मोहम्मद ज़ुबैर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रिहा, ट्वीट करने पर भी नहीं लगाई रोक

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- Author, सुचित्र के. मोहंती
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को बुधवार की शाम तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने ज़ुबैर को यूपी में दर्ज़ छह मामलों में अंतरिम ज़मानत देने के साथ ही उनके ट्वीट करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुई एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने कोर्ट से दरख़्वास्त की थी कि कम से कम ये शर्त रखी जाए कि वह ट्वीट न करें.
लेकिन सर्वोच्च अदालत ने उनके इस निवेदन को स्वीकार नहीं किया.
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने मोहम्मद ज़ुबैर को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यह अच्छा होगा कि सभी एफ़आईआर को एक साथ लाकर एक एजेंसी से जाँच कराई जाए. अगर बाद में और एफ़आईआर दर्ज होती है तो उनकी जाँच भी साथ में ही होगी.
कोर्ट ने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को बुधवार को शाम छह बजे तक मोहम्मद ज़ुबैर को रिहा करने का आदेश दिया.
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'पत्रकार को लिखने से कैसे रोकें'
यूपी सरकार की ओर से पेश हुईं एएजी गरिमा प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि मोहम्मद ज़ुबैर से कहा जाए वो ट्वीट न करें.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक पत्रकार को लिखने से कैसे रोका जा सकता है.
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि "ये कुछ ऐसा है कि एक वकील को कहा जाए कि वह बहस न करे. हम एक पत्रकार को ये कैसे कह सकते हैं कि वह लिखें नहीं और एक शब्द न कहें."
इस पर गरिमा प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन ब्रांच ने 8 जुलाई को सीतापुर मामले में अतंरिम ज़मानत देते हुए ट्वीट न करने की शर्त रखी थी.
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर ज़ुबैर कोई आपत्तिजनक ट्वीट करते हैं तो वे उसके लिए जवाबदेह होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि आवाज़ उठाने के लिए किसी के ख़िलाफ़ अग्रिम कार्रवाई कैसे की जा सकती है?
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ज़ुबैर की वकील ने क्या कहा
उत्तर प्रदेश में दर्ज अन्य मामलों के बारे में मोहम्मद ज़ुबैर की वकील वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, ''हाथरस में दर्ज मामले में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. वहीं लखीमपुर खीरी केस में पुलिस रिमांड के आवेदन पर आज सुनवाई होगी.''
एडवोकेट ग्रोवर ने आगे कहा, ''कृपया, इनके ट्वीट देखिए. इसमें उकसाने वाला कुछ भी नहीं है.''
उन्होंने सुदर्शन टीवी की ओर से दर्ज कराए गए मामले का भी ज़िक्र किया. उन्होंने बताया, ''बतौर फ़ैक्ट चेकर उन्होंने सुदर्शन टीवी की एक ग्राफ़िक्स में ग़लत मस्जिद की तस्वीर दिखाने के मामले को उठाया. बतौर फ़ैक्ट चेकर गज़ा बम धमाके में उन्होंने असल मस्जिद की तस्वीरें पेश की.''
वृंदा ग्रोवर के अनुसार, ''इस मामले को देखने से साफ़ है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया, लेकिन सुदर्शन चैनल ने उन पर 153ए, 295ए के तहत केस दर्ज करा दिया. यह तो उन्हें चुप कराने की कोशिश है. पुलिस को टैग करते हुए कहा गया कि उम्मीद है कि वो एक्शन लेंगे. असल में उकसा कौन रहा है?''

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दिल्ली पुलिस ने क्यों गिरफ़्तार किया था?
बीते 20 जून को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की थी. उन पर यह एफ़आईआर 2018 में सेंट्रल बोर्ड फ़िल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफ़सी) से हरी झंडी मिली 1983 की फ़िल्म 'किसी से ना कहना' की एक तस्वीर पोस्ट करने के मामले में हुई थी.
इसमें दिखाया गया कि हनीमून होटल का नाम बदलकर हनुमान होटल कर दिया गया है. इस तस्वीर को लेकर ही 'हनुमान भक्त' नाम के एक ट्विटर यूज़र ने शिकायत की थी और कहा था कि उसकी धार्मिक भावना आहत हुई है.
ज़ुबैर ने इसी तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा था, "2014 से पहले हनीमून होटल, 2014 के बाद हनुमान होटल." 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे. कहा जा रहा है कि मोहम्मद ज़ुबैर ने इस तस्वीर के ज़रिए पीएम मोदी पर तंज़ किया था.
मोहम्मद ज़ुबैर की वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में सवाल उठाते हुए कहा था कि पुलिस कैसे जादुई तरीक़े से इस ख़ास ट्वीट के आधार पर मोहम्मद ज़ुबैर के चार साल पुराने ट्वीट के लिए गिरफ़्तार कर सकती है.
इस मामले में ज़ुबैर को पहले ही ज़मानत मिल गई थी.
बाद में उत्तर प्रदेश में मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ छह एफ़आईआर दर्ज किए गए थे. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन छह मामलों में भी अंतरिम ज़मानत दे दी.
इससे पहले बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की प़ैग़ंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी के कारण भारत को राजनयिक स्तर पर निपटना पड़ा था.
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कई इस्लामिक देशों ने भारत को लेकर बयान जारी किया था और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. क़तर ने तो भारत से माफ़ी की मांग की थी. बाद में भारतीय जनता पार्टी ने नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था.
दरअसल, नूपुर शर्मा के मामले को मोहम्मद ज़ुबैर ने ही ज़ोर-शोर से उठाया था. बाद में यह मामला सरहद पार कर इस्लामिक देशों में भी मुद्दा बन गया था और फिर एक-एक कर इस्लामिक देशों ने भारत के ख़िलाफ़ बयान जारी किया था. बाद में मोहम्मद ज़ुबैर को भी धार्मिक भावना आहत करने के मामले में गिरफ़्तार किया गया.
ज़ुबैर पर कब, कहां और किन धाराओं में मामले दर्ज़
- दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ 2018 में किए गए एक ट्वीट के आधार पर एफ़आईआर दर्ज की है. इस एफ़आईआर में पहले आईपीसी की धाराएँ 153ए और 295 लगाई गई थीं. इसके बाद आपराधिक साज़िश (120-बी), सबूत मिटाना (201) और फ़ॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफ़सीआरए) की धारा 35 भी जोड़ी गई. दिल्ली पुलिस ने उन्हें 27 जून को गिरफ़्तार किया.
- दिल्ली पुलिस ने अगस्त 2020 में मोहम्मद ज़ुबैर पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण के लिए बने क़ानून (POCSO) के तहत भी एक केस दर्ज किया था. ये केस नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स की (NCPCR) प्रमुख प्रियंका कानूनगो की शिकायत पर दर्ज किया गया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सितंबर 2020 में मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाने पर रोक लग दी थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने फरवरी में पुलिस से अब तक हुई जांच पर स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को कहा. इसके बाद मई में दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि मोहम्मद ज़ुबैर का ट्वीट अपराध की श्रेणी में नहीं आता.

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- उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में एक जून को मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ 'हिंदू शेर सेना' के ज़िलाध्यक्ष भगवान शरण की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है. शिकायतकर्ता ने कहा है कि "हिंदू शेर सेना के राष्ट्रीय संरक्षक पूजनीय प्रबंधक महंत बजरंग मुनि जी को हेट मॉन्गर्स जैसे अपशब्द से संबोधित किया गया. उसी ट्वीट में मोहम्मद जुबैर ने यति नरसिंहानंद सरस्वती और स्वामी आनंद स्वरूप को भी अपमानित किया."

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- मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ लखीमपुर खीरी में 18 सितंबर 2021 को सुदर्शन टीवी न्यूज़ चैनल के स्थानीय पत्रकार आशीष कटियार ने रिपोर्ट (एफ़आईआर संख्या - 0511) दर्ज कराई, सुदर्शन टीवी के पत्रकार ने कहा कि मोहम्मद ज़ुबैर "देश विरोधी ट्वीट करने में माहिर हैं जिस पर कार्यवाही किया जाना न्यायहित में आवश्यक है."
- यह भी शिकायत की गई है कि ज़ुबैर ने "पूरे विश्व के मुसलमानों से अपील की है कि एकजुट होकर अराजकता फैलाएँ और देश का माहौल ख़राब करते हुए न्यूज़ चैनल के विरोध में सांप्रदायिकता फैले ताकि देश के अंदर गृह युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो सके."
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- मुज़फ़्फ़रनगर के थाना चरथावल में 24 जुलाई 2021 को अंकुर राणा ने शिकायत (एफ़आईआर संख्या 0199) की थी कि "ज़ुबैर ने एक फोनवार्ता के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी." ये मामला भी सुदर्शन न्यूज़ की उस ख़बर से जुड़ा है जिस आपत्तिजनक बताते हुए मोहम्मद ज़ुबैर ने कार्रवाई की मांग की थी.
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