जनरल बिपिन रावत: हेलिकॉप्टर हादसे के चश्मदीद ने क्या-क्या देखा

प्रत्यक्षदर्शी

इमेज स्रोत, Madan Prasad/BBC

"मैंने अपनी आंखों से सिर्फ़ एक आदमी को देखा. वो जल रहे थे और फिर वो नीचे गिर गए. मैं हिल गया."

ये जानकारी कृष्णास्वामी ने दी. वो बुधवार को हुए उस हेलिकॉप्टर हादसे के प्रत्यक्षदर्शी हैं, जिसमें देश के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टॉफ़ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत की मौत हो गई.

इस हादसे में जनरल रावत की पत्नी मधुलिका रावत और हेलिकॉप्टर में सवार रहे 11 अन्य लोगों की भी मौत हो गई. हादसे में जीवित बचे इकलौते शख्स हैं ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह. उनका इलाज चल रहा है.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

वायुसेना ने बताया है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है

हादसे के गवाह रहे कृष्णास्वामी 68 साल के हैं. जहां हादसा हुआ, वो उस जगह के क़रीब रहते हैं. उन्होंने पूरी घटना को बयान किया.

बिपिन रावत और उनकी पत्नी

इमेज स्रोत, Getty Images

प्रत्यक्षदर्शी ने क्या देखा?

उन्होंने बताया, "मेरा नाम कृष्णास्वामी है. मैं नानजप्पा सैथिराम का रहने वाला हूं. मैं घर के लिए लकड़ी लेने निकला था. घर में पानी नहीं था क्योंकि पाइप टूटा हुआ था. चंद्रकुमार और मैं इसकी मरम्मत कर रहे थे. तभी हमें ज़ोर की आवाज़ सुनाई दी."

वो आगे बताते हैं, "धमाके से बिजली के खंबे तक हिल गए. पेड़ उखड़ गए. जब हमने देखा कि ये क्या हुआ तब धुआं उठ रहा था, जिसने सारे इलाके को ढक लिया था. वहां धुंध भी छाई थी. पेड़ के ऊपर आग की लपटें उठ रही थीं. मैंने अपनी आंखों से सिर्फ़ एक आदमी को देखा. वो जल रहे थे और फिर वो नीचे गिर गए. मैं हिल गया. मैं दौड़ता हुआ वापस आया और मैंने लोगों से कहा कि वो दमकल और पुलिस को बुलाएं. कुछ देर बाद अधिकारी भी आ गए. उसके बाद मैंने शव को ले जाते नहीं देखा. मैं सदमें था. घर आया और लेट गया."

बिपिन रावत

इमेज स्रोत, Getty Images

आखिरी सफ़र

जनरल रावत और उनकी पत्नी समेत 14 लोग भारतीय वायु सेना के एमआई-17वी5 (Mi-17V5) हेलिकॉप्टर में सवार थे. ये हेलिकॉप्टर तमिलनाडु के कुन्नूर में क्रैश हो गया.

ये हेलिकॉप्टर सुलुर के आर्मी बेस से निकला था और जनरल रावत को लेकर वेलिंगटन सैन्य ठिकाने की ओर बढ़ रहा था.

जनरल बिपिन रावत

इमेज स्रोत, Getty Images

पहले सीडीएस

जनरल बिपिन रावत को 31 दिसंबर 2019 को भारत का पहला सीडीएस नियुक्त किया गया था और उन्होंने 1 जनवरी 2020 को कार्यभार संभाला.

बतौर सीडीएस जनरल रावत की ज़िम्मेदारियों में भारतीय सेना के विभन्न अंगों में तालमेल और सैन्य आधुनिकीकरण जैसी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां शामिल थीं.

जनरल रावत इससे पहले भारतीय सेना के प्रमुख रह चुके थे. वे 31 दिसंबर 2016 से 1 जनवरी 2017 तक भारत के 26 वें थल सेना प्रमुख रहे.

बिपिन रावत

इमेज स्रोत, ADG PI - INDIAN ARMY

पिता थे लेफ़्टिनेंट जनरल

जनरल रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी ज़िले में एक सैन्य परिवार में हुआ. उनके पिता सेना में लेफ़्टिनेंट जनरल थे.

भारतीय सेना की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार जनरल रावत 1978 में सेना में शामिल हुए थे.

शिमला के सेंट एडवर्ड्स स्कूल से पढ़ाई के बाद उन्होंने खड़कवासला के नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी में सैन्य प्रशिक्षण लिया था.

देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी से ट्रेनिंग के बाद वे 11वीं गोरखा राइफ़ल्स टुकड़ी की पाँचवीं बटालियन में सेकंड लेफ़्टिनेंट बनाए गए. गोरखा ब्रिगेड से सेना के सर्वोच्च पद पर पहुँचने वाले वो चौथे अफ़सर थे.

चार दशक से लंबे सैन्य जीवन में जनरल रावत को सेना में बहादुरी और योगदान के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल के अलावा और कई प्रशस्तियों से सम्मानित किया गया.

ये भी पढ़ें:-

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)