जम्मू-कश्मीर: कोरोना संक्रमित इलाज के लिए दूसरे राज्यों का कर रहे हैं रुख़

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    • Author, मोहित कंधारी (जम्मू से), माजिद जहांगिर (श्रीनगर से)
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और हालात चिंताजनक बने हुए हैं. बुधवार को यहां सबसे अधिक 2204 मामले दर्ज किये गए और 13 मरीज़ों की मृत्यु हो गई.

बुधवार को मेडिकल हेल्थ विभाग के वित्तीय आयुक्त अटल दुल्लो ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि 20 अप्रैल के दिन किए गए टेस्ट रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पॉज़िटिविटी रेट 5.2 प्रतिशत है.

इस बीच इस केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना पॉज़िटिव एक्टिव मामलों की संख्या क़रीब 15 हज़ार पहुँच गयी है.

अब तक पूरे केंद्र शासित प्रदेश में दो हज़ार से ज़्यादा मरीज़ों की मौत हुई है जिसमें से क़रीब 800 जम्मू संभाग और 1300 से अधिक कश्मीर संभाग के हैं.

जम्मू-कश्मीर सरकार के सूचना विभाग के अनुसार, "पिछले एक हफ़्ते में जम्मू संभाग में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेज़ी आयी है. जहाँ 13 अप्रैल को जम्मू संभाग में कोरोना संक्रमित मरीज़ों की संख्या 3267 थी, वहीं 21 अप्रैल को यह संख्या बढ़कर 6216 हो गयी है."

जम्मू-कश्मीर के सभी शहरों में नाईट कर्फ़्यू लगा दिया गया है. बाज़ारों में भीड़ कम करने के लिए सरकार ने 50 प्रतिशत दुकाने बंद रखने का आदेश भी जारी किया है. इसके अलावा यात्री वाहनों को क्षमता से 50 प्रतिशत कम सवारी बिठाने का आदेश जारी किया गया है.

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दूसरे राज्यों का रुख़ कर रहे हैं मरीज़

जम्मू के त्रिकुटा नगर इलाक़े में रहने वाले राजेश और उनकी माँ पिछले एक हफ़्ते से घर से दूर जालंधर के एक अस्पताल में ज़िंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं. इस मुश्किल की घड़ी में घर का कोई भी सदस्य उनके साथ नहीं है.

परिवार के सदस्य कोरोना संक्रमण के कारण क्वारंटीन हैं. जम्मू में रहने वाले कई परिवारों की कहानी इससे मिलती-जुलती है.

कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं और बेहतर इलाज की तलाश में बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज़ पड़ोसी राज्यों का रुख़ कर रहे हैं. यहां से लोग पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की ओर इलाज के लिए जा रहे हैं.

वहीं सरकार लगातार इस बात का दावा कर रही है कि जम्मू कश्मीर में कोरोना संक्रमितों के लिए अलग-अलग अस्पतालों में लगभग 6000 बेड रिज़र्व हैं. सरकार के मुताबिक़ इनमें से सिर्फ़ 807 बेड ही अभी भरे हैं.

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तो सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में बेड ख़ाली होने की बावजूद कोरोना संक्रमित बाहरी राज्यों का रुख़ क्यों कर रहे हैं?

राजेश के परिवार के एक सदस्य ने बीबीसी हिंदी को बताया कि पिछले साल जम्मू के मेडिकल कॉलेज में समय पर इलाज न मिलने और ऑक्सीजन की कमी की वजह से मरीज़ों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था, इसी कारण लोगों को सरकारी अस्पतालों पर भरोसा नहीं रहा.

फ़ोन पर बात करते हुए राजेश के एक क़रीबी रिश्तेदार ने बताया ,"मां की तबीयत बिगड़ने लगी थी. जब जम्मू में कोविड के मरीज़ों के लिए आईसीयू बेड का इंतज़ाम नहीं हो पाया हमें उन्हें मजबूरी में जालंधर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा."

माँ का इलाज करवाते करवाते उनका छोटा बेटा प्रवीण भी कोरोना संक्रमित हो गया और इस समय वो भी उसी अस्पताल में अपना इलाज करवा रहा है. उनके साथ घर का कोई दूसरा सदस्य नहीं है जिस की वजह से उन्हें बहुत परेशानियां हो रही हैं.

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सरकार की कैसी है तैयारी

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वयं कोरोना से जुड़े मामलों की समीक्षा कर रहे हैं.

अटल दुल्लो ने पत्रकारों को बताया की एक हफ़्ते के अंदर सरकार जम्मू-कश्मीर में कम से कम 23 ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट चालू करने जा रही. उनके मुताबिक़ इसके साथ ही 2000 ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड चालू हो जायेंगे.

दुल्लो ने बताया कि अभी तक पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 17.5 लाख लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ दी जा चुकी है.

उनके मुताबिक़ वैक्सीनेशन सेंटर्स की संख्या 1400 से बढ़ा कर 3000 की जा रही है ताकि जनता को उनके घर के पास वैक्सीन मिल सके.

सिर्फ़ जम्मू संभाग में रोज़ाना 900 से ज़्यादा मामले दर्ज हो रहे हैं. जम्मू संभाग में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले जम्मू ज़िले में ही दर्ज किए जा रहे हैं.

उसके बाद उधमपुर, रियासी, कठुआ और सांबा में सबसे अधिक मामले सामने आ रहे है. नियंत्रण रेखा से सटे राजौरी और पुंछ में फ़िलहाल स्थिति इतनी गंभीर नहीं है.

जम्मू मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. संदीप डोगरा ने बीबीसी हिंदी से बताया, "जम्मू संभाग में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसके लिए आम जनता का ग़ैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार और अलग-अगल स्ट्रेन ज़िम्मेदार हैं."

मरीज़ों का दूसरे राज्यों में इलाज के लिए जाने के सवाल पर वो कहते हैं कि यह परसेप्शन का मामला है. उनके मुताबिक़, "आम जनता के मन में एक धारणा बन गयी है कि सरकारी अस्पताल में ठीक इलाज नहीं मिलता इसलिए वो प्राइवेट सेक्टर के आभाव में बाहरी राज्यों का रुख़ करते हैं."

डॉ डोगरा कहते हैं कि सरकार ने समय रहते कुछ कड़े क़दम उठाये हैं जिससे उम्मीद भी जगी है कि बाहरी राज्यों की तुलना में जम्मू संभाग में हालात क़ाबू में किये जा सकते हैं.

वहीं कश्मीर के डॉक्टरों के संगठन 'डॉक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर' के मुताबिक़ कश्मीर के अस्पतालों में ICU बेड्स की कमी होने लगी है और ऑक्सीजन की सप्लाई सिलिंडर्स से पूरी की जा रही है.

संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर निसार उल हसन कहते हैं कि "बीते दो हफ़्तों में कश्मीर के अस्पतालों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं. कुछ गंभीर मामले भी सामने आ रहे हैं. महाराजा हरि सिंह अस्पताल में हमारे पास रोज़ाना बीस से तीस केस ऐसे होते हैं, जो गंभीर होते हैं. ऐसे गंभीर मामलों के लिए आईसीयू बेड्स की ज़रूरत होती है. लेकिन उनको वो नहीं मिलते हैं. अस्पताल में जो बेड्स मौजूद हैं, वो पहले ही बुक होते हैं. दूसरे अस्पतालों में भी हालात ऐसे ही हैं."

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दक्षिणी कश्मीर के एक नागरिक ज़ोहूर ने बताया कि वो बीते कई दिनों से बीमार हैं. कोरोना के डर और अस्पतालों में आउटडोर पेशेंट सुविधाएं बंद होने से उन्हें वीडियो कॉल के ज़रिए डॉक्टर से इलाज करवाना पड़ रहा है.

वैष्णो देवी आने वालों की संख्या घटी

नवरात्र और रमज़ान के बावजूद सारे ज़िलों के बाज़ारों में पहले रौनक नहीं है. ज़रूरी सामान की ख़रीदारी को छोड़ लोग बेवजह बाहर निकलने से परहेज़ कर रहे हैं.

वैष्णो देवी की यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी पिछले सालों की तुलना में भारी गिरावट देखी जा रही.

माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार रोज़ाना 9,000 से 10,000 यात्री कटरा बेस कैंप पहुँच रहे हैं. आम तौर पर नवरात्री के दिनों में 30,000 से 40,000 श्रद्धालु रोज़ाना यहां आते थे.

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श्रीनगर ज़िले में मरने वालों की संख्या 500 के क़रीब

कश्मीर के श्रीनगर ज़िले में अबतक मरनेवालों की कुल संख्या 495 तक पहुँच चुकी है. प्रशासन ने कश्मीर के सभी दस ज़िलों में रात का कर्फ़्यू लगा दिया है.

प्रशासन ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में केवल पचास प्रतिशत सवारियों को बिठाने का आदेश दिया है. साथ ही प्रशासन ने ये भी कहा है कि नगर पालिका के अंदर आने वाली दुकानें बारी-बारी से खुलेंगी.

हालाँकि, इस फ़ैसले का श्रीनगर के व्यापारी संगठनों ने विरोध जताया है. उनका कहना है कि सिर्फ़ दुकानें बंद कराने से संक्रमण नहीं रुकेगा.

संगठन के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन ख़ान ने कहा कि सरकार को दूसरे विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए.

पर्यटन को फिर लगा धक्का

कश्मीर के पर्यटन उद्योग को लगातार तीसरे वर्ष भी नुक़सान हो रहा है. कश्मीर हाउसबोट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अब्दुर रशीद ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि डल झील में हाउसबोट्स की सभी बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं.

उन्होंने कहा, "बाहर के ट्रैवेल एजेंट्स ने जो बुकिंग की थीं, वो सब रद्द हो चुकी हैं. यहाँ जितने भी पर्यटक थे, वो वापस जा चुके हैं. हाउसबोट वीरान हो चुके हैं. बीते तीन महीने से दो वर्षो के बाद थोड़ा काम बढ़ गया था, उम्मीद थी कि आगे भी अच्छा काम चलेगा लेकिन अब ऐसा नहीं लग रहा है."

अमरनाथ यात्रा की रजिस्ट्रेशन स्थगित

कोरोना के बढ़ते मामले को देख श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने गुरुवार को बताया कि फ़िलहाल अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के रजिस्ट्रेशन को स्थगित कर दिया गया है.

पिछले साल कोरोना के कारण अमरनाथ यात्रा को रद्द किया गया था.

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