असम में हवाई अड्डे के लिए चाय बागान की ज़मीन खाली कराने का क्यों हो रहा है विरोध?

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
"मैं इसी चाय बागान में काम करता हूं और मेरे पूर्वजों ने भी यहीं मज़दूरी की थी. लेकिन अब हमारे साथ अन्याय किया जा रहा है.इतनी बड़ी ज़मीन से चाय के पौधों को उखाड़ कर हवाईअड्डा बनाया जा रहा है, इससे हम सबका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा." असम के कछार ज़िले के डोलू चाय बागान में महज 183 रुपये पर रोज़ाना मज़दूरी करने वाले सोहन कर्मकार (बदला हुआ नाम) बड़ी उदासी के साथ ये बातें कहते हैं.
दरअसल असम सरकार ने 12 मई से सिलचर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण के लिए डोलू चाय बागान से चाय की झाड़ियों को हटाने का काम शुरू किया है.
लेकिन चाय बागान में काम करने वाले मज़दूरों का एक बड़ा वर्ग सरकार के इस बेदखली अभियान का विरोध कर रहा है.
कछार ज़िला प्रशासन के अधिकारियों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की मौजूदगी में करीब 100 बुलडोज़रों को चाय की झाड़ियों को उखाड़ने के काम में लगाया गया है.
पिछले कुछ दिनों से मीडिया में आ रही अलग-अलग तस्वीरों में डोलू चाय बागान के मजदूरों को चाय की झाड़ियां हटाने आए प्रशासन के समक्ष घुटने पर बैठकर गिड़गिड़ाते हुए देखा गया.
मज़दूर संगठनों और प्रबंधन के बीच 'समझौते' से अनजान मज़दूर?
इस बेदखली अभियान का विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 30 लाख से अधिक चाय के पौधों को उखाड़ा जाएगा.
इसके लिए बीते 7 मार्च को डोलू टी कंपनी इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों और डोलू चाय बागान के मज़दूरों से जुड़े तीन पंजीकृत ट्रेड यूनियनों के बीच एक एमओयू अर्थात समझौते पर हस्ताक्षर किया गया है.
चाय बागान के श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाला बराक चाय श्रमिक संघ, अखिल भारतीय चाय मज़दूर संघ और बराक घाटी चाय मज़दूर संघ के नेताओं ने इस एमओयू पर साइन किया है. लेकिन विरोध कर रहे मज़दूरों का कहना है कि इस तरह के किसी भी एमओयू पर दस्तखत करने से पहले उन लोगों को कुछ भी नहीं बताया गया.
42 साल के चाय श्रमिक सोहन कहते है कि अगर हवाई अड्डे के लिए चाय बागान की ज़मीन से इतने पौधों को उखाड़ देंगे तो आने वाले समय में मज़दूरों का भी काम छीन लिया जाएगा. अगर सरकार का इरादा नेक है तो चाय बागान में इतनी तादाद में पुलिस क्यों तैनात की गई है?
दरअसल पिछले बुधवार शाम से ही कछार ज़िला प्रशासन ने डोलू टी एस्टेट और आसपास के इलाकों में 144 धारा लगा रखी है. लिहाजा अभी बागान में किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहा है.
इससे पहले कछार जिले की पुलिस अधीक्षक रमनदीप कौर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि डोलू चाय बागान में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण और ज़मीन के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
पुलिस अधीक्षक ने अपील करते हुए लोगों से कहा कि पूर्व में हस्ताक्षरित एमओयू के अनुसार क़दम उठाए जा रहे हैं. यदि किसी का कोई विरोध या तर्क या मांग है, तो वे इस तरह से अनावश्यक रूप से आंदोलन करने और सरकारी काम में बाधा डालने के बजाय संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें और अपनी मांगें रखें.

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चाय बागान प्रबंधन ने कहा- किसी की नौकरी नहीं जाएगी
ईस्टर्न चाय कंपनी के स्वामित्व वाले डोलू टी एस्टेट के उप महाप्रबंधक सुप्रियो सिकदर का कहना है कि 30 लाख चाय के पौधों को उखाड़ने की बात पूरी तरह झूठी है.
डोलू चाय बागान के मज़दूरों के विरोध को लेकर सुप्रियो सिकदर ने बीबीसी से कहा,"बाहर के कुछ लोगों ने साज़िश की थी जिसके चलते मज़दूरों ने विरोध किया था लेकिन अब सबकुछ सामान्य है. बागान का काम भी चल रहा है और सरकार का काम भी हो रहा है. जिस जगह प्रशासन के लोग काम कर रहे हैं वहां सरकार ने धारा 144 लगाई है. लेकिन बाकी इलाके में सब कुछ सामान्य है. हमारे बागान के पास 250 हेक्टयर से भी अधिक वर्जिन लैंड है, जिस पर नए सिरे से प्लांटेशन किया जाएगा."
सुप्रियो सिकदर ने कहा,"इस हवाई अड्डे के लिए हमने सरकार को 325 हेक्टेयर ज़मीन दी है. भविष्य में और ज़मीन देने की कोई योजना नहीं है.बात जहां तक किसी मज़दूर के काम की है तो बागान ने उन्हें सौ फीसदी भरोसा दिया है. हमारी कंपनी में कुल 1700 श्रमिक है और किसी से काम छीना नहीं जाएगा. बागान ने आज तक किसी भी मज़दूर को काम से हटाया नहीं है.हमने मज़दूर यूनियनों के साथ कई बैठकें करने के बाद ही एमओयू साइन किया है."
इस समझौते में लंबित पीएफ, ग्रेच्युटी और श्रमिकों की बकाया मज़दूरी की बात भी शामिल की गई है. इसके अलावा चाय कंपनी ने यूनियनों को आश्वासन दिया है कि वह किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं करेगी.

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ट्रेड यूनियनों से अलग मज़दूर कर रहे अपना आंदोलन
इस समझौते के अनुसार कंपनी ने कुल 9,250 बीघा भूमि में से 2,500 बीघा भूमि असम सरकार को मुआवजे के एवज में देने का निर्णय लिया है. इस बीच लालबाग डिवीज़न चाय बागान में पुलिस और सीआरपीएफ बल की एक बड़ी टुकड़ी को तैनात किया गया है ताकि प्रदर्शनकारी मज़दूरों को क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सके और झाड़ियों को उखाड़ने की प्रक्रिया को जारी रखा जा सके.
कछार जिले के 12 प्रमुख संगठनों ने रविवार को सिलचर के पेंशनर भवन में एक नागरिक बैठक का आयोजन कर "डोलू चाय बागान बचाव समन्वय समिति" का गठन किया है.
इस समन्वय समिति में शामिल यूथ अगेंस्ट सोशल एविल्स नामक गैर सरकारी संगठन के प्रमुख संजीव राय ने बताया, "ये विरोध मजदूरों के हक की लड़ाई के लिए है. जिन मज़दूर यूनियनों ने एमओयू साइन किया था वे लोग खामोश हैं लेकिन बाकी के कई सारे संगठन लगातार आवाज उठा रहे हैं.
उन्होंने कहा, ''हम आसपास के सभी चाय बागानों के मज़दूरों को इस बेदखली प्रक्रिया के बारे में बताएंगे ताकि विरोध प्रदर्शन में ज्यादा लोग जुड़ सके. क्योंकि इस एमओयू की बातें स्पष्ट तौर पर मजदूरों के हक में नहीं दिखती. ये सीधे तौर पर ढाई हज़ार चाय श्रमिकों की जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है. ज़िला उपायुक्त ने मौके पर जन सुनवाई करवाई थी और उस दौरान मजदूरों ने इस बेदखली अभियान के खिलाफ अपनी तमाम बातें ज़िला उपायुक्त के समक्ष रखी है."

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क्या है समझौते का सच?
डोलू टी कंपनी के मजदूरों की तरफ से किए जा रहे विरोध और उनकी समस्याओं पर बात करने के लिए बीबीसी ने कछार की ज़िला उपायुक्त कीर्ति जल्ली को कई बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
हालांकि ज़िला उपायुक्त जल्ली ने इसी साल 26 अप्रैल को ज़िला उपायुक्त के आधिकारिक ट्विटर एकांउट पर चार पन्ने के इस एमओयू को साझा करते हुए लिखा,"डोलू टी कंपनी इंडिया लिमिटेड और बागान के श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले डोलू टी एस्टेट के 3 पंजीकृत ट्रेड यूनियनों के बीच 7 मार्च 2022 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए है."
असम सरकार ने जनवरी 2022 में औपचारिक रूप से इस हवाई अड्डे के निर्माण के लिए भारत सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था.असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इस साल फरवरी में घोषणा की थी कि डोलू चाय बागान के एक हिस्से का उपयोग करके एक नया हवाई अड्डा बनाया जाएगा.
सिलचर का वर्तमान हवाई अड्डा पुराना है और इसे रक्षा मंत्रालय ने इसका अधिग्रहण किया है. लिहाजा सिलचर शहर से करीब 16 किलोमीटर दूरी पर बनने जा रहा यह नया हवाई अड्डा वाणिज्यिक यातायात के लिए सिलचर के कुम्भीरग्राम हवाई अड्डे की जगह लेगा.
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