगे.

आम लोगों को क्या फ़ायदा होगा?

विदेश में काम करने वाले और डिजिटल मनी के रूप में सैलेरी हासिल करने वालों को इसे कम फ़ीस में अपने रिश्तेदारों या दूसरे देशों में रह रहे लोगों को ट्रांसफ़र करने की सुविधा दी जा सकती है.

माना जा रहा है कि बाहर पैसा भेजने की लागत इससे आधे से भी कम हो जाएगी.

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कितने देश लाने जा रहे हैं डिजिटल करेंसी?

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने अटलांटिक काउंसिल्स सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी ट्रैकर का हवाले से बताया है कि 100 से ज़्यादा देश सीबीडीसी लाने की योजना बना रहे हैं.

फ़िलहाल नाइजीरिया और जमैका समेत दस देश डिजिटल करेंसी लॉन्च कर चुके हैं.

चीन 2023 में डिजिटल करेंसी लॉन्च करेगा. जी-20 समूह के उन्नीस देश सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं.

डिजिटल करेंसी कितनी सुरक्षित?

यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने कहा है कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी रिस्क फ़्री मनी है, जिसकी गारंटी राज्य (देश) देता है.

जल्द ही यूरोपीय यूनियन अपने 27 सदस्य देशों में डिजिटल करेंसी लॉन्च करेगा.

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व ने कहा है कि अगर उसने डिजिटल करेंसी लॉन्च की तो यह लोगों के लिए सबसे सुरक्षित डिजिटल करेंसी होगी. इसमें कोई क्रेडिट और लिक्विडिटी रिस्क नहीं होगा.

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