तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट से किन शर्तों पर मिली अंतरिम ज़मानत

तीस्ता सीतलवाड़

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सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम ज़मानत दे दी है.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित की अगुआई वाले बैंच ने ये फ़ैसला सुनाया है.

इस बैंच में जस्टिस यूयू ललित के अलावा जस्टिस एस रवींद्र भट्ट और सुधांशु धूलिया भी हैं.

तीस्ता सीतलवाड़ पर साल 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े मामलों में 'निर्दोष लोगों' को फंसाने के लिए फर्जी सबूत गढ़ने का आरोप लगाया गया है.

इन आरोपों में गुजरात पुलिस ने तीस्ता को 25 जून को गिरफ़्तार कर लिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक गुजरात हाई कोर्ट तीस्ता सीतलवाड़ की ज़मानत याचिका पर फ़ैसला न सुना दे, वे अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करेंगी.

इसके साथ ही उन्हें जांच एजेंसियों के साथ मामले में सहयोग करने के लिए भी कहा गया है.

सुप्रीम कोर्ट

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गुरुवार की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी तीस्ता के मामले पर सुनवाई हुई थी.

उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर हैरत जताई थी कि गुजरात हाई कोर्ट ने तीस्ता की ज़मानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस भेजने के छह हफ़्ते बाद सुनवाई के लिए 19 सितंबर की तारीख़ आख़िर किस आधार पर तय की है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से इस बात का जवाब भी मांगा था कि क्या राज्य में इस तरह का कोई उदाहरण पहले से मौजूद है?

चीफ़ जस्टिस ने साफ़ शब्दों में नाराज़गी जताते हुए कहा, "शुक्रवार को दोपहर दो बजे हम इस मामले पर फिर से सुनवाई करेंगे. हमें ऐसे उदाहरण दीजिए जब ऐसे मामलों में किसी महिला अभियुक्त को हाई कोर्ट से ऐसी तारीख़ें मिली हों. या तो इस महिला को अपवाद माना गया है.... कोर्ट इस तरह से तारीख़ कैसे दे सकती है. क्या ये गुजरात में स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है?"

तीस्ता सीतलवाड़ की ज़मानत याचिका पर गुजरात हाई कोर्ट ने तीन अगस्त को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था और मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख़ 19 सितंबर तय की थी.

तीस्ता सीतलवाड़

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अदालत में दी गई दलीलें

तीस्ता सीतलवाड़ की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने एक दिन पहले यानी एक सितंबर को कोर्ट में कहा था कि उनके ख़िलाफ़ कोई मामला नहीं है.

तीस्ता ने अपनी याचिका में ये भी कहा कि विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने इस मामले में उन्हें अभियुक्त नहीं कहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि 2002 दंगों के पीड़ितों की मदद के लिए गुजरात सरकार उन्हें निशाना बना रही है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा था कि दो महीने बाद उनकी कस्टडी की क्या आवश्यकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा था कि पिछले दो महीनों में तीस्ता सीतलवाड़ के ख़िलाफ़ किस तरह के सबूत इकट्ठा किए गए हैं.

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अहमदाबाद सेशन कोर्ट

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद सेशन कोर्ट ने 30 जुलाई को तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार की ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी.

तब सेशन कोर्ट ने कहा था कि अगर उन्हें ज़मानत पर रिहा किया गया तो इस ग़लती करने वालों के बीच ये संदेश जाएगा कि किसी व्यक्ति को छूट हासिल है और वो बच जाएगा.

तीस्ता सीतलवाड़ को साल 2002 के गुजरात दंगों के मामले में आपराधिक साज़िश और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए गिरफ़्तार किया गया था.

उन्हें साबरमती सेंट्रल जेल में बंद रखा गया है. श्रीकुमार ने भी हाई कोर्ट में ज़मानत याचिका दाखिल कर रखी है.

इसी मामले के तीसरे अभियुक्त और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने ज़मानत याचिका नहीं दाखिल की है. इस मामले में जब संजीव भट्ट को गिरफ़्तार किया गया तो वे पहले से जेल में थे.

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क्या हैं आरोप

इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 468 (धोखे देने की नीयत दस्तावेजों से छेड़छाड़) और सेक्शन 194 (फ़र्जी सबूत गढ़ने) के तहत केस दर्ज करने के बाद अहमदाबाद सिटी क्राइम ब्रांच ने उन लोगों को गिरफ़्तार कर लिया था.

24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने ज़ाकिया जाफ़री की याचिका खारिज कर दी थी. इसके अगले दिन मुंबई में रहने वाली तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार को गिरफ़्तारी कर लिया गया था.

ज़ाकिया जाफ़री ने इस याचिका में गुजरात दंगे में शामिल होने का आरोपों का सामना कर रहे 64 लोगों को गुजरात एसआईटी के क्लीनचिट को चुनौती दी थी.

ज़ाकिया जाफ़री के पति और पूर्व कांग्रेसी सांसद एहसान जाफ़री की गुजरात दंगों के दौरान मौत हो गई थी.

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