RRB-NTPC परीक्षा: पटना में प्रदर्शन के बाद गिरफ़्तार छात्रों के परिजन क्या कह रहे हैं?

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- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
"हम पैसा कर्जा करके लाए थे सर. बहुत खर्चा हो गया. 15-16 सौ बचा होगा. हमको पटना के बारे में कुछ भी नहीं पता. इस पर (भाई पर) एकदम गर्व था." कहते-कहते विवेकानंद कुमार (28 वर्ष) की आंखें डबडबा जाती हैं.
विवेकानंद वैसे तो झारखंड के गिरीडीह जिले के रहने वाले हैं लेकिन इन दिनों पटना के पुलिस स्टेशन, जेल और कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं.
होटल में काम करने वाले विवेकानंद अपनी 7 हजार कमाई में से 3 हजार अपने भाई को पटना भेज देते थे. उन्हें ये भी नहीं पता कि उनका भाई (किशन) पटना के किस कोचिंग संस्थान में पढ़ता है. उनके भाई को पुलिस RRB-NTPC की परीक्षा व परिणाम की कथित धांधली के बाद राजेन्द्र नगर टर्मिनल पर छात्रों के हुए प्रदर्शन के बाद पकड़ कर ले गई.
उन्हें डर है कि जब ऊपर से ही केस नहीं हटेगा तो उनका भाई नौकरी लायक ही नहीं रहेगा. कहीं कैरेक्टर पर दाग लग गया तो उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी.
24 जनवरी को हुए ये प्रदर्शन
पटना में RRB-NTPC की परीक्षा व परिणाम में हुई कथित धांधली के खिलाफ बीते सप्ताह (24 जनवरी) को प्रदर्शन शुरू हुए. प्रतियोगी छात्रों ने राजेन्द्र नगर टर्मिनल पर लगभग 6 घंटों तक ट्रेनों की आवाजाही रोके रखी.
बाद में देर रात पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया, लेकिन प्रदर्शन अगले दिन भी नहीं रुका. इस दौरान राज्य के अलग अलग हिस्सों में प्रदर्शन देखने को मिला एवं कुछ जगहों पर आगज़नी भी देखने को मिली.
उत्तरप्रदेश में भी कई जगहों पर छात्रों ने रेल रोकी. पुलिस ने छात्रों को रोकने के लाठियां चलाईं और प्रयागराज में लॉज में घुसकर छात्रों को पीटने वाला वीडियो भी वायरल हुआ.

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पटना के भिखना पहाड़ी मोड़ पर भी हजारों की संख्या में छात्रों ने RRB-NTPC के संशोधित परिणाम और ग्रुप डी परीक्षाओं में CBT-2 की परीक्षा लिए जाने के खिलाफ दिन भर प्रदर्शन किया. पुलिस ने शाम के वक्त बल प्रयोग करते हुए छात्रों को वहां से खदेड़ा. जवाबी कार्रवाई के तौर पर छात्रों ने पुलिस बल पर रोड़े-पत्थर बरसाए. चोटें दोनों तरफ के लोगों को लगीं.
छात्र समुदाय की ओर से किए जा रहे इस प्रदर्शन का कोई चेहरा नहीं है, बावजूद इसके छात्र पुलिस-प्रशासन से भिड़ने को तैयार दिखे. साथ ही इस पूरे प्रदर्शन ने पूरे देश में एक और बात को स्थापित किया कि 'बेरोजगारी' कैसे एक बड़ा मुद्दा है और अलग-अलग सरकारें (राज्य और केन्द्र) इस मसले के समाधान को लेकर गंभीर नहीं दिखतीं.
इस संदर्भ में सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की ओर से देश में बेरोजगारी के संदर्भ में दिए गए आंकड़े से पता चलता है कि इस वक्त देश में बेरोजगारी अपने सार्वकालिक चरम पर है- देश में बेरोजगारों की संख्या 5 करोड़ को पार कर चुकी है. CMIE की मानें तो इस वक्त देश में सिर्फ 38 फीसदी लोगों को ही रोजगार मिल पा रहा है. बेरोजगारी दर 8 फीसदी से भी अधिक का आंकड़ा छू रहा है.

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इस प्रदर्शन में गिरफ्तार किए गए एक और छात्र राजन के पिता उमेश महतो कहते हैं, "हम तो 400 रुपया तक का दिहाड़ी मजदूरी करने वाला मजदूर हैं. कई बार तो वो भी नहीं मिलता. किसी तरह बच्चा को पढ़ा रहे. हाथ में चोट भी मेरे ही बच्चे को ही लगी है. दोनों हाथों में, लेकिन अब क्या कहें? वो सब बात कहने लायक नहीं. जो हुआ सो हुआ. बस अब बच्चों का कल्याण हो जाए. सर्विस में कोई दाग न लगे."
महतो आगे कहते हैं, "उसका का LDC में भी हो गया है. सारी प्रक्रिया हो चुकी है. टाइपिंग वगैरह हो चुका है. पहला और दूसरा परीक्षा हो चुका है. पूरा चांस है कि वो मेरिट में भी आ जाएगा. SSC-CGL का मेन्स परीक्षा (29 जनवरी) था तो इस चक्कर में छूट ही गया. हम तो प्रशासन से यही विनती करते हैं कि केस को खत्म कर दे. वैसे तो वो कुछ किया नहीं है लेकिन फिर भी प्रशासन को कुछ लगता है तो उसको मुक्त कर दे. बच्चा से गलती हो गया तो भी उसको माफ कर दें."
लखीसराय के ही रहने वाले उपेंद्र यादव (50 वर्ष) के लड़के रोहित को भी पुलिस ने उक्त प्रदर्शन में सहभागी होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.
वे आगे कहते हैं, "चावल और गेंहू घर से ही भेजते थे. थोड़ा-बहुत हमारा खेती है. बाकी तेल-मसाला और सब्जी वो यहीं से खरीद लेता था. पांच साल से पटना में रह रहा था. हमको तो यह भी नहीं पता कि वो किस कोचिंग में पढ़ता था. अब रिजल्ट सब आने लगा तो ऐसा हो गया. सरकार से गुहार है कि उसे आगे के लिए मौका दिया जाए. केस खत्म कर दिया जाए."

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चरित्र प्रमाण पत्र के बिगड़ने का डर
यहां हम आपको बताते चलें कि किन्हीं सरकारी नौकरियों के लिए चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है. स्थानीय थाने और जिला प्रशासन की ओर से निर्गत इस प्रमाण पत्र पर बेहद सामान्य परिपाटी के लोगों का बहुत कुछ निर्भर करता है.
चरित्र प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी पाने के लिए एक अहम दस्तावेज़ है. इस तरह के मामलों के दर्ज होने के बाद सामान्य तौर पर पुलिस किसी को एकदम पाक-साफ नहीं करार देती. परिवार वाले इसी बात से डरे हुए हैं.
तीनों परिजनों ने तो इस बात पर जोर देते हुए कहा और गुहार लगाई कि प्रशासन उन्हें दोषमुक्त कर दे. वे कहीं से गुनाहगार नहीं. कैरेक्टर सर्टिफिकेट पर कोई दाग न लग जाए.

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प्राथमिकी में क्या दर्ज है?
RRB-NTPC परीक्षा व परिणाम में हुई कथित धांधली के खिलाफ हुए प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस ने 6 कोचिंग संचालकों समेत 17 और लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की. हालांकि गिरफ्तार सिर्फ 4 छात्रों को ही किया गया.
पहले तो उन्हें पत्रकार नगर थाने के हाजत में ही रखा गया और फिर फुलवारीशरीफ जेल भेज दिया गया. छात्रों पर आईपीसी की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
पुलिस का कहना है कि टेलीफोनिक संदेशों और सोशल मीडिया पर लिखी जा रही बातों व वीडियो को देखकर हजारों की संख्या में छात्र राजेन्द्र नगर टर्मिनल पर इकट्ठा हो गए. ट्रेन के परिचालन में बाधा उत्पन्न की. विधि व्यवस्था को बाधित किया. और आम लोगों को इससे असुविधा हुई.

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क्या कहते हैं वकील?
इस पूरे मामले में छात्रों की ओर से पक्ष रख रहे एडवोकेट ऋषव रंजन कहते हैं, "देखिए इन सारे छात्रों को 24 तारीख की रात राजेन्द्र नगर टर्मिनल के आस-पास से उठाया गया, और इन्हें पुलिस एयरपोर्ट थाना ले गई. फिर वहां से उन्हें पत्रकारनगर थाने लाया गया. 25 तारीख को एफआईआर फाइल की गई, और 26 तारीख को पुलिस ने छात्रों को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. प्रावधान ये है कि यदि पुलिस किसी को हिरासत में लेती है तो उसे 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने लाना होता है, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया."
ऋषव आगे कहते हैं, "शनिवार सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने बेल का विरोध करते हुए कहा कि छात्रों ने हिंसा की और संपत्ति का नुकसान किया. सोमवार को भी सुनवाई हुई. हमारी दलील है कि ये पढ़ाई करने वाले मेधावी छात्र हैं, लेकिन आज भी सरकारी वकील ने बेल का विरोध किया."
बिहार पुलिस ने जिस तरह से प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर मुक़दमा दर्ज़ कराया है, उसके लिए सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है. एक तरफ़ ये सब हो रहा है, लेकिन दूसरी ओर सत्ताधारी पार्टी का दावा है कि वह इन छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है.
जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं, "छात्रों की बेल याचिका रिजेक्ट होना हमारे लिए भी चिंता का विषय है, लेकिन हम यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि न्याय की लड़ाई में हम उनके परिजनों के साथ खड़े हैं. निजी तौर पर मैं मानता हूं कि वे कहीं भी गुनहगार नहीं हैं. मैं अपने निजी और राजनैतिक हैसियत से परिजनों से संवाद करके ये तय करने की कोशिश करूंगा कि उन्हें न्याय मिले."
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