मेवात में मुसलमानों को बंदूक़ दिखाने वाले वीडियो पर बोली हरियाणा पुलिस - प्रेस रिव्यू

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अंग्रेजी अख़बार 'द हिंदू' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, हरियाणा के मेवात इलाक़े के नूंह से कुछ वीडियो सामने आए हैं जिसमें कथित तौर पर गोरक्षकों को लोगों को पीटते हुए, महिलाओं को गालियां देते हुए और बंदूक़ लहराकर उन्हें धमकाते हुए दिख रहे हैं.
हालांकि पुलिस अभी वीडियो की लोकेशन और सत्यता की जांच कर रही है.
नूंह के लोगों ने वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए, वीडियो में नज़र आ रहे लोगों को ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई की मांग की है.
अख़बार के अनुसार, स्थानीय लोगों ने कहा कि ये घटनाएं नूंह के एक गांव में हुईं, नूंह एक मुस्लिम बहुल इलाक़ा है. हालांकि पुलिस ने कहा कि वीडियो की सत्यता, घटनाओं के समय और जगह की पुष्टि की जा रही है.
नूंह के विधायक आफ़ताब अहमद ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि कुछ पत्रकारों ने कथित गौरक्षकों के कुछ आपत्तिजनक वीडियो उनके संज्ञान में लाए हैं.
उन्होंने कहा कि वीडियो में असामाजिक तत्व अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हथियार तान रहे हैं और लोगों पर हमला कर रहे हैं. अहमद ने कहा कि उन्होंने सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक से बात की और मामले की जानकारी उन्हें दी है.
अहमद ने अख़बार से कहा, "मैंने बदमाशों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और इस संबंध में सभी सबूत पेश किए हैं."
नूंह के पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला ने 'द हिंदू' को बताया कि वीडियो के संबंध में कोई औपचारिक शिकायत नहीं थी, लेकिन मीडिया और अन्य स्रोतों के माध्यम से मामला उनके संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी.
सिंगला ने कहा, "वीडियो को नूंह में शूट किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हम जगह और समय की पुष्टि कर रहे हैं. हम इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि ये वीडियो कब और किसने शूट किया."

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छात्रों को लगता है यहां सबकुछ फ्ऱी है- जेएनयू वीसी
जवाहर लाल यूनिवर्टी की वाइस चांसलर शांतिश्री धूलीपुड़ी पंडित ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए एक इँटरव्यू में कहा है कि उन्हें जेएनयू से प्यार है और वो भारत की बेहतरीन यूनिवर्सिटी में से एक है लेकिन यहां आज़ादी का मतलब ग़ैर-ज़िम्मेदारियां मान लेते है और इसे एक ऐसी जगह माना जाता है जहां 'सब कुछ फ्री है.'
उन्होंने ये भी कहा कि जेएनयू में दूसरी विचारधाराओं के लिए भी जगह होनी चाहिए.
उन्होंने इंटरव्यू में कहा, "जेएनयू को लेकर जो दो चीज़ें मुझे नहीं पसंद उनमें से एक है छात्रों की ग़लतफ़हमी- छात्रों को लगता है सबकुछ फ़्री है. जब वो बाहर की दुनिया में जाते हैं तो उन पर मानसिक असर पड़ता है और वो जेएनयू छोड़ना ही नहीं चाहते क्योंकि बाहर की दुनिया जेएनयू जैसी नहीं है. और हम उन्हें यथार्थवादी नहीं बनाते. हमें लगने लगता है कि दुनिया जेएनयू जैसी है, जहां कोई भी कुछ भी पहनकर घूम सकता है, किसी को कोई परेशानी नहीं होती लेकिन बाहर की दुनिया ये नहीं है. आज़ादी के साथ भी यही मसला है, उन्हें लगता है कुछ भी कह दो, कर दो कोई पुलिस केस नहीं होगा."
"इसके अलावा मुझे लगता है कैंपस में हेट के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. आपकी अपनी विचारधारा हो सकती है, वो रखिए लेकिन लोगों से नफ़रत मत कीजिए. हम करदाताओं के पैसे से चलते हैं और पिछले प्रशासन के दौरान जो हुआ है उसके बाद से कई लोग ये लिखते हैं कि 'जेएनयू को बंद कर देना चाहिए.' मुझे लगता है छात्रों को समझना चाहिए कि ये उनकी ज़िंदगी का एक हिस्सा है जिसका आनंद लें और बाहर की दुनिया में जाकर कुछ अच्छा करें. जैसा हमने किया."
पंडित खुद जेएनयू की छात्र रह चुकी हैं और वह कहती है कि जेएनयू देश की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटी है.

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केंद्रीय विद्यालय में सासंदों का कोटा ख़त्म, 40 हज़ार सीटें हुईं फ्री
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से जारी संशोधित एडमिशन दिशानिर्देशों के अनुसार, केंद्र सरकार ने केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए सांसदों का कोटा ख़त्म कर दिया है.
हफ्तों पहले सांसदों सहित सरकारी कर्माचारियों के कोटे पर रोक लगाई गई थी. अब इस पर केंद्रीय विद्यालय संगठन की समीक्षा के बाद इसे ख़त्म करने का फैसला किया गया है.
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश मिले इस पर विचार होगा.
एडमिशन ज़िला मजिस्ट्रेट की दी गई सूची के आधार पर किया जाएगा, हर केंद्रीय विद्यालय में 10 ऐसे बच्चों का एडमिशन होगा. 2022-23 शैक्षणिक सत्र के लिए एडमिशन जून तक चल रहा है.
विशेष प्रावधानों के तहत, सांसदों के पास केंद्रीय विद्यालय में 10 बच्चों के प्रवेश की सिफ़ारिश करने की सुविधा थी. यहां तक कि एक ज़िला मजिस्ट्रेट के पास केवी में प्रायोजक प्राधिकरण कोटे के तहत 17 छात्रों की सिफारिश करने का अधिकार था.

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बच्चों के लिए कोरोना की दो वैक्सीन को मंज़ूरी
हिंदी अख़बार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के औषधि महानियंत्रक डीजीसीआई ने 6 से 12 साल तक के बच्चों के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है. इसके अलावा 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ज़ायडस कैडिला की ज़ायकोव डी वैक्सीन को भी इमरजेंसी इस्तेमाल की मंज़ूरी दी गई है.
यह फैसला ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीजीसीआई की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की मीटिंग के बाद लिया गया है, जिसमें भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को 2-12 साल की उम्र के बच्चों को लगाने के लिए डेटा मांगा गया था.
फिलहाल 12-14 साल के बच्चों को कॉर्बेवैक्स वैक्सीन दी जा रही है. 15-17 साल के बच्चों को कोवैक्सीन का डोज़ दिया जा रहा है. मंगलवार को मिली मंज़ूरी के बाद देश में 6 से 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों को कुल 3 कोरोना वैक्सीन लगाई जाएंगी.
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