'मैं गैस बचाने के लिए एक वक़्त खाना बनाती हूं, दो महीने सिलेंडर चलाना पड़ता है'

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली के कल्याणपुरी में गुमटी में चाय की दुकान चलाने वाली पप्पी देवी को जैसे ही एलपीजी सिलेंडर के दाम पचास रुपये बढ़ने का पता चला उन्होंने गहरी सांस ली.
किराये के कमरे में अकेली रहने वाली पप्पी कहती हैं, "मैं फुटकर में गैस ख़रीदती हूं, सौ रुपये देने पड़ते हैं एक किलो के, अब और ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे. लेकिन चाय के दाम नहीं बढ़ा सकती."
पास ही रहने वाली शांति देवी के बेटे 12 हज़ार रुपये महीना की नौकरी करते हैं.
वो कहती हैं, "घर की कमाई बढ़ नहीं रही है लेकिन हर चीज़ महंगी होती जा रही है. बाकी चीज़ों से समझौता किया जा सकता है लेकिन गैस सिलेंडर के बिना काम कैसे चलेगा?"
शांति कहती हैं, "महंगाई का ये झटका ऐसा है कि इसके आगे करंट भी हलका है. ऐसा लग रहा है सरकार हमें करंट लगा रही है और हम बिलबिला रहे हैं."
पप्पी देवी और शांति देवी जैसी महिलाओं को नहीं पता कि इस बढ़ती महंगाई से कैसे निबटा जाएगा.
शनिवार को गैस कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में पचास रुपये की वृद्धि की है.
दिल्ली में अब घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर 999 रुपये का है.

घरेलू एलपीजी सिलेंडर
इससे पहले 1 मई को गैस कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर पर सौ रुपये बढ़ाए थे. 19 किलो का ये सिलेंडर अब दिल्ली में 2355 रुपये का है.
बीते 45 दिनों में ही 14 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 100 रुपये बढ़ चुके हैं.
जनवरी 2021 में घरेलू गैस सिलेंडर की क़ीमत 694 रुपये थे. फ़रवरी 2021 में दाम बढ़े और क़ीमत 769 रुपये हो गई.
इसके बाद अगले ही महीने मार्च में दाम बढ़े और सिलेंडर 819 रुपये का हो गया. अगले महीने अप्रैल में सिलेंडर के दाम पर दस रुपये कम हुए और क़ीमत 809 रुपये हो गई.
भारत में गैस कंपनियां हर महीने सिलेंडर के दाम की समीक्षा करती हैं और ज़रूरत होने पर दाम बढ़ाए जाते हैं.

चुनावी माहौल में...
आज (7 मई) की बढ़ोतरी से पहले 02 मार्च को एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे. तब सिलेंडर के दाम बढ़कर 949 रुपये (दिल्ली) में हो गए थे.
हालांकि इससे पहले चुनावी माहौल था और पांच राज्यों में चुनाव थे.
मार्च 2020 से पहले गैस के दामों में अंतिम बढ़ोतरी 6 अक्तूबर 2021 को हुई थी जब सिलेंडर पर 50 रुपये बढ़ाए गए थे.
चुनावी माहौल में ज़रूर कंपनियों ने गैस के दाम बढ़ाने से गुरेज किया था.
हाल के दिनों में सिर्फ़ एलपीजी के ही दाम नहीं बढ़े हैं. देश के अधिकतर हिस्सों में पेट्रोल भी सौ रुपये प्रति लीटर से अधिक बिक रहा है.
दिल्ली में इस समय एक लीटर पेट्रोल का दाम 105 रुपये प्रति लीटर है.

मनभरी की तकलीफ़
ईंधन और तेल के दामों में बढ़ोत्तरी का असर खाने-पीने की चीज़ों पर भी हो रहा है. आटा, चावल, दाल से लेकर रसोई में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर चीज़ के दाम बढ़ चुके हैं.
इस महंगाई ने सबसे ज़्यादा उन लोगों को प्रभावित किया है जो आर्थिक व्यवस्था के अंतिम पायदान पर हैं.
50 वर्षीय मनभरी कल्याणपुरी में मुर्गा शॉप चलाती हैं.
मनभरी कहती हैं, "सिलेंडर इतना महंगा हो गया है कि इसे ख़रीदना हमारे बजट से बाहर हो रहा है. लेकिन गैस के बिना खाना नहीं बन सकता. खनाना नहीं बनेगा तो बच्चे भूखे सोएंगे, ऐसे में हम दूसरे ज़रूरी ख़र्च काटकर गैस ख़रीददते हैं."
मनभरी कहती हैं, "आटा दाल के ख़र्च में कटौती की जा सकती है लेकिन गैस के ख़र्च में कटौती नहीं होती. बिना गैस के घर चल ही नहीं सकता है. ये ख़र्च पूरा करने के लिए हम अपने बच्चों पर ख़र्च कम कर रहे हैं."
यहीं रहने वाली एक महिला अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए कहती हैं कि इन दिनों वो सिर्फ़ दिन में एक समय खाना बनाती हैं और परिवार के लोगों ने महंगाई की वजह से खाना कम कर दिया है.

जीवनस्तर गिराने की मजबूरी
मनभरी कहती हैं, "एक वक़्त खाना बनाते हैं और उसे ही दो वक़्त बनाते हैं. पहले दिन में कई बार चाय बनाते थे, अब हद से हद दो बार बनाते हैं. कई बार दिन में सिर्फ़ एक ही बार बनाते हैं."
वो कहती हैं, "हर बार गैस का बर्नर जलाते हुए ये ख़्याल रहता है कि गैस कम से कम ख़र्च हो. हम कोशिश करते हैं कि किसी तरह सिलेंडर दो महीने चल जाए. अगर हम सिलेंडर दो महीने नहीं चलाएंगे तो सिलेंडर ख़रीद ही नहीं पाएंगे."
महंगई ने लोगों को अपना जीवनस्तर गिराने पर मजबूर कर दिया है. कभी गुरुग्राम में फ्लैट रहकर रहने वाले विजय (बदला हुआ नाम) अब कल्याणपुरी में सस्ता कमरा लेकर रहते हैं.
विजय कहते हैं, "महंगाई सिर्फ़ गैस सिलेंडर पर ही नहीं बढ़ी है बल्कि हर चीज़ पर बढ़ी है. जनवरी 2021 के बाद सिर्फ़ गैस सिलेंडर के दाम 40 प्रतिशत के क़रीब बढ़ चुके हैं. लेकिन किसी का भी वेतन इस अनुपात में नहीं बढ़ा है बल्कि कम ही हुआ है. मैं कोविड से पहले जिस वेतन पर काम करता था अब उससे आधे पर काम कर रहा हूं."

विजय कहते हैं, "कोविड के बाद मैंने 25 फ़ीसदी कम वेतन पर नौकरी शुरू की है. जरूरत के खर्चे भी पूरे नहीं कर पा रहा हूं. गुरुग्राम में फ्लैट लेकर रहता था पहले, अब छोटा कमरा लेकर रह रहा हूं. पहले सेविंग नहीं हो पाती थीं लेकिन लाइफस्टाइल अच्छा था. अब तो इस हालत में भी कई बार उधार लेना पड़ जाता है."
महबूब अली इसी इलाक़े में सब्जी बेचते हैं.
महबूब कहते हैं, "घरेलू गैस इतनी महंगई हो गई है कि लोगों के लिए खाना मुश्किल हो रहा है. हालात ये हैं कि लोग सब्ज़ी नहीं ख़रीद पा रहे हैं. जो लोग पहले आधा किलो सब्ज़ी लेते थे वो अब एक पाव ही ख़रीदते हैं. महंगाई का असर मेरी बिक्री पर भी हुआ है और मेरी कमाई पहले से कम हो गई है."

यहीं से गुज़र रहीं एक रिटायर्ड महिला कहती हैं, "हमें पेंशन नहीं मिलती है, कमाई का कोई दूसरा ज़रिया नहीं है. हम बमुश्किल सिलेंडर ख़रीद पा रहे थे, अब सरकार ने और दाम बढ़ा दिए हैं. सरकार हम जैसे लोगों के बारे में सोच ही नहीं रही है. इस महंगाई में तो हम यही सोचते हैं कि भगवान हमें उठा ले तो बेहतर हो."
वो कहती हैं, "अगर सरकार हमारे हालात को समझती तो गैस के दाम कम करती ना की बढ़ाती. लेकिन हमारे हालात सरकार को दिख ही नहीं रहे हैं."
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