भारत में छात्र एक साथ, एक समय में ले पाएंगे बीए और बीकॉम की डिग्री - जानिए कब कहाँ और कैसे?

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चार साल पहले अशोक जर्नलिज़्म की पढ़ाई के साथ साथ अरबी भाषा के डिग्री कोर्स में एडमिशन लेना चाह रहे थे.
लेकिन उनको एडमिशन लेने में कई तरह की दिक़्क़तों का सामना करना पड़ा.
एक विश्वविद्यालय ने यह कह कर एडमिशन देने से इनकार कर दिया कि वो एक साथ दो फुल टाइम कोर्स में एडमिशन नहीं ले सकते.
दोनों कोर्स की टाइमिंग एक होने की वजह से भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.
चार साल पहले तक यूजीसी के नियम भी भारत में एक साथ दो डिग्री कोर्स करने की इजाज़त नहीं देते थे.
अब चार साल बाद भारत के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अशोक जैसे दूसरे छात्रों की इस दुविधा को दूर करने की पहल की है.
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत में छात्र दो डिग्री की पढ़ाई एक साथ पूरी कर सकेंगे, लेकिन कुछ शर्तों के साथ.
आइए जानते हैं, इस फ़ैसले से जुड़े तमाम सवालों के जवाब. ये तमाम जवाब यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने दिए हैं.

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क्या किसी ख़ास विषयों में ही ये संभव होगा?
यूजीसी के मुताबिक़ इसमें विषय चुनने की कोई बाध्यता नहीं है. दो डिग्री कोर्स ह्यूमैनिटीज़ के साथ-साथ साइंस विषय के भी हो सकते हैं.
ये दोनों फुल टाइम कोर्स हो सकते हैं. ये दो एक विश्वविद्यालय में भी हो सकते हैं या अलग अलग विश्वविद्यालयों में भी हो सकता है.
एडमिशन के नियम, छात्रों की योग्यता और टाइम टेबल चूंकि विश्वविद्यालय स्तर पर तय किए जाते हैं, इसलिए ये उन पर निर्भर होगा कि वो दो डिग्री के चुनाव में किस तरह के विषयों के विकल्प तैयार करते हैं.
मतलब ये कि छात्र चाहे तो गणित और इतिहास की डिग्री साथ साथ अर्जित कर सकते हैं.
एक विकल्प ये हो सकता है कि दोनों कोर्स फ़िज़िकल मोड वाले हो सकते हैं, बस ये देखना होगा कि ऐसे दोनों डिग्री कोर्स की क्लास टाइमिंग अलग अलग हो.
दूसरा विकल्प ये है कि एक कोर्स फ़िज़िकल और दूसरा ओपन और डिस्टेंस लर्निंग या ऑनलाइन कोर्स हो सकता है.
तीसरा विकल्प ये हो सकता है कि दोनों कोर्स ऑनलाइन या दोनों कोर्स ओपन और डिस्टेंस लर्निंग वाले हो सकते हैं.
इस फैसले में ये भी कहा गया है कि दोनों कोर्स एक ही लेवल के हों - यानी या तो दोनों ग्रेजुएशन की डिग्री हों या दोनों पोस्ट ग्रेजुएशन की.
एक पोस्ट ग्रेजुएशन और दूसरा ग्रेजुएशन की डिग्री - ऐसा प्रावधान इस फ़ैसले में नहीं किया गया है.

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अचानक ऐसा फ़ैसला क्यों?
जुलाई 2020 में मोदी सरकार नई शिक्षा नीति लेकर आई थी. ये एक तरह का पॉलिसी डॉक्यूमेंट है, जिसमें सरकार ने स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के अपने विज़न की व्याख्या की थी.
इसी विज़न डाक्यूमेंट में सरकार ने प्रस्ताव रखा था कि छात्र एक साथ चाहें तो अलग अलग डिसिप्लिन की पढ़ाई कर सकते हैं और एक साथ कई तरह के स्किल हासिल कर सकते हैं.
मसलन मैथ्स की पढ़ाई करने वाला चाहे तो डेटा साइंस की पढ़ाई कर ले, जर्नलिज्म की पढ़ाई करने वाला लैंग्वेज कोर्स भी कर सके.
नई शिक्षा नीति के इसी प्रस्ताव को ध्यान में रख कर ये फ़ैसला लिया गया है.
दूसरी वजह ये है कि भारत में उच्च शिक्षा की डिमांड और सप्लाई में बहुत बड़ा गैप है. उच्च शिक्षा संस्थान आवेदन करने वाले छात्रों में से केवल 3 फ़ीसदी छात्रों को ही कैंपस में दाखिला दे पाते हैं.
कई विश्वविद्यालय कई विषयों के ऑनलाइन कोर्स और ओपन और डिस्टेंस लर्निंग कोर्स चला रहे हैं. अच्छे कोर्स होने के बावजूद उनमें सीटें खाली रह जा रही थीं. छात्र चाह कर भी एक साथ दो कोर्स में एडमिशन नहीं ले पा रहे थे.
सभी प्रावधानों को एक दूसरे के अनुकूल बनाने के लिए यूजीसी ने ये फ़ैसला लिया है.
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इसकी शुरुआत कब से होगी?
अकादमिक सत्र 2022-2023 से इसकी शुरुआत प्रस्तावित है. यूजीसी अपनी वेबसाइट पर इसकी आधिकारिक गाइडलाइन्स जारी करेगी.
उच्च शिक्षा संस्थानों की वैधानिक निकाय और काउंसिल से भी इसकी मंजूरी की आवश्यकता होगी. तभी ये लागू किया जा सकेगा.
जिन संस्थानों के वैधानिक निकायों (यूनिवर्सिटी प्रशासन) ने इसे लागू करने का फैसला नहीं लिया होगा, उन्हें इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
हालांकि, यूजीसी ने उम्मीद जताई है कि सभी विश्वविद्यालय को ऐसा करने के लिए वो प्रोत्साहित करेंगे.
ये फ़ैसला डिप्लोमा, ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए लागू होगा. पीएचडी और एमफिल डिग्री पर ये लागू नहीं होगा.

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अगर फ़र्स्ट इयर में दो कोर्सों में ए़डमिशन ना लिया हो तो क्या दूसरे और तीसरे साल में एडमिशन मिल सकता है?
हां. ऐसा करने में कोई परेशानी नहीं है. नियमों के मुताबिक़ छात्र दो अलग अलग विश्वविद्यालयों से भी दो डिग्री कोर्स कर सकेंगे.
नई शिक्षा नीति में मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम की भी बात की गई है, इस वजह से एक कोर्स में एडमिशन पहले साल और दूसरे कोर्स में एडमिशन दूसरे साल लिया जा सकता है.
इस फ़ैसले में दोनों डिग्री कोर्स को साथ में शुरू करने और ख़त्म करने की बाध्यता नहीं है.
क्या टाइम टेबल इस बात को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा कि एक बच्चा दो-दो कोर्सेज़ भी कर सकता है?
इसके लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर कोशिश करने की ज़रूरत होगी.
जिन कोर्स की डिमांड ज्यादा हो या जो पॉपुलर कोर्स हों, उनके बारे में विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे फ़ैसले लिए जा सकते हैं.

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क्या कोई निश्चित मात्रा में अटेंडेंस की बाध्यता दोनों कोर्स के लिए होगी?
इसके लिए यूनिवर्सिटी को गाइडलाइन जारी करने का अधिकार होगा. ये व्यवस्था विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य नहीं है बल्कि वैकल्पिक है.
CUET से इसका कोई लेना देना है?
चूंकि इसमें ऑनलाइन और ओपन-डिस्टेंस लर्निंग की भी बात है और ये एक वैकल्पिक व्यवस्था है, इस वजह से कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) से सीधे सीधे इसका कोई लेना देना नहीं है.
लेकिन फिजिकल क्लास करके डिग्री लेने वाले कोर्स में जो भी संस्थान द्वारा एडमिशन के नियम तय किए गए हैं, उनका पालन छात्रों को करना होगा. अगर उन कोर्स में दाखिले के लिए CUET पास करना अनिवार्य होगा, तो एडमिशन के लिए वो पास करना अनिवार्य होगा.
क्या भारत के अलावा दुनिया के दूसरे देशों में ऐसी व्यवस्था है?
यूजीसी के चेयरमैन के मुताबिक़ दुनिया के किसी दूसरे देश में ऐसी व्यवस्था है या नहीं इसकी जानकारी उन्हें नहीं है.
उन्होंने कहा, "शायद भारत इस दिशा में पहल करने वाला पहला देश है, जो विश्व के लिए उदाहरण पेश कर सकता है."
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