कोरोना संक्रमण के चलते अमरनाथ यात्रा इस साल नहीं होगी

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अमरनाथ श्राइन बोर्ड की 39वीं बोर्ड मीटिंग में इस साल यानी 2020 की अमरनाथ यात्रा रद्द करने का फ़ैसला लिया गया.
कश्मीर के स्थानीय पत्रकार माजिद जहांगीर के मुताबिक उप राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू की अध्यक्षता में हुई बैठक में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति का हवाला देते हुए इस यात्रा को रद्द करने का फ़ैसला लिया गया.
इस बैठक में यह चर्चा हुई कि अमरनाथ यात्रा को कराने के लिए फरवरी, 2020 से तैयारियां शुरू हो गई थीं लेकिन कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन के चलते केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में धार्मिक जगहें आम लोगों के लिए बंद हैं.
ये पाबंदी 31 जुलाई तक लागू रहेंगी. बोर्ड की बैठक में यह भी कहा गया कि जुलाई महीने में कोरोना संक्रमण तेज़ी से बढ़ा है. स्वास्थ्यकर्मी भी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं ऐसे में अमरनाथ यात्रा के चलते काफी सारा संसाधन इस यात्रा के लिए लगाना पड़ता, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाएं प्रभावित होतीं. इन सबके अलावा श्रदालुओं के संक्रमित होने का ख़तरा भी बना हुआ था.
हालांकि श्राइन बोर्ड की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया है कि श्रदालुओं को वर्चुअल दर्शन करने की सुविधा मुहैया कराई जाएगी.
कश्मीर में इस यात्रा के आयोजन को लेकर आम लोगों में काफ़ी चिंता थी, इस पर कश्मीर से बीबीसी संवाददाता रियाज मशरूर की रिपोर्ट आप यहां पढ़ सकते हैं-
हर साल दिल खोलकर अमरनाथ यात्रियों का स्वागत करने वाले कश्मीरी समाज में इस साल अमरनाथ यात्रा को लेकर थोड़ी चिंता थी. इसकी वजह है कि जम्मू-कश्मीर 'देश के कई कोविड-19 हॉटस्पॉट्स में से एक' बन चुका है और कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.
वहीं कश्मीर में मौजूद भारतीय सेना अमरनाथ यात्रा के दौरान चरमपंथी हमले की संभावना भी ज़ाहिर कर चुकी थी.
हालांकि जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने अमरनाथ यात्रियों के लिए जो नया प्रोटोकॉल बनाया था उसके अनुसार तीर्थयात्रियों की दैनिक संख्या 500 तक सीमित की गई है और यात्रा केवल दो सप्ताह तक चलाने के निर्देश दिये गए थे.
इसका मतलब है कि पूरे भारत के क़रीब आठ हज़ार तीर्थयात्री कश्मीर जाने के लिए लंबी यात्राएं करके और वहाँ पहुँचकर बाबा अमरनाथ की गुफ़ा के दर्शन के लिए पहलगाम और सोनमर्ग से हिमालय-श्रृंखला की चढ़ाई कर पाते.
कश्मीर में कोरोना संक्रमण के मामलों में तीव्र उछाल दर्ज किया गया है. रोज़ाना कोरोना के औसतन 500 नये मामले सामने आ रहे हैं और क़रीब 10 लोगों की रोज़ कोविड-19 के कारण मौत हो रही है. अब तक 12 हज़ार से ज़्यादा लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनमें से 250 लोगों की मौत हो चुकी है.

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वैसे, पिछले साल अनुच्छेद-370 हटाये जाने के कारण अमरनाथ यात्रा को रद्द करना पड़ा था.
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद-370 हटाये जाने की घोषणा हुई थी जिसके कुछ दिन बाद ही भारतीय फ़ौज ने ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर यह चेतावनी दी थी कि 'अमरनाथ यात्रियों पर चरमपंथी हमला हो सकता है.'
मगर इस साल, भारतीय फ़ौज की चेतावनी के बाद भी प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा रद्द करने पर विचार नहीं किया है. बल्कि स्थानीय स्तर पर यात्रा की तैयारियाँ ज़ोर शोर से चल रही थीं.
अमरनाथ यात्रा के बंदोबस्त में लगे एक सरकारी अधिकारी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हम आदेशों के अनुसार काम कर रहे हैं. जो रास्ते बाबा अमरनाथ की गुफ़ा को जाते हैं, उन्हें दोबारा तैयार किया गया है और बाक़ी बंदोबस्त भी लगभग पूरे किये जा चुके हैं."
भारतीय सेना के ब्रिगेडियर वीएस ठाकुर ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि 'दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम, शोपियाँ और पुलवामा में क़रीब 100 हथियारबंद चरमपंथियों की मौजूदगी है.' और तीर्थ-यात्रा का रूट इन चार में से दो ज़िलों से गुज़रता है.
बाबा अमरनाथ की गुफ़ा को क़रीब 500 साल पहले खोजा गया था. पिछले कई दशकों से भगवान शिव को मानने वाले अमरनाथ यात्रा करते रहे हैं और स्थानीय प्रशासन के लिए भी ये तीर्थ-यात्रा सर्वोच्च प्राथमिकता रही है.

पूरी तरह से स्वायत्त अमरनाथ श्राइन बोर्ड होने के बावजूद, कम से कम सोलह सरकारी विभागों को अमरनाथ यात्रा के दौरान तमाम सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए अलर्ट पर रखा गया था.
लेकिन कश्मीरी लोगों को डर था कि यात्रा की वजह से कहीं महामारी और ना बढ़ जाये. उन्हें लगता है कि 'तीर्थ-यात्रा को नियंत्रित रख पाना मानवीय रूप से असंभव होगा.'
इतिहासकार और स्तंभकार पीजी रसूल कहते हैं, ''उत्तराखण्ड में होने वाली पवित्र चारधाम यात्रा को गंभीर रूप से प्रतिबंधित किया गया है. सिर्फ़ स्थानीय लोगों को तीर्थ-यात्रा करने की अनुमति दी गई. लेकिन अमरनाथ यात्रा के लिए पूरे देश के लोग यात्रा करते. यदि एक व्यक्ति भी संक्रमित होता और वो कैरियर साबित हुआ तो कल्पना कीजिए कि आप कितने बड़े क्षेत्र में संक्रमण फ़ैलने की गुंजाइश होती. यह ना केवल कश्मीरियों के लिए ख़तरा था, बल्कि तीर्थ-यात्रियों के लिए भी सुरक्षित नहीं था."
सरकार पहले अमरनाथ यात्रा कराने पर विचार कर रही थी, सरकार के रवैये पर जम्मू स्थित विश्लेषक तरुण उपाध्याय ने कहा, "मुझे नहीं पता कि सरकार के फ़ैसले पर हंसना चाहिए या रोना चाहिए. देश भर से श्रद्धालु जम्मू पहुँचते हैं. तालाब टुल्लू इस यात्रा का मुख्य बेस कैंप है और अधिकारियों ने पूरे तालाब टुल्लू क्षेत्र को रेड ज़ोन घोषित किया हुआ है."

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पिछले महीने भी स्वायत्त संस्था 'अमरनाथ श्राइन बोर्ड' ने 2020 में तीर्थ-यात्रा नहीं कराने का निर्णय लिया था.
लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसमें हस्तक्षेप किया और श्राइन बोर्ड के आदेश को रद्द कर दिया गया.
इसको लेकर सिर्फ़ कश्मीर ही नहीं, बल्कि जम्मू में भी बहुत से लोग केंद्र सरकार के इस 'दोहरे मापदंड' का मज़ाक बना रहे थे और उनका सवाल है कि 'सरकार पैमाना कैसे बदल सकती है.'
श्रीनगर में मौजूद पत्रकार रियाज़ मलिक सवाल करते हैं, "तबलीगी जमात के मरकज़ पर जमा हुए लोग 'बड़ी परेशानी' थे, उनसे संक्रमण फैला, इसलिए उनके ख़िलाफ़ मुक़दमें दर्ज किये गए. लेकिन अमरनाथ यात्रा, जिसमें पूरे देश से लोग आते हैं, हज़ारों लोग जमा होंगे, उसके लिए सरकार बेपरवाह होकर आगे बढ़ रही थी."
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