एंट्रिक्स-देवास डील पर बीजेपी का कांग्रेस पर हमला, लगाए गंभीर आरोप

निर्मला सीतारमण

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एंट्रिक्स-देवास डील मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फ़ैसले के आधार पर केंद्र की एनडीए सरकार ने पूर्व यूपीए सरकार पर हमला बोला है.

केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुई एंट्रिक्स-देवास डील को भारत के ख़िलाफ़ धोखा बताया है.

ग़ौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपील ट्राइब्यूनल (NCLAT) के देवास (डिजिटल एनहांस्ड, वीडियो एंड ऑडियो सर्विसेज़) मल्टिमीडिया प्राइवेट लिमिटेड को बंद करने के आदेश को बरक़रार रखा था.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि इस डील के ज़रिए हुए घोटाले में 'यूपीए के तत्कालीन मंत्री को गिरफ़्तार किया गया था.'

उन्होंने कहा कि यूपीए कार्यकाल में देश के संसाधन ज़बरदस्त तरीक़े से बेचे गए और इस डील के बारे में कैबिनेट को मालूम भी नहीं था.

वित्त मंत्री ने और क्या-क्या कहा

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निर्मला सीतारमण ने कहा कि यूपीए सरकार ने एंट्रिक्स-देवास डील के लिए कभी भी एक आर्बिट्रेटर (न्यायकर्त्ता) तक की नियुक्ति नहीं की थी.

उन्होंने कहा कि साल 2011 में जब पूरी डील रद्द हो गई तो देवास अंतरराष्ट्रीय न्यायकर्त्ता के पास गया था और यूपीए सरकार को 21 दिनों के अंदर आर्बिट्रेटर नियुक्त करने के लिए कहा गया था लेकिन सरकार ने उसे नियुक्त नहीं किया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि एंट्रिक्स-देवास डील पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया फ़ैसला दिखाता है कि यूपीए सरकार ग़लत कामों में शामिल थी. उन्होंने कहा कि यह 'कांग्रेस की ग़लत ताक़त के इस्तेमाल को दिखाता है.'

"यह कांग्रेस का फ़्रॉड है जो कांग्रेस के लिए था और कांग्रेस के द्वारा था."

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए ये डील की गई थी और अब कांग्रेस पार्टी को बताना है कि इस तरह का धोखा देश की जनता के साथ कैसे किया गया.

सीतारमण ने कहा कि एनडीए सरकार हर कोर्ट में लड़ाई लड़ेगी ताकि देवास डील धोखे से बचकर न भाग पाए. उन्होंने बताया कि इस मामले में एक लिक्विडेटर (कंपनी के समापन की प्रक्रिया को देखने वाला व्यक्ति) को जल्द ही नियुक्त किया जाएगा.

उन्होंने कहा, "हम करदाताओं का पैसा बचाने के लिए लड़ रहे हैं वरना यह शर्मनाक एंट्रिक्स-देवास डील में चला जाता."

क्या है मामला

स्पेस

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दिसंबर 2004 में देवास मल्टीमीडिया कंपनी का गठन हुआ था जो कि बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप कंपनी थी. इस कंपनी का भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) की वाणिज्यिक कंपनी एंट्रिक्स के साथ 2005 में एक सैटेलाइट सौदा हुआ था.

इस सौदे के तहत देवास को ISRO की वाणिज्यिक कंपनी को सेवाएं देने के लिए बैंडविड्थ दिया गया था. इसके तहत एंट्रिक्स को दो सैटेलाइट को बनाना और अंतरिक्ष में छोड़ना था और उसकी 90 फ़ीसदी सैटेलाइट ट्रांसपोडर क्षमता को देवास को देना था.

इस सौदे में 70 मेगाहर्टज़ के एस-बैंड स्पेक्ट्रम भी थे जिसकी लागत 1,000 करोड़ रुपये थी. इस स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल केवल सुरक्षा बलों और सरकारी टेलीकॉम कंपनियों के लिए ही किया जाना था.

इसरो

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इस सौदे पर सवाल उठे कि इसे ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से किया गया है जिसके बाद यूपीए सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए फ़रवरी 2011 में इस सौदे को रद्द कर दिया.

एंट्रिक्स ने NCLAT का रुख़ करते हुए आरोप लगाया कि साल 2005 में तत्कालीन चैयरमेन जी. माधवन नायर समेत कंपनी के वरिष्ठ अफ़सरों ने देवास को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़ों से कॉन्ट्रैक्ट दिया था.

25 मई 2021 को NCLAT ने देवास को अपना काम समेटने का आदेश दिया था. हालांकि इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ देवास और देवास इंप्लॉयीज़ मॉरिशस प्राइवेट लिमिटेड के शेयरहोल्डर NCLAT की चेन्नई बेंच में गए. वहां पर भी उनकी याचिका को ख़ारिज कर दिया गया.

NCLAT के फ़ैसले के ख़िलाफ़ एंट्रिक्स सुप्रीम कोर्ट गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी NCLAT के फ़ैसले को बरक़रार रखा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह मामला 'बड़े आकार की धोखाधड़ी का है जिसे कार्पेट के नीचे ख़त्म नहीं किया जा सकता है.'

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