मुरादाबाद: मुसलमानों के घर ख़रीदने के बाद सामूहिक पलायन की धमकी का सच - ग्राउंड रिपोर्ट

सामूहिक पलायन के पोस्टर

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    • Author, शहबाज़ अनवर
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, मुरादाबाद से

उत्तर प्रेदश के मुरादाबाद में लाजपत नगर की शिव मंदिर बी-ब्लॉक कॉलोनी इन दिनों कई हिंदू परिवारों के पलायन की धमकी और तमाम हिंदूवादी संगठनों के विरोध को लेकर चर्चा में है.

पिछले एक अगस्त से कॉलोनी के क़रीब 81 हिंदू परिवारों की बैठक एक मंदिर में शुरू हुई तो कई हिंदू संगठन एक-एक कर सक्रिय हो गए. आए दिन यहां बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, करणी सेना, हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता पहुँच कर प्रदर्शन वग़ैरह कर रहे हैं.

तीन दिन पहले पुलिस अधीक्षक (एसपी) और ज़िलाधिकारी (डीएम) भी वहां पहुँचे और कॉलोनी के लोगों से बातचीत की.

मुरादाबाद के ज़िलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह मीडिया से कहते हैं, "जिन लोगों के मन में संशय और असंतोष है, उनसे बैठकर वार्ता की गई है. उनका असंतोष दूर करने के लिए एक राय बनी है कि ये लोग रेज़िडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन बना लेंगे, जो भी कॉलोनी की समस्याएं आती रहती हैं, उनका इस एसोसिएशन के माध्यम से निदान करेंगे. सभी लोगों ने आश्वासन दिया है कि ये लोग अगले दो-तीन दिनों में आपस में बैठक करेंगे."

कॉलोनी स्थित मंदिर में बैठक करते समाज के लोग

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क्या है असंतोष की वजह

दरअसल यह सारा विवाद कटघर थाना क्षेत्र की लाजपत नगर इलाक़े की शिव विहार कॉलोनी का है. इस कॉलोनी के बाहरी छोर पर स्थित दो मकानों के बिकने से विवाद शुरू हुआ. घर बेचने वाले हिंदू हैं और उन्हें ख़रीदने वाले मुसलमान हैं.

शिव मंदिर में अपनी माँगों को रखने के लिए एक अगस्त से ही कॉलोनी के लोग हर रोज़ यहां एकत्र होते हैं. इन्हीं में एक हैं विवेक शर्मा जो पूर्व पार्षद हैं. विवेक शर्मा निर्दलीय पार्षद चुने गए थे, लेकिन अब वो बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हुए हैं.

वह कहते हैं, "कॉलोनी के एक एंट्री गेट एक पर ज्ञान प्रकाश रस्तोगी तथा दूसरे गेट पर विकास मोहन अग्रवाल के मकान थे. ये दोनों ही आरएसएस के कार्यकर्ता हैं. इन लोगों ने कुछ माह पूर्व अपने-अपने मकान मुसलमानों को बेच दिए हैं. कॉलोनी में 81 मकान हिंदुओं के हैं. सभी के तीज-त्योहार आते हैं. सावन में ईद-उल-अज़हा आती है. जानवरों की क़ुर्बानियां होंगी, हम लोग कैसे यहां रह पाएंगे."

करणी सेना के ज़िलाध्यक्ष योगेंद्र कुमार

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इस बैठक में मौजूद करणी सेना के ज़िलाध्यक्ष योगेंद्र राणा भी विवेक शर्मा की बातों से सहमति व्यक्त करते हैं. योगेंद्र राणा यहां बैठकों में लगभग हर रोज़ ही शामिल होते हैं. वह पिछले काफ़ी समय से कई अन्य हिंदू संगठनों में भी सक्रिय रह चुके हैं.

इस मामले पर वो कहते हैं, "हिंदू बहुल इलाक़े में मुसलमानों के मकान ख़रीदने का मतलब आख़िर है क्या. इसके पीछे कोई ना कोई साज़िश है. मुसलमान घर ख़रीदते हैं तो हिंदू पलायन क्यों करेगा. हम कैराना या फिर कश्मीर की तरह हिंदू परिवारों को पलायन नहीं करने देंगे. प्रशासन नहीं सुनेगा तो हम शासन तक बात पहुँचाएंगे. आंदोलन की ज़रूरत हुई तो उससे भी पीछे नहीं हटेंगे. ख़रीदे गए मकानों की रजिस्ट्री कैंसिल होनी चाहिए."

जो घर ख़रीदे गए हैं, वे बिकने के बाद से ही बंद पड़े हैं, लेकिन कॉलोनी के कुछ लोग इस बात का दावा कर रहे हैं कि वहां कई बार मांस वग़ैरह के टुकड़े पड़े मिले हैं.

साथ ही, छतों पर पतंग उड़ाने पहुँचे युवाओं पर फ़ब्तियां कसने के आरोप भी लगाए गए हैं.

कॉलोनी में ही रहने वाली शालिनी चड्ढा कहती हैं, "मैं शिव मंदिर के निकट ही रहती हूं. यहां के जो मुसलमान समाज के लोग हैं, कई गुना ज़्यादा दामों में घर ख़रीद रहे हैं. पतंगबाज़ी के चक्कर में गंदे कमेंट करते हैं. ईद पर सड़कों पर गंदगी फैलाते हैं. हमारी सेफ़्टी का सवाल है."

कॉलोनी में ही रहने वाली एक अन्य महिला मीनू कहती हैं, "यहां पर सभी एक परिवार की तरह रहते हैं. हम शांति से रहते हैं, इसलिए हम नहीं चाहते कि यहां इस तरह से कोई दंगा हो या फिर कोई हम लोगों को परेशान करें."

गली के द्वार के बाहर वो दूसरा मकान जिसे विकास मोहन अग्रवाल ने बेचा है.

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घर बेचने वाले आरएसएस से जुड़े हैं?

एक अन्य कॉलोनी वासी तुषार अग्रवाल कहते हैं, "भवनों को ख़रीदने के पीछे क्या साज़िश है, इसकी जाँच होनी चाहिए. दोनों मकान ख़रीदे गए तो सामूहिक पलायन का फ़ैसला हम सभी का अपना रहा है."

बैठक में शामिल एक अन्य कॉलोनी वासी रिंकू कश्यप इस बात से नाराज़ हैं कि कॉलोनी के तीन में से दो गेटों के प्रवेश द्वार पर स्थित मकानों को मुसलमानों ने ख़रीद लिया है. वह इस बात पर भी नाराज़ हैं कि इन मकानों को जिन लोगों ने बेचा है, वे हिंदू समाज से हैं और आरएसएस के कार्यकर्ता हैं.

एक अन्य निवासी रवि चड्ढा कहते हैं, "हमारी समझ में नहीं आ रहा है कि आख़िर इतने महंगे दामों पर इन मकानों को ख़रीदा क्यों गया है. दोनों घर करोड़ों में बेचे गए हैं."

घर कितने में ख़रीदे-बेचे गए इस बारे में दोनों ही पार्टी सही जानकारी देने से इनकार करती हैं.

उनके मुताबिक़ यह ख़रीदने और बेचने वालों के बीच का निजी मामला है.

लेकिन वहां पर क़रीब 35 हज़ार रुपए वर्ग मीटर का सर्किल रेट है.

एक मकान 138 वर्ग मीटर और दूसरा 162 वर्ग मीटर में दो मंज़िला बना हुआ है.

इस हिसाब से मकान की क़ीमत करोड़ तो होगी है.

कॉलोनी के पहले गेट पर जो घर बिका है उसके मालिक ज्ञान प्रकाश रस्तोगी थे.

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ख़रीद-फ़रोख़्त पर रोक-टोक क्यों?

कॉलोनी के पहले गेट पर जो घर बिका है उसके मालिक ज्ञान प्रकाश रस्तोगी थे.

पास ही उनका अपना दूसरा रिहायशी मकान है जिसमें वह ख़ुद रहते हैं. उन्होंने ये मकान एक मुसलमान डॉक्टर को पिछले महीने ही बेचा है.

इस बात की वह ख़ुद भी तस्दीक़ करते हैं. बीबीसी ने उनके घर पहुँच कर बात की. ज्ञान प्रकाश एक बुज़ुर्ग व्यक्ति हैं.

उन्होंने कहा, "हमने जो मकान बेचे हैं वे मुख्य सड़क पर स्थित हैं. यह मकान क़रीब 138 वर्ग मीटर में है. मैं 12 वर्ष की आयु से संघ कार्यकर्ता हूं. मोदी जी ख़ुद कह रहे हैं कि सबका साथ, सबका विकास हो. हमारा संविधान एक है, तिरंगा एक है और फिर ऐसी मानसिकता ठीक नहीं है."

वो आगे कहते हैं, "एक वक़्त जब एक हिंदू महिला को इमरजेंसी में इलाज की ज़रूरत थी तो उसका इलाज करने वाला यह मुसलमान डॉक्टर ही था."

कॉलोनी के प्रवेश द्वार पर बेचा गया वो पहला घर जो ज्ञान प्रकाश रस्तोगी ने बेचा है. इसे लेकर नाराज़गी जताई जा रही है.

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इसी बीच ज्ञान प्रकाश शहर के प्रतिष्ठित सामाजिक पदों पर रहने के अपने काग़ज़ात बतौर सबूत दिखाते हैं. ज्ञान प्रकाश के पुत्र दीपक रस्तोगी इस बात का दावा करते हैं कि कॉलोनी के बाहरी छोर पर मुख्य सड़क पर कई मकान बिक चुके हैं, इनमें कई मकानों को मुसलमानों ने ख़रीदे हैं.

कॉलोनी के अन्य गेट पर जिस दूसरे मकान को बेचे जाने की बात हो रही है, वह मकान विकास मोहन अग्रवाल का रहा है.

विकास मोहन अग्रवाल भी यह कहते हैं कि वो आरएसएस से जुड़े हुए हैं.

विकास मोहन अग्रवाल मुरादाबाद में सुगम स्वीट के नाम की दुकान के मालिक हैं.

हमने उनसे इस बारे में बात की.

उन्होंने कहा, "क़रीब डेढ़ माह पूर्व हमने अपने मकान की रजिस्ट्री एक व्यक्ति को की है. ये मकान लगभग 162.9 वर्ग मीटर में है, इस लेन में क़रीब 10 मकान हैं जिनमें आठ पहले ही बिक चुके हैं. मेरा घर सातवें नंबर पर था. चार वर्ष से इस घर को बेचने की कोशिश कर रहा था, जब किसी ने नहीं लिया तो मुस्लिम समाज के एक एक्सपोर्टर ने यह घर ख़रीद लिया है. सारा क़ानूनी काम हो चुका है."

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'इसमें ग़लत क्या है'

जिन लोगों ने ज्ञान प्रकाश और विकास अग्रवाल के मकान ख़रीदे हैं, उनमें एक परिवार से बीबीसी ने बातचीत की.

उनके घर की घंटी जब बजी तो इमारत की खिड़की से ही हमारे वहां आने का कारण पूछा गया. परिचय देने के बाद संशय और संकोच के साथ बातचीत शुरू हुई लेकिन उन्होंने मना किया कि उनका नाम न छापा जाए.

वो कहते हैं, "देखिये पता नहीं क्यों इतना हंगामा किया जा रहा है. हम पहले मुसलमान नहीं हैं, वहां घर ख़रीदने वाले. सब हमारी जान पहचान वाले ही हैं. मीडिया हर रोज़ हमारे घरों पर हमसे बात करने पहुँच रही है लेकिन, हम कुछ नहीं बोल रहे हैं. सब कुछ क़ानूनी तौर पर हुआ है. हां, यदि कोई ग़लत प्रेशर हमारे ऊपर बनाया गया तो हम क़ानून की सहायता लेंगे."

गली के प्रवेश द्वार पर लगा पलायन का बैनर

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ज्ञान प्रकाश रस्तोगी का मकान ख़रीदने वाले दूसरे व्यक्ति पेशे से जाने माने डॉक्टर हैं.

वह कहते हैं, "देखिए मेरी जो भी बात हो उसमें मेरा नाम ना लिखा जाए. मैं पेशे से डॉक्टर हूं. मेरी पत्नी भी डॉक्टर हैं. हम सांप्रदायिक सौहार्द वाले लोग हैं. सामाजिक कार्य से जुड़ी कई संस्थाओं से भी जुड़ा हूं. मैंने मकान बेचने वालों से इस बारे में पूछा था कि हमारे वहां आने पर किसी को कोई ऐतराज़ तो नहीं होगा. हालांकि, उस लेन में पिछले काफ़ी समय से हमारे समाज के कई लोगों ने घर ख़रीदा है."

इसी लेन में एक अन्य डॉक्टर सैय्यद मोहम्मद रज़ी का क्लिनिक है.

एक और मुसलमान व्यक्ति का शेयर कारोबार का दफ़्तर है. उनके बारे में ख़ुद कॉलोनी के लोगों ने किसी प्रकार का ऐतराज़ ना होने की बात कही है, वहीं डॉक्टर रज़ी के एक रिश्तेदार ओवैस सरताज कहते हैं, "हमने क़रीब डेढ़ वर्ष पहले यहां मकान ख़रीदा था. सभी लोग मिल-जुलकर रहते हैं. हमसे किसी को कोई परेशानी नहीं है."

लाजपत नगर की महिला पार्षद पूनम बंसल

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मामला ज़मीन का या धर्म का?

लाजपत नगर की महिला पार्षद पूनम बंसल इस मामले में अलग नज़रिए से देखती हैं.

वह कहती हैं, "क्षेत्र में भू-माफ़िया सक्रिय हैं. ये लोग दलालों के माध्यम से संपर्क कर लालच देकर मकान दिखाने की कोशिश करते हैं. लालच के चक्कर में कुछ लोगों ने विशेष समुदाय के लोगों को ये भवन बेच दिये हैं."

पूनम बंसल लालच का आरोप लगाती हैं, लेकिन मकान बेचने वाले ख़ुद कह रहे हैं कि उन्हें चार साल से मकान का कोई ख़रीदार नहीं मिल रहा था, इसलिए उन्होंने उसे बेच दिया जो ख़रीदने के लिए तैयार हो गया.

जहां तक विशेष समुदाय के लोगों को मकान बेचने की बात है, इस पर एक मकान के मालिक ज्ञान प्रकाश कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो ख़ुद सबका साथ, सबका विकास की बात करते हैं.

मामले के हल को लेकर पूनम बंसल कहती हैं, "प्रशासनिक अफ़सर यहां पहुँचे थे. ख़रीदने और बेचने वाले लोगों से बातचीत कराई जाएगी. आशा है जल्द ही मामले का हल निकलेगा."

सामूहिक पलायन का पोस्टर लिए लोग

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लाजपत नगर में आबादी की स्थिति

पूर्व पार्षद विवेक शर्मा कहते हैं, "लाजपत नगर की आबादी क़रीब 25 हज़ार है. वोटों की बात करें तो यह संख्या दस हज़ार के आसपास है. 70 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है जबकि तीस प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है."

इस कॉलोनी में जहां यह सब विवाद बना हुआ है, वहीं सामने ही सड़क पर कई मुस्लिम परिवार भी रहते हैं.

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