कालीचरण को रायपुर पुलिस ने आधी रात कैसे और कहां गिरफ़्तार किया

कालीचरण

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए

बुधवार की रात अब गुरुवार में बदल चुकी थी. हर आहट के साथ, कान बाहर से आने वाली आवाज़ को सुनने के लिए बंद दरवाज़े पर टिक जाते थे.

घड़ी की सुई आधी रात को पार कर 3 के अंक तक पहुंचने वाली थी, उसी समय किसी गाड़ी के आने की आवाज़ आई.

बागेश्वर होम स्टे के मुख्य कमरे को पार कर, चार लोग दाखिल हुए और सामने के कमरे में ही बैठ गये. लेकिन भीतर के नारंगी रंग से पुते कमरों में एक, कमरा नंबर 109 की ओर बढ़ने से पहले ही वे घिर चुके थे.

कैसे गिरफ़्तार हुए कालीचरण

अभिजीत सारग ऊर्फ कालीचरण, मध्यप्रदेश के बागेश्वर धाम पहुंची रायपुर पुलिस की गिरफ़्त में थे.

पुलिस के एक अधिकारी कहते हैं-"कालीचरण ने पहले तो जवानों पर रौब ग़ालिब करने की कोशिश की. लेकिन जब समझाया गया कि साथ चलने के अलावा कोई चारा नहीं है तो बड़े बेमन से कालीचरण ने साथ आना स्वीकार किया."

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रविवार की शाम को रायपुर में आयोजित 'धर्म संसद' में अल्पसंख्यकों और महात्मा गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले अकोला, महाराष्ट्र के कालीचरण की वापसी सोमवार को थी.

विवादास्पद बयान के बाद जब वे कार्यक्रम स्थल से निकलने लगे तो मीडिया के लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने रायपुर के पुजारी पार्क में पहुंचने की सलाह दी, जहां वे ठहरे हुए थे.

इधर कार्यक्रम स्थल पर गहमागहमी शुरू हो चुकी थी. हालांकि, 'भारत देश को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए' विषय पर दूसरे साधु-संतों का भाषण जारी था.

इधर रात नौ बजे तक कालीचरण के भाषण का क्लिप वायरल हो चुका था. इसके बाद टिकरापारा थाने में धर्म संसद की आयोजन समिति से जुड़े कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे की शिकायत दर्ज़ किए जाने के बाद जब पुलिस पुजारी पार्क पहुंची तो पता चला कि कालीचरण वहां नहीं हैं.

एक पुलिस अधिकारी कहते हैं-"साइबर टीम ने कालीचरण और उससे जुड़े लोगों के मोबाइल का लोकेशन पता किया तो सारे नंबर बंद थे. पुलिस टीम को पता चला कि कालीचरण महाराज और उसके सहयोगी सड़क मार्ग से रवाना हुए हैं."

कालीचरण को पकड़कर ले जाती पुलिस

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फोन की लोकेशन

पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि कालीचरण की तलाश कहां की जाए. सारे फ़ोन नंबर बंद थे और आने-जाने के बारे में कोई खास जानकारी नहीं मिल पा रही थी.

इस बीच कालीचरण के पीए के सेलफोन का लोकेशन खजुराहो के आसपास नज़र आया.

खजुराहो रेलवे स्टेशन के पास ही है पल्लवी गेस्ट हाउस और रेस्तरां.

वहां के एक कर्मचारी ने बीबीसी को बताया, -"छत्तीसगढ़ की पुलिस जब हमारे यहां सादी वर्दी में पहुंची तो पता चला कि सोमवार की शाम को जो लोग आये थे, उनमें कालीचरण भी शामिल थे."

मोबाइल लोकेशन के आधार पर खजुराहो पहुंची, छत्तीसगढ़ पुलिस को पता चला कि कालीचरण और उनके तीन साथी शाम पांच बजे के आसपास पल्लवी गेस्ट हाऊस पहुंचे थे. इसके बाद कालीचरण का एक शिष्य वहां पहुंचा.

लगभग घंटे भर तक वहां रुकने और खाना-पीना के बाद कालीचरण वहां से एक टैक्सी में अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गए. लेकिन एक साथी वहीं रुका रहा.

एक पुलिसकर्मी के अनुसार-"पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर यही दर्शाने की कोशिश की कि वे कालीचरण के भक्त हैं और उनका दर्शन करना चाहते हैं. कालीचरण के पीए का फ़ोन चालू था. उस पर संपर्क कर टीम के एक सदस्य ने दर्शन की इच्छा जताई तो उन्हें मना कर दिया गया. पीए ने कहा कि अभी एक लाख लोगों की वेटिंग चल रही है."

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पुलिस कैसे पहुंची बागेश्वर धाम

पीए के सेलफोन का लोकेशन खजुराहो से लगभग 25 किलोमीटर दूर बागेश्वर धाम के आसपास बता रहा था.

अब पुलिस ने उस टैक्सी चालक की तलाश शुरू की, जिसने कालीचरण और उनके साथियों को बागेश्वर धाम तक पहुंचाया था.

इसी टैक्सी चालक की मदद से बुधवार को रायपुर पुलिस गढ़ा गांव पहुंची.

गढ़ा गांव में एक पतली सड़क के दोनों ओर बने हुए घरों में से कुछ घरों में लोग होम स्टे की सुविधा उपलब्ध कराते हैं.

इसी गढ़ा गांव के बागेश्वरधाम होम स्टे की टीन के चादर की छत वाले कमरों में ज़मीन पर गद्दे और चादर बिछाने की सुविधा है, जहां एक दिन का किराया 300 रुपये है.

बागेश्वरधाम होम स्टे के संचालक शंकर शिवहरे ने बीबीसी से कहा-"मंगलवार की रात को जब कालीचरण बाबा पहुंचे तो उन्होंने जींस और टी शर्ट पहन रखी थी और चेहरा ढक रखा था. उन्होंने तीन कमरे बुक कराये थे. होम स्टे के कमरा नंबर 109 में सचिन उर्फ राजू कुटे के नाम से कालीचरण रुके हुए थे. उनके दूसरे साथियों ने रुकने के लिए कमरा नंबर 103 और 112 भी बुक करा रखा था. उनमें से एक लड़का पहले भी अगस्त में हमारे यहां ठहर चुका था."

शंकर कहते हैं-"अगली सुबह नहा-धो कर बाबा और उनके साथी बागेश्वरधाम चले गए. बागेश्वरधाम जाते समय भी बाबा ने जींस वगैरह ही पहन रखी थी. इसलिए मुझे पता भी नहीं चला कि वे कोई साधू हैं. हां, उनके साथ के दो लोगों ने गेरुआ कपड़े ज़रुर पहन रखे थे."

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सादी वर्दी में पहुंची पुलिस

शंकर शिवहरे के अनुसार रायपुर पुलिस सादी वर्दी में बुधवार की दोपहर 12 बजे पहुंची और कमरा देखने के बहाने उसने दूसरे ठहरे लोगों की जानकारी प्राप्त की.

इसके बाद पुलिस शाम चार बजे के आसपास फिर पहुंची. फिर से कमरे का किराया, आने-जाने का रास्ता आदि की जानकारी ली.

शंकर कहते हैं-"सादी वर्दी में पहुंचे पुलिस वालों ने कालीचरण महाराज की लंबे बालों वाली तस्वीर दिखा कर हमसे जानना चाहा कि क्या ये यहीं ठहरे हुए हैं. मैंने उन्हें बताया कि महाराष्ट्र से चार लोग आए तो हैं लेकिन इनमें यह व्यक्ति है कि नहीं, मुझे पता नहीं."

शंकर शिवहरे के अनुसार पुलिस वालों ने कहा कि वे बाबा के भक्त हैं और उनके दर्शन के लिए आए हुए हैं.

इसके बाद शाम सात बजे के आसपास सादी वर्दी में पहुंचे उन्हीं तीन पुलिस वालों ने कालीचरण बाबा के बगल का कमरा नंबर 110 बुक कराया.

इस दौरान शंकर या उनके किसी स्टॉफ को भनक भी नहीं लगी कि जिन तीन लोगों ने कमरा बुक कराया है, वो पुलिस वाले हैं.

पुलिस के अनुसार इस पूरे दौर में वे कालीचरण के पीए से संपर्क करने की कोशिश करते रहे और भक्त होने का अभिनय करते हुए एक बार दर्शन कराने का इसरार करते रहे.

एक पुलिसकर्मी ने बीबीसी से कहा-"कालीचरण को बागेश्वरधाम में जा कर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय टीम ने भक्त बन कर स्टे होम में ही रुकना बेहतर समझा. कालीचरण के बारे में तब तक ये ख़बर आ चुकी थी कि वे बागेश्वरधाम के महंत धीरेन्द्र कृष्ण गर्ग से मिलने के लिए गए हुए हैं."

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जब लगा कि हाथ से निकल जाएंगे कालीचरण

लेकिन जब रात हो गई और कालीचरण या उनके साथियों की वापसी नहीं हुई तो टीम का धैर्य चुकने लगा. 7-8 डिग्री तापमान वाले ठंड में टीम के सदस्यों को लगा कि कहीं कालीचरण हाथ से निकल न जाएं.

लेकिन पीए के मोबाइल फ़ोन का लोकेशन बागेश्वरधाम के आसपास ही शो कर रहा था, इसलिए उम्मीद बची हुई थी.

इसके बाद जब देर रात दो बजे के आसपास कालीचरण पहुंचे तो पुलिस ने बिना देरी किए, साथियों समेत उन्हें हिरासत में ले लिया.

रायपुर के पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल कहते हैं- "हमारी टीम ने पूरी विधिक प्रक्रियाओं का पालन किया. गिरफ़्तारी के तुरंत बाद कालीचरण के वकील और परिजनों को गिरफ़्तारी की सूचना दी और 24 घंटे से पहले ही रायपुर की अदालत में उसे पेश भी कर दिया."

कालीचरण की गिरफ़्तारी पर हमने उनके पिता धनंजय सारग और भाई से भी बात करने की कोशिश की.

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परिवार ने बात करने से किया इनकार

लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. परिजनों ने बताया कि बेटे की गिरफ़्तारी के बाद वे इस मुद्दे पर कुछ बात नहीं करना चाहते.

धनंजय सारग और उनके एक बेटे अकोला में ही एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं.

कालीचरण को पिछले कई सालों से जानने वाले अकोला के स्थानीय पत्रकार उमेश अलोने कहते हैं-"अभिजीत सारग को यहां बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता. यहां अकोला में उनका कोई आश्रम वगैरह भी नहीं है. हालांकि उनके कुछ समर्थक भी हैं. लेकिन 2017 में जब उन्होंने पार्षद का चुनाव लड़ा था तो वह चुनाव भी वे हार गये थे. पिछले साल भोजपुर मंदिर का वीडियो सामने आने के बाद उन्हें देश के अलग-अलग जगहों में बुलाया जाने लगा."

अपने को कालीचरण का भक्त बताने वाले अकोला के एक नौजवान आशीष भावे का कहना है कि बाबा की गिरफ़्तारी का विरोध करने उनके शिष्य रायपुर पहुंचेंगे.

आशीष कहते हैं- "हमारे बाबा जी पर काली माता का आशीर्वाद है और उन्हें दुनिया की कोई ताकत क़ैद कर के नहीं रख सकती. वे सिद्ध पुरुष हैं, सच्ची बात करते हैं. उनके ख़िलाफ़ बात करने वाले वो लोग हैं, जो बाबा जी से जलते हैं."

हालांकि कालीचरण जिस भावसार समाज से आते हैं, उसके अध्यक्ष अनिल मावले का दावा है कि कालीचरण के परिवार ने उनकी हरकतों से तंग आकर उन्हें पढ़ने के लिए नानी के घर मालेगांव भेज दिया था. बाद में वहां से भी मौसी के घर इंदौर भेजने की नौबत आ गई. जहां वे भय्यू जी महाराज के संपर्क में आए.

अनिल मावले कहते हैं-"एक दिन अभिजीत यहां लौटा और अपने को बाबा घोषित कर दिया. लेकिन उसकी संगत अच्छे लोगों के साथ नहीं थी. उसने गायत्री परिवार के साथ मिल कर काम करने की कोशिश की लेकिन लोगों को समझ में आ गया तो लोगों ने उससे दूरी बना ली.

महिलाओं और लड़कियों को लेकर भी कई सवाल उठे. फिर उसके साथ बड़ी संख्या में ऐसे लोग जुड़ते चले गये, जिन्हें समाज में अच्छा नहीं माना जाता. कोई मोटरसाइकिल चोर तो कोई मवाली. कालीचरण समेत उसके साथियों पर कुछ मामले भी दर्ज हैं."

अनिल मावले का कहना है कि समाज की कुलदेवी का मंदिर, कालीचरण के घर के पास ही है, जहां अक्सर उनकी मुलाकात कालीचरण से होती रही है.

मावले कहते हैं-"अभिजीत बड़ी-बड़ी बातें करता रहता है. उसका कहना है कि उसे काली माता ने आशीर्वाद दिया है कि वह सांसद बनेगा, मुख्यमंत्री बनेगा, प्रधानमंत्री बनेगा."

कालीचरण ऊर्फ अभिजीत सारग का राजनीतिक भविष्य क्या होगा, यह कह पाना तो मुश्किल है. लेकिन फिलहाल सबकी नज़रें उनकी जमानत के आवेदन पर टिकी हुई है, जिस पर तीन जनवरी को सुनवाई हो सकती है.

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