नीमच: प्रशासन ने हटाई मूर्ति, हिंदू संगठन ने कहा - तेज़ करेंगे विरोध

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मध्य प्रदेश के नीमच में सोमवार को शहर की पुरानी कचहरी के पास जिस मूर्ति की स्थापना की गई थी उसे प्रशासन ने हटा दिया है. अब मूर्ति को वहां से हटाकर नीमच सिटी के पुराने थाने के परिसर में मौजूद मंदिर में स्थापित कर दिया गया है. ये सब कुछ कड़ी सुरक्षा के बीच किया गया.
मगर प्रशासन की इस पहल के विरोध में हिंदू संगठन सड़कों पर उतरे और उन्होंने बुधवार की शाम शहर के ही फ़व्वारा चौक पर सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया और अपना विरोध जताया.
प्रशासन ने नीमच सिटी थाने के जिस मंदिर परिसर में मूर्ति को ले जाकर स्थापित किया है वहां पर ताला भी डाल दिया गया है.
सोमवार को एक दरगाह के पास स्थित पुरानी कचहरी के मैदान में मूर्ति स्थापना के बाद हिंसा भड़क गयी थी जिसकी वजह से शहर के कई इलाकों में उपद्रव और आगज़नी की घटनाएं हुईं.
इस सिलसिले में लगभग एक दर्जन लोगों को अब तक हिरासत में लिया गया है.
हिंदू संगठन और ख़ास तौर पर विश्व हिंदू परिषद उसी जगह पर मूर्ति की पुनर्स्थापना की मांग कर रहा है जिस जगह से प्रशासन ने उसे हटाया था.
परिषद के विभाग संयोजक अनूप सिंह झाला ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने ऐसा 'एक समुदाय के दबाव' में किया है.

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हिंदू संगठनों का क्या कहना है
हिंदू संगठनों ने प्रशासन को एक दिन का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि अगर मूर्ति उसी जगह स्थापित नहीं की गयी तो शुक्रवार को नीमच में बंद के आह्वान के साथ पूरे प्रदेश में व्यापक आन्दोलन चलाया जाएगा.
अनूप सिंह झाला ने कहा, "प्रशासन ने एक वर्ग को संतुष्ट करने के लिए प्रतिमा को हटाया है. हम भगवान की पुनः प्राण प्रतिष्ठा की मांग कर रहे हैं. इसीलिए हमने फ़व्वारा चौक पर सामूहिक हनुमान चालीसा और हनुमान जी की महा आरती का आयोजन किया."
विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों ने प्रशासन को जो मांग पात्र सौंपा है उनमें तीन मांगें प्रमुख हैं. संगठनों का कहना है कि अगर इन मांगों पर प्रशासन सहमत नहीं होता है तो इस आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा.
झाला का कहना था, "जिस तरह बालाजी महाराज की प्रतिमा हटाई गई है, उसे लेकर हिंदू समाज में आक्रोश है. मूर्ति की पुनः स्थापना होनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो ज़िले से आंदोलन का आग़ाज़ हो चुका है. हमारी मांग है कि बालाजी महाराज की प्राण प्रतिष्ठा कचहरी परिसर में ही हो. अगर स्थानीय प्रशासन हमारी मांग नहीं मानता है तो सर्व हिंदू समाज मिल कर बड़े स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा बना चुका है."
ज़िले के पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि जिस जगह मूर्ति की स्थापना की गयी थी वहां पहले कोई मूर्ति थी ही नहीं. वो कहते हैं, "मूर्ति को एक-दो दिन पहले ही रखा गया. जिस जगह पर ये सब कुछ हुआ वहां कोई मंदिर था ही नहीं. अलबत्ता एक आयुर्वेदिक चिकित्सालय है और गृह रक्षा वाहिनी का पुराना दफ़्तर है."

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प्रशासन ने क्या कहा है
वहीं नीमच के ज़िला अधिकारी मयंक अग्रवाल ने शहर में उत्पन्न हुए इस विवाद को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए 1936 के मौजूद सरकारी दस्तावेज़ों का हवाला दिया और कहा कि कचहरी के पास जो लक्ष्मीनारायण मंदिर और दो दरगाहें हैं वो बहुत पुरानी हैं. उनका कहना था कि हिंदू संगठनों ने मूर्ति स्थापित करने से पहले प्रशासन से कोई अनुमति भी नहीं ली थी. उन्होंने कहा, "कुछ लोंगों द्वारा 'न्यूसेंस'(उत्पात) करने के उद्देश्य से यह कार्य किया गया था."
नीमच में पैदा हुए तनाव के बीच स्थानीय विधायक दिलीप परिहार का कहना है कि उन्होंने ज़िला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को बताया कि जहाँ मूर्ति स्थापित की गयी थी वो सरकारी ज़मीन है. वो कहते हैं, "मैंने अधिकारियों से कहा है कि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए."
भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय सांसद सुधीर गुप्ता ने नीमच, मंदसौर और रतलाम के ज़िला अधिकारियों को पत्र भेज कर इन तीनों ज़िलों में वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति का ब्योरा माँगा है.
अपनी चिट्ठी में उन्होंने लिखा है, "इन ज़िलों में वक्फ़ की समस्त संपत्ति और उसके स्रोत की जानकारी यथाशीघ्र उपलब्ध कराएं."

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अब तक क्या कार्रवाई हुई है
नीमच प्रशासन का दावा है कि वो हर वर्ग से बातचीत कर रहा है ताकि कोई भी शहर की शांति और क़ानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश न कर सके. लेकिन प्रशासन पर दोनों तरफ़ से दबाव बन रहा है.
पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा कहते हैं कि प्रशासन के अलर्ट रहने की वजह से स्थिति को फ़ौरन काबू में कर लिया गया और पूरा शहर साम्प्रदायिकता की आग में जलने से बच गया.
बीबीसी से बात करते हुए उनका कहना था, ''सोमवार को जिन लोगों ने उपद्रव मचाया और आगज़नी की, उनकी शिनाख़्त वीडियो फ़ुटेज के माध्यम से हो रही है और जितनी भी प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं, उनके आधार पर कार्रवाई भी हो रही है.''
लेकिन पुलिस और स्थानीय प्रशासन के लिए तब अजीब स्थिति पैदा हो गयी जब बड़ी संख्या में हिंसा ग्रस्त इलाकों की महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक से मुलाक़ात की और मांग की कि उन्हें अपनी 'सुरक्षा के लिए हथियार रखने' की अनुमति दी जाए. हालांकि प्रशासन ने इस मांग को पूरी करने से साफ़ इन्कार कर दिया है.
इस बीच 'संस्कृति बचाओ मंच' नाम की संस्था ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र को प्रतिवेदन देकर मांग की है कि सरकार भोपाल शहर की सबसे पुरानी जामा मस्जिद का पुरातात्विक सर्वेक्षण करवाए.
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