जनरल बिपिन रावत की पत्नी मधुलिका रावत की भी हेलिकॉप्टर हादसे में मौत, क्या थी शख़्सियत

मधुलिका रावत

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    • Author, शुरैह नियाज़ी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

देश के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत का बुधवार को हेलिकॉप्टर हादसे में निधन हो गया. इस हादसे में जनरल रावत की पत्नी मधुलिका रावत की मौत भी हो गई.

मधुलिका रावत मध्यप्रदेश के शहडोल की रहने वाली थीं. बिपिन रावत का ससुराल शहडोल था.

हादसे की ख़बर मिलते ही शहडोल भी शोक में डूब गया. बताया जा रहा है कि हादसे के बाद से ही परिवार वाले अपनी बेटी और दामाद की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे थे तभी उन्हें जनरल रावत और उनकी पत्नी की मौत की ख़बर पता चली.

मधुलिका रावत का परिवार

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इमेज कैप्शन, इस तस्वीर में जनरल बिपिन रावत के माता-पिता (बाएं) और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के पिता हैं (दाएं)

वहीं परिवार के मिली जानकारी में बताया गया है कि जनरल बिपिन रावत की सास ज्योति प्रभा सिंह अभी शहडोल में ही हैं और उन्हें परिवार सहित दिल्ली बुलाया गया है. उनके भाई यशवर्धन सिंह दिल्ली रवाना हो चुके हैं.

बिपिन रावत की पत्नी मधुलिका रावत शहडोल के सोहागपुर से थीं. उनके ससुर मृगेंद्र सिंह कांग्रेस पार्टी के विधायक रह चुके हैं लेकिन अब उनका निधन हो चुका है.

परिवार का कहना है कि आख़िरी बार बिपिन रावत शहडोल 2012 में आए थे.

मधुलिका रावत ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई शहडोल में ही की थी. उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे ग्वालियर चली गई थीं जहां पर उन्होंने सिंधिया स्कूल में पढ़ाई की. फिर उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक किया.

मधुलिका रावत

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बिपिन रावत से उनकी शादी 1986 में हुई थी. दोनों की दो बेटियां हैं. इनकी बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है जबकि छोटी बेटी अभी पढ़ाई कर रही हैं.

मधुलिका रावत अपने दो भाइयों हर्षवर्धन सिंह और यशवर्धन सिंह की इकलौती बहन थीं.

दोनों बेटियों के साथ मधुलिका रावत

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इमेज कैप्शन, दोनों बेटियों के साथ मधुलिका रावत

वे आर्मी वाइव्स वेलफ़ेयर एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष भी थीं.

इसकी वेबसाइट पर इसे सैन्यकर्मियों की पत्नियों, बच्चे और आश्रितों के लिए काम करने वाला संगठन बताया गया है.

मधुलिका रावत

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आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की स्थापना 1966 में की गई थी और साथ ही यह भी दावा किया गया है कि यह देश के सबसे बड़े एनजीओ में से एक है.

वो सेना की विधवाओं, कैंसर रोगियों, विकलांग बच्चों के लिए काम करने वाले सामाजिक अभियानों का हिस्सा भी रहीं.

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