अडानी, अंबानी की पूजा होनी चाहिए, संसद में बोले बीजेपी नेता अलफ़ोंस- प्रेस रिव्यू

के जे अल्फ़ोंस

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विपक्षी पार्टियों और केंद्र सरकार के बीच वार-पलटवार और बढ़ती बेरोज़गारी के बीच बीजेपी सांसद के जे अलफ़ोंस ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि अंबानी और अडानी जैसे कारोबारियों की पूजा की जानी चाहिए क्योंकि ये रोज़गार पैदा करते हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ अलफ़ोंस ने राज्यसभा में बयान दिया, "आप मुझ पर पूंजीपतियों का पैरोकार होने का आरोप लगा सकते हैं. जिन लोगों ने देश में रोज़गार पैदा किया है, मैं उन लोगों का नाम लेता हूं, क्योंकि आपने उनका नाम लिया है. चाहे रिलायंस हो, अंबानी हो, अडानी हो, कोई भी हो...उनकी पूजा होनी चाहिए. हां, क्योंकि ये नौक़रियां देते हैं. वे लोग जो निवेश करते हैं, अंबानी-अडानी, इस देश में पैसा कमाने वाला हर उद्योगपति रोज़गार पैदा करता है. उन्होंने नौक़रियां दी हैं, उनका सम्मान करने की ज़रूरत है."

पूर्व केंद्रीय मंत्री अलफ़ोंस ने तर्क दिया कि "वैश्विक असामनताएं एक सच हैं." उन्होंने कहा कि विपक्ष कहता है कि दो लोगों की संपत्ति बढ़ी है.

राहुल गांधी

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उन्होंने कहा, "एलन मस्क की संपत्ति 1016 प्रतिशत बढ़ गई है. क्या आपको यह मालूम है? गूगल के संस्थापक लैरी पेज की संपत्ति में 126 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. बेजोस की संपत्ति में 67 फ़ीसदी इज़ाफा हुआ है. इन सभी शीर्ष 10 में सबसे नीचे बिल गेट्स हैं. उनकी संपत्ति केवल 30 प्रतिशत बढ़ी है. वैश्विक असामनाता एक सच्चाई है, चाहे आप इसे मानें या न मानें. दुनिया में तीन अरब लोग एक दिन में पांच डॉलर से नीचे जीवनयापन करते हैं. इसलिए वैश्विक असमानताएं एक सच हैं."

बता दें कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए संसद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर देश को अमीर और ग़रीब भारत में बांटने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार की वजह से भारत में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं. देश की 40 फ़ीसदी आमदनी सिर्फ़ कुछ पूंजीपतियों के पास है. उन्होंने कहा कि अमीरों और ग़रीबों के बीच ख़ाई बढ़ती जा रही है.

राहुल गांधी ने ये भी कहा था, "कोरोना के समय कई वैरिएंट आते हैं, लेकिन "डबल ए" वैरिएंट है जो देश की अर्थव्यवस्था में बढ़ रहा है." राहुल गांधी ने संसद में कहा था कि एक व्यक्ति का (नाम नहीं लूंगा) देश के सभी पोर्ट्स, एयरपोर्ट, पावर ट्रांसमिशन, माइनिंग, ग्रीन एनर्जी, गैस वितरण, एडिबल ऑयल... जो भी हिंदुस्तान में होता है, वहां अडानी जी दिखाई देते हैं. दूसरी साइड अंबानी जी की पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम, रीटेल, ई-कॉमर्स में मोनोपॉली है. पूरा धन चुनिंदा लोगों के हाथ में जा रहा है.

मतदाताओं की ग़लती से यूपी का होगा कश्मीर-बंगाल और केरल सा हाल, सीएम योगी के बयान पर बवाल

योगी आदित्यनाथ

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अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान को प्रमुखता से प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर मतदाता ग़लती करते हैं तो उत्तर प्रदेश को जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल या केरल जैसा बनने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा. योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने विवाद छेड़ दिया है, जिस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.

केरल के वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "हमारे संघ (यूनियन) में शक्ति है. यह हमारी संस्कृति का संघ है, हमारी विविधता का संघ है, हमारी भाषाओं का संघ है, हमारे लोगों का संघ है और राज्यों का संघ है. कश्मीर से केरल, गुजरात से पश्चिम बंगाल तक भारत अपने सभी रंगों में ख़ूबसूरत है. भारत की मूल भावना का अपमान मत कीजिए."

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केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ट्वीट किया, "अगर उत्तर प्रदेश केरल बन जाता है तो उसे न सिर्फ़ बेहतर शिक्षा व्यवस्था का लाभ मिलेगा बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं और लोगों का जीवन स्तर भी सुधरेगा. यहां एक ऐसा समाज होगा जहां लोगों को धर्म या जाति के नाम पर क़त्ल नहीं किया जाता."

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वहीं, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव के लिए प्रचार कर रही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर तो इस बयान को लेकर कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने इस पर ज़ोर दिया कि उनकी सरकार ने ग़रीबों के लिए यूपी से ज़्यादा काम किया है. ममता बनर्जी ने योगी आदित्यनाथ के साधु होने पर भी सवाल किया.

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्ऱेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीट कर के ये दावा किया कि उत्तर प्रदेश की तुलना में जम्मू-कश्मीर के अंदर कम ग़रीबी, बेहतर मानव विकास सूचकांक, कम अपराध और बेहतर जीवन स्तर है.

अलग-अलग राज्यों को लेकर यह विवाद ऐसे समय शुरू हुआ जब कुछ दिन पहले ही संसद में राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच राज्यों के प्रति केंद्र सरकार के रवैये को लेकर तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर एक छड़ी से सभी राज्यों को हांकने का आरोप लगाया था तो वहीं, पीएम मोदी ने कांग्रेस पर देश में फूट डालने का आरोप लगाया था.

"स्किन टू स्किन टच" वाला फ़ैसला देने वाली बॉम्बे हाई कोर्ट जज का इस्तीफ़ा

बॉम्बे हाई कोर्ट

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अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित की रिपोर्ट के मुताबिक़, स्थायी जज न बनाए जाने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की अतिरिक्त न्यायाधीश जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने अपना कार्यकाल पूरा होने से दो दिन पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया.

बीते साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला के नाम की बॉम्बे हाई कोर्ट के स्थायी जज के तौर पर सिफ़ारिश न करने का फ़ैसला किया था. ये निर्णय जस्टिस गनेडीवाला की ओर से दिए गए दो विवादित आदेशों को ध्यान में रखते हुए किया गया था.

कोलेजियम के फ़ैसले का अर्थ था कि 12 फ़रवरी को अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर कार्यकाल पूरा होने के बाद पुष्पा गनेडीवाला को दोबारा ज़िला अदालत भेजा जाएगा.

जस्टिस गनेडीवाला ने एक केस में विवादित आदेश देते हुए कहा था कि नाबालिग के अंदरूनी अंग को बिना कपड़े हटाए छूना तब तक यौन अपराध नहीं है जब तक कि स्किन से स्किन का टच न हो. हालांकि, इस आदेश को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था.

सन् 1969 में महाराष्ट्र के अमरावती में जन्मी जस्टिस गनेडीवाला को साल 2007 में ज़िला न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किया गया था. साल 2019 में उन्हें नागपुर में बॉम्बे हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था.

मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, ईडी ने पत्रकार राणा अयूब की 1.77 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त की

राणा अयूब

मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने पत्रकार राणा अयूब की 1.77 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने ये कार्रवाई उत्तर प्रदेश के इंदिरापुरम में दर्ज़ हुई एक एफ़आईआर के बाद की है.

गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस थाने में राणा अयूब के ख़िलाफ़ दर्ज़ कराई गई एफ़आईआर में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने चैरिटी के नाम पर आम जनता से अवैध तौर पर पैसे लिए.

एफ़आईआर 28 अगस्त, 2021 को विकास सांकृत्यायन नाम के शख़्स द्वारा दर्ज़ कराई गई शिकायत पर की गई थी.

एफ़आईआर में आरोप लगाया गया है कि अयूब ने ऑनलाइन क्राउड फ़ंडिंग प्लेटफ़ॉर्म केटो के ज़रिए तीन अभियानों के लिए करोड़ों रुपये जुटाए. इनमें से एक अभियान अप्रैल-मई 2020 के दौरा झुग्गी में रहने वालों और किसानों के लिए पैसे इकट्ठे करने का था.

इसके बाद जून-सितंबर 2020 के दौरान असम, बिहार और महाराष्ट्र में राहत कार्य के लिए अभियान शुरू किया गया और फिर मई-जून 2021 के दौरान कोरोना प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर पैसे इकट्ठे किए गए.

ईडी के मुताबिक, राणा अयूब ने केटो पर कुल 2 करोड़ 69 लाख 44 हज़ार 680 रुपये जुटाए. ये राशि उनके बहन और पिता के बैंक ख़ातों में आई. इसमें से 72 लाख रुपये से ज़्यादा की राशि राणा अयूब के ख़ाते में गई.

चारधाम पर सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति के अध्यक्ष का इस्तीफ़ा

चार धाम प्रोजेक्ट

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अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालय में "सड़कों को चौड़ा करने" की अनुमति पर निराशा ज़ाहिर करते हुए, चार धाम ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के अध्यक्ष रवि चोपड़ा ने गुरुवार को इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

14 दिसंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने क़रीब 900 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना की निगरानी के लिए एक समिति गठित की थी. यह समिति उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा तक सड़कों को चौड़ा करने पर चारधाम राजमार्ग परियोजना की निगरानी कर रही थी.

ये सड़कें ऋषिकेश से माना, ऋषिकेश से गंगोत्री और टनकपुर से पिथौड़ागढ़ के बीच बन रही थीं. इन्हें सुरक्षा के लिहाज़ से अहम सड़के बताया गया है. हालांकि, एचपीसी के अधिकार क्षेत्र में रुद्रप्रयाग से केदारनाथ के बीच बन रही 70 किलोमीटर लंबी सड़क और धरासू से जानकी चटी तक बन रही सड़क परियोजनाएं ही थीं.

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