मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसक नारे का मामला: वकील अश्विनी उपाध्याय समेत 6 लोग गिरफ़्तार

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुसलमानों को निशाना बनाकर हिंसा के लिए भड़काने वाली नारेबाज़ी की गई जिसके वीडियो रविवार से सोशल मीडिया पर वायरल हो गए.
ये सब हुआ संसद भवन से चंद मिनट दूर और संसद मार्ग थाने से चंद क़दम की दूरी पर, यही नहीं वहाँ पुलिस की मौजूदगी भी थी.
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता चिन्मय बिस्वाल ने बीबीसी को बताया है कि इस मामले में प्रदर्शन के आयोजक अश्विनी उपाध्याय समेत छह लोगों को हिरासत में लिया गया था और उनसे पूछताछ की गई.
पूछताछ के बाद सभी को मंगलवार दोपहर गिरफ़्तार कर लिया गया है.
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय, विनोद शर्मा, दीपक सिंह, विनीत क्रांति, प्रीत सिंह और दीपक को भड़काऊ नारे लगाने के केस में गिरफ़्तार किया गया है.
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एक एफ़आईआर दर्ज की है.
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इससे पहले नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त दीपक यादव ने बीबीसी से कहा था, "इस संबंध में एक एफ़आईआर दर्ज की गई है, वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है."
दिल्ली में पिछले साल फ़रवरी में हुए दंगों के कई अभियुक्तों की पहचान के लिए सीसीटीवी फ़ुटेज और फ़ेशियल रिकॉग्नीशन सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल किया गया था, क्या इस मामले में ऐसा किया जाएगा, इसका कोई जवाब दिल्ली पुलिस ने नहीं दिया है.
सोशल मीडिया पर इस घटना के अलग-अलग कोण से लिए गए कई वीडियो मौजूद हैं जिनमें हाथ के इशारे के साथ मुसलमानों को काटे जाने के नारे लगाते हुए लोगों के चेहरे साफ़ दिख रहे हैं.
आठ अगस्त को क्या हुआ था?

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"भारत जोड़ो अभियान" के नाम से जंतर-मंतर पर लोगों को एकजुट किया गया था और 'अंग्रेज़ी शासन काल के काले क़ानूनों के ख़िलाफ़' प्रदर्शन किया गया था.
ये प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय के आह्वान पर हुआ था.
इस दौरान 'भारत में समान शिक्षा, समान चिकित्सा, समान कर संहिता, समान दंड संहिता, समान श्रम संहिता, समान पुलिस संहिता, समान न्यायिक संहिता, समान नागरिक संहिता, समान धर्मस्थल संहिता और समान जनसंख्या संहिता' लागू करने की मांग की गई थी.
आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शन में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अलावा अन्य प्रांतों से भी हिंदूवादी कार्यकर्ता शामिल हुए थे.
सोशल मीडिया पर इस प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो शेयर किए जा रहे हैं. इन वीडियो में कई लोग 'जब मु&*#...काटे जाएंगे, राम-राम चिल्लाएंगे' नारा लगाते हुए दिख रहे हैं. नारा लगाने के साथ ये लोग हाथ से काटने का इशारा भी कर रहे हैं.

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वीडियो में "भारत जोड़ो अभियान" का बैनर भी दिखाई देता है जिस पर आठ अगस्त, जंतर-मंतर भी लिखा है.
प्रदर्शन के आयोजक अश्विनी उपाध्याय ने एक बयान जारी करके कहा है कि वे नारेबाज़ी करने वालों को नहीं जानते.
उन्होंने अपने आप को नारेबाज़ी करने वालों से अलग करते हुए कहा है, "सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति उन्मादी भाषण दे रहा है. कुछ लोग मुझे बदनाम करने के लिए मेरा नाम लेकर यह वीडियो ट्विटर, फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप पर शेयर कर रहे हैं जबकि वीडियो में दिख रहे लोगों को न तो मैं जानता हूँ, न तो इनमें से किसी से मिला हूँ और न तो इन्हें बुलाया गया था."
उपाध्याय ने दिल्ली पुलिस को एक पत्र लिखकर वीडियो की जांच करने और कार्रवाई करने की मांग की है. उपाध्याय ने लिखा है, "अगर यह वीडियो सही है तो इसमें शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई करें और यदि असत्य है तो इसे सोशल मीडिया में शेयर करने वालों के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई करें."
वीडियो ही नहीं, चश्मदीद भी
प्रदर्शन में शामिल रहे एक हिंदूवादी नेता ने बीबीसी से नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रदर्शन के दौरान बहुत से समूह अलग-अलग नारेबाज़ी कर रहे थे और उत्तेजक नारेबाज़ी भी हुई थी.
उन्होंने कहा, "युवाओं का जो समूह नारेबाज़ी करते हुए दिख रहा है इनमें से कुछ ग़ाज़ियाबाद के लोनी से आए थे. मैं इन युवाओं से मिला भी था. बाद में इन्होंने ये उत्तेजक नारेबाज़ी की. उस समय मैं वहां नहीं था. मैं वहा होता तो वीडियो में दिख रहा होता और सबसे पहले मैं ही गिरफ़्तार किया जाता."
वहीं इस प्रदर्शन को कवर करने गए मीडिया पोर्टल 'नेशनल दस्तक' के पत्रकार अनमोल प्रीतम को उग्र लोगों ने धमकाने और उनसे ज़बर्दस्ती 'जय श्रीराम' का नारा लगवाने की कोशिश की. इसका वीडियो अनमोल ने ट्वीट किया है.
बीबीसी से बात करते हुए अनमोल प्रीतम ने कहा, "मेरा कैमरामैन मुझसे पहले पहुंच गया था, उसने उत्तेजक नारेबाज़ी को रिकॉर्ड किया था. मैं इसके बाद वहां पहुंचा, मैंने अपने कैमरामैन के शूट किए वीडियो में देखा कि कम उम्र के युवा नारा लगा रहे थे कि जब मु&*#... काटे जाएँगे, राम राम चिल्लाएँगे, इसके अलावा हिंदुस्तान में रहना होगा तो जय श्रीराम कहना होगा के भी नारे लगे रहे थे जिसमें अनेक लोग शामिल थे."
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प्रीतम कहते हैं, "ये नारेबाज़ी जंतर-मंतर पर हुई थी. ये लोकतांत्रिक स्थान है जहां प्रदर्शन होते हैं. ये देश का केंद्र भी है. यहां से पीएमओ, संसद भवन और दूसरे राष्ट्रीय संस्थान चंद मिनट की दूरी पर हैं. मुझे ये नारेबाज़ी बहुत खतरनाक लगी. पुलिस वहां मौजूद थी, जैसे कि प्रदर्शनों में होती ही है लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था."
प्रीतम कहते हैं, "मैंने नारेबाज़ी को लेकर इन लोगों से बात करने की कोशिश की, मैंने पूछा कि आपके मुद्दे क्या हैं, तो उन्होंने सिविल कोड, जनसंख्या नियंत्रण और आईपीसी की दो सौ धाराओं को बदलने की मांग के बारे में बताया, फिर वो रोहिंग्या शरणार्थियों को देश की असली समस्या बताने लगे."
'मुझे लगा कि वो मुझे मार देंगे'
प्रीतम कहते हैं, "जब वे समस्याएं बता रहे थे तब मैंने उनसे पूछ लिया कि सात साल से हिंदूवादी सरकार है तो ये मुद्दे सुलझ क्यों नहीं रहे हैं, मैं बात कर ही रहा था कि एक युवा आया और कहने लगा कि ये जेहादी चैनल है, ये जय श्रीराम नहीं बोलते."
इसी बातचीत के दौरान कुछ युवाओं ने प्रीतम पर 'जय श्री राम' के नारे लगाने के लिए दबाव बनाया. हालांकि प्रीतम ने ये नारा नहीं लगाया और वो वहां से निकल लिए.
प्रीतम कहते हैं, "ये सब बहुत भयावह था, वो डेढ़ सौ लोग होंगे, जो बार-बार कह रहे थे कि तुम जेहादी हो, जय श्री राम का नारा क्यों नहीं लगा रहे. एक समय मुझे लगा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है और अब मेरे साथ हिंसा हो सकती है."
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अल्पसंख्यक आयोग ने मांगा जवाब?
मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए भड़काने वाली नारेबाज़ी पर अल्पसंख्यक आयोग ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. आयोग के निदेशक ए धनलक्ष्मी ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर पूछा है कि अब तक नारेबाज़ी करने वालों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की गई है.
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने नारेबाज़ी का स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने दिल्ली पुलिस से मंगलवार तक जवाब देने के लिए कहा है. आयोग ने पुलिस से ये भी पूछा है कि क्या नारेबाज़ी करने वालों की पहचान की गई है और क्या किसी को इस संबंध में गिरफ्तार किया गया है.
दिल्ली पुलिस का ये भी कहना है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी. अल्पसंख्यक आयोग ने दिल्ली पुलिस से पूछा है कि पुलिस भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या-क्या क़दम उठाने जा रही है.

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मुसलमान धार्मिक नेताओं के संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर से मुलाक़ात की और नारेबाज़ी करने वालों के साथ-साथ आयोजक अश्विनी उपाध्याय को गिरफ़्तार करने की माँग की.
जमियत प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा, "मु&*# काटे जाएंगे, राम-राम चिल्लाएँगे का धमकी भरा नारा लगाया गया. प्रदर्शनकारियों ने भारत के मुसलमानों के नरसंहार का आह्वान किया है. इससे मुसलमानों और सभी शांतिप्रिय लोगों में डर पैदा हुआ है."
उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस को इस आयोजन का संज्ञान लेना चाहिए था और इसे रोकना चाहिए था. अब दिल्ली पुलिस को इसके आयोजकों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए."
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दिल्ली पुलिस पर उठ रहे हैं सवाल
हिंसक नारेबाज़ी के वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. जिस समय ये नारेबाज़ी की जा रही थी, दिल्ली पुलिस के जवान वहां तैनात थे. किसी पुलिसकर्मी ने इन युवाओं को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया.
सवाल उठ रहा है कि दिल्ली पुलिस मुसलमानों के ख़िलाफ़ हुई इस हिंसक नारेबाज़ी के प्रति उदासीन क्यों है?
पूर्वोत्तर दिल्ली में फ़रवरी 2020 में हुए दंगों के मामले में भी दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर कई सवाल उठे थे और एक मामले में तो अदालत ने हाल ही में उसके कामकाज और जाँच के तरीक़ों को "हास्यास्पद और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना" बताया है.
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