बिटकॉइन जैसी करेंसी का भविष्य भारत में कब तय करेगी सरकार?

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पिछले कुछ सालों से डिजिटल मुद्राओं की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है जिन्हें ब्लॉकचेन सॉफ़्टवेयर के ज़रिए इस्तेमाल किया जाता है. ये डिजिटल मुद्रा इनक्रिप्टेड यानी कोडेड होती हैं इसलिए उन्हें क्रिप्टोकरेंसी भी कहते हैं.
दुनिया भर में मुद्राओं को देश के केंद्रीय बैंक नियंत्रित करते हैं लेकिन क्रिप्टोकरेंसी के मामले में ऐसा नहीं है, इसका नियंत्रण इसकी ख़रीद-बिक्री करने वाले लोगों के हाथों में सामूहिक तौर पर होता है.
यही वजह है कि ज़्यादातर देशों की सरकारें या तो इन्हें ग़ैर-कानूनी मानती हैं या इन्हें किसी न किसी रूप में नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं.
भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के विपरीत दक्षिण अमेरिका के देश अल सल्वाडोर ने अब इसके इस्तेमाल पर क़ानूनी मुहर लगा दी है.
हालांकि जब क़ानूनी तौर पर क्रिप्टोकरेंसी के कार्यान्वयन के लिए अल सल्वाडोर ने विश्व बैंक से तकनीकी मदद मांगी तब विश्व बैंक ने इसे मानने से इनकार कर दिया और कहा कि इसे ले कर पारदर्शिता और पर्यावरण संबंधी चिंताएं हैं.
इधर दूसरी ओर, चीन ने मनी-लॉड्रिंग के इल्ज़ाम में अब तक क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े 1100 लोगों को गिरफ़्तार किया है.
चीन ने डिजिटल करेंसी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इस क्षेत्र में कदम रखा है, हालाँकि क्रिप्टोकरेंसी पर सरकारों का नियंत्रण नहीं होता लेकिन चीन ने जो डिजिटल करेंसी शुरू की है उस पर पूरा सरकारी नियंत्रण है.
दरअसल, डिजिटल युआन परंपरागत युआन करेंसी की ही केवल डिजिटल शक्ल है. इसे चीन के कुछ शहरों में प्रयोग के तौर पर पिछले साल लांच किया गया था. अमेरिका भी डिजिटल डॉलर शुरू करने के बारे में विचार कर रहा है.

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भारत और क्रिप्टोकरेंसी
क्रिप्टोकरेंसी के ख़रीद-बिक्री के लिए भारत में इस समय 19 क्रिप्टो एक्सचेंज मार्केट हैं जिनमें वज़ीरएक्स का नाम पिछले दिनों सुर्ख़ियों में था.
केंद्र सरकार के एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने वज़ीरएक्स के संस्थापक और निदेशक निश्चल शेट्टी को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 1999 के क़ानून के तहत 2,971 करोड़ रुपये के क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन का हिसाब देने को कहा है.
ईडी ने वज़ीरएक्स पर अपने उपयोगकर्ताओं की 'नो योअर कस्टमर' (केवाईसी) यानी ग्राहक वेरिफ़िकेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज़ नहीं लेने का आरोप लगाया है. ईडी के अनुसार, वज़ीरएक्स का इस्तेमाल कुछ चीनी नागरिकों ने अपने वज़ीरएक्स वॉलेट में राशि जमा करके किया. वज़ीरएक्स के संस्थापक शेट्टी ने जवाब में तीन ट्वीट किए और इस इल्ज़ाम को नकारते हुए ईडी के साथ पूरा सहयोग का वादा किया.
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भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अभी कोई सरकारी गाइडलाइन या नियम-कानून मौजूद नहीं हैं. यही वजह है कि वज़ीरएक्स जैसे मामलों में अभी सिर्फ़ केवाईसी के नियमों का पालन नहीं करने को लेकर नोटिस भेजा गया है.
भारत सरकार संसद के अगले सत्र में क्रिप्टोकरेंसी की निगरानी के लिए एक बिल पेश कर सकती है. वर्चुअल करेंसी को रेगुलेट करने पर सरकार की एससी गर्ग समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इसके अलावा सरकार के पास कई मंत्रालयों की एक संयुक्त समिति की रिपोर्ट भी है.
जानकारों का कहना है कि एससी गर्ग समिति ने क्रिप्टोकरेंसी पर भारत में पाबंदी लगाने की सलाह दी है. लेकिन मार्च में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए थे कि वर्चुअल करेंसियों को केवल रेगुलेट किया जाएगा, उन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा. सरकार इस समय दुविधा में नज़र आती है और इसका आख़िरी फैसला क्या है, इसका पता विधेयक के पेश किए जाने के बाद ही लगेगा.
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क्रिप्टोकरेंसी क्या है?
दुनिया में रुपए, डॉलर और यूरो जैसे नोटों की तरह पिछले 10-12 सालों में वर्चुअल दुनिया में कई मुद्राएँ सामने आई हैं और इनकी लोकप्रियता और संख्या दोनों तेज़ी से बढ़ती जा रही है. खास तौर पर युवा पीढ़ी में ये काफ़ी लोकप्रिय हैं.
मोटे तौर पर क्रिप्टोकरेंसी वर्चुअल या डिजिटल पैसा है जो टोकन या डिजिटल "सिक्कों" के रूप में होता है, क्रिप्टोकरेंसी को डिज़ाइन ही इस तरह किया गया है कि वह सरकारी नियमों और नियंत्रण से मुक्त रहे.
इस तरह की करेंसियों में सबसे चर्चित बिटकॉइन है, पिछले हफ़्ते एक बिटकॉइन की क़ीमत लगभग 30 लाख रुपए थी. दुनिया भर में दो करोड़ के क़रीब बिटकॉइन चलन में हैं जिनमें से दो हज़ार भारत में बताए जाते हैं.
इसकी क़ीमत में लगातार भारी उतार चढ़ाव दिख रहा है, कुछ जानकारों का कहना है कि यह अगले कुछ महीनों में इसकी वैल्यू 50 प्रतिशत गिर सकती है, तो कुछ दूसरे विशेषज्ञों का मानना है कि यह 30 लाख से बढ़कर 75 लाख तक हो सकता है.
इस तरह की इनक्रिप्टेड या कोडेड मुद्राओं की संख्या करीब चार हज़ार है लेकिन आम लोगों को सिर्फ़ बिटकॉइन का नाम पता है.
भारत में अभी आम लोगों को इसकी जानकारी बहुत कम है. दुनिया के कई देशों में भी हाल कुछ ऐसा ही है. अगर गूगल ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो 'बिटकॉइन' टर्म सर्च करने वाले लोगों की तादाद तेज़ी से बढ़ती जा रही है यानी लोगों की दिलचस्पी इसमें बढ़ रही है.

क्रिप्टो और ब्लॉकचेन
क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन नामक टेक्नोलॉजी पर आधारित है. प्रवीन विशेष सिंगापुर में एक बड़े हेज फंड के पोर्टफ़ोलियो मैनेजर हैं. उनका काम करेंसी व्यापार से जुड़ा है.
बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, "ब्लॉकचेन भविष्य का टेक्नोलॉजी प्लेटफार्म है. ये वो मंच है जिस पर क्रिप्टो मुद्राओं का लेन-देन होता है. ब्लॉकचेन जानकारी को रिकॉर्ड करने की एक प्रणाली है जिसमें जानकारी को बदलना या हैक करना लगभग असंभव है."
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में लियोनार्ड कुकोस क्रिप्टोकरेंसी के विकास के समर्थक और निवेशक हैं. इस काम में वो बहुत सक्रिय हैं. वो ब्लॉकचेन जैसी उभरती टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ भी हैं.
उन्होंने बीबीसी के सवालों के जवाब में कहा, "सरल शब्दों में, ब्लॉकचेन एक विशेष प्रकार का डेटाबेस है जिसे डिस्ट्रीब्यूटेड खाता कहा जाता है जो डिजिटल लेनदेन को रिकॉर्ड करता है ताकि इसे बदलना, हैक करना या फ्रॉड करना लगभग असंभव हो. यह विशेष है क्योंकि सभी लेन-देन कंप्यूटरों के विशाल नेटवर्क में एन्क्रिप्टेड, कॉपीड और ड्रिस्ट्रीब्यूटेड होते हैं."
वो आगे कहते हैं, "इन कंप्यूटरों को नोड कहा जाता है, और उनका मुख्य काम हर लेन-देन को मान्यता देना और दर्ज करना होता है. हर कोई एक नोड हो सकता है, फिर भी नेटवर्क पर किसी का पूरा नियंत्रण नहीं हो सकता है इसलिए ब्लॉकचैन एक विकेन्द्रीकृत प्रणाली है".
क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन दोनों एक दूसरे से जुदा हैं लेकिन इनका अटूट रिश्ता भी है. जैसा कि लियोनार्ड कहते हैं, "ब्लॉकचेन एक पसरा हुआ बही-खाता है, जबकि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी उसी खाते के मुताबिक़ डिज़ाइन किए गए हैं. बिटकॉइन अपने ब्लॉकचेन के बिना मौजूद नहीं हो सकता, हालांकि ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग क्रिप्टोकरेंसी के अलावा दूसरी चीज़ों में भी होता है."
बिटकॉइन अकेली क्रिप्टोकरेंसी नहीं है, इथेरियम, टीथर, कार्डानो, पोल्काडॉट, रिपल और डोजकॉइन जैसी और भी कई क्रिप्टोकरेंसी भी चलन में हैं जिनमें हर साल अरबों डॉलर के लेन-देन होते हैं.
हालांकि क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ार में बिटकॉइन सबसे पहले आने वाली, सबसे महंगी और सबसे प्रचलित क्रिप्टोकरेंसी है. बिटकॉइन को 2009 में लांच किया गया था और आज इसका मार्केट कैप $732 अरब डॉलर है, यानी अकेले बिटकॉइन कई देशों के सकल घरेलू उत्पाद से ज़्यादा है.
इन दिनों एक बिटकॉइन की क़ीमत 30 लाख रुपए है. हाल में जब टेस्ला कंपनी के मालिक एलन मस्क ने घोषणा की कि उनकी कंपनी कारों के पेमेंट बिटकॉइन करेंसी में नहीं स्वीकार करेगी तो बिटकॉइन की क़ीमत 45 लाख रुपए से 25 लाख रुपये प्रति बिटकॉइन हो गयी. अब धीरे-धीरे इसका मूल्य एक बार फिर बढ़ रहा है.
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भरोसा नहीं तो नोट केवल काग़ज़ है
क्रिप्टोकरेंसी को इस समय भरोसे के संकट का सामना करना पड़ रहा है. सरकारें इसे शक़ की निगाहों से देखती हैं और इसे पारंपरिक करेंसी के लिए ख़तरा मानती हैं. सरकारों को ये भी लगता है कि क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी वर्चुअल दुनिया का हिस्सा है जो सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने की कोशिश कर रही है और वास्तविक दुनिया के समानांतर चलने की कोशिश कर रही है.
भारतीय मूल के प्रवीण विशेष कहते हैं, "मेरे हिसाब से सरकारों के क्रिप्टोकरेंसी का विरोध करने का पहला कारण इन बाजारों को नियंत्रित करने में असमर्थता है. बुनियादी ढांचे की कमी और इन बाज़ारों के नियमों के अभाव के कारण सरकारें इन बाजारों को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं."
लियोनार्ड कुकोस कहते हैं, "क्रिप्टोकरेंसी के बारे में सबसे आम आलोचना में से एक यह है कि उनमें वास्तविक मूल्य की कमी होती है, उदाहरण के लिए, कुछ लोग सोचते हैं कि बिटकॉइन का कोई वास्तविक मूल्य नहीं है और अंततः इसका कोई मूल्य नहीं होगा क्योंकि कोई संप्रभु सरकार उसकी गारंटर नहीं है."
वे कहते हैं, "अमेरिका में 100 डॉलर के नोट की छपाई में सिर्फ़ 14 सेंट का खर्च आता है, तो बाकी मूल्य कहां से आता है? जवाब है--भरोसा. हम करेंसी का इस्तेमाल करने वाले लोग वास्तविक मूल्य के लिए पारंपरिक मुद्राओं पर भरोसा करते हैं, विश्वास के बिना पैसा सिर्फ कागज़ है."
प्रसिद्ध इसराइली विचारक और इतिहासकार युवाल नोआ हरारी के विचार में पैसा केवल काग़ज़ है अगर इस पर सामूहिक भरोसा नहीं है. वो अपनी एक क़िताब में कहते हैं, ''पैसा आपसी विश्वास की अब तक की सबसे सार्वभौमिक और सबसे कुशल प्रणाली है."
उनका तर्क ये है कि किस तरह से शुरू में लोगों का मुद्रा पर भी भरोसा नहीं था, इसे लोगों का भरोसा हासिल करने में एक युग लगा. वैसा ही क्रिप्टोकरेंसी के मामले में भी हो सकता है.

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क्रिप्टोकरेंसी का अवैध इस्तेमाल
सरकारों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी के साथ एक ख़तरा ये भी है कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाएगा और इनका इस्तेमाल तस्कर और आतंकवादी करेंगे.
लेकिन इन मुद्राओं का समर्थन करने वालों का कहना है कि ये पारंपरिक मुद्राओं के बारे में भी कहा जा सकता है जिनका इस्तेमाल काले धन को बटोरने, रिश्वतखोरी और आतंकवादी योजनाओं के लिए आम तौर से किया जाता है.
प्रवीण विशेष के अनुसार क्रिप्टो मुद्राओं को ट्रैक करने के लिए सरकारों और केंद्रीय बैंकों के पास वर्तमान में नियम या तकनीकी इंन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं है.
वे कहते हैं, "कई दशकों से, केंद्रीय बैंकों ने आतंकवाद की फाइनेंसिंग और अवैध लेनदेन के पर निगरानी रखी है, हर लेन-देन का विवरण और विदेशी मुद्रा के मामले में कारण भी बताना पड़ता है. इनमें केवाईसी और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग पॉलिसी जैसी नीतियां शामिल हैं. हालांकि जब क्रिप्टो मुद्राओं की बात आती है, तो ऐसी कोई नीति नहीं है."
वहीं लियोनार्ड कहते हैं कि दरसल ये सब कंट्रोल का मामला है. "बिटकॉइन की कई बड़ी विशेषताओं में से एक ये है कि ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच एन्क्रिप्टेड है और पूरी तरह पसरा हुआ है जिस पर सरकारों या सेंट्रल बैंकों की निगरानी की ज़रुरत नहीं है. ये भी एक वजह है कि सरकारें इससे डरती हैं. ये सब नियंत्रण का खेल है और नियंत्रण का मतलब होता है पावर."
शायद इसीलिए चीन ने क्रिप्टोकरेंसी के ख़िलाफ़ क़दम उठाना शुरू कर दिया है और अमेरिका इस पर अंकुश लगाने की सोच रहा है.
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क्रिप्टोकरेंसी पर भरोसा कैसे हो?
विशेषज्ञ कहते हैं कि जैसे-जैसे बड़ी संस्थाएं और बैंक इसका इस्तेमाल शुरू करेंगे वैसे-वैसे इसका विस्तार होगा और इस पर भरोसा क़ायम होगा.
प्रवीण विशेष कहते हैं कि कई बड़े संस्थान अब क्रिप्टो करेंसी को अपना रहे हैं, गोल्डमैन सैक्स ने अपने प्रमुख ग्राहकों की सेवा के रूप में बिटकॉइन और ईथर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की घोषणा की है.
लियोनार्ड के मुताबिक़ भरोसा स्थापित करने में समय लग सकता है. "क्रिप्टोकरेंसी को गुमनामी से मुख्यधारा में लाने में लगभग एक दशक का समय लगा, लेकिन इसकी तुलना में पारंपरिक करेंसी को ऐसा करने में काफ़ी अधिक समय लगा था."
जर्मनी के वैश्विक डॉयचे बैंक ने हाल में 'पेमेंट सिस्टम के भविष्य' पर एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया था जिसमें क्रिप्टोकरेंसी के हर पहलू पर विस्तार से लिखा गया था.
डॉयचे बैंक का रिसर्च बताता है कि "क्रिप्टोकरेंसी के सुरक्षा, गति, न्यूनतम लेन-देन शुल्क और डिजिटल युग में प्रासंगिकता जैसे फ़ायदों के बावजूद उन्हें भुगतान के साधन के रूप में व्यापक रूप से अब तक स्वीकार नहीं किया गया है".
हालांकि रिसर्च पेपर का कहना है कि यह समय के साथ बदल सकता है, "अगर गूगल, अमेज़न, फेसबुक और ऐपल या टेनसेंट जैसी चीनी कंपनी के साथ चीनी सरकार क्रिप्टोकरेंसी के लिए कुछ बाधाओं को दूर कर सकती है तो क्रिप्टोकरेंसी अधिक आकर्षक हो सकती है. ये उन्हें नकदी को बदलने की क्षमता देगा. अगर ब्लॉकचेन वॉलेट का इस्तेमाल करने वालों तादाद बढ़ती रही, तो दशक के अंत तक, क्रिप्टोकरेंसी इस्तेमाल करने वालों की संख्या 20 करोड़ तक हो सकती है जो वर्तमान स्तर से चार गुना अधिक होगा."

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भारी उतार-चढ़ाव ख़ास कमज़ोरी
कई लोग क्रिप्टो मार्केट में पैसे लगाने से डरते हैं क्योंकि उनकी कीमतों में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव होते हैं. शायद ऐसे ही समय के लिए अमेरिका के प्रसिद्ध निवेशक और व्यापारी वारेन बफेट ने कहा था, "जब दूसरे लालची हों तो आप भयभीत हों और जब दूसरे भयभीत हों तो आप लालची हों."
उन्होंने इसी फार्मूले को अपनाते हुए अरबों डॉलर कमाए हैं. लेकिन दूसरी तरफ पारम्परिक मुद्राओं के भाव में भी कभी-कभी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है.
प्रवीण विशेष कहते हैं, ''कुछ मुद्राएं जैसे तुर्की का लीरा और रूसी रूबल बहुत अस्थिर हैं, किसी भी नए "उभरते" उत्पाद की तरह, क्रिप्टो मुद्राएं भी बहुत अस्थिर हैं."
प्रवीण विशेष के मुताबिक़ कई मायनों में आने वाले दशक में पारंपरिक बैंकिंग तरीकों की तुलना में उधार लेने, उधार देने और व्यापार आयात और निर्यात के तरीके बहुत अलग हो सकते हैं.
लोयनार्ड कहते हैं क्रिप्टोकरेंसी की स्वीकृति बढ़ रही है. वो कहते हैं "क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती स्वीकृति की एक बड़ी वजह ये है कि इन्हें वित्तीय संस्थाएं स्वीकार करने लगी हैं. पेपाल जैसे वित्तीय संस्थान ने खातों में बिटकॉइन का लेन-देन करने की अनुमति देकर इनकी प्रगति का रास्ता साफ़ कर दिया है."
लेकिन कई ऐसे विशेषज्ञ हैं जिनके अनुसार क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसा बुलबुला है जो देर या सवेर फट जाएगा, मगर लियोनार्ड कहते हैं "कई मायनों में क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य अब हमारे सामने आ रहा है."
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