पीएफ़ खाते पर टैक्स को लेकर आपको कितनी चिंता करनी चाहिए?

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- Author, आलोक जोशी
- पदनाम, वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
आपकी भविष्य निधि या प्रॉविडेंट फ़ंड पर टैक्स लगने का सिलसिला शुरू हो गया है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में एलान किया था कि प्रॉविडेंट फ़ंड खाते में सालाना ढाई लाख रुपए से ऊपर की रकम जमा हुई तो उसके ब्याज पर अब टैक्स लगेगा.
हालांकि बाद में इस पर सफ़ाई आई और बताया गया कि सरकारी कर्मचारियों के लिए और जिन कर्मचारियों के खाते में उनके इंप्लॉयर की तरफ़ से कोई पैसा जमा नहीं किया जाता उन्हें सालाना पांच लाख रुपए तक की रकम पर टैक्स से छूट मिलेगी.

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जिस दिन से यह एलान हुआ तभी से इस पर तरह तरह के सवाल उठ रहे थे.
क्या-क्या थे सवाल
- सबसे बड़ा सवाल तो यह था कि आख़िर इस टैक्स का हिसाब कैसे लगेगा?
- एक ही पीएफ़ अकाउंट में कितनी रकम पर टैक्स लगेगा और कितनी पर नहीं, इसे तय करने का फ़ॉर्मूला क्या होगा?
- एक साल तो समझ में आ जाएगा, लेकिन उसके बाद अगले साल किस रकम पर कितने ब्याज तक टैक्स से छूट मिलेगी और कितने के बाद टैक्स लगाया जाएगा?
- इन सबसे बड़ी शंका यह भी थी कि कहीं सरकार आख़िरकार पीएफ़ की रकम पर पूरी तरह टैक्स लगाने की तैयारी ही तो नहीं कर रही है?
अभी आख़िरी सवाल का जवाब मिलना तो बाकी है. लेकिन टैक्स विभाग ने इतना साफ़ कर दिया है कि यह टैक्स वसूला कैसे जाएगा.
कैसे वसूला जाएगा टैक्स

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इसके लिए अब जिन लोगों के खाते में टैक्स के लिए तय सीमा से ज़्यादा रकम जमा हो रही है उनके एक की जगह दो पीएफ़ खाते होने ज़रूरी होंगे. एक खाता वो जिसमें अब तक कटी हुई रकम और ब्याज की सारी रकम रहेगी. आगे भी जो पीएफ़ कटेगा या खाते में जमा होगा उसमें से टैक्स फ़्री सीमा तक की रकम इसी खाते में जमा होती रहेगी.
इस खाते में जमा रकम या उस पर लगने वाला ब्याज टैक्स फ़्री होगा. कम से कम अभी तक तो यही बताया गया है.
और जो रकम इस सीमा से ऊपर होगी उसे एक अलग खाते में जमा किया जाएगा. इस खाते में आने वाली रकम पर जो भी ब्याज मिलेगा उस पर हर साल आपकी कमाई की स्लैब के हिसाब से टैक्स लगा करेगा.
ऐसा करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी ने इनकम टैक्स नियमावली 1962 में बदलाव किया है और वहां एक नया नियम 9D जोड़ दिया है.
इसी नियम में पीएफ़ खाते को दो टुकड़ों में तोड़ने या दो अलग खाते खोलने का इंतज़ाम किया गया है. टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि इसके साथ ही एक बहुत बड़ी शंका दूर हो गई है जो पीएफ़ पर टैक्स लगने के एलान के साथ खड़ी हो गई थी.
उनका यह भी कहना है कि अब खाताधारकों के लिए अपने टैक्स का हिसाब लगाना आसान हो जाएगा क्योंकि टैक्स वाली रकम एक खाते में और बिना टैक्स वाली रकम एक दूसरे खाते में रहेगी.
कितने लोगों पर पड़ेगा असर

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देश में अभी क़रीब छह करोड़ पीएफ़ खाते हैं. इसलिए लगता है कि यह नियम बहुत बड़ी संख्या में लोगों पर असर डालेगा और सरकार ने बहुत से लोगों का सिरदर्द दूर कर दिया है.
लेकिन सच यह है कि इनमें से 93 फ़ीसदी लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला है क्योंकि उनके खाते में जमा होने वाली रकम इस सीमा से कम है और उनको फ़िलहाल टैक्स की कोई फ़िक़्र नहीं करनी है.
यह आंकड़ा भी कहीं बाहर से नहीं आया है. पिछले साल पीएफ़ पर टैक्स की भारी आलोचना के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों ने ही अपने बचाव में तर्क के तौर पर यह आंकड़ा सामने रखा था. उसी वक्त यह भी बताया गया था कि वर्ष 2018-19 में 1.23 लाख धनी लोगों ने अपने पीएफ़ खातों में 62,500 करोड़ रुपए की रकम जमा करवाई है.
यही नहीं उन्होंने यह भी बताया कि एक अकेले पीएफ़ खाते में 103 करोड़ रुपए की रकम जमा थी. यही देश का सबसे बड़ा पीएफ़ खाता था. जबकि इसी तरह के टॉप-20 अमीरों के खातों में 825 करोड़ रुपए की रकम जमा थी.
उस वक्त देश में साढ़े चार करोड़ पीएफ अकाउंट होने का अनुमान था और बताया गया कि इनमें से ऊपर के 0.27% खातों में औसतन 5.92 करोड़ रुपए का बैलेंस रहा होगा और इनमें से हर एक हर साल 50 लाख के आसपास टैक्स फ्री ब्याज कमा रहा था.
क्या लोगों को चिंता करनी चाहिए?

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यह सब सुनकर तो अधिकतर लोगों को लगेगा कि उनपर तो कोई असर पड़ना नहीं है और सरकार ने यह टैक्स लगाकर एकदम सही क़दम ही उठाया है. लेकिन तब यह भी याद रखना चाहिए कि पीएफ़ पर टैक्स लगाने की मोदी सरकार की यह पहली कोशिश नहीं है.
2016 में भी बजट में प्रस्ताव आया था कि रिटायर होने के बाद जब कर्मचारी अपनी भविष्य निधि की रकम निकालते हैं उस वक्त उसके 60 फ़ीसदी हिस्से पर टैक्स लग जाना चाहिए.
हालांकि बाद में भारी विरोध के कारण उसे वापस लेना पड़ा. इसके पहले साल कर्मचारियों की तरफ से अपने भविष्य के लिए होने वाली बचत यानी ईपीएफ़ या एनपीएस या किसी भी सुपरएन्युएशन या पेंशन योजना में जमा की जानेवाली कुल रकम पर 7.5 लाख रुपए की सीमा लगा दी गई थी.
और अब भी यह सवाल ख़त्म नहीं हुआ है कि सरकार पीएफ़ पर टैक्स लगाने का इरादा रखती है या नहीं?
लेकिन फ़िलहाल सवाल यह है कि आपको क्या करना है. तो इसका सीधा जवाब तो यही है कि आपको कुछ ख़ास करना नहीं है. अगर आपकी तनख्वाह से कटने वाला पीएफ़ महीने में 20833.33 रुपए से ज़्यादा है, या आपके इंप्लायर की तरफ़ से कोई रकम नहीं जमा होती है तो आपकी कटौती की रकम 41666.66 रुपए से ऊपर है, तब आपको कुछ सोचना होगा.
लेकिन उसमें भी ज़िम्मेदारी आपकी नहीं बल्कि पीएफ का हिसाब रखने वाले संगठन ईपीएफ़ओ या फिर आपकी कंपनी के पीएफ़ ट्रस्ट की होगी कि वो आपका अलग खाता खोलकर दोनों खातों में हिसाब से रकम डालना शुरू कर दें.
आपको बस इस पर नज़र रखनी होगी. इसके लिए पीएफ़ दफ़्तर से आने वाली मेल या चिट्ठी पर नज़र रखें और ज़रूरत हो तो अपने दफ़्तर के एचआर विभाग से इस बारे में पूछताछ कर पता कर लें कि अकाउंट खुल गया कि नहीं.
31 मार्च 2021 तक आपके खाते में जो भी रकम थी उस पर या उसके ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगना है और अभी तक सरकार ने पब्लिक प्रॉविडेंट फ़ंड या पीपीएफ़ को भी इससे मुक्त रखा है. इसलिए फ़िलहाल उस बारे में भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
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