इसके अलावा लगभग 20 निजी व्यवसायों, जैसे स्टारबक्स और मैकडॉनल्ड, ने भी इस प्रयोग में हिस्सा लिया है.
अगर ये कामयाब रहा, तो चीन सरकार 2022 में इसे विंटर ओलंपिक के समय सारे देश में जारी कर देगी.
हालाँकि ये चरणबद्ध तरीक़े से किया जाएगा और इसमें कई साल लग सकते हैं.
इस प्रोजेक्ट पर काम 2014 में शुरू हुआ था. चीन इसे लागू में काफ़ी तेज़ी दिखा रहा है.
इसके तीन मुख्य कारण हो सकते हैं: अमरीका के साथ बढ़ता ट्रेड वॉर, कोरोना वायरस को लेकर अमरीका और पश्चिमी देशों का चीन पर लगातार लगता इल्ज़ाम और फ़ेसबुक की डिजिटल करेंसी लिब्रा के इस साल लाने की तैयारी.
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टेक्टोनिक शिफ्ट
डिजिटल युआन को लाना एक ऐसी बात मानी जा रही है जिससे वैश्विक संतुलन में बदलाव आ सकता है. ये चीन की उन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का हिस्सा है जिनका उद्देश्य अमरीका के प्रभाव को ख़त्म करना और 21वीं सदी का एक शक्तिशाली देश बन कर उभरना है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके सफल प्रयोग से 10-15 वर्षों में एक नयी सियासी और आर्थिक व्यवस्था जन्म ले सकती है.
दिल्ली स्थित फ़ोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के चीन विशेषज्ञ डॉ. फ़ैसल अहमद कहते हैं, "भारत और अमरीका भी क्रमशः " लक्ष्मी "और " डिजिटल डॉलर" नाम की अपनी डिजिटल मुद्राओं पर काम कर रहे हैं. लेकिन अभी तक ये वास्तविकता से काफ़ी दूर हैं."
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अमरीकी डॉलर बनाम डिजिटल मुद्राएं
फ़िलहाल तो चीनी ड्रैगन ने भारतीय लक्ष्मी को काफ़ी पीछे छोड़ दिया है.
लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक़ मुद्रा जगत के बेताज बादशाह डॉलर पर भी ख़तरा मंडरा रहा है.
मुंबई स्थित चूड़ीवाला सेक्युरिटीज़ के आलोक चूड़ीवाला कहते हैं, "अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व के ख़रबों डॉलर के क़र्ज़ों को देखें तो डॉलर अपने असली मूल्य से काफ़ी महंगा है (ओवर-वैल्यूड). एक नई मुद्रा का निश्चित रूप से स्वागत है लेकिन इसकी वैश्विक स्वीकृति में एक लंबा समय लगेगा."
प्रवीण विशेष सिंगापुर-स्थित मॉड्युलर एसेट मैनेजमेंट के पोर्टफोलियो मैनेजर हैं और दुनिया भर की मुद्राओं से डील करते हैं.
वो कहते हैं, "डिजिटल युआन निश्चित रूप से अमरीकी डॉलर से दूरी बनाने की तरफ़ एक बड़ा क़दम है. वर्तमान में अमरीकी डॉलर दुनिया की प्रचलित मुद्रा है और ऐसा 1970 के दशक की शुरुआत में गोल्ड स्टैंडर्ड के अंत के बाद से ऐसा है."
वो आगे कहते हैं, "अमरीका-चीन के ट्रेड वॉर और अब कोरोना महामारी के विवाद के कारण बढ़ता अवैश्वीकरण डॉलर के लिए ख़तरा है. हालांकि, तत्काल किसी और विकल्प के अभाव के कारण इस परिवर्तन में समय लगेगा. दुनिया को निश्चित रूप से चीन के क़दम पर ध्यान रखना होगा."
फ़िलहाल अमरीकी डॉलर की अहमियत का इस बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि साल 2019 में अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक लेन-देन का लगभग 90 प्रतिशत कारोबार अमरीकी डॉलर में हुआ.
इसकी तुलना में चीनी युआन वैश्विक भुगतान और भंडार का केवल 2 प्रतिशत था.
दूसरी तरफ़ दुनिया के सभी रिज़र्व भंडार का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अमरीकी डॉलर में है.
भारत का 487 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भी अमरीकी डॉलर में ही है.
चीन के ख़ज़ाने में तीन ख़राब डॉलर भी अमरीकी मुद्रा में है.
डॉ फ़ैसल अहमद का मानना है कि चीन इसे कई तरीके से इस्तेमाल कर सकता है जिससे इसकी साख बढ़ेगी.
वो कहते हैं "चीन भू-राजनीतिक फ़ायदे के लिए दूसरे देशों को प्रोत्साहन पैकेज देने और मध्य एशिया से लेकर आर्कटिक क्षेत्र तक के बेल्ट एंड रोड (BRI) प्रोजेक्ट में शामिल देशों में निवेश करने के लिए इस करेंसी का इस्तेमाल कर सकता है."
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गोले प्रत्येक देश में कोरोना वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या दर्शाते हैं.
स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां
आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST
फ़िलहाल अमरीका डॉलर के प्रभाव और इसकी अहमियत का मतलब ये है कि अमरीका दुनिया की सियासत और आर्थिक मुद्दों में अपना दबदबा बनाए रखेगा.
उदाहरण के लिए, ईरान, रूस, उत्तर कोरिया और अन्य देशों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बैंकों की अमरीकी डॉलर पर निर्भरता के कारण संभव है.
डॉयचे बैंक ने इस साल जनवरी के अंत में डिजिटल मुद्राओं पर एक ख़ास रिपोर्ट जारी की थी जिसमें सुझाव दिया गया था कि चीनी डिजिटल युआन वैश्विक पावर संतुलन को उलट सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया, "चीन अपने केंद्रीय बैंक की मदद से एक डिजिटल मुद्रा पर काम कर रहा है जिसे सॉफ्ट या हार्ड-पावर टूल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. वास्तव में, अगर चीन में व्यापार करने वाली कंपनियों को डिजिटल युआन अपनाने के लिए मजबूर किया जाता है तो ये निश्चित रूप से वैश्विक वित्तीय बाज़ार में डॉलर की प्रधानता को नष्ट कर सकता है."
रिपोर्ट में कहा गया है, "बीसवीं सदी की शुरुआत में जिस तरह से अमरीका ने डॉलर को बढ़ावा दिया था उसी तरह से चीन सरकार अब रेनमिनबी RMB (चीन की आधिकारिक मुद्रा जिसकी इकाई युआन है) के अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिए ज़बरदस्त प्रयास कर रही है. साल 2000 से 2015 तक, चीन के व्यापारिक लेन-देन में RMB का हिस्सा शून्य से बढ़कर 25 प्रतिशत हो गया. "
डॉयचे बैंक ने सुझाव दिया कि डिजिटल युआन और इसी तरह की डिजिटल मुद्राएं नकदी को समाप्त नहीं कर सकती हैं लेकिन क्रेडिट कार्ड जैसे तीसरे पक्ष के अंत का कारण बन सकती हैं.
प्रवीण विशेष कहते हैं, "भुगतान के अन्य तरीकों के विपरीत, इसका उपयोग इंटरनेट कनेक्शन के बिना भुगतान के लिए किया जा सकता है. ये वास्तविक नकदी की तरह है मगर एक डिजिटल दुनिया में."
वह आगे बताते हैं, "डिजिटल युआन की सफलता इस बात पर टिकी होगी कि आम इंसान, खुदरा व्यापारी, कॉर्पोरेशन, सरकारें और अन्य देश इसे किस तेज़ी से अपनाते हैं."
मगर वर्चुअल दुनिया में एक शक्ति बन कर उभरने वाली मुद्राओं में फ़ेसबुक के लिब्रा और डिजिटल युआन के अलावा भी कई वर्चुअल करेंसी मौजूद हैं और कई पर काम चल रहा है.
बिटकॉइन बाज़ार में पहले से ही मौजूद है और इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है.
भारत ने क्रिप्टो मुद्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन रिज़र्व बैंक डिजिटल मुद्रा लक्ष्मी के बारे में गंभीरता से सोच रहा है.
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फ़ेसबुक का लिब्रा बनाम डिजिटल युआन
डॉयचे बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, "इस समय मुख्य धारा की डिजिटल मुद्राएं फ़ेसबुक की लिब्रा और चीनी सरकार की डिजिटल युआन हैं. फ़ेसबुक के लगभग 2.5 अरब यूज़र हैं जो दुनिया की आबादी का एक तिहाई हिस्सा है. चीन की 1.4 अरब से अधिक आबादी के साथ फेसबुक और चीन डिजिटल मुद्राओं को मुख्यधारा में आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं."
लेकिन अन्य डिजिटल मुद्राओं और डिजिटल युआन के बीच महत्वपूर्ण अंतर ये है कि डिजिटल युआन को चीन का केंद्रीय बैंक जारी करेगा जिससे इसे स्वीकृति मिलेगी और इस पर विश्वास बढ़ेगा.
अन्य सभी डिजिटल मुद्राएं विकेंद्रीकृत हैं और किसी भी नियामक प्राधिकरण के दायरे में नहीं आती हैं.
डॉ फ़ैसल अहमद कहते हैं "डिजिट़ल युआन लिब्रा जैसी अन्य मुद्राओं से अलग एक राज्य समर्थित मुद्रा है. इसके राजनीतिक असर भी होंगे. उदाहरण के लिए, डिजिटल युआन के इस्तेमाल से उत्तर कोरिया जैसे देशों को अमरीकी प्रतिबंधों से बचने में मदद मिलेगी."
भारत की अपनी डिजिटल मुद्रा लक्ष्मी की सोच 2014 में पैदा हुई थी. उसी वर्ष चीन में डिजिटल युआन का भी विचार पैदा हुआ था.
लेकिन भारत की लक्ष्मी के लांच के लिए पहले इस मुद्दे पर गठित कई समितियों की रिपोर्ट का इंतज़ार करना पड़ेगा.
एक विशेषज्ञ ने कहा, "भारत डिजिटल वॉलेट को बढ़ावा दे रहा है जबकि चीन डिजिटल मुद्रा लांच करने वाला है."
प्रवीण विशेष कहते हैं, "डिजिटल युआन को ख़तरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे डिजिटल नेटवर्क में क्रांति के रूप में देखना चाहिए. भारत ने भी AEPS (आधार सक्षम भुगतान प्रणाली) और UPI (एकीकृत भुगतान प्रणाली) को स्थानीय तौर पर इस्तेमाल से डिजिटल क्रांति को आगे बढ़ाया है."
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डिजिटल मुद्राओं के फ़ायदे और नुक़सान
फ़ायदे ये हैं कि इसकी नक़ल नहीं की जा सकती, लेन-देन तत्काल हो सकता है, अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन का ख़र्च न के बराबर होगा, सभी लोग इस्तेमाल कर सकेंगे और हवाला, तस्करी और उनके ज़रिए चरमपंथी गतिविधियों को मिलने वाली मदद के रास्ते बंद हो जाएँगे.
और नुक़सान ये है कि इसमें लोगों को जल्दी भरोसा नहीं होगा, आबादी के सबसे ग़रीब तबके तक इसकी पहुँच नहीं होगी और ये डिजिटल वॉलेट पर निर्भर होगा.
जानकार कहते हैं, जैसै-जैसे टेक्नोलॉजी का विकास होगा, डिजिटल करेंसी के फायदे भी बढ़ेंगे.
आलोक चूड़ीवाला कहते हैं "किसी भी सिस्टम पर लोगों का भरोसा बनने में एक लंबा समय लगता है. अमरीकी डॉलर 1770 से वजूद में है. इसकी लोकप्रियता पहले विश्व युद्ध के समय से बढ़ने लगी और दूसरे विश्व युद्ध तक ये दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मुद्रा बन गई."
इसराइल के इतिहासकार और विचारक युवल नूह हरीरी का कहना है कि मुद्रा एक मिथक है जिसका दुनिया भर में महत्व है.
हर कोई डॉलर पर भरोसा करता है और हर कोई इसे महत्व देता है.
लेकिन अगर अमरीका की दुनिया में धाक कम हो रही है तो कोई और ताक़त इसकी जगह लेगी. चीन उस दौड़ में काफ़ी आगे नज़र आता है.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
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पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.