ज्ञानवापी का मामला अब वाराणसी ज़िला जज की कोर्ट में, तय होगा मुक़दमा चले या नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी विवाद को वाराणासी ज़िला जज की अदालत के समक्ष भेज दिया है. ज्ञानवापी मस्जिद की प्रबंधन समिति की तरफ़ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'पांच हिंदू महिलाओं की तरफ़ से दायर मुक़दमा चलाया जाए या नहीं इसे वाराणसी ज़िला जज की अदालत प्राथमिकता से तय करेगी.'
अभी तक इस मामले की सुनवाई वाराणासी के सिविल जज (सीनियर डिवीज़न) की अदालत में हो रही थी. अब ये मुक़दमा वाराणसी ज़िला जज की अदालत में भेज दिया गया है.
चस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने भी कहा कि इस विवाद के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का 17 मई 2022 को पारित आदेश प्रभावी रहेगा.
इस आदेश के तहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद परिसर में मिले कथित 'शिवलिंग' की सुरक्षा की जाए और मुसलमानों का मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के अधिकार की भी रक्षा की जाए.
अदालत ने कहा कि ये आदेश ज़िला जज की अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद समिति की याचिका का निपटारा होने और उसके आठ सप्ताह बाद तक प्रभावी रहेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी के ज़िलाधिकारी को मस्जिद परिसर में वज़ू की व्यवस्था करने के लिए भी निर्देशित किया है.
शुक्रवार को अदालत के समक्ष मस्जिद समिति की तरफ से कहा गया कि परिसर में सदियों से चली आ रही यथास्थिति में परिसर को सील करने के बाद पहले ही बदलाव आ चुका है.
मस्जिद समिति की तरफ़ से तर्क दिया गया कि भले ही मामलों को ज़िला जज की अदालत में भेजा जा रहा है लेकिन यथास्थिति बरक़रार रहनी चाहिए.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद समिति की इस गुहार पर कोई आदेश पारित नहीं किया.
सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला जज को निर्देश दिया है कि इस प्रश्न को प्राथमिकता से तय किया जाए कि क्या ज्ञानवापी मामले में पूजा स्थल अधिनियम (विशेष प्रावधान) क़ानून के तहत मुक़दमें पर रोक होगी या नहीं.
मस्जिद समिति ने कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर (नागरिक प्रक्रिया संहिता) के नियम 7 के ऑर्डर 11 के तहत दायर मुक़दमा ख़ारिज करने की याचिका दायर की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक ऑर्डर 11 रूल 7 के तहत दायर याचिका पर फ़ैसला नहीं आता, वाराणासी के सिविल कोर्ट का शिवलिंग के स्थान को सुरक्षित करने का आदेश प्रभावी रहेगा.
मस्जिद समिति की तरफ़ से ये तर्क भी दिया गया था कि वाराणसी के सिविल जज का मस्जिद परिसर में सर्वे के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश 1991 में पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन है.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ये भी कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कमिशन की रिपोर्ट के चुनिंदा हिस्सों को मीडिया को लीक किया जाना बंद हो.
तीन जजों की बैंच के अध्यक्ष जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "कमिशन की रिपोर्ट के हिस्सों का मीडिया में लीक होना हर हाल में बंद हो."
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "हमें दूसरे पक्ष को कहना चाहिए कि लीक बंद हो. जब कमिशन की रिपोर्ट आ जाए तो उसे अदालत के समक्ष पेश किया जाना चाहिए. प्रेस में चीज़ें लीक नहीं होनी चाहिए. इस रिपोर्ट को जज के सामने ही पेश किया जाना चाहिए."

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा इस बेंच का हिस्सा हैं.
मस्जिद समिति की तरफ़ से अदालत के सामने पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी ने अदालत से कहा कि मीडिया में कमिशन रिपोर्ट के चुनिंदा हिस्से लीक किए जाने से एक ख़ास नैरेटिव बन रहा है.
उन्होंने अदालत से ये भी बताया कि सिविल कोर्ट ने जानकारी लीक करने को लेकर एडवोकेट कमिश्नर को पद से हटा दिया है.
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