अमरनाथ यात्रा दो साल बाद आज से शुरू, किए गए हैं नए इंतज़ाम

बालटाल बेस कैम्प

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, जम्मू और कश्मीर से, बीबीसी हिंदी के लिए

दो साल के अंतराल के बाद श्री अमरनाथ यात्रा 30 जून से शुरू होने जा रही है. यह यात्रा 43 दिनों तक चलेगी. इस यात्रा में शामिल होने के लिए भारत के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का कश्मीर घाटी पहुंचना शुरू हो गया है.

अमरनाथ गुफा जाने वाले यात्री कश्मीर घाटी के दो बेस कैंप्स में ठहराए जा रहे हैं और इन बेस कैंप्स से रोज़ाना यात्रियों के जत्थे अमरनाथ गुफा दर्शन के लिए रवाना होंगे.

अमरनाथ जाने वाले यात्रियों के लिए कश्मीर के कई इलाकों में ट्रांज़िट कैंप भी बनाए गए हैं, जहाँ देर रात पहुंचने वाले यात्री ठहरेंगे और अगले दिन सुबह उन्हें बेस कैंप्स जाने की अनुमति होगी.

जम्मू और कश्मीर प्रशासन का कहना है कि अमरनाथ यात्रा के लिए हर तरह से चाक-चौबंद तैयारी की गई है.

अमरनाथ यात्रा में है इस बार क्या अलग?

प्रशासन का कहना है कि बीते वर्षों के मुक़ाबले में इस साल कुछ नई सुविधाएं यात्रियों को मुहैया करायी जाएंगी.

कश्मीर जोन के डिविजनल कमिश्नर पांडुरंग के. पोल ने बताया कि यात्रा के लिए मई के महीने से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं और इस बार भी ऐसा ही किया गया. उन्होंने बताया कि इस बार कुछ तैयारियां अलग से की गई हैं, जैसे वो गुफा के दोनों तरफ़ यानी नुनवन और बालटाल बेस कैंप से जियो नेटवर्क और एयरटेल नेटवर्क को शुरू कर दिया गया है.

कश्मीर के ​डिविजनल कमिश्नर पीके पोल

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पोल ने कहा, "इस बार अंडरग्राउंड पावर केबल सेवा को भी बालटाल से लेकर गुफा तक शुरू किया गया है."

"अंडरग्राउंड पावर सेवा की वजह से यात्रियों और यात्रा से जुड़े लोगों की मुश्किलें कम होंगी. पूरे 24 घंटे यह सेवा उपलब्ध रहेगी. कैंप्स में यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था क़रीब 30 से 50 प्रतिशत बढ़ा दी गई है."

"तीसरी बात यह है कि इस बार प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा पर आने वाले हर श्रद्धालु, लंगर वालों, घोड़े वालों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफ़िकेशन डिवाइस (आरआईडीएफ़) टैग दिया है. आरआईडीएफ़ को इस बार यात्रियों के लिए ज़रूरी बनाया गया है, ताकि समय-समय पर यात्रियों और दूसरे लोगों को ट्रैक किया जा सके और उनकी निगरानी की जा सके."

पोल का ये भी कहना था कि इन सब के चलते यात्रा की तैयारी किसी चुनौती से कम नहीं है.

अमरनाथ मार्ग की निगरानी करते सुरक्षा बल के जवान

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सुरक्षा के सख़्त इंतज़ाम

इस बार अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित तरीक़े से चलाने के लिए लखनपुर से लेकर अमरनाथ गुफा तक सुरक्षा के सख़्त इंतज़ाम किए गए हैं. इस बार सुरक्षा की पांच चरणों में व्यवस्था की गई है. जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह पर सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है.

यात्रा को सुरक्षित रूप से चलाने के लिए जो इंतज़ाम किए गए हैं, उनमें शार्पशूटर्स, ड्रोन और सीसीटीवी की निगरानी टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है.

कश्मीर ज़ोन के पुलिस महानिदेशक विजय कुमार ने बीते मंगलवार को अमरनाथ गुफा जाकर सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा लिया.

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने ट्वीट किया है, "पुलिस महानिदेशक और एसएसपी, अनंतनाग ने पवित्र गुफा और यात्रा शिविर और पंजतीर्थ का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने सीआरपीएफ़, आईटीबीपी, जम्मू-कश्मीर पुलिस, एनडीआरएफ़ और नागरिक प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की. बाद में, पुलिस महानिदेशक ने ज़मीन पर सुरक्षा बलों की तैनाती का ख़ुद से निरीक्षण किया और बेहतर तालमेल रखने पर ज़ोर दिया और यात्रा को सुचारू रूप से चलाने का निर्देश दिया."

43 दिनों की चलने वाली यात्रा 30 जून को गांदेरबल ज़िला के बालटाल और अनंतनाग ज़िला के पहलगाम के रास्तों से शुरू होने वाली है.

दक्षिण कश्मीर के पहलगाम के पारंपरिक रास्ते से श्रद्धालुओं को नुनवन बेस कैंप से अमरनाथ गुफा तक 48 किलोमीटर का सफ़र तय करना होगा, जबकि मध्य कश्मीर के बालटाल से 14 किलोमीटर का सफ़र पूरा करना होगा.

ख़बरों के मुताबिक़ अमरनाथ गुफा जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुरक्षा कवर देने के लिए सुरक्षाबलों की 300 कंपनियों को हाल ही में कश्मीर लाया गया है.

पंथा चौक ट्रांजिट कैम्प पर मौजूद स्वास्थ्य सहायता कैम्प

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स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां

जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग ने कश्मीर में जवाहर टनल से लेकर अमरनाथ गुफा तक मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था की है.

कश्मीर ज़ोन के डायरेक्टर स्वास्थ्य डॉक्टर मुश्ताक़ राथेर ने बीबीसी को बताया कि पहलगाम और बालटाल रास्तों पर यात्रियों के लिए 70 चिकित्सकीय सुविधाओं की व्यवस्था की गई है.

उनका कहना था पहलगाम के चंदनवाड़ी में तीर्थ यात्रियों के लिए छह बेस अस्पताल बनाए गए हैं. डॉक्टर मुश्ताक़ का कहना था कि गुफा जाने वाले रास्तों पर 26 ऑक्सीज़न बूथ बनाए गए हैं.

उन्होंने दावा किया है कि बीते वर्षों की तुलना में इस साल स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां तीन गुना ज़्यादा हैं.

पंथा चौक ट्रांजिट कैम्प पर पहुंचे तीर्थयात्री

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दो वर्ष से नहीं हो रही थी यात्रा

वर्ष 2020-21 को कोरोना संक्रमण के चलते यात्रा को आयोजित करने की मंज़ूरी नहीं मिली थी. दो वर्षों से यात्रा आयोजित न होने की वजह से इस बार यात्रियों की संख्या पहले के मुक़ाबले में कहीं ज़्यादा है.

इस बार अमरनाथ यात्रा को मीडिया की तरफ़ से कवर करने के नियम भी बदल दिए गए हैं. जम्मू-कश्मीर राजभवन ने किसी भी मीडिया हाउस को अमरनाथ गुफा तक जाने की इजाज़त नहीं दी है.

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के मीडिया सलाहकार नितेश्वर कुमार ने दो दिन पहले कुछ पत्रकारों से इस संबंध में बैठक की थी और उस दौरान ये जानकारी पत्रकारों को दी गई है कि किसी भी मीडिया हाउस को अमरनाथ गुफा तक जाने की इजाज़त नहीं होगी.

उस बैठक में शामिल एक पत्रकार ने बताया कि कोई ख़ास वजह तो बताई नहीं गई, सिर्फ़ इतना कहा कि गुफा तक जाने की इजाज़त मीडिया को नहीं होगी और न ही बेस कैंप तक कोई पत्रकार बिना अनुमति के जा सकता है.

यात्रा की कवरेज को लेकर इस तरह के नियम मीडिया के लिए पहली बार लागू हुए हैं.

अमरनाथ यात्रियों के पहले जत्थे को झंडी दिखाकर रवाना करते उपराज्यपाल मनोज सिन्हा

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जम्मू से बुधवार को पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए रवाना हो गया.

बुधवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू के भगवती नगर के शिविर से श्रदालुओं के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई. बम-बम भोले के जयकारों के बीच बीच जम्मू से श्रद्धालुओं ने अमरनाथ गुफा की तरफ़ सफ़र शुरू किया.

स्थानीय लोगों ने यात्रा का स्वागत किया

प्रशासन का कहना है कि अमरनाथ गुफा जाने वाले रास्तों पर हर तरह की तैयारी की जा चुकी है और स्थानीय लोग यात्रा का पारंपरिक रूप से स्वागत कर रहे हैं.

पर्यटन विभाग की सचिव सरमद हफ़ीज़ ने बीबीसी की बताया कि अमरनाथ यात्रा को सुखद रूप से चलाने के लिए हर एक तैयारी की जा चुकी है. हफ़ीज़ के मुताबिक टेंट कॉलोनियों को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है. स्थानीय सेवा देने वाले लोग जो यात्रा का स्वागत करते हैं उनकी तरफ से भी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.

जम्मू से लेकर अमरनाथ गुफा तक जगह-जगह कई वॉलिंटयर्स ने अपने लंगर लगाए हैं, जहां गुफा जाने वाले यात्रियों को मुफ़्त में खाना खिलाया जाता है.

दिनेश नाडोईया

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इसी तरह का एक लंगर श्रीनगर के पंथ चौक ट्रांज़िट कैंप में राजस्थान से आए हुए प्रधान दिनेश नाडोईया लगाते रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें रोज़ाना चार से पांच हज़ार यात्रियों को खाना खिलाने का लक्ष्य दिया गया है.

दिनेश नाडोईया ने बताया, "पहले इस ट्रांज़िट कैंप में तीन शेड होते थे और इस बार यहां 10 शेड बनाए गए हैं. टॉयलेट और नहाने की व्यवस्था चार गुना बढ़ाई गई है. बिजली और पानी की भी व्यवस्था भी बेहतर की गई है."

दिनेश नाडोईया का कहना था कि सुरक्षा के तो पुख्ता इंतज़ाम तो हैं ही, उसके अलावा कश्मीरी लोगों का जो प्यार मिल रहा है उसकी कोई मिसाल नहीं है.

उन्होंने बताया, "कश्मीरी लोग यात्रियों का इस्तक़बाल कर रहे हैं. आम कश्मीरीयों को इस यात्रा का हमेशा इंतज़ार रहता है. उनका भी रोज़गार इस यात्रा से जुड़ा है."

अमरनाथ गुफा जाने वाले यात्रियों के पंजीकरण का सिलसिला जारी है. अधिकारियों के मुताबिक़, अभी तक पंजीकृत यात्रियों का आंकड़ा एक लाख को पार कर चुका है.

वीडियो कैप्शन, ये कश्मीरी तीन साल से कैसे बेबसी झेल रहे हैं?

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