ग़ुलाम नबी आज़ाद का पाँच पन्ने का पत्र सोनिया के नाम, राहुल के बारे में बहुत कुछ कहा

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कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने अपनी नाख़ुशी और मायूसी ज़ाहिर करते हुए जिस तरह पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है उससे एक बार फिर पार्टी के भविष्य को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है.
जम्मू इलाक़े से आने वाले ग़ुलाम नबी आज़ाद पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता रहे हैं, वे पिछले साल फ़रवरी महीने तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता रह चुके हैं.
आज़ाद को पिछले कुछ समय से नाराज़ बताया जा रहा था, उन्होंने जिस तरह पांच पन्ने की चिट्ठी लिखी है उसमें उन्होंने अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त किया है.
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती वर्षों को याद किया है जब 1970 के दशक में ब्लॉक स्तर पर कांग्रेस से जुड़े थे.
सोनिया गांधी को संबोधित पत्र में उन्होंने लिखा है, "पार्टी के सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को किनारे कर दिया गया है, अब अनुभवहीन चाटुकारों की मंडली पार्टी चला रही है.''
इससे पहले उन्होंने सोनिया गांधी की तारीफ़ की है और कहा है कि उन्होंने यूपीए-1 और यूपीए-2 को शानदार तरीके से चलाया जिसकी "वजह ये थी कि वरिष्ठ और अनुभवी लोगों की सलाह मानी जाती थी."
उनकी चिट्ठी से साफ़ ज़ाहिर है कि वे राहुल गांधी और उनके युवा सहयोगियों से नाख़ुश हैं और ख़ुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे.
वे ये भी मानते हैं कि राहुल गांधी का ये रवैया 2014 में कांग्रेस पार्टी की पराजय का कारण बना.

ग़ुलाम नबी आज़ाद की चिट्ठी की प्रमुख बातें:-
पार्टी के शीर्ष पर एक ऐसा आदमी थोपा गया जो गंभीर नहीं है
पार्टी के अहम फ़ैसले राहुल गांधी की चाटुकार मंडली ले रही है
पार्टी के सभी अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है
राहुल गांधी का अध्यादेश फाड़ने का फ़ैसला बिल्कुल बचकाना था
पार्टी अब इस हाल में पहुँच गई है कि वहाँ से वापस नहीं लौट सकती
पार्टी को चलाने के लिए एक और कठपुतली की तलाश हो रही है
पार्टी के अहम फ़ैसले राहुल गांधी के सिक्योरिटी गार्ड और पीए ले रहे हैं


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राहुल गांधी से सीधी नाराज़गी

सरकार और पार्टी में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके आज़ाद ने कहा है कि पार्टी अपरिपक्व लोगों के हाथों में है और इसकी सबसे बड़ी मिसाल है—"राहुल गांधी का मीडिया के सामने सरकारी अध्यादेश को फाड़कर फेंकना, वह अध्यादेश कांग्रेस के अनुभवी नेताओं ने गहन विचार-विमर्श करके तैयार किया था."
राहुल गांधी के इस व्यवहार को उन्होंने अपने पत्र में 'बचकाना' बताया है. उन्होंने कहा, "इस हरकत की वजह से प्रधानमंत्री और भारत सरकार की गरिमा को भारी ठेस पहुँची."
अपनी चिट्ठी में गुलाम नबी आज़ाद ने याद दिलाया कि सीताराम केसरी को पद से हटाकर जब सोनिया गांधी ने पार्टी की अध्यक्षता अपने हाथों में ली थी तब अक्तूबर 1998 में पंचमढ़ी में एक विचार मंथन का आयोजन किया गया था.
इसी तरह 2003 में शिमला में और 2013 में जयपुर में चिंतन बैठकें हुईं, लेकिन "इन बैठकों में तय किए ऐक्शन प्लान पर कभी ठीक से अमल नहीं किया गया जबकि ये सभी निर्णय कांग्रेस कार्यसमिति से पास हुए थे."
उन्होंने लिखा है कि मैंने अपने राजनीतिक जीवन में अपने परिवार और स्वास्थ्य की क़ीमत पर रात-दिन काम किया, लेकिन पार्टी के भीतर पिछले कई सालों से निकम्मापन घर कर चुका है.
2014 का चुनाव लड़ने के लिए जो योजना बनाई गई थी उसके बारे में आज़ाद का कहना है कि वह "नौ साल से कांग्रेस के दफ़्तर में स्टोररूम में बंद है. मेरे बार-बार अनुरोध के बावजूद किसी ने उन सुझावों पर गंभीरता से गौर करने की भी ज़रूरत नहीं समझी."

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हार-जीत का हिसाब-किताब

उन्होंने लिखा है, "आपके नेतृत्व में और उसके बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में 2014 से लेकर 2022 के बीच हम न सिर्फ़ दो लोकसभा चुनाव हारे बल्कि 49 विधानसभा चुनावों में से 39 में पार्टी को हार मिली. पार्टी को सिर्फ़ चार विधानसभा चुनावों में जीत मिली, छह राज्यों में वह सत्ताधारी गठबंधन में शामिल रही, आज की तारीख़ में पार्टी दो राज्यों में सरकार में है, और दो अन्य राज्यों में कमज़ोर गठबंधन साझीदार है."
उनका कहना है कि 2019 में हुई हार के बाद तो हालात और ख़राब होते जा रहे हैं, "राहुल गांधी ने हड़बड़ी में इस्तीफ़ा देकर अपने-आप को सभी वरिष्ठ नेताओं से काट लिया. उसके बाद से आप पिछले तीन सालों से अंतरिम अध्यक्ष बनी हुई हैं."
उन्होंने कहा कि सबसे बुरी बात ये है कि "पार्टी रिमोट कंट्रोल से चल रही है."
आज़ाद ने लिखा है कि इसी रिमोट कंट्रोल संस्कृति ने पहले यूपीए सरकार को और उसके बाद पार्टी को तबाह कर दिया.
'सिक्योरिटी गार्ड और पीए फ़ैसले ले रहे हैं'

आज़ाद ने सोनिया गांधी को अपने पत्र में नाम मात्र की अध्यक्ष बताया है और कहा है कि "सारे अहम फ़ैसले राहुल गांधी कर रहे हैं, बल्कि उससे भी बदतर तो ये है कि उनके सिक्योरिटी गार्ड और निजी सचिव फ़ैसले कर रहे हैं."
उन्होंने लिखा है कि पार्टी के 22 वरिष्ठ नेताओं ने जब सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी की बदहाली की ओर ध्यान खींचना चाहा तो इसके जवाब में "चाटुकारों की मंडली ने हम पर हमला बोला, हमें विलेन बनाने की कोशिश की. बहुत ही बुरी तरह हमें अपमानित किया गया."

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गुलाम नबी आज़ाद ने लिखा है कि "इसी चाटुकार मंडली के इशारे पर जम्मू में मेरा जनाज़ा निकाला गया जिन्होंने अनुशासनहीनता से भरी यह हरकत की उनकी तारीफ़ पार्टी के महासचिवों और राहुल गांधी ने की."
उनका कहना है कि इसी मंडली ने कांग्रेस के एक और अनुभवी नेता कपिल सिब्बल पर भी हमला किया, जबकि कपिल सिब्बल अदालतों में आपके और आपके परिवार को बचाने के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे थे.
'अब पार्टी की वापसी संभव नहीं'

आज़ाद का कहना है कि पार्टी अब ऐसी अवस्था में पहुँच गई है जहाँ से वापस लौटना संभव नहीं है.
उन्होंने कहा कि अब 'कठपुतली' की तलाश हो रही है, लेकिन ऐसा 'चुना हुआ व्यक्ति' कुछ भी नहीं कर पाएगा क्योंकि पार्टी तबाह हो चुकी है, उस व्यक्ति की डोर किसी और के ही हाथों में होगी.
माना जा रहा है कि उनका इशारा अशोक गहलोत की ओर है जिन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा चल रही है.
उन्होंने कहा है कि "देश की राजनीति में हमने अपनी जगह बीजेपी के लिए, और राज्यों में क्षेत्रीय दलों के लिए छोड़ दी है."
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राहुल गांधी पर एक और टिप्पणी उन्होंने की है, उन्होंने कहा है कि "यह दुर्दशा इसलिए हुई क्योंकि पार्टी के शीर्ष पर एक ऐसे आदमी को थोप दिया गया है जो गंभीर नहीं है.''
उन्होंने पार्टी के भीतर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को एक तमाशा बताया है.
उन्होंने गांधी परिवार से अपनी नज़दीकी का हवाला दिया. उन्होंने कहा, ''मैं अब भी परिवार के त्याग और बलिदान का सम्मान करता रहूँगा.''
उन्होंने अपने पत्र के अंत में लिखा कि पार्टी को 'भारत जोड़ो अभियान' से पहले 'कांग्रेस जोड़ो अभियान' चलाना चाहिए था.
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