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निशांक राठौर की 'मौत' का सच क्या निकला?
- Author, प्रशांत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी डिसइंफॉर्मेशन यूनिट
मध्य प्रदेश के निशांक राठौर का शव रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध हालत में मिलने के बाद से ही, सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों ने इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की.
निशांक के फ़ोन से किए गए कुछ विवादित मैसेज और इंस्टाग्राम स्टेटस के आधार पर इस घटना को मज़हबी रंग देकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई.
कहा गया कि निशांक की हत्या तथाकथित 'इस्लामी जिहादियों' ने की है क्योंकि वे नूपुर शर्मा का समर्थन कर रहे थे.
25 जुलाई की शाम से ही भारत में सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर #nishankrathore #justicefornishank #hinduunderattack जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे.
सोशल मीडिया पर सभी हैशटैग के साथ दावा किया जा रहा था कि नुपूर शर्मा के समर्थन और नबी की शान में गुस्ताख़ी के कारण मध्य प्रदेश में निशांक राठौर नामक युवक की हत्या कर दी गई. दावे के साथ साथ निशांक राठौर के विवादित व्हाट्सऐप चैट और इंस्टाग्राम स्टेटस के स्क्रीनशॉट भी बहुत ख़ूब वायरल किए गए.
निशांक राठौर के मोबाइल से जो व्हाट्सऐप मैसेज पिता को मिला उसमें लिखा था कि 'राठौर साहब आपका बेटा बहुत बहादुर था', 'नबी से गुस्ताख़ी नहीं. इसी तरह का मैसेज उसके दोस्तों के पास भी गए. इसके साथ ही उनके इंस्टाग्राम स्टेटस पर लिखा था कि "सारे हिन्दू कायरों, देख लो, अगर नबी के बारे में ग़लत बोलोगे तो यही हश्र होगा"
कई भारतीय न्यूज़ चैनलों ने भी इस ख़बर को प्रमुखता से चलाया और बिना जाँच-पड़ताल किए घटना को सांप्रदायिक रंग देकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की.
क्या था पूरा मामला ?
रायसेन ज़िला पुलिस के मुताबिक़ 24 जुलाई शाम 7 बजे, थाना ओबेदुल्लागंज की चौकी बरखेड़ा के अंतर्गत रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात शव बरामद हुआ जिसकी पहचान निशांक राठौर नाम के 21 वर्षीय युवक के तौर पर की गई.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बीटेक की पढ़ाई करने वाले निशांक राठौर सिवनी के रहने वाले थे. शुरुआत में आत्महत्या लगने वाली मौत की गुत्थी तब उलझ गयी जब घटना के दिन ही निशांक के पिता को उनके फ़ोन पर बेटे के फ़ोन से किए गए "सर तन से जुदा" वाले मैसेज कथित तौर पर मिले.
इस बीच सोशल मीडिया पर इस घटना को राजस्थान के कन्हैयालाल हत्याकांड और अमरावती के उमेश कोल्हे हत्यकांड की कड़ी के तौर पर पेश किया जाने लगा. राजस्थान और अमरावती में हुई ये दोनों ही घटनाएँ मज़हबी कट्टरपंथ का नतीजा थी.
निशांक राठौर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले की जांच के लिए सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया.
एसआईटी ने सुलझाई मौत की गुत्थी
मध्य प्रदेश में निशांक राठौर की मौत की जाँच कर रहे विशेष जाँच दल (एसआईटी) प्रमुख अमृत मीणा ने बीबीसी को बताया, "उन्होंने कर्ज़ न चुका पाने की वजह से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी. निशांक की हत्या नहीं हुई है, जैसा कि पहले संदेह जताया जा रहा था."
अमृत मीणा बताते है, "निशांक के फ़ोन की साइबर जाँच के बाद सामने आया कि निशांक ने क़रीब 18 ऑनलाइन ऐप से लोन ले रखा था, इसके अलावा उसने अपने कई दोस्तों से भी पैसे उधार ले रखे थे, पर उसके पास कर्ज़ चुकाने के पैसे नहीं थे. निशांक के मोबाइल फ़ोन से अपने पिता के लिए लिखा गया आख़िरी मैसेज हिंदी में था जिसमें 'सिर तन से जुदा' करने की बात कही गई थी. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी इसी तरह का मैसेज पोस्ट किया था."
एसआईटी प्रमुख आगे कहते हैं, "साइबर जाँच से पता चला कि इंस्टाग्राम स्टोरी लगाने के बाद निशांक के पास तीन दोस्तों से विवादित स्टोरी पर रिएक्शन आए थे जिसका निशांक ने जवाब भी दिया था. इस घटना से पहले निशांक ने कभी भी किसी धर्म या मज़हब के पक्ष या विपक्ष में किसी तरह की कोई सामग्री सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट या साझा नहीं की थी."
मीणा के अनुसार, निशांक के फ़ोन पर पासवर्ड लगा था. उनके फ़ोन पर किसी भी बाहरी व्यक्ति ने किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की है, और न ही घटनास्थल पर निशांक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति के कोई सबूत पाए गए .
फ़ोन से 24 जुलाई को शाम आखिरी बार छह बजे निशांक अपने पिता को फ़ोन करते हैं, पर उनके पिता वह कॉल नहीं उठा पाते, और उसके कुछ मिनटों बाद निशांक ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस की चपेट में आते हैं, जिसके कारण उनकी मौत हो जाती है.
जाँच से ये बात साफ़ हो जाती है कि निशांक राठौर की मौत का किसी षड़यंत्र, हत्या या मज़हबी कट्टरपंथ से कोई लेना-देना नहीं है. बल्कि ये एक आत्महत्या है.
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