ओमिक्रॉन: कई देशों में कोरोनावायरस का नया वेरिएंट, भारत में अब तक कोई केस नहीं लेकिन आगे क्या

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया है कि भारत में अब तक कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमण का कोई केस सामने नही आया है.
लेकिन 'चिंता का विषय' बताए जा रहे इस वेरिएंट ने अब तक दुनिया के कई देशों में दस्तक दे दी है. 14 से ज़्यादा देशों ने इसकी मौजूदगी की पुष्टि की है.
इनमें यूरोपीय देशों ब्रिटेन, जर्मनी, पुर्तगाल, बेल्जियम, नीदरलैंड से लेकर कनाडा, हॉन्गकॉन्ग, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं.
संक्रमण के ख़तरे को लेकर ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीकी देशों पर ट्रैवल बैन लगा दिया है. और मास्क लगाने को अनिवार्य बनाए जाने से लेकर तमाम अन्य तरह के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.
इसी बीच, जापान ने एलान किया है कि मंगलवार से वो नए विदेशी यात्रियों के लिए अपनी सीमाएं बंद करने जा रहा है.
और, ऑस्ट्रेलिया ने सीमाओं पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की अपनी बहुप्रतिक्षित योजना को कुछ समय के लिए टाल दिया है.
इसके बाद ऑस्ट्रेलिया का वीज़ा ले चुके अंतरराष्ट्रीय छात्रों और 'कुशल कामगारों' को 15 दिसंबर तक का इंतज़ार करना होगा.
इसराइल ने भी विदेशी नागरिकों के आने पर दो हफ़्ते का प्रतिबंध लगाया हुआ है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आशंका जाहिर की है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट भारत समेत दुनिया भर में हाहाकार मचाने वाले डेल्टा वेरिएंट से भी ज़्यादा ख़तरनाक साबित हो सकता है.
हालांकि, अब तक इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.

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कितना तैयार है भारत?
विश्व स्वास्थ्य स्वास्थ्य संगठन ने बीते सोमवार चेतावनी जारी करते हुए कहा कि इस वैरिएंट की वजह से दुनिया भर में संक्रमण के मामले बढ़ने का ख़तरा बढ़ गया है.
यही नहीं, इस वैरिएंट की वजह से कुछ क्षेत्रों में काफ़ी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं.
ऐसे में सवाल है कि भारत सरकार इस वैरिएंट का सामना करने के लिए कितनी तैयार है?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया है कि भारत किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है.
उन्होंने कहा, "ओमिक्रॉन वेरिएंट अब तक दुनिया के 14 देशों में पाया गया है. भारत में अब तक इस वेरिएंट से संक्रमण के मामले सामने नहीं आए हैं. लेकिन जिस तरह से दुनिया भर में इस वायरस को लेकर सूचना मिली है. उसे देखते हुए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. पोर्ट (हवाई - अड्डों) पर भी देखरेख शुरू कर दी गयी है.
अगर कोई संदिग्ध केस सामने आता है तो उसे तुरंत ही चेक करके उसकी जीनोम सिक्वेंसिंग भी करा रहे हैं. और इस समय सावधानी रखने की ज़रूरत है. क्योंकि कोविड महामारी के दौरान हमने बहुत कुछ सीखा है. हमारे पास बहुत कुछ संसाधन भी उपलब्ध हैं. लैब आदि भी उपलब्ध हैं. कैसी भी स्थिति का हम सामना कर सकते हैं.
लेकिन अब तक ओमिक्रॉन से जुड़ा कोई केस सामने नहीं आया है. और देश में इस वेरिएंट से जुड़ा कोई केस न आए, इसलिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं."
लेकिन इसके साथ - साथ आगामी 1 दिसंबर से नयी ट्रेवल गाइडलाइंस भी जारी होने वाली हैं जिनके तहत यात्रियों को अपनी 14 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री और नकारात्मक आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट को एयर सुविधा पोर्टल पर जमा करना होगा.
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उधर, कोविड से सबसे ज़्यादा प्रभावित रहे महाराष्ट्र के मुंबई शहर ने नए वेरिएंट को ध्यान में रखते हुए कक्षा 1 से लेकर कक्षा 7 तक के स्कूलों को खोलने की तारीख़ आगे बढ़ा दी है.
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इससे पहले इन कक्षाओं के लिए स्कूल 1 दिसंबर से खुलने वाले थे. लेकिन अब ये स्कूल 15 दिसंबर से खुलेंगे.
इसी बीच ख़बर आ रही है कि आगामी बुधवार को लोकसभा में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट को लेकर चर्चा हो सकती है.
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RT-PCR टेस्ट काम करेगा?
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को राज्यों के साथ ओमिक्रॉन वेरिएंट पर समीक्षा बैठक की है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया है कि इस मीटिंग में भूषण ने रेखांकित किया है कि ये वेरिएंट आरटी-पीसीआर एवं आरएटी टेस्ट से बचने में संभव नहीं है.
इसका मतलब ये है कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना वायरस के इस वेरिएंट से संक्रमित है और वह आरटी-पीसीआर या आएटी टेस्ट कराता है तो उसकी रिपोर्ट सकारात्मक आने की संभावना है.
इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से टेस्टिंग बढ़ाने, हॉट-स्पॉट पर नज़र बनाए रखने, वैक्सीनेशन को बढ़ाने से लेकर कंटेनमेंट एवं सर्विलांस को मजबूत करने का सुझाव दिया है.
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वैक्सीनकितनी प्रभावी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से इस वेरिएंट को लेकर चिंता जताए जाने के बाद से दुनिया भर में लोगों के बीच सिर्फ एक सवाल है.
और वो सवाल ये है कि क्या वैक्सीन इस वेरिएंट का सामना करने में सक्षम है.
दुनिया की बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनियों में से एक मॉडेर्ना के सीइओ स्टीवन बेंसेल ने इसी सवाल का जवाब अपने एक इंटरव्यू में देकर दुनिया भर में हलचल मचा दी है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, मॉडेर्ना के सीइओ स्टीवन बेंसेल ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि कोविड - 19 वैक्सीन ओमिक्रॉन के मामले में डेल्टा जितनी प्रभावी साबित नहीं होंगी.
इसके बाद से दुनिया भर में वित्तीय बाज़ारों में गिरावट देखी जा रही है.

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एम्स दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया भी इस मुद्दे पर अपनी बात रख चुके हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए गुलेरिया ने कहा है कि ऐसा बताया जा रहा है कि ओमिक्रॉन के 30 से ज़्यादा म्यूटेशन हो चुके हैं. ये म्यूटेशन या बदलाव वायरस के स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में हुए हैं. वायरस के स्पाइक प्रोटीन वाले क्षेत्र में म्यूटेशन होने से वो वेरिएंट ऐसी क्षमता विकसित कर सकता है जिसमें कि वो इम्युनिटी से बच सकता है, यानी ये हो सकता है कि टीके या दूसरी वजहों से पैदा हुई शरीर की प्रतिरोधी क्षमता का उस वायरस पर असर नहीं हो.
उन्होंने कहा है कि दुनिया की सभी कोविड वैक्सीनों की समीक्षा करनी पड़ेगी क्योंकि अधिकतर वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन से जूझने वाले एंटीबॉडी विकसित करते हैं, और इसी आधार पर वो वैक्सीन काम करती है.
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