यूक्रेन पर रूसी हमले के बीच अमेरिका ने भारत से क्या कहा- प्रेस रिव्यू

नरेंद्र मोदी

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यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र में हुई वोटिंग से दूरी बनाने के बाद अमेरिका ने भारत से कहा है कि वो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सुरक्षा के लिए रूस पर अपने रिश्तों के प्रभाव का इस्तेमाल करे.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार के अनुसार संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन मसले पर लाए गए प्रस्ताव को लेकर ख़ुलकर पश्चिमी देशों के गठबंधन का समर्थन न करने और वोटिंग से दूरी बनाए रखने के बाद भारत और अमेरिका के बीच थोड़ी असहजता आ गई है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस से जब पूछा गया कि क्या यूक्रेन संकट ने भारत और अमेरिका के संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है क्योंकि भारत के रूस और अमेरिका दोनों से ही अच्छे संबंध हैं. इस पर नेड प्राइस ने कहा कि अमेरिका ये समझता है कि भारत की रूस से रिश्तों की प्रकृति अमेरिका से उसके संबंधों की तुलना में अलग है.

लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत पर भरोसा जताते हुए उससे कहा है कि दुनियाभर के देश, ख़ासतौर पर वो देश, जिनका रूस पर प्रभाव है, उन्हें अपने प्रभाव को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा के लिए इस्तेमाल करने की आवश्यकता है.

नेड प्राइस ने ये भी कहा कि इसी तरह के नियम आधारित व्यवस्थाओं ने बीते 70 सालों में भारत, अमेरिका, उसके यूरोपीय सहयोगी देशों और नेड रूसी संघ के हित के लिए काम किया है.

अमेरिका ने ऐसे समय में भारत से हस्तक्षेप करने को कहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस और यूक्रेन दोनों ही देशों के नेताओं से बात की है. हालांकि, अभी तक इस बातचीत का असर देखने को नहीं मिला है.

वीडियो कैप्शन, क्यों भारत किसी एक देश का समर्थन नहीं कर रहा.

इससे पहले भारत, चीन और यूएई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की निंदा करने वाले प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं की थी. हालांकि, वोटिंग से दूरी बनाने का भारत का कदम बाइडेन प्रशासन के लिए नया नहीं था लेकिन फिर भी दोनों देशों के बीच थोड़ी असहजता को बढ़ावा मिलता दिखा.

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने बाद में बयान जारी कर बताया कि भारत ने वोट क्यों नहीं दिया. बयान के मुताबिक, "ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि कूटनीति के रास्ते को छोड़ दिया गया. हमें दोबारा इसी रास्ते पर जाना चाहिए. इसलिए भारत ने प्रस्ताव पर वोट नहीं किया."

एलआईसी आईपीओ

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LIC का आईपीओ आने से पहले 20% एफ़डीआई की मंज़ूरी

केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को जीवन बीमा निगम के जल्द आने वाले आईपी में 20 प्रतिशत विदेशी निवेश (फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमें) यानी एफ़डीआई को मंज़ूरी दे दी.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी इस ख़बर के मुताबिक़ सरकार के इस निर्णय का मकसद देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी के विनिवेश की प्रक्रिया को सुचारू बनाना है.

शनिवार को कैबिनेट के एफ़डीआई नीति में बदलाव को मंज़ूरी दे दी है, जिसके बाद एक सरकारी अधिकारी ने बताया, "एफ़डीआई नीति में बदलाव से एलआईसी में 20 प्रतिशत तक फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट का रास्ता साफ़ हो गया है." उन्होंने ये भी बताया कि इसके बाद एलआईसी ऐक्ट, 1956 में बदलाव की ज़रूरत नहीं है.

अनुमान के मुताबिक, सरकार आईपीओ के ज़रिए एलआईसी में अपनी पांच फ़ीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 63-66 हज़ार करोड़ रुपये जुटाएगी. बाज़ार के अनुमान के मुताबिक़, एलआईसी के एक शेयर की कीमत कऱीब 2 हज़ार से 2100 रुपये के बीच हो सकती है.

गौहत्या

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गौहत्या नहीं कर्ज़ के चक्कर में हुई थी मुस्लिम शख्स की हत्या: बिहार पुलिस

बिहार पुलिस ने शनिवार को बताया कि 16 फ़रवरी को समस्तीपुर में एक मुस्लिम शख्स की पीट-पीटकर हत्या करने के पीछे पहले से पैसों को लेकर चला आ रहा विवाद था. इससे पहले कहा गया था कि मोहम्मद ख़लील अहमद को गौहत्या के शक़ में मारा गया था.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ता रहे मोहम्मद ख़लील अपने हत्यारों को पहले से ही जानते थे.

जांच करने वाले अधिकारियों के मुताबिक, मोहम्मद ख़लील अहमद ने हत्या के अभियुक्त अनुराग झा उर्फ़ बिट्टू से कुछ पैसे उधार लिए थे.

समस्तीपुर एसपी हृदय कांत ने बताया, "गिरफ़्तार किए गए अभियुक्तों ने कबूला है कि उन्होंने पैसों के लेन-देन की वजह से हत्या की है. इसमें कोई और बात नहीं."

मामले की जांच के लिए बनी विशेष टीम के सदस्य एसएचओ बिक्रम आचार्य ने कहा कि बिट्टू के बार-बार मांगने पर भी आलम ने पैसे नहीं लौटाए. उन्होंने कहा, "16 फ़रवरी को बिट्टू और उसके दोस्तों ने मुर्शीघरारी के पास आलम को देखा और फिर उन्हें अपने साथ अपने एक अन्य दोस्त विपुल झा के पोल्ट्री फ़ार्म तक चलने को कहा."

इसके बाद अभियुक्तों ने आलम का सिम कार्ड अपने मोबाइल में लगाकर उनकी पत्नी को फ़ोन किया और उनसे 2.5 लाख रुपये मांगे. फिर आलम को अभियुक्तों ने पीटना शुरू कर दिया. बाद में 21 फ़रवरी को बिट्टू ने लिंचिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया.

फ़हद शाह

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'द कश्मीर वाला' के संपादक फ़हद शाह रिहा होते ही फिर गिरफ़्तार

न्यूज़ पोर्टल 'द कश्मीर वाला' के संपादक फ़हद शाह को शनिवार एक स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी लेकिन इसके थोड़ी ही देर बाद दक्षिण कश्मीर के एक अन्य मामले को लेकर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने इस ख़बर को अपने पहले पन्ने पर जगह दी है. ख़बर के मुताबिक, शनिवार को ही पुलवामा की स्थानीय अदालत ने शाह को बेल दी थी.

इसी साल 4 फ़रवरी को फ़हद शाह को सोशल मीडिया पर कथित देश विरोधी कंटेट साझा करने के आरोप में यूएपीए कानून के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

नाना पटोले

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महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख़ फ़ोन टैपिंग केस: आईपीएस अधिकारी पर एफ़आईर दर्ज

महाराष्ट्र में पिछली बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले के कथित फ़ोन टैपिंग के मामले में आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, ये एफ़आईआर पुणे के बंड गार्डन पुलिस थाने में दर्ज हुई है. अख़बार ने पुणे सिटी पुलिस के सूत्रों के हवाले से पुष्टि की है कि रश्मि शुक्ला के ख़िलाफ़ इंडियन टेलीग्राफ़ ऐक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है.

बीते साल, पटोले ने आरोप लगाया था कि साल 2016-17 के दौरान 'ड्रग तस्करी' में शामिल अमज़द ख़ान के मामले में उनका फ़ोन टैप किया गया.

पटोले ने ये भी आरोप लगाया था कि केंद्रीय मंत्री रावसाहब दावने के निजी असिस्टेंट, तत्कालीन बीजेपी सांसद संजय ककाड़े और अन्य कई नेताओं के फ़ोन टैप किए गए थे.

इसके बाद राज्य सरकार ने आरोपों की जांच करवाने का फ़ैसला किया. डीजीपी संजय पांडे की अगुवाई में बनी तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने इस संबंध में राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक़, रिपोर्ट के आधार पर सरकार से मंज़ूरी मिलने के बाद रश्मि शुक्ला के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. शुक्ला मार्च 2016 से 2018 के बीच पुणे सिटी की पुलिस कमिश्नर थीं.

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