नूपुर शर्मा को फटकार लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट ने अब कहा- हम ये कभी नहीं चाहते थे...- प्रेस रिव्यू

नूपुर शर्मा

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को राहत देते हुए अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ़्तार न किए जाने का आदेश जारी किया है.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे बी पारदीवाला की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की. यह वही बेंच थी जिसने इससे पहले 1 जुलाई को नूपुर शर्मा की याचिका सुनने से मना कर दिया था.

तब कोर्ट ने नूपुर शर्मा को उदयपुर की घटना के लिए जिम्मेदार बताते हुए फटकार लगाई थी और उनकी टिप्पणियों को "तकलीफ़देह" बताया था. कोर्ट ने कहा था "उनको ऐसा बयान देने की क्या ज़रूरत थी?"

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, मंगलवार को हुई सुनवाई में पिछली बार नूपुर शर्मा याचिका को अस्वीकार करनेवाली अदालत 18 दिन बाद दोबारा विचार करती प्रतीत हुई.

अख़बार के मुताबिक़ अदालत ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि एक जुलाई को जब उन्होंने सुनवाई के दौरान राहत देने से मना कर दिया था तो इसका मतलब नुपूर को अलग-अलग अदालतों में जाने के लिए मजबूर करना नहीं था जहाँ उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुए हैं.

बेंच ने कहा, "हम इसमें थोड़ा सुधार ये करना चाहते हैं कि हम यह कभी नहीं चाहते थे कि आप सभी अदालतों में जाएं."

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की इसी बेंच ने नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ दर्ज अलग-अलग एफ़आईआर को एक साथ करने से मना कर दिया था.

मगर, उसी पीठ ने मंगलवार को कहा कि इस मामले से जुड़े हुए कुछ अन्य तथ्य उसके सामने आए हैं.

मंगलवार को नूपुर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश का ज़िक्र करते हुए कहा,"जैसा कि अपने एक जुलाई के आदेश में कहा था कि वह अपने ख़िलाफ़ दर्ज हुईं एफ़आईआर के ख़िलाफ़ राहत के लिए संबंधित उच्च-न्यायालयों के पास जाएं. लेकिन नूपुर शर्मा के लिए उच्च-न्यायालयों में जाना मुश्किल है क्योंकि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं."

इस पर बेंच ने उनसे पूछा, "यदि हम आपकी बात को सही से समझ रहे हैं, तो आप किसी एक हाई कोर्ट में जाना चाहते हैं? क्या आप दिल्ली हाई कोर्ट जाएँगे?"

इसके जवाब में वकील ने हामी जताई.

इसके बाद अदालत ने कहा,"पहले हम ये सुनिश्चित करना चाहते थे कि आप क़ानून के तहत वैकल्पिक प्रावधानों का इस्तेमाल कर सकें. मगर अब जब आप इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि भविष्य में कुछ घटनाएँ हो सकती हैं, जैसे कि आपक या आपके जीवन पर ख़तरा हो...तो हम इस बात का ख़याल रखना चाहते हैं कि ऐसे इंतज़ाम किए जाएँ जिनसे कि आप वैकल्पिक प्रावधानों का लाभ उठा सकें."

बेंच ने केंद्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों को नोटिस जारी किया है और सुनवाई की अगली तारीख़ तक जवाब मांगा है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, नुपूर शर्मा के ख़िलाफ़ अलग-अलग राज्यों में अभी तक नौ एफ़आईआर दर्ज हो चुकी हैं. जिनमें से एक दिल्ली में, पांच महाराष्ट्र में, पश्चिम बंगाल में दो और तेलंगाना में एक मामला दर्ज हुआ है.

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टीवी कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ बातें करने वाले 163 मामलों पर सरकार ने की कार्रवाई

संसद का मॉनसून सत्र जारी है. जिसमें मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले तीन सालों में केबल टेलीविज़न नेटवर्क नियमों के उल्लंघन के तहत 163 मामलो में कार्रवाई की है.

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, लोकसभा में एक लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा, "पिछले तीन सालों में और मौजूदा वर्ष के दौरान, सरकार ने सलाह, चेतावनी और ऑफ़-एयर आदेश जारी करके 163 मामलों में कार्रवाई की है."

लोकसभा में सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि अगर कोई टीवी चैनल नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सरकार कार्रवाई करती है.

लोकसभा में एक कांग्रेस सांसद ने पिछले तीन वर्षों और मौजूदा वर्ष में संबंधित चैनलों के ख़िलाफ़ घटनाओं और उस पर कार्रवाई का विवरण मांगते हुए प्रश्न किया था.

अपने जवाब में अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्राइवेट टीवी सैटेलाइट टीवी चैनलों पर प्रसारित सभी कार्यक्रमों को केबल टीवी नेटवर्क अधिनियम का पालन करना अनिवार्य है. जो धर्म, समुदाय पर हमले ​​करने वाले, भड़काऊ शब्दों वाले किसी भी कार्यक्रम के प्रसारण को प्रतिबंधित करता है.

उद्धव ठाकरे

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उद्धव ठाकरे बीजेपी के साथ गठबंधन करना चाहते थे, पीएम से भी मिले थे- राहुल शेवाले

महाराष्ट्र के नव-नियुक्त सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले समूह की ओर से लोकसभा में शिवसेना के नियुक्त नेता राहुल शिवाले ने मंगलवार को दावा किया कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ख़ुद महाराष्ट्र में एमवीए सरकार बनने के तुरंत बाद बीजेपी से समझौता करना चाहते थे.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि उस समय शिवसेना के कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया था, जिस कारण समझौता नहीं हो सका था.

उन्होंने कहा, "उद्धव ठाकरे ने शिवसेना सांसदों के साथ बातचीत के दौरान बताया था कि वह बीजेपी के साथ गठबंधन के इच्छुक हैं."

उन्होंने कहा कि 2021 में जब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने गए थे तब उन्होंने उनके साथ गठबंधन के मुद्दे पर भी चर्चा की थी.

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